शराब पीकर मोटर सायकल चलाने वाले तीन पर पुलिस ने कार्यवाही 


अनूपपुर

जिले के चचाई थाना अंतर्गत रेल्वे स्टेशन तिराहा अमलाई के पास मोटर सायकल MP 18 ZD 9323 को चेक किया गया तो वाहन को चालक परशुराम बैगा पिता राजू बैगा उम्र 24 साल निवासी थाना चचाई का चला रहा था, जो शराब के नशे में था, ब्रेथ एनालाईजर मशीन से परीक्षण कराया गया तो एल्कोहल की मात्रा 177.4 एमजी/100 एम एल पायी गयी। दूसरे मामले में रेल्वे स्टेशन तिराहा अमलाई में मोटर सायकल MP 65 MF 0804 को चेक किया जिसे चैतू बैगा पिता भूरा बैगा उम्र 25 साल निवासी बरगंवा थाना चचाई का चला रहा था, जिसके मुह से शराब की गंध आ रही थी जिसका परीक्षण करने पर एल्कोहल की मात्रा 130.3 एम जी 100 एम एल पायी गयी। तीसरे मामले में मोटर सायकल MP 18 ME 6019 को शारदा मंदिर चचाई के पास चेक किया तो वाहन को बलवीर सिंह पिता राम प्रसाद सिंह उम्र 34 साल निवासी अमलाई थाना चचाई का चला रहा था, चेक करने पर एल्कोहल की मात्रा 173.8 एम जी 100 एम एल पायी गयी जिसका 185, 130/ 177(3) एम व्ही एक्ट का चेकिंग पंचनामा गवाह दिनेश सिंह एवं सेमलू साहू के तैयार कर उक्त सभी मोटर सायकलों को पृथक पृथक समय स्थान पर जप्त कर कब्जे पुलिस लिया गया वापसी पर तीनों वाहन चालकों के विरूद्ध क्रमशः इस्तगासा क्र० 1200,1201,1202/24 धारा 185,130/177(3) एम व्ही एक्ट के तहत कार्यवाही की गयी।

सड़क दुर्घटना में घायल हुए 3 व्यक्तियों को डायल 112 जवानों ने पहुँचाया अस्पताल


अनूपपुर 

जिले के थाना करनपठार क्षेत्र में जिंदा टोला गाँव में दो मोटर साईकिल की टक्कर हो जाने से एक बुजुर्ग एवं अन्य 02 व्यक्ति घायल हो गए है, पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को प्राप्त हुई। सूचना प्राप्ति पर तत्काल करनपठार थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मदद के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ प्रधान आरक्षक विमल सिंह एवं पायलट दिनेश लाल ने मौके पर पहुँचकर बताया कि दो मोटर साईकिल की आमने-सामने की टक्कर हो जाने से धीरु सिंह श्याम उम्र 65 वर्ष, कोमल सिंह श्याम उम्र 45 वर्ष तथा अजीत करचाम उम्र 40 वर्ष सभी निवासी ग्राम कोहका थाना करन पठार घायल हो गए थे । डायल-112 स्टाफ ने सभी घायलों को एफ़ आर व्ही वाहन से ले जाकर बेनीबारी अस्पताल में भर्ती करवाया जहाँ घायलों का उपचार किया जा रहा है।

रिहायशी क्षेत्र में गैस एजेंसी का गोदाम, प्रशासन की लापरवाही, बाद हादसे का इंतजार

*अधिकारियो की चुप्पी, टिक-टिक करता टाइम बम, जनता की जान जोखिम में*


अनूपपुर

जिले के कोतमा के रिहायशी इलाके में स्थित अकरम इंडेन गैस एजेंसी का गोदाम प्रशासनिक लापरवाही और अयोग्यता का जीता-जागता उदाहरण बन चुका है। गैस सिलेंडरों का भंडारण और पास के अंडरग्राउंड खदानों में विस्फोटक सामग्री का उपयोग पूरे क्षेत्र को एक बड़े हादसे की ओर धकेल रहा है। यह स्थिति प्रशासन की नाकामी और जनता की सुरक्षा के प्रति उनकी घोर असंवेदनशीलता को दर्शाती है

*अधिकारियों की आपराधिक चुप्पी*

स्थानीय निवासियों ने बार-बार इस खतरे को लेकर शिकायत की, लेकिन अधिकारियों ने केवल आश्वासन देकर मामले को टाल दिया। उनकी निष्क्रियता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जनता की सुरक्षा उनके लिए प्राथमिकता नहीं है। यह चुप्पी किसी अनजाने कारण की नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई अनदेखी है। क्या प्रशासन को एक और मुरैना जैसी त्रासदी का इंतजार है?

*हादसों से भी नहीं सीखा प्रशासन*

मध्य प्रदेश के हरदा जिले में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए विस्फोट और मुरैना में विस्फोटक सामग्री के कारण हुए हादसे प्रशासन के लिए चेतावनी थे। इन घटनाओं में दर्जनों लोगों की जान गई और सैकड़ों परिवार तबाह हो गए। फिर भी कोतमा में अधिकारियों ने वही गलती दोहराने की ठान ली है। उनकी लापरवाही बताती है कि वे किसी भी स्थिति को गंभीरता से लेने के लिए तैयार नहीं हैं

*गैस गोदाम टिक-टिक करता टाइम बम*

गैस सिलेंडरों और विस्फोटक सामग्री का इतना पास होना पूरे क्षेत्र को एकटिक-टिक करता टाइम बम  रहा है। स्थानीय लोगों का हर दिन भय के साए में गुजरता है। एक छोटी-सी चूक या दुर्घटना सैकड़ों परिवारों को तबाह कर सकती है। क्या अधिकारियों को इन लोगों की जिंदगी की कोई परवाह नहीं है?

*अधिकारियों का अक्षम नेतृत्व उजागर*

प्रशासन की यह निष्क्रियता केवल उनकी असंवेदनशीलता नहीं, बल्कि उनकी अयोग्यता का भी प्रमाण है। जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर है, वे अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह भागते नजर आ रहे हैं। यह रवैया न केवल उनकी अक्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि वे अपने पद पर बने रहने के लायक नहीं हैं

*जनता का आक्रोश अब और बर्दाश्त नहीं*

स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि अगर गैस गोदाम को तुरंत रिहायशी इलाके से हटाया नहीं गया और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित नहीं किया गया, तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। जनता ने साफ कर दिया है कि किसी भी अप्रिय घटना की जिम्मेदारी सीधे प्रशासन और अधिकारियों पर होगी

*जनता की जान जोखिम में*

अब समय आ गया है कि अधिकारी जागें और अपनी जिम्मेदारी निभाएं। यदि अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो जनता का गुस्सा अधिकारियों की निष्क्रियता और अयोग्यता को उजागर कर देगा। कोतमा के लोग अपनी सुरक्षा के लिए लड़ने को तैयार हैं, और प्रशासन की यह लापरवाही अब और सहन नहीं की जाएगी

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