जान हथेली में रखकर तेज बहाव में नदी को पार करते हैं स्कूली छात्र- छात्राएं व ग्रामीण

*आजादी के 77 वर्ष बाद भी लोगो को नही मिली सुविधा, क्या यही है विकास*


शहडोल 

जिले में पुल निर्माण नहीं होने से 50 से अधिक गांव के लोग नरकीय जीवन जीने को मजबूर है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की लापरवाही के चलते आधर में लटका पुल लोगों को नसीब नहीं हो रहा है।

*यह है पूरा मामला*

आलम ये है कि गांव के लोगों को बरूहा नदी (नाला) के तेज धार के बीच नदी पार करके आना-जाना पड़ रहा है, सबसे से ज्यादा दुर्दशा स्कूली छात्रों की है,जो रोजान अपनी जान हथेली में लेकर नदी के तेज धार पार कर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। बच्चों का कहना है कि उन्हें डर लगता है नदी पार करते समय कहीं किसी दिन वो इस नदी पार करते समय बह न जाए। ऐसा कोई दिन नहीं जाता जिस दिन बच्चे नदी पार करते समय भीगते न हो और उनका यूनिफॉर्म और कॉपी किताब गीली ना होती हो। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की लापरवाही के चलते आधर में लटका पुल लोगों को नसीब नहीं हो रहा। जिससे रोजाना ग्रामीण युवा स्कूली बच्चे जान जोखी में डालकर नदी पार कर रहे और प्रशासन इस इंतजार में है की कोई बड़ी घटना हो जिसके बाद इस आधर में लटके पुल का निर्माण कराए।

*हजारी लोग नदी करते हैं पार*

आदिवासी बाहुल्य शहडोल जिले के जनपद पंचायत सोहागपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत मंडवा में बहने वाली बरुहा नदी ( नाला ) लगभग 50 से अधिक गांव के लोगों के जान का खतरा बना हुआ है। आलम ये है की पुल निर्माण नहीं होने से गांव के लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार कर इस और से उस और जाते है। बच्चों के परिजन व ग्रामीण खुद की जान जोखिम में डालकर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए नदी पार कराते है। ऐसा कोई दिन नहीं जाता जिस दिन बच्चे नदी पार करते समय भीगते न हो और उनका यूनिफॉर्म और कॉपी किताब गीली ना होती हो।

कहने को तो प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना विभाग द्वारा एक पुल निर्माण करा रहा, लेकिन विभाग की दावपेच के चलते पिछले एक साल से पुल अधूरा बना बना पड़ा है, पुल की सौगात मिलने के बाद भी ग्रामीणों को पुल की सुविधा नसीब नहीं हो रही है,जिससे आज भी लोग रोजाना जान जोखिम में डालकर अपने जीवन का सफर तय कर रहे है। वहीं इस पुरे मामले में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के जीएमएस के मौर्य का कहना है की पुल का अलयामेंट का इशू होने व ठेकेदार की लापरवाही के चलते पुल निर्माण नहीं हो सका है। जल्द ही पुल निर्माण कर कराया जाएगा।

*आजादी के 77 वर्ष बाद भी पुल नही*

आजादी के 77 साल बाद भी बच्चों के स्कूल जाने के लिए नदी पर पुल या अन्य कोई संसाधन सरकार नहीं बना पाई है। छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सैकड़ों ऐसे बच्चे हैं जो अपनी जान जोखिम में डालकर गांव से स्कूल जाते हैं। छात्रों के परिजन उन्हें उफनती नदी में उतार कर नदी पार कराते हैं। मंडवा गांव में इस समस्या से छात्र ही नहीं बल्कि कई किसानों को भी काफी समस्या उठानी पढ़ रही है। जिले में आज भी पुल व सड़क नही होने से ग्रामीण व मासूम बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार कर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर है, और शासन प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के इंतजार में पुल निर्माण नहीं करा रहा है।

कलयुगी माँ का कारनामा, डिलेवरी के बाद नवजात को फेंक दिया शौचालय में

*शासकीय जिला अस्पताल के मेडिकल वार्ड़ का मामला, जांच जारी*


शहडोल

शासकीय कुशाभाऊ ठाकरे जिला चिकित्सालय के फीमेल मेडिकल वार्ड के शौंचालय में एक नवजात का शव पड़ा हुआ मिला। जिसे देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि किसी कलयुगी माँ ने समय से पहले कोख से निकलवाकर उसे यहाँ फेंक दिया है। इस सम्बन्ध में मिली जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल के वार्ड में भर्ती कोई मरीज जब प्रशाधन के लिए वहां गयी तो उसने देखा कि एक नवजात का शव वहाँ पड़ा हुआ है, जिससे वह काफी भयभीत हो गयी। जिसके बाद इसकी जानकारी वार्ड में मौजूद अस्पताल कर्मियों को दी गयी।

फिर यह जानकारी अस्पताल परिसर में स्थित पुलिस सहायता केंद्र में मौजूद पुलिस कर्मियों तक पहुंची। पुलिस द्वारा नवाजात के शव को कब्जे में लेते हुए विसरा पिजर्व कराया गया। फिलहाल मर्ग कायम कर मामले की जांच पड़ताल की जा रही है। पुलिस ने बताया कि शव को देखकर प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वह एक- दो दिन पुराना है। शव को कब्जे में लेकर उसका बिसरा पिजर्व कराया गया। बाद में कागजी कार्यवाही पूर्ण कर नवजात के शव को दफ़न करा दिया गया।

ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि अस्पताल में डिलेवरी के बाद प्रसूति वार्ड से शव को लाकर यहाँ फेका गया है। वहीं दूसरी और यह भी आशंका व्यक्त की जा रही है कि किसी कलयुगी माँ ने अपने किसी कृत्य को छुपाने के लिए ऐसा किया है। किसी को संदेह न हो इसलिए बाहर से भी शव लाकर यहाँ फेक दिए जाने से भी इनकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल पुलिस द्वारा हर बिंदु को ध्यान में रखते हुए मर्ग कायम कर मामले की तहकीकात की जा रही है।

भारत विकास परिषद की पहल राष्ट्रीय चेतना के स्वर तरानों से गूंजेगा शहर

*6 अक्टूबर को आस्था होटल में होगा समूहगान प्रतियोगिता का आयोजन*


अनूपपुर

सम्पर्क ,सहयोग, संस्कार, सेवा और  समर्पण के सूत्र पर कार्य करने वाली पूर्ण  राष्ट्रीय  सामाजिक  संगठन  भारत विकास परिषद , जिसकी  सम्पूर्ण भारत में शाखाएं हैं और जो समाज में संस्कार और  सेवा भाव से काम करती है।‌ भारत विकास परिषद शाखा अनूपपुर भी उनमें से एक है और अपने संस्कार प्रकल्प के तहत दिनाँक 06 अक्टूबर 2024 को आस्था होटल अनूपपुर में विविध विद्यालय के विद्यार्थियों के माध्यम से करने जा रही है।

इस कार्यक्रम में विद्यालयों की छात्र - छात्राओं द्वारा विविध भारतीय परिधान में राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत हिन्दी ,संस्कृत और लोकगीत का गायन किया जाएगा तथा विविध भाव भंगिमाओं के साथ अनूठा अभिनय और प्रदर्शन मन को मोह लेने वाला होगा। वास्तव में जब हमारी संस्कृति जब पाश्चात्य सभ्यता के अंधानुकरण में लगी है तब इस तरह के संगठन आगे आकर विद्यार्थियों में देश प्रेम की भावना जागृत करते हैं यह बहुत ही अनुकरणीय पहल हैं ।

आज जब विद्यालय में अध्ययनरत बच्चों के कोमल मन पर अश्लील फ़िल्मी गीतों और इनमें फूहड़ नृत्य का असर इस क़दर से हो रहा है कि हर गली नुक्कड़ में आए दिन प्रदर्शन करते  बच्चें दिख जाते हैं, तब ऐसी स्थिति में भारत विकास परिषद उन विद्यार्थियों राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत इस कार्यक्रम का आयोजन कर विद्यालय में, विद्यार्थियों के परिवारों में और समाज में एक सकारात्मक राष्ट्रीय चेतना जागृत करती हैं । इस लिए परिषद ज्यादा से ज्यादा विद्यालय को इस  कार्यक्रम में सहभाग करने के लिए आमंत्रित करती है।

कार्यक्रम का आयोजन भारत विकास परिषद विकास परिषद शाखा अनूपपुर के द्वारा किया जा रहा है। इस हेतु एक आवश्यक बैठक 29 सितंबर को आयोजित की गयी । जिसे संबोधित करते हुए विंध्य प्रांत के अध्यक्ष डॉ देवेन्द्र कुमार तिवारी ने बताया कि यह कार्यक्रम शाखा स्तरीय है ,विद्यार्थियों में कार्यक्रम के प्रति जिज्ञासा और उत्साह बना रहे इसलिए इसे प्रतियोगिता का स्वरूप दिया जाता है और इसमें जिस भी विद्यालय का हिंदी, संस्कृत और लोकगीत तीनों को मिलाकर के बेहतर प्रदर्शन होता है उसको प्रथम स्थान पर रखते हैं और फिर वह विद्यालय की टोली आगे प्रांतीय प्रतियोगिता का हिस्सा होती हैं वहां भी इसी तरह की प्रतियोगिता संपादित होती है । वहां से जो भी विद्यार्थी प्रथम स्थान अर्जित करते हैं ,वो  क्षेत्रीय प्रतियोगिता में भाग लेते हैं और जो विद्यालय वहां पर भी प्रथम स्थान अर्जित करते हैं, उन्हें अखिल भारतीय स्तर पर आयोजित होने वाली राष्ट्रीय समूह गान प्रतियोगिता में शामिल होने का अवसर प्राप्त होता है। इस तरह से इस प्रतियोगिता को शाखा से लेकर के अखिल भारतीय स्तर तक लेकर के जाते हैं और विद्यार्थियों के बीच में एक अनूठा और अलग वातावरण निर्मित करने का प्रयास होता है।

बैठक में देवेन्द्र तिवारी, राजेंद्र प्रसाद तिवारी, मनोज द्विवेदी, वीरेंद्र सिंह राठौड़, सिद्धार्थ शिव सिंह, राकेश गौतम, आनंद पाण्डेय, सदस्य पुष्पेंद्र पांडे, डॉ देवेंद्र बागरी, मनोज मिश्रा, शीलू त्रिपाठी, राजा तिवारी, अरविंद मिश्रा, आदि उपस्थित रहे।

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