हाथियो ने तोड़ा घर स्कूल में रह रहा परिवार, नहीं मिली राहत राशि, कलेक्टर को दिया पत्र


अनूपपुर

अनूपपुर जिले की जैतहरी तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत गोबरी के ठेंगरहा गांव निवासी एक आदिवासी महिला का पांच माह पूर्व हाथियों द्वारा दो माह के मध्य चार बार हमला कर मकान को नष्ट कर दिये जाने पर महिला परिवार सहित पांच माह से ठेंगरहा के विद्यालय में रह रही है,आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वह घर की मरम्मत नहीं कर पा रही है वही पांच माह के बाद भी महिला को प्रशासन की ओर से एक भी राहत राशि नहीं मिली पाई है।

इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार अनूपपुर जिले के जैतहरी तहसील एवं थाना अंतर्गत ग्राम पंचायत गोबरी के वार्ड क्रमांक एक भदराखार ग्राम ठेंगरहा निवासी सूरजकली सिंह पति बाबूलाल सिंह गोंड जो मूलतः जैतहरी के पास मुर्रा गांव के निवासी है की भूमि कई वर्ष पूर्व मोजर बेयर कंपनी के अधिग्रहण कर लेने के कारण अधिग्रहण के बाद मिले राशि से गोंबरी पंचायत मके ठेंगरहा गांव में लगभग 2 एकड़ जमीन लेकर दो कमरे का मकान एवं खेत बनाकर अपने पति बाबूलाल सिंह  तीन पुत्र,दो पुत्र वधू एवं दो नाती के साथ रहकर कृषि कार्य के साथ मजदूरी का भी काम कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रही थी। हाथियों के घर तोड़ने के बाद सूरजकली के बेघर हो जाने पर विगत पांच महत्वपूर्ण ग्राम पंचायत गोंबरी के जनप्रतिनिधियों को बताए जाने पर प्रशासन द्वारा उसे परिवार को पचास किलो चावल देते हुए प्राथमिक विद्यालय ठेंगरहा के पुराने रसोई घर का एक कमरा उपलब्ध कराया जिसमें वह निरंतर रह रही है सूरजकली के मकान एवं खेतों में हाथियों के समूह द्वारा किए गए नुकसान पर पटवारी एवं वन विभाग द्वारा राहत प्रकरण भी तैयार किया गया रहा लेकिन पांच माह व्यतीत हो जाने के बाद भी प्रशासन के द्वारा वर्तमान समय तक किसी भी तरह की राहत राशि नहीं दी गई।

विगत तीन माह तक निरंतर हाथियों के इस क्षेत्र में विचरण दौरान सैकड़ो ग्रामीणों के घर-बाड़ी,खेतों,खेतों में लगे अनाज का नुकसान किए जाने पर शहडोल संसदीय क्षेत्र के सांसद,पुष्पराजगढ़ विधानसभा क्षेत्र के विधायक,अनूपपुर कलेक्टर,पुलिस अधीक्षक एवं वन मण्डलाधिकारी ने भी हाथी प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर ग्रामीणो की मांग पर जल्द ही राहत राशि दिए एवं दिलाए जाने का आश्वासन दिया जा रहा जिस दौरान क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने सूरजकली सिंह के साथ घटित घटना की जानकारी से भी अवगत कराया जा रहा है किंतु पांच माह व्यतीत हो जाने के बाद भी उसे राहत राशि नहीं मिल सकी है जिससे परेशान सूरजकली ने गुरुवार को अनूपपुर कलेक्टर के नाम एक आवेदन दे कर शीघ्र ही राहत राशि दिलाने की अपेक्षा की है।

नए कवियों की 2 कविताएं ‘नवांकुर’ नामक पुस्तक में होगी प्रकाशित, होंगे पुरस्कृत- गिरीश पटेल


अनूपपुर

आदरणीय मित्रों, हमारे इस शीर्षक के तहत नए काव्य साधकों की कविताएँ फ़ेसबुक में न केवल प्रकाशित की जाएँगीं बल्कि उनका वाचन भी हमारे द्वारा किया जाएगा । प्रत्येक साधक की 2 कविताओं का वाचन होगा। जब पर्याप्त रचनाओं का प्रकाशन और वाचन हो जाएगा तब कविताओं को ' नवांकुर' नामक पुस्तिका में संकलन कर प्रकाशित किया जाएगा । इन प्रकाशित रचाओं में से सबसे अच्छी रचना को पुरस्कृत भी किया जाएगा।

इसमें भाग लेने के लिए नए कवि उन्हें ही माना जाएगा जिनकी उम्र ४५ वर्ष से कम हो तथा जिन्हें रचना करते हुए ज़्यादा समय न बीता हो । प्रत्येक कवि को अपना जीवनवृतांत (बायोडेटा) के साथ दो रचनाएँ नीचे दिए मेल एड्रेस पर भेजनी होंगी।

girishchandra.patel4@gmail.com

मौसम बदलाव से तीर्थयात्रियों, टूरिस्टो में दिखी भारी कमी, सूनसान मंदिर, आश्रम, बाजार

*कोहरा और ठंड की वजह से लोग हो जाते है परेशान - पुजारी धनेश द्विवेदी, मंदिर*


अनूपपुर/अमरकंटक 

अमरकंटक में दो दिन से ढा रहा मिचौंग नाम का तूफानी चक्रवात जो तमिलनाडू की राजधानी चेन्नई व आस पास के क्षेत्र में बड़ी तबाही मचा रखा है । इसका असर मध्य प्रदेश समेत अन्य प्रदेशों में भी अपना असर दिखा रहा है । अमरकंटक में ऐसे मौसम का मिजाज साल के अनेक बार आए दिन दिखता रहता है और मौसम का मिजाज बदलता रहता है । यंहा की बारिश का कोई अनुमान लगा पाना बड़ा ही मुश्किल कहा जा सकता है । वैसे भी अमरकंटक के चारो दिशाओं से यह स्थान घने जंगलों से अच्छादित है । मैकल , सतपुड़ा और विंध्य की पहाड़ियों की चोटी पर बसा अमरकंटक मां नर्मदा जी की उद्गम स्थली , सोनभद्र तथा जोहिला जैसे नदियों की जन्म (उद्गम) स्थली है । इसी वजह से अमरकंटक में देश के अलावा विदेशों से भी लोग पहुंचते है । धार्मिक त्योहारों में भारी संख्या में श्रद्धालु आते है स्नान , पूजन कर नर्मदा दर्शन करते है । पर्यटकों का आना जाना इस क्षेत्र में बारहों महीने चलता रहता है । जब कभी यहां का मौसम बारिश के बाद अचानक बदल जाता है तब टूरिस्टो व अन्य यात्रियों को भ्रमण करने में काफी परेशानी होती है , कारण की लगातार रिमझिम व तेज बारिश का होना आफत पैदा करती है । जिस वजह से ऐसे मौसम में लोग इधर आना पसंद नही करते । बारिश होने से ठंड तुरंत बढ़ जाया करता है । बारिश के मौसम में धुंध या कोहरा का भी प्रकोप बढ़ जाता है । कोहरा की वजह से कई बार वाहनों का रोड़ एक्सीडेंट भी हो जाया करता है । ज्यादा बारिश की वजह से घरो और होटलों , आश्रमों में रुके लोगो को निकलना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है । अगर वस्त्र भीग गए तो कब सूखेंगे यह कह पाना भी मुश्किल है । ऐसे मौसम में सब जगह सुना सुना दिखता है । मंदिरों में आवागमन कम हो जाता है , बाजार भी सुना हो जाता है और आश्रमों में भी सन्नाटा जैसे महसूस होता है । होटलों में भी मायूसी नजर आती है।

नर्मदा मंदिर पुजारी धनेश द्विवेदी कहते है की बारिश के मौसम में जब भी बदलाव आता है तब तब अमरकंटक में सन्नाटा जैसे लगने लगता है , श्रद्धालुओं , यात्रियों , पर्यटकों का आना कम हो जाता है जिस वजह से मंदिर , बाजार आश्रमों और होटलों में सुना सुना लगता है।

आचार्य स्वामी रामकृष्णानंद महाराज (मारकंडे आश्रम) ने कहा की अमरकंटक का मौसम बदलने पर भक्तो का आवागमन कम हो ही जाता है , कोहरा का प्रकोप , भारी बारीश और ठंड परिवार वालो को ठीक नही रहता।

कुछ दिन पहले शुष्क मौसम में अमरकंटक भ्रमण पर आए शहडोल यूनिवर्शल कोचिंग सेंटर के प्रमुख भागवत तिवारी साथ में विक्रम सिंह ने बताया की हम अपने कोचिंग के सभी बच्चे व बच्चियों को भ्रमण कराने अमरकंटक ले के आए है , यहां आने पर सभी लोग अति प्रसन्न है , यहां के सभी प्रमुख स्थानों का भ्रमण कर चुके है और शहडोल की अपेक्षा यहां मौसम में ठंडक भी है । हमारे पूरे कोचिंग की टीम व सारे बच्चे यहां आने से अति प्रसन्न है।

स्कूलों की छुट्टियां जब भी पड़ती है तब अनेक स्कूलों के बच्चो के साथ शिक्षकगण अमरकंटक टूर में जरूर पहुंचते है । दीपावली पर्व के बाद लोगो का आवागमन काफी ज्यादा बना रहा । लेकिन मौसम ने यहां की रौनक को धीमा कर दिया । यह मौसम भी यहां के लिए कश्मीर से कम नहीं आका जा सकता , दूर दराज व शहरी क्षेत्रों से आए श्रद्धालुओं , पर्यटकों को यह मौसम का भी लुफ्त उठाते भी नजर आते है।

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