उर्दू अकादमी द्वारा चंद्रमौली शर्मा की स्मृति में प्रसंग एवं रचना पाठ का आयोजन आज 


अनूपपुर

मध्य प्रदेश उर्दू अकादमी, संस्कृति परिषद, संस्कृति विभाग के तत्त्वावधान में ज़िला अदब गोशा, अनूपपुर के द्वारा सिलसिला एवं तलाशे जौहर के तहत महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित चंद्रमौली शर्मा की स्मृति में स्मृति प्रसंग एवं रचना पाठ का आयोजन 7 सितंबर 2023 को दोपहर 3:00 बजे से संकल्प पैरा मेडिकल कालेज, अनूपपुर में ज़िला समन्वयक दीपक अग्रवाल के सहयोग से किया जाएगा। 

उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ. नुसरत मेहदी के अनुसार उर्दू अकादमी द्वारा सिलसिला के तहत प्रदेश के सभी ज़िलों में काव्य, साहित्यिक एवं सांगीतिक गोष्ठियां आयोजित की जा रही है। इस वर्ष ज़िलावार सिलसिला एवं तलाशे जौहर कार्यक्रम उन ज़िलों के दिवंगत रचनाकारों एवं स्वतंत्रता सेनानियों को समर्पित किये गए हैं। अकादमी द्वारा प्रदेश के समस्त ज़िलों में अपने समन्वयकों के माध्यम से ऐसी हस्तियों के नाम ढूंढ कर उनकी स्मृति में कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इस कड़ी का उन्नीसवां कार्यक्रम अनूपपुर में 7 सितम्बर को  आयोजित हो रहा है जिसमें अनूपपुर ज़िले के अंतर्गत आने वाले सभी गांवों, तहसीलों एवं बस्तियों के ऐसे स्थापित शायर एवं साहित्यकार अपनी प्रस्तुति देंगे जिन्हें अकादमी के मंचों पर प्रस्तुति का कम अवसर मिला है। 

अनूपपुर ज़िले के समन्वयक दीपक अग्रवाल ने बताया कि  सिलसिला एवं तलाशे जौहर के तहत स्मृति प्रसंग एवं रचना पाठ का आयोजन दोपहर 3 बजे होगा जिसकी शुरुआत में स्मृति प्रसंग के तहत अनूपपुर के वरिष्ठ पत्रकार  जबलपुर के महान स्वतंत्रता सेनानी पंडित चंद्रमौली शर्मा "वैद्य जी" के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर चर्चा कर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे।  रचना पाठ में जो शायर एवं साहित्यकार अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेंगे उनमें विशिष्ट आमंत्रित शायरों /साहित्यकारों के रूप में शहडोल के मशहूर शायर क़ासिम इलाहाबादी एवं कटनी के प्रसिद्ध शायर चंद्र किशोर श्रीवास्तव शामिल होंगे और स्थानीय शायरों /साहित्यकारों में  अजीत मिश्रा, गिरीश पटेल, पवन छिब्बर, सुधा शर्मा अनूपपुर, फैय्याज़ हसन जैतहरी, मो. यासीन खान, कैलाश पाटकर, एस.के. बोहरे, कोतमा, विजेन्द्र सोनी, रामनारायण पांडे, मीना सिंह, ललित दुबे (अनूपपुर) अविनाश अग्रवाल, अमरेन्द्र सिंह कोतमा, मधुकर चतुर्वेदी (अनूपपुर) आदि  शामिल होंगे। कार्यक्रम का संचालन दीपक अग्रवाल द्वारा किया जाएगा। 

उर्दू अकादमी की निदेशक डॉ नुसरत मेहदी ने अनूपपुर के सभी कला एवं साहित्य प्रेमियों से कार्यक्रम में शामिल होने का आग्रह किया है।

कल्याणिका केंद्रीय शिक्षा निकेतन विद्यालय ने मनाया शिक्षक दिवस 


अनूपपुर/अमरकंटक

कल्याणिका केंद्रीय शिक्षा निकेतन विद्यालय अमरकंटक में बड़े ही धूमधाम से स्कूल के शिक्षको के साथ स्कूली बच्चो ने मां सरस्वती बंदना से प्रारंभ किया गया । बच्चो ने शिक्षको के सम्मान में सांस्कृतिक प्रोग्राम का भी आयोजन किया । शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर विद्यालय के प्रबंध न्यासी स्वामी हिमाद्री मुनि जी महाराज ने समस्त शिक्षकों को आशीर्वाद स्वरूप उपहार भेंट किया । नगर के प्रमुख विद्यालयो में से कल्याणिका हर छोटे-बड़े आयोजन क्रमशः होते रहते हैं । शिक्षा के मंदिर के पुजारी जिसका अर्थ है शिक्षक आज उनका  दिवस है जिसको विद्यालय परिवार के द्वारा बड़े ही धूमधाम से मनाया गया । कार्यक्रम के उपरांत सर्वप्रथम माता सरस्वती जी की पूजन उपरांत विद्यालय के बच्चों के द्वारा एकल व सामूहिक नृत्य , कविता , भाषण के उपरांत कल्याण सेवा आश्रम के प्रबंध न्यासी स्वामी हिमाद्री मुनि जी महाराज के द्वारा समस्त शिक्षकों को एवं विद्यालय परिवार के सदस्यों को उपहार प्रदान कर अपना आशीश वचन देकर प्रसन्नता व्यक्त की । विद्यालय के शिक्षकों में जिनके द्वारा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर अतिरिक्त उपहार भी स्वामी जी के द्वारा भेंट किया गया । कार्यक्रम का सफल मंच संचालन शिक्षकों के अलावा छात्र-छात्राओं ने भी किया एवं कार्यक्रम में आभार व्यक्त विद्यालय के उपप्राचार्य ने किया एवं स्वामी जी ने समस्त छात्राओं , शिक्षकों को अपने जीवन में उन्नति करें ऐसा आशीर्वचन से आशीष प्रदान किए।

व्रत रखकर महिलाओं ने की हरछठ पूजन संतान प्राप्ति व पुत्र दीर्घायु निमित्त की आराधना


अनूपपुर/अमरकंटक

अनूपपुर जिला मुख्यालय समेत अमरकंटक के अलावा पूरे जिले में महिलाओं ने हलषष्ठी का व्रत रख विधि विधान से कि पूजन-आराधना। हरछठ का व्रत महिलाओ द्वारा किया जाता है। महिलाएं अपने परिवार की सुख संवृद्धि , संतान की दीर्घायु व संतान प्राप्ति हेतु षष्ठी माता का व्रत रह कर पूजन करती है।

यह व्रत विवाहित , नवविवाहिता महिलाए करती है जो अपने परिवार की सुख संब्रद्धि , पुत्र की प्राप्ति , पुत्र की लंबी आयु की कामना लिए दिन भर उपवास रहती है व विधि विधान से पूजन कर मनोकामना षष्ठी माता से मांगती है । पसही का चावल , भैंस के दूध की दही , उबला हुआ महुआ आदि व्रत समाप्ति बाद ग्रहण करती है।

यह पूजन भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है । आज ही के दिन कृष्ण के बड़े भाई बलराम जी का जन्म हुआ था , जो यह जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और यह दिवस (व्रत) उन्ही को समर्पित भी करती है । महिलाए घर के आंगन में एक चौकी य पीढ़ा रख उसपे गौरी , गणेश , कलश ( दीपक) रखकर पूजा का सामान रख आराधना करतीं है । महिलाओं ने बतलाया की अपनी श्रद्धानुसार वस्तु रख कर पंडित से पूजन , व्रत की कथा सुनने के बाद आरती की जाती है , महिलाए आज कोई भी अनाज का सेवन नहीं करती । आज व्रती महिलाए भैंस के दूध की दही और पका हुआ महुआ का ही प्रसाद पाती है।

इस दिन किसान अपने हल की पूजन भी करते है । भगवान बलराम का प्रधान शस्त्र हल है इसी से वे हलधर कहलाते है और यह व्रत हलषष्ठी कहलाता है । इसे देश के अलग अलग जगहों पर अलग अलग नाम से अलग अलग प्रकार से पूजन पद्धति व विधान है।

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