मप्र पटवारी संघ के आह्वान पर कई मांगो पर पटवारियो का हड़ताल जारी


अनूपपुर/कोतमा

अनूपपुर जिले के कोतमा मप्र पटवारी संघ भोपाल के आह्वान पर तहसील इकाई कोतमा के सभी पटवारी अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत हैं शासन द्वारा पटवारी संघ के मांगो को बार बार नजर अंदाज करने के बाद प्रदेश के सभी पटवारी लामबंद है व हड़ताल के लिए मजबूर हैं शासन के वादा खिलाफी के कारण मजबूरन पटवारियों को आंदोलन के लिए बैठना पड़ रहा है। मप्र पटवारी संघ के प्रमुख मांगो में सबसे महत्वपूर्ण और विगत 28 वर्षों की मांग 2800 पे ग्रेड व पद्दोन्नति जैसे मांग शामिल है मप्र पटवारी संघ तहसील इकाई कोतमा जिला अनूपपुर के तहसील अध्यक्ष प्रणय पाठक व तहसील सचिव प्रवीण तिवारी जी का कहना है कि जब तक शासन स्तर से हमारे मांगो पर विचार कर उन्हें पूरा नही किया जाता है तब तक पूरे प्रदेश स्तर पर ऐसे ही हम सभी पटवारी आंदोलनरत रहेंगे।

आदेश बना दिखावा, आवारा जानवरो से छुटकारा दिलाने में नाकाम हो रही हैं जिला प्रशासन? 


अनूपपुर

अनूपपुर जिला मुख्यालय समेत कोतमा, बिजुरी, राजनगर, जमुना, भालूमाड़ा, चचाई, अमरकंटक, राजेन्द्रग्राम व जैतहरी समेत ग्राम पंचायतों में आवारा गौवंश सड़को पर धमाचौकड़ी मची रहती हैं सड़को पर आवारा जानकारों के कारण लगातार दुर्घटना घठित होती हैं जिससे लोगो की जान चली जाती हैं। इसके अलावा बड़े वाहन से टकराने के कारण गौवंश भी काल के मुंह मे समा जाते है। कई वर्षो से यही चला आ रहा हैं जिले में जितने भी गौशाला हैं जिसमे जिले के आवारा जानवरो की रखने की पर्याप्त व्यवस्था नही हैं।  जिले में कई वर्षो से केवल प्रशासन के द्वारा केवल खानापूर्ति के लिए आदेश भर करती हैं कि जानवरो को सड़कों पर आवारा छोड़ने पर पशु मालिकों के ऊपर जुर्माना लगाकर कब कार्यवाही की जाएगी, कब जुर्माना किया जाएगा। प्रशासन ही बता सकती हैं, कार्यवाही न होने से पशु मालिक निडर होकर पशुओं को सड़कों पर छोड़ देते है और प्रशासन का आदेश केवल यह कागजी कार्यवाही तक ही सीमित रह गया हैं दिखावे के लिए नगरपालिकाओ द्वारा एक दिन कार्यवाही करके अपना कोरम पूरा कर लेती हैं दूसरे दिन से फिर सड़को की स्थित वही हो जाती हैं। जिला मुख्यालय में कलेक्टर कार्यालय, कलेक्टर निवास, एसपी निवास, जिला पंचायत कार्यालय के सामने सैकड़ो आवारा पशु सड़को को पूरी तरह जाम किये रहते हैं जब जिले के आला अधिकारियों के बंगले और कार्यालय के सामने का यह हाल है तो पूरे जिले में क्या हाल होगा। जिला मुख्यालय के हर वार्डो समेत कोतमा रोड जैतहरी रोड, अमरकंटक रोड व चचाई रोड में सैकड़ो की संख्या में आवारा जानवर सड़को को जाम किये रहते हैं।आखिर जिला प्रशासन केवल आदेश ही करती रहेगी या सड़को से आवारा जानवरो को हटाकर पशु मालिको के ऊपर जुर्माना करके लोगो को आवारा पशुओं से निजात दिलाएगी।

*ये हैं आदेश*

राजमार्गों एवं नगर पालिका क्षेत्रों मे विचरण करने वाले आवारा (निराश्रित) गौवंशों को गौशालाओं में प्रतिस्थापित करने का कार्य प्रारंभ कर दिया गया हैं। तत्संबंध में कलेक्टर अनूपपुर द्वारा मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को नगरीय क्षेत्रों से एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारियों जनपद पंचायत को पंचायत से गुजरने वाले राजमार्गों से आवारा (निराश्रित) गौवंशों को नजदीकी गौशालाओं मे प्रतिस्थापित (भेजे जाने) के निर्देश जारी किये गये थे। इस संबंध में जानकारी देते हुए पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उप संचालक डॉ. ए.पी. पटेल ने बताया है कि गौशालाओं में प्रतिस्थापित पशु 12 अंक के इनाफ टैग लगाकर पंजीकृत कर लिए जायेंगे। पशुपालक द्वारा पशु वापस मांगे जाने पर कलेक्टर द्वारा निर्धारित अर्थदंड (शुल्क) की वसूली किये जाने पर पशुपालक को पशु वापस किये जा सकेंगे। पशुपालकों से अपने गौवंश को घर में बांधने की अपील की गई है।

अज्ञात वाहन से टकराकर कुचलने से मादा चीतल की हुई मौत, वन विभाग ने की कार्रवाई


अनूपपुर

अनूपपुर वन परीक्षेत्र के जमुड़ी बीट अंतर्गत शहडोल-अमरकंटक मुख्य मार्ग के मध्य छीरापटपर में अज्ञात वाहन से टकराकर,बुरी तरह कुचल कर मादा चीतल की मौत हो जाने की सूचना राहगीरों द्वारा 100 डायल पुलिस को दिए जाने पर मौके पर पहुंचकर पुलिस द्वारा वन विभाग को सूचित किया जिसके बाद वन विभाग का अमला मौके पर पहुंच कर मृत चीतल के शव को अपनी अभिरक्षा में ले  कानूनी कार्यवाही करते हुए मादा चीतल का अंतिम संस्कार किया। इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार वन परीक्षेंत अनूपपुर के जमुडी बीट अंतर्गत छीरापटपर में शहडोल से अमरकंटक जाने वाले मुख्य मार्ग पर अज्ञात चार पहिया वाहन से टकराने पर एक मादा चीतल की बुरी तरह कुचल जाने से स्थल पर मौत हो गई,मृत मादा चीतल के शव को देखते हुए राहगीरों द्वारा 100 डायल पुलिस को फोन से सूचना दिए जाने पर प्रधान आरक्षक राजेंद्र सिंह,पायलट मनोज राठौर तत्काल मौके पर पहुंचकर मृत मादा चीतल के शव का अवलोकन करते हुए वन विभाग को सूचित किया जिस पर वन विभाग का अमला मौके पर पहुंच कर मादा चीतल के शव को अपनी अभिरक्षा में रखते हुए शुक्रवार की दोपहर कानूनी कार्यवाही के साथ मृत मादा चीतल का दाह संस्कार करते हुए जांच प्रारंभ की। ग्रामीण एवं वन्यप्राणियों के संरक्षण के प्रति रुचि रखने वाले संगठनों,व्यक्तियों द्वारा अनेको वार जिला प्रशासन एवं वन विभाग के अधिकारियों से वन्यप्राणी चीतल बाहुल्य शहडोल-अमरकंटक मुख्य मार्ग के मध्य जमुड़ी से राजेंद्रग्राम के लाघाटोला के मध्य एवं उमरगोहान से अमरकंटक पहुंचने के मध्य जहां से चीतल प्रजाति के वन्यप्राणी देर शाम से सुबह तक के जंगल से आहार की तलाश में गांव से लगे खेतों की ओर आने एवं सुबह होने के दौरान वापस वन क्षेत्र में जाते समय मध्य के स्थान को चिन्हित कर फेंसिंग वायर से फेंसिंग किए जाने की अपेक्षा किए जाने के बाद भी वर्तमान समय तक वन विभाग के द्वारा किसी भी तरह की कार्यवाही न किए जाने के कारण आए दिन चीतल सहित अन्य वन्यप्राणी मौत के शिकार हो रहे हैं वहीं वन विभाग कागज में खानापूर्ति कर अपने दायित्व को निभाने में जुटा रहता है।

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