रमेश सिंह कांग्रेस से विधायक पद के प्रबल दावेदार, जनता के बीच दिख रही लोकप्रियता, अनूपपुर सीट कांग्रेस की झोली में 


अनूपपुर

जिला मुख्यालय अनूपपुर विधानसभा सीट आदिवासियों के लिए सुरक्षित है जहां वर्तमान विधायक भाजपा की बिसाहू लाल सिंह हैं तो वही भाजपा की पूर्व विधायक रामलाल रौतेल एवं भाजपा जिला अध्यक्ष रामदासपुरी टिकट के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं। दूसरी और कांग्रेस कोई बड़ा चेहरा नजर नहीं आ रहा हैं एक चेहरा दिख रहा हैं जिला अध्यक्ष रमेश सिंह जिन्होंने मध्य प्रदेश सिविल सेवा से त्याग पद देते हुए पिछले चुनाव में अनूपपुर से देवदारी की थी किंतु पार्टी ने उन्हें अपना उम्मीदवार नहीं बनाया और एक जनपद सदस्य को टिकट देकर मैदान में उतारा जो करारी हार से चारों खाने चित हो गए। एक बार फिर रमेश सिंह ने पार्टी हाई कमान को अनूपपुर से चुनाव लड़ने की मनसा जाहिर कर दी है।

जिला पंचायत चुनाव में रमेश सिंह की धर्मपत्नी प्रीति सिंह को जिले भर में रिकार्ड मतों से विजय हासिल हुई थी इससे इनका ग्रामीणों के बीच लोकप्रियता पता चलती है। कांग्रेस के पास आज ऐसा कोई व्यक्ति नहीं जो भाजपा का मुकाबला कर सके अभी तक जो भी दावेदार ने अपना दावा ठोका है वह जनपद पंचायत तक ही सीमित है। ऐसे में कांग्रेस इस बार खतरा ।मोल लेने के मूड में दिखाई नहीं दे रही है।

नेता बनकर जनता की सेवा की चाह में सरकारी नौकरी से त्यागपत्र देकर अपनी किस्मत अजमानी के लिए रमेश सिंह ने लगातार से जनता के बीच पहुंचकर जनसेवा में लगे हुए हैं। अब तक जो भी सर्वे हुए हैं उसमें रमेश सिंह विधानसभा में सबसे अच्छी स्थिति बताई जा रही है, पिछले मध्यावधि चुनाव में कांग्रेस द्वारा अधिकृत प्रत्याशी की पैंतीस हजार से हार हुई थी ऐसे में पार्टी दुबारा कोई भी रिस्क नही लेना चाहेगी, जबकि कमलनाथ प्रत्याशी चयन में सावधानी बरत रहे हैं, रमेश सिंह का जनसंपर्क तीन वर्षों से चल रहा है और युवा समुदाय सभी वर्गों के बीच लोकप्रिय हैं। अनूपपुर विधायक पद के लिए कांग्रेस पार्टी में इससे अच्छा प्रत्याशी मिलना मुश्किल है।

प्रेम व खुशहाली का पर्व कजलियां उत्साह एवं श्रद्धा पूर्वक मनाया गया


अनूपपुर

कजलियां प्रकृति प्रेम और खुशहाली से जुड़ा पर्व है। इसका प्रचलन सदियों से चला आ रहा है। राखी पर्व के दूसरे दिन कजलियां पर्व मनाया जाता है। इसे कई स्थानों पर भुजलिया या भुजरियां नाम से भी जाना जाता है। बांस की छोटी-छोटी टोकरियों में मिट्टी की तह बिछाकर गेहूं के दाने बोएं जाते हैं। भुजरिया नई फसल का प्रतीक है। कजलियां मुख्‍य रूप से बुंदेलखंड में राखी के दूसरे दिन की जाने वाली एक परंपरा है, जिसमें नागपंचमी के दूसरे दिन खेतों से लाई गई मिट्टी को बर्तनों में भरकर उसमें गेहूं बोएं जाते हैं और उन गेंहू के बीजों में रक्षाबंधन के दिन तक गोबर की खाद और पानी दिया जाता है और देखभाल की जाती है। यह पर्व अच्छी बारिश, अच्छी फसल और जीवन में सुख-समृद्धि की कामना से किया जाता है। रक्षाबंधन के दूसरे दिन कजलियां पर्व मनाया जाता हैं अनूपपुर जिला मुख्यालय समेत शहरी व ग्रामीण क्षेत्रो में कजलियां पर्व बड़े ही उत्साह एवं श्रद्धा पूर्वक मनाया गया। अनूपपुर जिला मुख्यालय में सोन, तिपान व चंदास नदी में कजलियां विसर्जन के लिए लोगो की भीड़ देखी गई। वही कोतमा नगर के पंचायती मंदिर एवं पुरानी बस्ती से शाम कजलईया का जुलूस निकाला गाया, जो भजन कीर्तन करते हुए बस स्टैंड पुरनिहा तालाब व केरहा तालाब में कजलियां के विसर्जन के साथ समाप्त हुआ शाम से छोटे- छोटे बच्चे एवं बडे बुजुर्ग कजलिया लेकर एक दूसरे के घरों में पहुंचकर गले मिले। कजलईया पर्व हिन्दू त्यौहारो में मुख्य पर्व माना जाता है जिसमें लोग एक दूसरे से गले मिलकर अपनी खुशियां बांटते है। यह क्रम शाम से शुरू होगा जो देर रात तक निरंतर चलता रहा।

भद्राकाल के बाद धूमधाम से मनाया गया भाई बहन के पवित्र रिश्ते का त्योहार रक्षा बंधन


अनूपपुर

इस वर्ष रक्षाबंधन में भद्रा का साया होने के कारण दिन में राखी नहीं बांधी गई। भद्रा काल समाप्त होने के बाद बहनों ने रात में भाइयों की कलाइयों में राखी बांधी।  जिले भर की विभिन्न मंदिरों में श्रद्धालु पूजन अर्चन कर भगवान को भोग प्रसाद व राखियां चढ़ाई। बाजार में दिनभर लोगों की भीड़ बनी रही है। कपड़े, मिठाई व राखियों के साथ फल की दुकानों में बहनों ने जमकर खरीदारी की। भद्रा काल 30 अगस्त को सुबह 10.59 बजे से पूर्णिमा तिथि शुरू होने के साथ ही लगा जो रात 9.02 बजे तक रहा। बहनों ने रात 9 बजकर 02 मिनट के बाद ही भाई की कलाई पर राखी बांधी। सावन मास के पूर्णिमा को मनाई जाने वाली भाई-बहन के अटूट प्रेम व रिश्ते का प्रतीक रक्षाबंधन का पर्व सोमवार 30 अगस्त की रात से 31 अगस्त को दिनभर भाइयों की कलाइयों में राखी बांधने का क्रम चला। इस मौके पर बहनों ने अपने भाईयों के माथे पर चंदन तिलक के साथ कलाई पर रेशम की पवित्र डोर को बांध अपनी रक्षा का वचन लिया। जिला जेल अनूपपुर में सुबह से राखी बांधने वालो को काफी भीड़ देखने को मिली बहनों अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधने अनूपपुर जेल पहुंची। लगभग 101 बंदियों की बहनों ने भाईयों की कलाई पर राखियां बांधी। बहनों के इस प्रेम में भाईयों के आंखों की सूखी आंसू हिलारे लेकर एक- एक कर टपकने लगी। भाई- बहनों ने एक दूसरे के हाल जाने, वहीं भाईयों ने बहनों को रक्षा का संकल्प दिया। कैदियों को राखी बांधने के लिए जेल प्रबंधन ने सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक समय निर्धारित किया था। बहनों को राखी बांधने के लिए टोकन सिस्टम से अनुमति दी जा रही थी। प्रबंधन ने 200 ग्राम मिठाई, राखी व रूमाल के साथ बहनों को अंदर जाने प्रवेश दिया। इसके लिए जेल में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था के साथ अलग व्यवस्था बनाई गई थी। 

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