वन भूमि पर अतिक्रमण कारियो के हौसले बुलंद वन विभाग नही कर रहा हैं कार्यवाही


अनूपपुर/कोतमा

अनूपपुर जिले के कोतमा रेंज लतार सर्किल अंतर्गत ग्राम कोटमी वन भूमि से लगे भू स्वामी खसरा न.197 द्वारा आबादी क्षेत्र वन भूमि है जो नक्शा में स्पष्ट दिख रहा है वन भूमि अतिक्रमण कारी जगदीश यादव पिता कधाई यादव और सगे भाई शिवदयाल यादव कैलाश यादव द्वारा वन भूमि में मकान खनीहाल बनाकर कब्जा कर लिया गया है वन विभाग का अधिकारी के साठ गांठ से वन मुनारा को पूर्व में परिवर्तन किया गया है जांच दल  विवेचना अधिकारी द्वारा जान बूझ कर वन भूमि  से बाहर बताकर सभी अधिकारियो को गुमराह किया गया है जिन कारणों से  दिनांक 17/01/2023 को डीएफओ द्वारा कोई कार्यवाही नही की गई जिससे ऐसा प्रतीत होता है की अतिक्रमण कारी जगदीश यादव आपने प्रभाव का इस्तेमाल कर अधिकारी कर्मचारी का मुंह बंद सच उगले से बंद कर दिया है और वन विभाग की भूमि में दिनों दिन अतिक्रमण हो रहा है ग्रामीण द्वारा कई बार 181 पर शिकायत किया जा चुका है पर बिना कोई जानकारी बिना संतुष्टि का ऊपर से ही सभी शिकायत में गलत प्रतिवेदन देकर शिकायत को बंद कर दिया जाता है  और मामला को ठंड कर दिया जाता है उक्त ग्राम कोटमी के बना नक्शा राजस्व नक्शा की सीमा को देखते हुए अतिक्रमण की हुई भूमि से अतिक्रमण हटाने की करवाही करने की आवश्कता है।

मंत्री के निर्देश टॉय टॉय फिस्स, नही जागा प्रशासन, बैगा गांव में पहुंचने के लिए नही मिली सड़क की स्वीकृति


अनूपपुर

जिला मुख्यालय अनूपपुर से लगभग 15 कि,मी,दूर स्थित ग्राम पंचायत लखनपुर के आश्रित बैगा बाहुल्य पचरीपानी ने ग्रामीणों,ग्राम पंचायत के कई सरपंचों के साथ जिले के विधायक एवं सरकार के मंत्री द्वारा लिखे गए पत्रों एवं फोन पर चर्चा के बाद भी अब तक रोड निर्माण के लिए जिला प्रशासन द्वारा किसी भी तरह की कार्यवाही ग्रामीणों के समक्ष, समझ में ना आने से ग्रामीण परेशान हैं वही एक बार फिर से आने वाले वर्षा काल में बैगा जनजाति समाज के गांव वालों को भीषण समस्या का सामना करना पड़ेगा जिसके लिए जिला प्रशासन ही जिम्मेदार माना जाएगा ।

ज्ञातव्य है कि ग्राम पंचायत लखनपुर के बसाहट टोला पचरीपानी मैं बैगा(भुमिया) जनजाति के साथ गोंड समाज के 25 घरों में लगभग सवा सौ ग्रामीणों की बस्ती है जो चारों ओर से वन क्षेत्र से घिरा हुआ है गांव में पहुंचने के लिए ग्रामीणों ग्राम पंचायत के कई सरपंचों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा जिले के जनप्रतिनिधियों एवं जिला प्रशासन से अनेकों बार मार्ग निर्माण की मांग रखी जाने के बाद भी वर्तमान समय तक मार्ग निर्माण के संबंध में पत्राचार तक की जानकारी नहीं मिल पाने से ग्रामीण परेशान हैं जिससे एक बार फिर आने वाले वर्षा काल में मार्ग ना होने से कीचड़-कादो के बीच आवागमन करने को मजबूर होना पड़ेगा इस गांव के बैगा समाज के लोग गांव के राजस्व एवं वनाअधिकार प्राप्त भूमि पर खेती कर तथा मजदूरी मूलक कार्य कर अपनी आजीविका चलाते आ रहे हैं,बसाहट-टोला के तीन ओर जंगल तथा पहाड़ होने से मुख्य बाजार अनूपपुर आने के लिए एक मात्र पचरीपानी से अगरियानार-लखनपुर पगडंडी रास्ता है जिसे कई वर्षों पूर्व वन विभाग द्वारा पेड़ों की कटाई दौरान अपने वाहनों को निकालने के लिए रास्ता बनाया रहा है जो निरंतर वर्षा के कारण बुरी तरह क्षतिग्रस्त स्थिति में है वही वर्षा काल दौरान गांव में बीमारी या अन्य कार्य होने पर ना तो कोई वाहन से पचरीपानी गांव तक जा सकता है न हीं गांव से कोई बाहर अन्य इलाके में आ-जा सकता है, मार्ग निर्माण हेतु वर्ष 2009 में ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के आधार पर जिला प्रशासन द्वारा सामुदायिक दावा का अधिकार भी प्रदाय किया गया है जिसके तहत ग्रामीण व ग्राम पंचायत के सरपंचों द्वारा विगत कई वर्षों से जिला प्रशासन एवं जिला मुख्यालय अनूपपुर के विधायक एवं मध्यप्रदेश सरकार के महत्वपूर्ण मंत्री बिसाहूलाल सिंह के समक्ष मार्ग निर्माण की बात रखते हुए पत्र सौंपा गए जिस पर मंत्री द्वारा भी अनेकों बार जिला प्रशासन को बैगा बाहुल्य पचरीपानी गांव तक मार्ग निर्माण कराए जाने हेतु प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृत किए जाने के निर्देश दिए गए किंतु निरंतर निर्देशों के बाद भी वर्तमान समय तक जिला प्रशासन के द्वारा मार्ग निर्माण का सर्वेक्षण व वन विभाग से मार्ग निर्माण हेतु अनुमति के लिए पत्राचार तक नहीं किए जाने की जानकारी पंचायत को नहीं है जिससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है ज्ञातव्य है कि विगत वर्ष 2022 के अक्टूबर में अचानक वर्षा होने एवं पचरीपानी में उल्टी दस्त की शिकायतों पर मरीजों को जिला चिकित्सालय जाने तक के लिए एंबुलेंस जैसा वाहन बमुश्किल पहुंच पाता रहा है मार्ग ना होने के कारण ग्रामीण जन अपने पीड़ित मरीजों को साइकल,पैदल व अन्य संसाधनों से एंबुलेंस तक या अस्पताल तक लेकर आते रहे हैं मुख्य मार्ग लखनपुर से अगरियानार होकर पचरीपानी तक मार्ग निर्माण एवं मध्य में पचरी नाला एवं एक अन्य नाले पर पुलिया निर्माण की मांग को लेकर एक बार फिर ग्रामीणों ने पत्र लिखा है इसके साथ ही जिला मुख्यालय के वन्यजीव संरक्षक एवं सामाजिक कार्यकर्ता शशिधर अग्रवाल ने जिले के मंत्री श्री बिसाहूलाल सिंह,जिला पंचायत अध्यक्ष,कलेक्टर एवं सीईओ जिला पंचायत अनूपपुर को पत्र लिखकर इस मार्ग के सर्वेक्षण कराते जाने,वन विभाग से अनुमति लेकर मार्ग निर्माण कराए जाने की मांग रखी है।

रेलवे की तानाशाही 4 माह से बंद है पुराना पैदल पुल 3-4 प्लेटफार्म में जाने के लिए यात्रियों को हो परेशानी


अनूपपुर 

भारतीय रेलवे की मनमानी से रेलयात्री पूरी तरह से परेशान हो चुके हैं।इनको संचालन करने वालों के अड़ियल रवैया के चलते लोगों को सुविधाएं मिलना अब दूर की बात हो गई। गुड्स ट्रेन के आगे यात्री ट्रेनों की बिलासपुर जोन, बिलासपुर रेल मंडल के अंतर्गत कोई वैल्यू ही नहीं रह गई। रेलवे का एकमात्र उद्देश्य गुट्स ट्रेनों से आय अर्जित करना रह गया है।अच्छा होता कि बिलासपुर जोन के अंतर्गत बिलासपुर रेल मंडल के सभी स्टेशनों पर ताले लगा दिए जाए यात्री ट्रेनों को पूर्ण रूप से बंद कर दिया जाए तो यात्री स्टेशन एवं ट्रेनों को अपने दिलो दिमाग से निकाल दे।

अनूपपुर जंक्शन का रेलवे स्टेशन है यहां पर चिरमिरी, अंबिकापुर सीआईसी रेल सेक्शन से हजारों यात्रियों का आवागमन होता है।अनूपपुर जंक्शन स्टेशन का पुराना पैदल पुल केवल जरा सी टूट-फूट के चलते रेलवे ने पूरी तरह से बंद कर दिया।यहां तक की बिलासपुर रेल मंडल के डीआरएम से जब उनके अनूपपुर दौरे के समय अनूपपुर नगर पालिका अध्यक्ष एवं रेल संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमंडल मिला एवं यात्रियों की समस्याओं को पैदल पुल के बंद होने से अवगत कराया एवं स्पाट निरीक्षण का अनुरोध किया तो उन्होंने स्पाट निरीक्षण को एक सिरे से खारिज कर दिया और कह दिया किया कि यह पुल बंद कर दिया गया है।अब चालू नहीं होगा।जबकि वास्तविकता यह है की पुल का सुधार करा कर यात्री हित में पुल को चालू किया जा सकता है।लेकिन डीआरएम ने स्पष्ट इंकार कर दिया।जबकि प्लेटफार्म नंबर 3-4 तक पूर्व में नया पैदल पुल दक्षिण दिशा की ओर बनाया जा चुका है।उसी पुल का विस्तार करते हुए नया भी बनाया जा सकता था।लेकिन रेलवे ने पूरी तरह से दोनों तरफ से पैदल पुल को हमेशा के लिए बंद कर दिया एवं एक बोर्ड लगा दिया जिसमें लिखा है

असुविधा के लिए खेद है प्लेटफार्म नं.03/04 पर जाने हेतु कटनी छोर मे बने पैदल पुल का उपयोग करें। इतना लिखकर रेलवे ने अपने कार्यों की इतिश्री कर ली।जब रेल मदद ऐप से शिकायत की गई तो शिकायत को बंद कराने के पूर्व यह आश्वस्त किया गया की 1 माह के अंदर पुल का निर्माण प्रारंभ करा दिया जाएगा लेकिन आज दिनांक तक पुल पर किसी तरह का कार्य प्रारंभ नहीं हुआ। पुनः रेल मदद ऐप से शिकायत की गई शिकायत के 3 दिन बाद भी रेलवे की ओर से रेल मदद ऐप में किसी तरह का समाधान या जवाब नहीं दिया गया।रेल मदद ऐप को लेकर भी बिलासपुर रेलवे जोन एवं रेल मंडल अब प्रश्न वाचक चिन्ह लगाने को मजबूर कर रहा है।आज देखा जा सकता है कि रेलवे ने जो कटनी छोर पर नया पुल बना कर छोड़ा है वह पुराने पुल से काफी दूर है और लोगों के आवागमन करते करते कई बार ट्रेनें छूट जाती हैं।बाहर से आने वाले यात्री जिन्हें पुल बंद होने की जानकारी नहीं है उन्हें आवागमन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है कई चक्कर इधर से उधर काटने पड़ते हैं।लेकिन रेलवे के कान में जूं तक नहीं रेंगती। रेलवे अपनी मनमानी के आगे यात्रियों की सुविधाओं पर तनिक भी ध्यान नहीं दे रही।यात्री पूरी तरह से रेलवे की कार्यप्रणाली से त्रस्त हो चुका है।भारतीय रेलवे का नाम अब लोगों की जुबान पर पहले जैसा नहीं रहा।आज भी उड़ीसा में मिनिमम टिकट दर 10 रुपए में मेमो ट्रेन की टिकट उपलब्ध है लेकिन उसके बाद भी बिलासपुर जोन एवं बिलासपुर रेल मंडल के अंतर्गत मिनिमम टिकट दर 30 रुपए है चाहे मेमू में यात्रा करें या एक्सप्रेस में यात्रा करें टिकट दर समान है।लेकिन इतना बड़ा खुलासा होने के बाद भी रेलवे के केंद्र में प्रतिनिधित्व करने वाले सांसदों ने कभी लोकसभा में सवाल नहीं उठाया की टिकट दर में भिन्नता क्यों है।कुल मिलाकर रेलवे यात्रियों का पूरी तरह से शोषण कर रहा है संघर्ष करने वालों पर एफ आई आर करा कर संघर्ष करने वालों को सजा दे रहा है।यहां तक रेलवे का कार्य सीमित रह गया है। कोई बोलने वाला नहीं,कोई सुनने वाला नहीं।अगर यही हाल रहा तो लोकसभा चुनाव 2024 में संघर्षशील प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के कार्यकाल पर रेलवे प्रश्नचिन्ह छोड़ देगा...? आज तक रेलवे करोना जाने के बाद भी नियमित ट्रेनों को प्रारंभ नहीं किया।स्पेशल बनाकर ट्रेनों को चलाया जा रहा है।यात्रियों को लूटा जा रहा है।कई स्टॉपेज आज भी बंद पड़े हैं छोटे-छोटे स्टेशनों के लिए ट्रेन अब सपना बनकर रह गई।

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