कलेक्टर ने आदेश जारी कर समस्त जिला अधिकारियों की छुट्टी की रद्द, कारण जानने पढ़े पूरी खबर


अनूपपुर

कलेक्टर अनूपपुर सोनिया मीणा एक आदेश जारी करते हुए समस्त जिला अधिकारियों की छुट्टी रद्द की, 26 जनवरी गणतंत्र दिवस कार्यक्रम, 27 जनवरी से 29 जनवरी तीन दिवसीय नर्मदा जयंती कार्यक्रम अनूपपुर जिले में नर्मदा जयंती पर मुख्यमंत्री का कार्यक्रम तय है व 31 जनवरी व 1 फरवरी को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में कलेक्टर कमिश्नर कांफ्रेंस तय है जिस कारण से सभी जिला अधिकारियों की छुट्टी रद्द कर दी है। अनूपपुर कलेक्टर ने यह आदेश जारी किया है यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। आदेश में समस्त जिला अधिकारियों को निर्देशित किया गया है, समस्त कार्यक्रम अवधि में अवकाश में नहीं रहेंगे और न मुख्यालय से बाहर जायेंगे।

 ABVP विश्वविद्यालय इकाई ने सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर चलाया स्वच्छता अभियान


अनूपपुर/अमरकंटक

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पराक्रम दिवस के उपलक्ष पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय इकाई द्वारा विद्यालय परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया गया जिसमें विश्वविद्यालय परिसर को स्वच्छ रखने का छात्र छात्राओं को संदेश दिया गया इस अभियान के माध्यम से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने विश्वविद्यालय परिसर को स्वच्छ रखने का संदेश दिया एवं भारत मां की जयकारों से सुभाष चंद्र बोस जी को याद कर उनकी जयंती मनाई,इस कार्यक्रम में ऋतुराज पटेल, रिद्धि शर्मा, रवि त्रिपाठी, स्नेहा पांडे,शताक्षी पांडे, अर्पित तिवारी, दिनकर कुमार, गौरव राठौर, कुंदन एवं अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

हड़ताल जारी है, नही जाग रहा शासन, जल सत्याग्रह आंदोलन की तैयारी


इन्ट्रो- विद्युत विभाग के संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों का विभागीय संविलियन को लेकर की जा रही हड़ताल चौथे दिन भी जारी रही। दूसरी ओर जिले भर मे बिजली संकट गहराते जा रहा है। आंदोलन को मंगलवार से यूनाईटेड फोरम फॉर पॉवर इम्पलाइज एण्ड इंजीनियर्स का समर्थन मिलने के बाद स्थिति और ज्यादा बदतर होती जा रही है वही विद्युत कार्यालयों मे उपभोक्ताओं के शिकायतों का अंबार लगते जा रहा है, लेकिन निदान नही हो पा रहा है।

अनूपपुर

विभिन्न मांगो को लेकर प्रदेश भर मे चल रहे विद्युतकर्मियों की हड़ताल लगातार चलने से जिले भर मे सुचारू विद्युत व्यवस्था ठप पड़ते जा रही है दूसरी ओर जिले भर के विद्युत उपभोक्ताआें का रोष भी विभाग के प्रति बढ़ते जा रहा है। यदि हड़ताल जल्दी समाप्त नही होती है तो जिले भर मे स्थिति अत्यंत भयावह हो सकती है जिसका शायद किसी को अंदाजा भी न हो। दूसरी ओर मांगो के निराकरण नही होने पर कर्मचारी जिला मुख्यालय स्थित मड़फा तालाब के जल सत्याग्रह आंदोलन भी 26 जनवरी के दिन करेंगे।

*शिकायतों का लग रहा अंबार*

चार दिनों से चल रहे हड़ताल के बाद पैदा हुई विकराल स्थिति की पड़ताल करने जब वितरण केन्द्र कार्यालय पहुंचकर जायजा लिया गया तो पता चला कि हड़ताल के चार दिनों के बीच जिले भर मे शिकायतों का जिस गति से कार्यालय मे अंबार लगा है, लेकिन उस गति से उसका निराकरण नही हो पा रहा है। पड़ताल मे पाया गया कि 21 जनवरी को वितरण केन्द्र अनूपपुर शहर मे 7 शिकायतें मिली तो ग्रामीण 9 शिकायतें दर्ज हुई वही 22 को शहर कार्यालय मे 6 तो ग्रामीण मे 5, 23 को शहर मे 7 तो ग्रामीण मे 6 शिकायतें रजिस्टर दर्ज पाई गई। इसी तरह 24 जनवरी को अनूपपुर शहर मे 12 शिकायतें दर्ज हुई तो ग्रामीण मे 6 शिकायतें रजिस्टर मे नोट पाई गई। इसके अलावा कुछ ऐसी शिकायतें भी हैं जो रजिस्टर मे नोट नही हुई है। इसी तरह वितरण केन्द्र राजेन्द्रग्राम, बेनीबारी, अमरकंटक, बिजुरी, कोतमा व चचाई मे भी शिकायतों मे लगातार वृद्धि देखी गई।

*लाइन फाल्ट का भी बढ़ रहा ग्राफ*

हड़ताल के दौरान जिले भर मे 33 व 11 केव्ही समेत एलटी मे लाइन फाल्ट की समस्याएं भी पहले की अपेक्षा ज्यादा देखी गई लेकिन उनका निदान समय पर नही हो पा रहा है। 20 को जैतहरी नगर परिषद के चुनाव के बाद स्ट्रांग रूम जैतहरी मे रखी गई ईव्हीएम मशीनों के कक्ष मे भी अंधेरा छाया रहा वही 23 जनवरी को परिणाम घोषणा के दिन भी विद्युत व्यवस्था सुचारू नही थी। इसी तरह जिले भर के कई गांवों मे कई-कई घंटो बिजली बाधित हो रही है, लेकिन उसका निराकरण नही हो पा रहा है। 23 जनवरी से फाल्ट जमुडी फीडर का अभी तक सुधार नही हो पाया है। 

*नियमित कर्मचारी 12-12 घंटे ड्यूटी को मजबूर*

संविदा व आउटसोर्स कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने के बाद विभाग ने नियमित कर्मचारियों की विद्युत उपकेन्द्रो मे ड्यूटी लगाई गई है जो ड्यूटी स्थल पहुंचने के बाद 12-12 घंटे ड्यूटी कर रहे हैं यहां तक कि शांति नगर सब स्टेशन मे एक ही कर्मचारी की 24 घंटे तक की ड्यूटी कर्मचारियों से ले रहे हैं। इस दौरान वह व्यक्ति सुरक्षा एवं लाइनों के फीडरों के देख रेख के लिए सो भी नही सकता और यदि सोता है तो सुरक्षा कौन करेगा। ऐसे मे समझा जा सकता है कि नियमित कर्मचारी किस तरह से मानसिक और शारीरिक रूप से अक्षम होते जा रहे हैं। इस दौरान किसी फीडर मे विद्युत व्यवधान पैदा होने अथवा आधी नींद मे कोई दुर्घटना होती है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।

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