लापरवाही करने पर पंचायत के सचिव पर एडीएम ने लगाया 1 हजार जुर्माना


अनूपपुर 

अपर कलेक्टर श्री सरोधन सिंह ने म.प्र. लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम के तहत समय-सीमा में आवेदकों को सेवा प्रदाय ना करने पर जनपद पंचायत जैतहरी अंतर्गत ग्राम पंचायत खोलाडी के सचिव श्री संतोष कुमार जोगी पर 1000 रुपये की शास्ति अधिरोपित की है।      

उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत खोलाडी के सचिव ने जन्म का अप्राप्यता प्रमाण पत्र की सेवा समय-सीमा में आवेदकों को प्रदाय नहीं की थी।

जेल में बन्द अपराधी का नाम रोजगार गारंटी में 5 दिन की मस्टर रोल में हाजिरी दर्ज

*ये कैसा जेल रात में रहता हैं जेल में दिन मे करता हैं काम खाते में आती हैं मजदूरी भुगतान*


शहड़ोल/सोहागपुर

जनपद पंचायत सोहागपुर के ग्राम पंचायत धनोरा में एक ऐसा भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है जिसमें भ्रष्टाचार और लापरवाही की सारी हदें पार कर दी गई है। ग्राम पंचायत धनोरा के रोजगार सहायक, सचिव, सरपंच, मेट, उपयंत्री, सहायक यंत्री, सहायक कार्यक्रम अधिकारी, जनपद सीईओ, यह सभी ग्राम पंचायत से लेकर जनपद पंचायत तक महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी अधिनियम को नियम बद्ध तरीके से चलाने एवं निगरानी रखने के लिए जिम्मेदार है।


 

ग्राम पंचायत धनोरा मैं रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत एक ऐसे व्यक्ति को 5 दिवस की मजदूरी दी जो कि बुढार जेल में एक बंदी के रूप में कैद है जानकारी के अनुसार 23 अप्रैल को ग्राम पंचायत धनोरा मैं कंटोवर टंच निर्माण तुर्री दलान चल रहा था। इस निर्माण कार्य में ग्राम छिरहनी निवासी मन्नू सिंह पिता क्षिलहा सिंह गौड़ की 23 अप्रैल से 27 अप्रैल तक 5 दिन की हाजिरी मस्टर रोल में दर्ज किया गया। 


जी. आर. एस, सचिव, सरपंच ने फीडिंग कराई उपयंत्री ने मौके पर मूल्यांकन किया, सहायक कार्यक्रम अधिकारी ने वेरिफिकेशन किया और अंत में सीईओ जनपद पंचायत की आई डी से मजदूरी भुगतान कर दिया। मजदूरी के एवज में 160 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से 800 रुपये का मजदूरी भुगतान मन्नू सिंह के बैंक खाते मैं किया गया। जबकि खैरहा थाना द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मन्नू सिंह के विरुद्ध अपराध क्रमांक 98/2021 धारा 302, 201, 34 के तहत 23 अप्रैल को दोपहर के 1:00 बजे पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर बुढार उप जेल भेजे जाने की जानकारी दी गई थी और वर्तमान में भी मन्नू सिंह बूढ़ार जेल में ही एक बंदी के रूप में कैद है। इस पूरे मामले को देखकर ऐसा लगता है की मनरेगा योजना को देखने के लिए रखे गए कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक आंख में भ्रष्टाचार की काली पट्टी बांधे देख रहे हैं और शासन की महत्वाकांक्षी योजना जिसे विश्व की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना भी कहा जाता है को केवल अपनी जेब भरने का जरिया बना चुके है।

फ्लाईओवर निर्माण भूमि अधिग्रहण मुआवजा मामले में हो सकता हैं बड़ा खुलासा ?

*मुआवजा ले चुके 10 संदिग्ध भू स्वामियों ने कलेक्टर ने भेजा नोटिस*


अनूपपुर

जिला मुख्यालय अनूपपुर स्थित रेलवे फाटक पर प्रस्तावित फ्लाईओवर निर्माण कई वर्षों से लंबित पड़ा है तीन बार शिलान्यास होने के बाद भी आज तक कार्य शुरू नही हो पाया है किसी न किसी विवाद से कार्य रुक जाता हैं फ्लाई ओवर निर्माण में भूमि स्वामियों को प्रशासन द्वारा मुआवजा वितरण कर दिया गया है उसके बाद भी कुछ भूमि स्वामी कम मुआवजा मिलना बताकर निर्माण कार्य मे अड़ंगा लगाया जा रहा था जिसके बाद 31 अक्टूबर को अपर जिला सत्र न्यायाधीश खसरा क्रमांक 630 एवं 631 की जांच के लिए फ्लाई ओवर निर्माण स्थल पहुँच कर मुआयना किया तो पता चला कि दोनों भूमि के कई बटांक हो चुके हैं और इसका मुआवजा भी संबंधितों को दिया जा चुका है। अब इस मामले में नया मोड़ सामने आते दिख रहा हैं  भूमि स्वामी ने कलेक्टर अनूपपुर के यहाँ शिकायत की जिसके पूरे मामले की जांच एसडीएम से कराई गई जांच में में 10 भूमि स्वामियों की भूमि संदिग्ध पाते हुए जांच प्रतिवेदन कलेक्टर को सौप दिए जिस पर कलेक्टर सोनिया मीणा ने 10 भू-स्वामियों के खिलाफ नोटिस जारी करते हुए 13 दिसम्बर को जवाब मांगा था। 


13 दिसंबर को सभी भू-स्वामी उपस्थित होकर 28 दिसंबर तक जबाब देने का समय मांगा हैं। जानकारी अनुसार कलेक्टर न्यायालय की ओर नोटिस में 10 भू-स्वामियों में शंकर प्रसाद शर्मा, पिता राधिका प्रसाद शर्मा, श्यामलाल रूपचंद पिता कन्हैयालाल जगवानी, विमलेश कुमार सोनी पिता बाला प्रसाद सोनी, गणेश प्रसाद गुप्ता, गिरीश चंद्र पिता भाईलाल पटेल, चंद्रकांत पिता भाईलाल पटेल, दिनेश कुमार पिता भाईलाल पटेल, मेघमाला पिता भाईलाल पटेल सहित एक अन्य सभी निवासी अनूपपुर को जारी कर कारण बताओ नोटिस में पूछा गया है कि अनुविभागीय अधिकारी(राजस्व) अनूपपुर द्वारा ग्राम अनूपपुर की भूमि खसरा नम्बर 631 रकवा 0.518 हेक्टेयर की जांच की गई है। जिसमें प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है। अनुविभागीय अधिकारी से प्राप्त जांच प्रतिवेदन अनुसार खसरा क्रमांक 631/3 के उपखंड के आप वर्तमान में राजस्व अभिलेख में भूस्वामी हैं। इस भूमि के अंशभाग का आरओबी के लिए अधिग्रहण किया गया है जिसका आपके द्वारा मुआवजा भी प्राप्त किए गए हैं। प्राप्त प्रतिवेदन व दस्तावेजों के आधार पर प्रथम दृष्टया आपका स्वामित्व संदिग्ध प्रतीत होता है। आप ग्राम अनूपपुर की भूमि खसरा क्रमांक 631/3 के उपखंड के स्वामित्व/ अंतरण के सम्बंध में कारण स्पष्ट करें कि ये भूमि आपको कब और किस आधार पर प्राप्त हुई है। जवाब दस्तावेजों सहित न्यायालय में 13 दिसम्बर की दोपहर उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत करें। क्यों न आपके सम्बंधित वर्तमान स्वामित्व की भूमि पूर्व राजस्व अभिलेख में दर्ज कराया जाए। अनुपस्थिति की स्थिति में आपके विरूद्ध नियमानुसार एकपक्षीय कार्रवाई की जाएगी। भू-स्वामियों ने 28 दिसम्बर तक मांगी मोहलत बताया जाता है कि इस मामले में अब भू-स्वामियों ने 28 दिसम्बर तक अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा है। वहीं नोटिस के बाद सम्बंधित भू-स्वामियों के साथ अन्य मुआवजा प्राप्त प्रभावित भू स्वामियों में हडकंप मची हुई है। पूर्व में ही मुआवजा वितरण के दौरान और अधिग्रहण के दौरान इस मामले में खबर प्रकाशित कर प्रशासन को सम्बंधित भूमि को राजस्व भूमि सहित इंदिरा तिराहा से लेकर रेलवे फाटक तक दान की लगभग 7.53 हेक्टेयर भूमि दान की भूमि बताया गया था। लेकिन वास्तविक राजस्व अभिलेख दर्ज नहीं होने के कारण प्रशासन ने इस मामले में गंभीरता नहीं दिखाई थी। परिजनों ने दर्ज कराई थी शिकायत अनूपपुर पुरानी बस्ती निवासी ओमकार मिश्रा पिता मोहन राम मिश्रा ने कलेक्टर सहित प्रमुख सचिव को मुआवजा वितरण के तीन साल बाद अब शपथ पत्र देते हुए शिकायत दर्ज कराई है।

*इनका कहना हैं*

*पत्रकारों के साथ प्रेस वार्ता पर पत्रकारों द्वारा पूछे गए सवाल पर जबाब मिला कि शिकायत मिली थी जिसकी जांच में प्रथम दृष्ट्या 10 भू-स्वामियों की भूमि संदिग्धं प्रतीत होती हैं। भू-स्वामियों को नोटिस जारी करके जबाब मांगा गया है

*सोनिया मीणा कलेक्टर अनूपपुर*

इंदिरा तिराहे से लेकर रेलवे फाटक तक की भूमि खसरा नम्बर 631 एवं 630 के रकवा 1.28 एकड़ व 1.83 एकड़ के भूस्वामी वर्ष 1958-59 तक मेरे दादा प्रसाद राम मिश्रा के नाम पर दर्ज थी। 80 के दशक में मेरे पिता द्वारा खसरा नंबर 631 की 0.57 एकड़ भूमि हीरालाल गुप्ता को विक्रय की गई थी। शेष भूमि किसी को भी नहीं बेची गई थी। केवल जिला अस्पताल के लिए भर भूमि दान दी गयी थी जिसमे अस्पताल और सड़क निर्माण था। बाकी जमीन बाकी लोगो के नाम स्थानांतरित हो गयी इस बात के कोई भी दस्तावेज नही है। जिसके संबंध में पूछे जाने पर तहसील से जानकारी मिली थी कि इस भूमि को शासन के पक्ष में दर्ज कर लिया गया है। 

*ओंकार मिश्रा शिकायत कर्ता अनूपपुर*

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