एक नम्बर की दो शिफ्ट डिजायर कार पुलिस ने जप्त मामले की कर रही जांच


अनूपपुर/कोतमा

मामला कोतमा थाना क्षेत्र का है जहां दिनांक 1 दिसंबर 2021 को एक ही नंबर mp 17 cc 0983 की नम्बर प्लेट लगी दूसरी कार पकड़ाई है। जिसे कोतमा पुलिस ने थाने में खड़ा कर ड्राइवर को थाने में बैठकर मामले की जांच कर रही है। कोतमा वार्ड नम्बर 6 निवासी रोहित नामदेव जो पेशे से ड्राइवर हैं व टूर एंड ट्रांसपोर्ट का काम करते हैं ने कोतमा थाने में लिखित में शिकायत दर्ज करवाये की मेरे पास एक स्विफ्ट डिजायर वाहन क्रमांक mp 17 cc 0983 है। जो मेरे जीजा राजेन्द्र कृष्ण नामदेव पिता विश्वनाथ प्रसाद नामदेव वार्ड नम्बर 29 पांड्यन टोला तहसील हुजूर जिला रीवा के नाम रजिस्टर्ड है। मुझे मेरे भतीजे द्वारा जानकारी मिली कि मेरी गाड़ी का नम्बर किसी अन्य व्यक्ति द्वारा अन्य गाड़ी में लगाकर चलाया जा रहा है। जो कोतमा में किसी गैराज में काम करवा रही है। जिसका नम्बर भी mp 17 cc 0983 है। जो किसी और के द्वारा नम्बर प्लेट लगाकर आपराधिक कृत्य किया जा रहा है। जिसकी लिखित शिकायत रोहित नामदेव द्वारा कोतमा थाने में की गयी। शिकायत कर्ता रोहित नामदेव ने उक्त व्यक्ति के ऊपर उचित कार्यवाही की माँग करते हुए अपने वाहन की आर सी बुक व वाहन के दस्तावेज भी थाने में जमा किये है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार आशीष कुमार पांडे निवासी पौराधार, केशवाही, झिरिया निवासी राजा गुप्ता का ड्राइवर है जो केशवाही में ही निवासकर्ता है। जिसे राजा गुप्ता द्वारा वाहन स्विफ्ट डिजायर का ब्रेक शू बदलवाने कोतमा भेजा गया था। जो किसी वर्कशॉप में गाड़ी का काम करवा रहा था। जहां से फर्जी नम्बर प्लेट लगी गाड़ी की सूचना  पुलिस को दी गयी। जिसे कोतमा पुलिस द्वारा वाहन को मौके से उठाकर थाने लाया गया। बहरहाल गाड़ी में सेम नम्बर प्लेट लगा हुआ है जो रोहित नामदेव की गाड़ी में लगा है। सूत्रों की माने तो गाड़ी में अभी तक ऐसे कोई भी अवैध सामग्री या मादक पदार्थ मौजूद नही मिले हैं बहरहाल पुलिस को शंका है कि उक्त वाहन मादक पदार्थ की सप्लाई में शामिल हो सकती है। जिसकी जानकारी जुटाने पुलिस तीन दिन से प्रयासरत है। तीन दिन से पुलिस कर रही छानबीन कहीं अवैध कार्यो में तो नही हो रहा था वाहन का उपयोग वही थाना प्रभारी अजय बैगा की नवीन पदस्थापना के साथ अपराधों पर अंकुश लगाने की कार्यवाही में पुलिस मुस्तैद नजर आ रही है। थाना प्रभारी अजय बैगा को संदेह है कि उक्त वाहन कहीं मादक पदार्थ की सप्लाई में तो लिप्त नही है जिसकी तस्दीक हेतु पुलिस लगातार पतासाजी कर छापेमारी कर  रही है। उक्त मामले में जल्द ही पुलिस छानबीन कर मामले का खुलासा करेगी। गाड़ी चोरी की है या अवैध कार्यो में शामिल है। यह अभी खुलासा नही हुआ है।

पति ने पत्नी की गला दबाकर की हत्या, कारण अज्ञात, जांच में जुटी पुलिस


अनूपपुर/अनूपपुर

जिले के पुष्पराजगढ़ एवं राजेंद्रग्राम थाना क्षेत्र अंतर्गत एक निर्दई पति द्वारा अपने पत्नी की गला दबाकर हत्या कर देने का मामला सामने आया है। आरोपी पति अपनी पत्नी की हत्या करने के पश्चात मौके से फरार बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक मृतिका का नाम गुड्डी बाई उम्र 30 वर्ष निवासी ग्राम कोहका थाना क्षेत्र राजेंद्र ग्राम जिला अनूपपुर की मौके पे की मौत हो गई है और बताया जा रहा है कि आरोपी पति फगनू सिंह उम्र 35 वर्ष अपने ससुराल ग्राम कोहका में ही रहता था। उक्त बात की जानकारी गांव के जब पड़ोसियों को मिली तो उन्होंने इस बात की सूचना थाना राजेंद्र ग्राम पुलिस को दी गई जिस पर राजेंद्र ग्राम पुलिस मौके से पहुंचकर शव को कब्जे में लेकर लोगों से पूछताछ करते हुए मौका पंचनामा तैयार कर आरोपी को तलाश करते हुए जांच में जुटी हुई है समाचार लिखे जाने तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है कि आखिर पति पत्नी के बीच किस बात को लेकर विवाद हुआ और हत्या का कारण क्या हैं।

पुलिस आयुक्त व्यवस्था अलोकतांत्रिक, पुलिस के निरकुंश होने की आशंका- भाकपा


भोपाल

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने भोपाल और इंदौर में पुलिस आयुक्त व्यवस्था लागू करने को अलोकतांत्रिक बताते हुए इसे वापस लेने की मांग मध्य प्रदेश सरकार से की है ।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मध्य प्रदेश राज्य परिषद के राज्य सचिव कॉमरेड अरविंद श्रीवास्तव और राज्य सचिव मंडल सदस्य कॉमरेड शैलेन्द्र शैली ने यहां जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि 

भोपाल और इंदौर में पुलिस आयुक्त व्यवस्था लागू होने  से पुलिस के निरंकुश होने की आशंका है ।सरकार के निर्णयों से असहमति रखने और जन विरोधी नीतियों का प्रतिरोध करने वाले राजनीतिक दलों ,जन संगठनों ,बुद्धिजीवियों ,वंचित समूहों पर पुलिस का अत्याचार बढ़ेगा ।जनता के लोकतांत्रिक अधिकार और अभिव्यक्ति की आजादी पर भी संकट पहले से कहीं अधिक बढ़ जाएगा । एक लोकतांत्रिक देश में पुलिस आयुक्त व्यवस्था अनुचित और अनैतिक है । पुलिस को दांडिक अधिकार मिल जायेंगे जो अभी कार्य पालन और न्यायिक दंडाधिकारियों के पास हैं ।पीड़ित जनता न्यायिक सुनवाई के अधिकार से वंचित हो जाएगी। आंदोलन ,धरना ,प्रदर्शन के लिए पुलिस की अनुमति लेना पड़ेगी। भोपाल और इंदौर जैसे महा नगरों में जनता की आवाज़ को दबाने के लिए ही मध्य  प्रदेश सरकार ने पुलिस आयुक्त व्यवस्था लागू की है। इसलिए जन हित में इसे वापस लेना चाहिए ।


शैलेन्द्र शैली 

राज्य सचिव मंडल सदस्य 

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी 

मध्य प्रदेश राज्य परिषद 

भोपाल 

मोबाइल 9425023669

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