7 दिवस में कार्यवाही न होने पर ग्रामीणो ने दी परिवहन रोकने की चेतावनी

*रेत खदान संचालक की मनमानी की सरपंच व ग्रामीणों ने की शिकायत*


अनूपपुर/कोतमा

कोतमा जनपद अंतर्गत ग्राम पंचायत बैहाटोला, कटकोना  के सरपंच एवं ग्रामीणों के द्वारा सोमवार को कलेक्टर ,खनिज विभाग एवं जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी को रेत ठेकेदार केजी डेवलपर्स द्वारा रेत उत्खनन एवं परिवहन में की जा रही मनमानी के विरोध में शिकायत करते हुए कार्यवाही की मांग की गई ।

शिकायत में बैहाटोला सरपंच रतन सिंह के द्वारा उल्लेखित कर  बताया गया कि रेत ठेकेदार केजी डेवलपर्स ग्राम पंचायत अंतर्गत कटकोना घाट पर रेत उत्खनन का कार्य कर रही है । जिसके द्वारा घनी आबादी के बीच से किए जा रहे रेत परिवहन को बंद कराया जाए । ग्राम पंचायत के बाहरी हिस्से में अलग से सड़क निर्माण कराते हुए परिवहन कराया जाए । जब तक अलग से सड़क निर्माण नहीं हो जाता तब तक पर्यावरण नीति के अंतर्गत रेप परिवहन मार्ग पर पानी का छिड़काव कराया जाए और शाम 6:00 बजे के बाद परिवहन बंद किया जाए । जिस मार्ग से वर्तमान में रेत का परिवहन किया जा रहा है उस मार्ग पर माध्यमिक शाला, आंगनबाड़ी भवन, उचित मूल्य दुकान, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ,पशु केंद्र व हाई स्कूल स्थित है । जिससे इस मार्ग पर रेत परिवहन किए जाने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है इसके साथ ही धूल डस्ट से भी लोग परेशान होते हैं। वही ग्राम पंचायत कटकोना के सरपंच व ग्रामीणों के द्वारा सौपे गए ज्ञापन में बताया गया कि केजी डेवलपर्स रात दिन बसाहट एरिया से रेत से भरे वाहनों का परिवहन कराते हैं जिससे हम ग्रामीणों को धूल डस्ट सहित वाहनों की आवाजों से परेशानी होती है, साथ ही ग्रामीणों के साथ दुर्घटना की आशंका भी बनी होती , रेत ठेकेदार उत्खनन स्थल पर ना तो मूल्य संबंधित बोर्ड लगाए हैं ना ही रेत खरीदने के दौरान बिल उपलब्ध कराए जाते हैं जिससे  रेत के मूल्य का सही पता नहीं चल पाता, रेत खदान पर मूल्य  का निर्धारण सहित बोर्ड लगाया जाए वह बिल उपलब्ध कराने के लिए तत्काल व्यवस्था कराने के लिए कहा जाये, रेत ठेकेदार बसाहट एरिया को छोड़ गांव के बाहर से अपनी सड़क बना ले ग्राम पंचायत के सरपंच व  ग्रामीणों की मदद से गांव के बाहर से सड़क बनाई जा सकती है सड़क बन जाने से ग्रामीणों को धूल डस्ट वाहनों के गड़गड़ाहट की आवाज सहित दुर्घटना से मुक्ति मिल सकेगी, तय पर्यावरण के अनुमति अनुसार ठेकेदार को कटकोना स्थित खसरा नंबर 215 में लगभग 6000 पौधे रोपे जाने थे जिसमें नीम, पीपल ,बरगद, गुलमोहर, आमला आदि वृक्ष लगाए जाने थे पर ठेकेदार रेत उत्खनन में अपना ध्यान दे रहे हैं, वृक्ष लगवाए जाएं ! ग्राम पंचायतों की सड़कें कमजोर होती हैं और इन सड़कों से ओवरलोड रेत से भरे वाहन दिन-रात परिवहन कराए जाते हैं उस पर रोक लगाई जाए ! रेत ठेकेदार को कटकोना में चारागाह भूमि का विकास करना था लेकिन आज दिनांक तक ठेकेदार ने चारागाह भूमि की ओर देखा तक नहीं ! हरि  प्राथमिक विद्यालय में पेयजल सुविधा के लिए हैंडपंप की स्थापना और पानी पंप के साथ ओवर टैंक की व्यवस्था, प्राथमिक विद्यालय हरि कक्षा का रखरखाव , साथ शौचालय का निर्माण सुनिश्चित करना था लेकिन इधर भी ठेकेदार ने कोई ध्यान नहीं दिया है ! ग्राम पंचायत कटकोना मे शासन के दर पर रेत की रॉयल्टी उपलब्ध कराए जाने की मांग की गई है,ग्राम पंचायत के समक्ष खदान की नापी कराई जाए और ग्राम पंचायत को उसकी सीमा से अवगत कराया जाए ! रेत नीति पर्यावरण की अनुमति शर्तो के अनुसार ट्रैक्टर ट्राली अलावा सभी बड़े वाहन नदी में प्रवेश हेतु वर्जित है इसके बात भी रेत ठेकेदार बड़े वाहनों को नदियों में उतार कर रेत की लोडिंग करा रहा है ! ऐसे ही कई नियमों की रेत ठेकेदार उल्लंघन लगातार कर रहा है जिस पर प्रशासन ध्यान देकर रोक लगाएं !

सौंपे गये ज्ञापन में सरपंच सहित ग्रामीणों ने कहा है कि 1 सप्ताह के अंदर हम ग्रामीणों को इन समस्याओं से निजात दिल आए नहीं तो ग्राम पंचायत से परिवहन बंद कर आंदोलन करेंगे ! ग्राम पंचायत कटकोना के सरपंच बैहाटोला सरपंच सहित लेखन चंद्रा, रामजी मिश्रा, श्याम मुरारी शर्मा, सुनील मिश्रा सहित दर्जनों ग्रामीण उपस्थित रहे !

मजबूरी की पाठशाला में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर छात्र-छात्राएं मर्यादा अभियान पर लगा ग्रहण..?

*मामा के राज में जर्जर विद्यालय, स्वच्छ भारत के नाम पर लग रहा पलीता*


अनूपपुर/पुष्पराजगढ़

यूं तो सरकार विकास के लाख दावे कर लें पर जमीनी हकीकत कुछ और ही बयाँ करती है विकास का राग अलापने वाली मौजूदा शिवराज सरकार के राज में भी शिक्षा का मंदिर का कहे जाने वाले स्कूलों की हालत दयनीय है हम बात कर रहे है अनुपपुर जिले के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में पुष्पराजगढ़ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बम्हनी के ग्राम तिवारी टोला की जहाँ एक ही कैम्पस के अंदर माध्यमिक, प्राथमिक और आंगनबाड़ी भवन संचालित है माध्यमिक और प्राथमिक और आंगनबाड़ी को मिला लगभग 100 बच्चे स्कूल में अध्यनरत है इन स्कूलों में पढ़ने वाले बालक बालिका आज भी जजर्र भवन में बैठने को मजबूर है स्कूल आंगनबाड़ी में शिक्षा ग्रहण करने वाले छात्र छात्राओं को शौचालय की सुविधा भी नसीब नही है जबकि हमारे देश के प्रधानमंत्री मोदी जी मर्यादा और स्वच्छता अभियान के लिए अनेको योजनाए चला रहे है और उनकी पृरी कोशिष है कि कोई भी व्यक्ति खुले में शौच न जाए। फिर भी जिम्मदारों की जिम्मेदारी पर सवाल उठ रहा है कि आखिर ये बच्चे स्कूल परिषर में बने शौचालय के बावजूद क्यू खुले में शौच जाने को मजबूर हैं ऐसी मजबूरी को "मजबूरी की पाठशाला" कहा जा सकता है।

*कभी भी धरासायी हो सकता हैं विद्यालय*

 कोरोना की दूसरी लहर के जब कोरोना संक्रमितों की संख्या में कमी हुई है और धीरे धीरे दैनिक दिनचर्या से जुड़े हर कार्यो को छूट देंना शुरू किया गया तो वही मध्यप्रदेश में स्कूल खोलने को लेकर शिवराज सरकार के फैसले के बाद प्रदेेेश भर में स्कूल खोले जा चुके है पहली से कक्षाओं का संचालन किया जा चुका है लेकिन स्कूल खुलने के बाद मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले पुष्पराजगढ़ में शिक्षा विभाग की कड़वी सच्चाई सामने आई है हालात ऐसे जो शर्मिंदगी से सर झुकाने को मजबर कर दें पुष्पराजगढ़ तहसील अंतर्गत जितनी भी शासकीय स्कूल आंगनबाड़ी संचालित की जा रही है 2 वर्ष के कोरोनाकाल के बाद इन भवनों की हालत भी जर्जर हो गई है ऐसे कई विविद्यालय है जहां शौचालय होने के बावजूद साफ सफाई के आभाव में बच्चे खुले में शौच जाने को मजबूर है मध्य प्रदेश सरकार सर्व शिक्षा अभियान के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है शिवराज सरकार के भांजे और भाजियों की स्थित काफी दयनीय और चिंता जनक है मामा शिवराज सिंह चौहान के भांजे भंजिया शौचालय होने के बावजूद खुले में शौच जाने को मजबूर है बरसात के दिनों मेंं कक्षा संचालित करना दूभर हो जाता है छतों सेे पानी रिसता रहता है स्कूल भवन की दीवारें जर्जर हालत में है यह हल्की बारिश मेंं ही धराशाई हो सकते हैं और बड़ा हादसा हो सकता है अब ऐसे जर्जर स्कूलों में बच्चे तो बच्चे शिक्षक भी खौफ खाने लगे हैं बच्चे जान जोखिम में डाल बैठने को मजबूर हैं।

*खुले में शौच जाने को मजबूर*

गौरतलब हो कि ग्राम पंचायत बम्हनी के तिवारी टोला स्कूल पुष्पराजगढ़ से महज 12 से 14 किमी दूर मेन रोड पर पड़ती है जहाँ से रोजाना अधिकारियों का आना जाना लगा रहता है फिर भी स्कूल की बदहाल स्थित आज तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारियों को दिखाई नही पड़ी जब हमारे संवाददाता ने इस स्कूल का जायजा लिया तो स्कूल में मौजूद बच्चो ने बताया कि हम लोग खुले में शौच जाते है और विद्यालय की शिक्षिका जमुना से जब इस मामले में बात किया गया तो यह कह दिया गया कि इस गाँव के ग्रामीण ही स्कूल में गंदगी करते है पर मैंने आज तक शिकायत नही की है और बजट के आभाव मे शौचालय की साफ सफाई नही हो पा रही है एक शौचालय साफ है जब जरूरत पड़ती है तब ताला खोल दिया जाता है हमारी टीम ने ग्रामीणों से स्कूल का हाल जाना तो ग्रामीणों ने सीधा विद्यालय प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है बहरहाल आरोप और प्रत्यारोप लगते ही रहते है देखना होगा कि शिक्षा विभाग के संज्ञान में मामला आने के बाद क्या कार्यवाही करता है या यूं ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भांजे और भाजियों को खुले में शौच जाने को मजबूर होना पड़ेगा वही आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से जब इस संबंध में बात किया गया तो कार्यकर्ता द्वारा बताया गया कि हमारे आंगनवाड़ी में शौचालय की सुविधा उपलब्ध नही है स्कूल के शौचालय से काम चला लेते थे पर वर्तमान में स्कूल के शौचालय की स्थिति सही नही होने से हमारे आंगनबाड़ी के बच्चे के बच्चे भी खुले में शौच जाने के मजबूर है।


पति की दीर्घायु के लिए पत्नियों ने रखा करवा चौथ ब्रत, पूजन विधि और मुहूर्त के लिए पढ़े खबर


आज है करवा चौथ ब्रत ,कैसे रखे ब्रत, पूजन विधि जाने, 

*ऐ चाँद करवा चौथ पर पर वंदना खरे की छोटी सी कविता*

ऐ चांँद तू जल्दी आना

जरा जल्दी आना आज

निराहार बैठी हूंँ आज

सुन जल्दी आना आज

कर सोलह श्रंगार

राह तेरी तक रही

 पैरों में लगा महावर 

हाथों में सजा मेहंदी 

लाल जोड़े में दूल्हन सी सजी 

ताक रही हूंँ आसमान में

जरा जल्दी आना आज 

चेहरे की चमक ढल ना जाए 

 चमकू मैं सितारों सी 

 दमकू मैं रोशनी की तरह

गुनगुनाऊं बहारों सी

थोड़ी बातें करनी है तुमसे

जरा झलक दिखाना आज 

ऐ चाँद जरा जल्दी आना आज...

(वन्दना खरे मुक्त चचाई जिला अनूपपुर म.प्र.)


*करवा चौथ  मुहूर्त, करवा चौथ व्रत कथा, व्रत विधि*

करवा चौथ का दिन और संकष्टी चतुर्थी, जो कि भगवान गणेश के लिए उपवास करने का दिन होता है, एक ही समय होते हैं। विवाहित महिलाएँ पति की दीर्घ आयु के लिए करवा चौथ का व्रत और इसकी रस्मों को पूरी निष्ठा से करती हैं। छान्दोग्य उपनिषद के अनुसार करवा चौथ के दिन व्रत रखने से सारे पाप नष्ट होते हैं और जीवन में किसी प्रकार का कष्ट नहीं होता है। इससे आयु में वृद्धि होती है और इस दिन गणेश तथा शिव-पार्वती और चंद्रमा की पूजा की जाती है।

विवाहित महिलाएँ भगवान शिव, माता पार्वती और कार्तिकेय के साथ-साथ भगवान गणेश की पूजा करती हैं और अपने व्रत को चन्द्रमा के दर्शन और उनको अर्घ अर्पण करने के बाद ही तोड़ती हैं। करवा चौथ का व्रत कठोर होता है और इसे अन्न और जल ग्रहण किये बिना ही सूर्योदय से रात में चन्द्रमा के दर्शन तक किया जाता है।

करवा चौथ के दिन को करक चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। करवा या करक मिट्टी के पात्र को कहते हैं जिससे चन्द्रमा को जल अर्पण, जो कि अर्घ कहलाता है, किया जाता है। पूजा के दौरान करवा बहुत महत्वपूर्ण होता है और इसे ब्राह्मण या किसी योग्य महिला को दान में भी दिया जाता है। करवा चौथ दक्षिण भारत की तुलना में उत्तरी भारत में ज्यादा प्रसिद्ध है। करवा चौथ के चार दिन बाद पुत्रों की दीर्घ आयु और समृद्धि के लिए अहोई अष्टमी व्रत किया जाता है।

*करवा चौथ कब होता है?*

करवा चौथ  का व्रत कार्तिक हिन्दू माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दौरान किया जाता है। अमांत पञ्चाङ्ग जिसका अनुसरण गुजरात, महाराष्ट्र, और दक्षिणी भारत में किया जाता है, के अनुसार करवा चौथ अश्विन माह में पड़ता है। हालाँकि यह केवल माह का नाम है जो इसे अलग-अलग करता है और सभी राज्यों में करवा चौथ एक ही दिन मनाया जाता है। करवा चौथ के दिन चौथ माता की पूजा अर्चना और व्रत वैसे तो पुरे ही भारत में रखा जाता है लेकिन मुख्य रूप से उत्तर भारतीय लोग वृहद स्तर पर करवा चौथ का व्रत रखते हैं और विधिविधान से पूजा करते हैं।

उत्तर भारत में विशेष कर राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश और पंजाब में भी बहुत ही हर्ष के साथ व्रत रखकर करवा चौथ की कहानी सुनी जाती है। इस पावन अवसर पर दिन में कहानी सुनी जाती है और रात्रि के समय चाँद को देखने के उपरान्त स्त्रियाँ अपने पति के हाथो से पानी पीकर / खाना ग्रहण करके व्रत खोलती हैं। करवा चौथ का यह व्रत पति की लम्बी आयु, स्वास्थ्य और सुखद वैवाहिक जीवन के उद्देश्य से किया जाता है।

करवा चौथ व्रत 12 वर्ष तक अथवा 16 वर्ष तक लगातार हर वर्ष किया जाता है। अवधि पूरी होने के पश्चात इस व्रत का उद्यापन (उपसंहार) किया जाता है। जो सुहागिन स्त्रियाँ आजीवन रखना चाहें वे जीवनभर इस व्रत को कर सकती हैं। इस व्रत के समान सौभाग्यदायक व्रत अन्य कोई दूसरा नहीं है। अतः सुहागिन स्त्रियाँ अपने सुहाग की रक्षार्थ इस व्रत का सतत पालन कर सकती हैं।


*करवा चौथ 2021 रविवार, 24*

करवा चौथ पूजा मुहूर्त 17:43 से 18:50

चंद्रोदय 20:07

चतुर्थी तिथि आरंभ 03:00 (24 अक्टूबर)

चतुर्थी तिथि समाप्त 05:40 (25अक्टूबर को)

*करवा चौथ व्रत कथा:*

बहुत समय पहले इन्द्रप्रस्थपुर के एक शहर में वेदशर्मा नाम का एक ब्राह्मण रहता था। वेदशर्मा का विवाह लीलावती से हुआ था जिससे उसके सात महान पुत्र और वीरावती नाम की एक गुणवान पुत्री थी। क्योंकि सात भाईयों की वह केवल एक अकेली बहन थी जिसके कारण वह अपने माता-पिता के साथ-साथ अपने भाईयों की भी लाड़ली थी।

जब वह विवाह के लायक हो गयी तब उसकी शादी एक उचित ब्राह्मण युवक से हुई। शादी के बाद वीरावती जब अपने माता-पिता के यहाँ थी तब उसने अपनी भाभियों के साथ पति की लम्बी आयु के लिए करवा चौथ का व्रत रखा। करवा चौथ के व्रत के दौरान वीरावती को भूख सहन नहीं हुई और कमजोरी के कारण वह मूर्छित होकर जमीन पर गिर गई।

सभी भाईयों से उनकी प्यारी बहन की दयनीय स्थिति सहन नहीं हो पा रही थी। वे जानते थे वीरावती जो कि एक पतिव्रता नारी है चन्द्रमा के दर्शन किये बिना भोजन ग्रहण नहीं करेगी चाहे उसके प्राण ही क्यों ना निकल जायें। सभी भाईयों ने मिलकर एक योजना बनाई जिससे उनकी बहन भोजन ग्रहण कर ले। उनमें से एक भाई कुछ दूर वट के वृक्ष पर हाथ में छलनी और दीपक लेकर चढ़ गया। जब वीरावती मूर्छित अवस्था से जागी तो उसके बाकी सभी भाईयों ने उससे कहा कि चन्द्रोदय हो गया है और उसे छत पर चन्द्रमा के दर्शन कराने ले आये।

वीरावती ने कुछ दूर वट के वृक्ष पर छलनी के पीछे दीपक को देख विश्वास कर लिया कि चन्द्रमा वृक्ष के पीछे निकल आया है। अपनी भूख से व्याकुल वीरावती ने शीघ्र ही दीपक को चन्द्रमा समझ अर्घ अर्पण कर अपने व्रत को तोड़ा। वीरावती ने जब भोजन करना प्रारम्भ किया तो उसे अशुभ संकेत मिलने लगे। पहले कौर में उसे बाल मिला, दुसरें में उसे छींक आई और तीसरे कौर में उसे अपने ससुराल वालों से निमंत्रण मिला। पहली बार अपने ससुराल पहुँचने के बाद उसने अपने पति के मृत शरीर को पाया।

अपने पति के मृत शरीर को देखकर वीरावती रोने लगी और करवा चौथ के व्रत के दौरान अपनी किसी भूल के लिए खुद को दोषी ठहराने लगी। वह विलाप करने लगी। उसका विलाप सुनकर देवी इन्द्राणी जो कि इन्द्र देवता की पत्नी है, वीरावती को सान्त्वना देने के लिए पहुँची।

वीरावती ने देवी इन्द्राणी से पूछा कि करवा चौथ के दिन ही उसके पति की मृत्यु क्यों हुई और अपने पति को जीवित करने की वह देवी इन्द्राणी से विनती करने लगी। वीरावती का दुःख देखकर देवी इन्द्राणी ने उससे कहा कि उसने चन्द्रमा को अर्घ अर्पण किये बिना ही व्रत को तोड़ा था जिसके कारण उसके पति की असामयिक मृत्यु हो गई। देवी इन्द्राणी ने वीरावती को करवा चौथ के व्रत के साथ-साथ पूरे साल में हर माह की चौथ को व्रत करने की सलाह दी और उसे आश्वासित किया कि ऐसा करने से उसका पति जीवित लौट आएगा।

इसके बाद वीरावती सभी धार्मिक कृत्यों और मासिक उपवास को पूरे विश्वास के साथ करती। अन्त में उन सभी व्रतों से मिले पुण्य के कारण वीरावती को उसका पति पुनः प्राप्त हो गया।

*करवा चौथ व्रत विधि :-*

नैवेद्य : आप शुद्ध घी में आटे को सेंककर उसमें शक्कर अथवा खांड मिलाकर मोदक (लड्डू) नैवेद्य के रूप में उपयोग में ले।

करवा : काली मिट्टी में शक्कर की चासनी मिलाकर उस मिट्टी से तैयार किए गए मिट्टी के करवे उपयोग किया जा सकता है। 

करवा चौथ पूजन के लिए मंत्र : ‘ॐ शिवायै नमः’ से पार्वती का, ‘ॐ नमः शिवाय’ से शिव का, ‘ॐ षण्मुखाय नमः’ से स्वामी कार्तिकेय का, ‘ॐ गणेशाय नमः’ से गणेश का तथा ‘ॐ सोमाय नमः’ से चन्द्रदेव का पूजन करें।

*करवा चौथ की थाली :* करवा चौथ की रात्रि के समय चाँद देखने के लिए आप पहले से ही थाली को सजाकर रख लेवे। थाली में आप निम्न सामग्री को रखें। 

•दीपक 

•करवा चौथ का कलश (ताम्बे का कलश इसके लिए श्रेष्ठ होता है )

•छलनी

•कलश को ढकने के लिए वस्त्र

•मिठाई या ड्राई फ्रूट

•चन्दन और धुप

•मोली और गुड/चूरमा

•व्रत के दिन प्रातः स्नानादि करने के पश्चात यह संकल्प बोलकर करवा चौथ व्रत का आरंभ करें- 

*मम सुखसौभाग्य पुत्रपौत्रादि सुस्थिर श्री प्राप्तये करक चतुर्थी व्रतमहं करिष्ये।*

पूरे दिन निर्जला रहें।

दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्रित करें। इसे वर कहते हैं। चित्रित करने की कला को करवा धरना कहा जाता है।

●आठ पूरियों की अठावरी बनाएं। हलुआ बनाएं। पक्के पकवान बनाएं।

पीली मिट्टी से गौरी बनाएं और उनकी गोद में गणेशजी बनाकर बिठाएं।

गौरी को लकड़ी के आसन पर बिठाएं। चौक बनाकर आसन को उस पर रखें। गौरी को चुनरी ओढ़ाएं। बिंदी आदि सुहाग सामग्री से गौरी का श्रृंगार करें।

●जल से भरा हुआ लोटा रखें।

वायना (भेंट) देने के लिए मिट्टी का टोंटीदार करवा लें। करवा में गेहूं और ढक्कन में शक्कर का बूरा भर दें।à उसके ऊपर दक्षिणा रखें।

●रोली से करवा पर स्वस्तिक बनाएं।

●गौरी-गणेश और चित्रित करवा की परंपरानुसार पूजा करें। पति की दीर्घायु की कामना करें।

*नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं *संतति शुभाम्‌। प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥*’

●करवा पर 13 बिंदी रखें और गेहूं या चावल के 13 दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा कहें या सुनें।

कथा सुनने के बाद करवा पर हाथ घुमाकर अपनी सासुजी के पैर छूकर आशीर्वाद लें और करवा उन्हें दे दें।

तेरह दाने गेहूं के और पानी का लोटा या टोंटीदार करवा अलग रख लें।

रात्रि में चन्द्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से उसे देखें और चन्द्रमा को अर्घ्य दें।

इसके बाद पति से आशीर्वाद लें। उन्हें भोजन कराएं और स्वयं भी भोजन कर लें।

पूजन के पश्चात आस-पड़ोस की महिलाओं को करवा चौथ की बधाई देकर पर्व को संपन्न करें।

●करवा चौथ में सरगी

पंजाब में करवा चौथ का त्यौहार सरगी के साथ आरम्भ होता है। यह करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले किया जाने वाला भोजन होता है। जो महिलाएँ इस दिन व्रत रखती हैं उनकी सास उनके लिए सरगी बनाती हैं। शाम को सभी महिलाएँ श्रृंगार करके एकत्रित होती हैं और फेरी की रस्म करती हैं।

●इस रस्म में महिलाएँ एक घेरा बनाकर बैठती हैं और पूजा की थाली एक दूसरे को देकर पूरे घेरे में घुमाती हैं। इस रस्म के दौरान एक बुज़ुर्ग महिला करवा चौथ की कथा गाती हैं। भारत के अन्य प्रदेश जैसे उत्तर प्रदेश और राजस्थान में गौर माता की पूजा की जाती है। गौर माता की पूजा के लिए प्रतिमा गाय के गोबर से बनाई जाती है।

•क्या अविवाहित करवा चौथ व्रत रख सकते हैं? 

करवा चौथ का व्रत शादीशुदा स्त्रियों के द्वारा ही रखा जाता है। इसके लिए आप अपने घर में बड़ी बुजुर्ग स्त्रियों की सलाह जरूर लेवे क्यों की कुछ अंचल में अच्छे वर के लिए कुंवारी लड़किया भी यह व्रत रखती हैं। 

•करवा चौथ व्रत में हम क्या खा सकते हैं? 

कुछ अंचल में अल्पाहार के लिए फल का उपयोग किया जाता है लेकिन इस व्रत को  निर्जला करना अधिक लाभदायी होता है। 

•क्या आप करवा चौथ पर पानी पी सकते हैं? 

नहीं, क्यों की यह निर्जला व्रत होता है इसलिए इस दिन ना तो कुछ खाया जाता है और नाही पानी हीग्रहण किया जाता है। 

•सरगी खाने का सही समय क्या है? 

वैसे तो इस व्रत को आप निर्जला करे तो उचित रहेगा, अन्यथा अपनी परम्पराओं के अनुसार सरगी का उपयोग करे जिसके लिए सूर्योदय से पूर्व ( प्रातः चार से पांच बाते ) तक का समय अनुकूल होता है।

•क्या हम करवा चौथ पर बाल धो सकते हैं?

नहीं, मान्यता नहीं है। 

•करवा चौथ पर किस भगवान की पूजा की जाती है?

•चौथ माता की पूजा के साथ आप माता पार्वती जी की पूजा करें और शिव, गणेश, और कार्तिकेय की भी पूजा अर्चना करे।



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