खबर के बाद प्रशासन का चला डंडा आनाधिकृत व्यक्ति के प्रवेश पर लगी रोक

*कर्मचारियों की लगी ड्यूटी वैक्सीन सेंटर में शिकायत मिलने पर होगी कड़ी कार्यवाही*


अनूपपुर/राजनगर

जिले के राजनगर वैक्सीन सेंटर में भाजपा का कब्जा और भाजपा के लोग वैक्सीन टोकन बांटने के मामले में दबंग पब्लिक प्रवक्ता ने खबर का प्रकाशन किया था खबर के बाद जिला प्रशासन ने मीडिया खबरों को गंभीरता से लेते हुए जांच हुई जिसमें जो आरोप लगे थे वो सच निकला और प्रशासन हरकत में आया और राजनगर वैक्सीनेशन सेंटर से गैर- सरकारी लोगों को बाहर का रास्ता दिखलाते हुए कर्मचारियों की तैनाती कर दी है।  कलेक्टर सोनिया मीणा के निर्देशानुसार कोतमा एसडीएम ऋषि सिंघई  के आदेशानुसार सीएमओ द्वारा जारी पत्र में उल्लेखित नामों के अतिरिक्त किसी भी गैर - संबधित व्यक्ति के वैक्सीनेशन सेंटर में प्रवेश को रोकने के लिये स्पष्ट किया गया है कि शिकायत मिलने पर कड़ी कार्यवाही की जाएगी।

*क्या हुआ आदेश*

नगर परिषद वनगवां मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने 21 जुलाई को एक पत्र जारी करते हुए अनुविभागीय दंडाधिकारी महोदय के पत्र क्रमांक 1653  अनुविभागीय अधिकारी/कोविड़/2020 दिनांक 20 जुलाई 2020 के आदेशानुसार वैक्सीन सेंटर की व्यवस्था सुचारु रूप से चलाने हेतु 22 जुलाई के बाद के वैक्सिनेशन पर निम्न 10 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाती हैं आदेश के बाद ड्यूटी पर कार्यरत सभी 10 कर्मचारी समय से सेंटर में पहुँचकर अपना दायित्व पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निर्वहन करेंगे अगर कोई भी गड़बड़ी हुई या किसी भी कर्मचारी के लापरवाही की शिकायत मिली तो उस पर ठोस कार्यवाही की जाएगी।

*अन्य लोगो पर लगा प्रतिबंध*

वैक्सिनेशन करने, करवाने वाले के एवं नगर परिषद के 10 कर्मचारियों के अलावा कोई भी व्यक्ति जिसका सम्बन्ध वैक्सीन सेंटर से नही होगा ऐसे लोगो को पूरी तरह वैक्सीन सेंटर के अंदर जाने की अनुमति नही होगी अगर उसके बाद भी कोई व्यक्ति आदेश की अवहेलना करता है तो उस पर कानूनी कार्यवाही की जाएगी। अब भाजपा वाले वोट बैंक की राजनीति कैसे करेंगे। राजनैतिक पार्टी भाजपा अपने पैरों में कुल्हाड़ी खुद मार बैठे।

*टोकन का कोई जिक्र नही*

यह आदेश के बाद कल वैक्सीन लगवाने वालो को यह समझ मे नही आ रहा है कि पंजीयन ऑनलाइन होगा या पहले की भांति ऑफलाइन अगर टोकन बटेंगे तो किसके द्वारा टोकन बांटा जाएगा। क्यू कि अभी तक टोकन के माध्यम से ही वैक्सीन लगवाए जाने की व्यवस्था की गई थी।

*भाजपा की चलेगी या प्रशासन की*

कल वैक्सीन सेंटर में प्रशासन के आदेश के बाद कल का नजारा देखने लायक होगा भाजपा के लोग जो सोमवार को वैक्सीन सेंटर में जबरदस्ती घुसकर दादागिरी से मनमाने तरीक़े से टोकन बांट रहे थे उस पर प्रशासन ने पूरी तरह रोक लगा दी हैं अब प्रशासन के आदेश वाला डंडा चलेगा की भाजपा वालो की जबरदस्ती वाली दादागिरी, कल सुबह सब कुछ साफ हो जाएगी। 

*पहले भी था नियम*

इससे पहले भी वैक्सीन सेंटर में वालेंटियर, स्वास्थ्य विभाग और नगर परिषद के कर्मचारियों वैक्सीन लगवाने वाले को ही प्रवेश देने के नियम थे मगर उसके बाद भी राजनैतिक दल, नेता, और वैक्सीन टोकन के दलालो को भीड़ बनी रहती थी अब देखना है कि यह  नए आदेश का पालन कितने दिनों तक होता हैं।


वैक्सीनेशन सेंटर पर उजागर हुई भाजपा की टोकन छाप राजनीति

*कलेक्टर के आदेश पर हुई जांच में मीडिया खबरों की हुई पुष्टि*

*छुटभैयों के आचरण से कोरोना वालेन्टियर्स भी परेशान*


अनूपपुर/राजनगर

भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की मंशा के अनुरुप उसके नेता ,कार्यकर्ता कोरोना संक्रमण के दौर में जरुरतमंद लोगों की सेवा, सहयोग करते रहे हैं। मीडिया ने उनके ऐसे सभी अच्छे कार्यों को प्रमुखता से स्थान दिया। लेकिन अब निचले स्तर पर वैक्सीनेशन सेंटर से उनके कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा जिस अराजकता का परिचय दिया जा रहा है, उससे पार्टी की बड़ी किरकिरी हो रही है। कुछ स्थानों पर कोरोना वालेंटियर्स को अपमानित करने की शिकायतों के बाद अब कुछ लोगों द्वारा टोकन की राजनीति करने से आम जनता में नाराजगी है। लोगों ने शिकायत की है कि कुछ लोग अभी से नगरपालिका चुनाव की तैयारी को ध्यान में रखकर वैक्सीनेशन सेंटर में अपने - अपने लोगों को टोकन दे कर उपकृत किया जा रहा है। शिकायत मिलने पर कलेक्टर सोनिया मीणा के मार्गदर्शन में एसडीएम कोतमा के द्वारा नायब तहसीलदार को मौके पर जांच के लिए भेजा जिससे हमारे खबर के सच की पुष्टि हो गयी।

*यह था मामला*

जिले के अंतिम छोर पर बसे राजनगर कोयलांचल क्षेत्र में सोमवार के दिन वैक्सीन सेंटर वैक्सीन लगाने का कार्य जैसे ही सुबह शुरू हुआ तो वहाँ पर राजनगर भाजपा मंडल के कार्यकर्ता और पदाधिकारी पार्टी का धौस जमाते हुए वैक्सीन सेंटर पर टेबल कुर्सी लगाकर बैठ गए और वैक्सीन सेंटर में वैक्सीन लगवाने वालो को टोकन बाटने लगे और सूत्रों से यह भी जानकारी लगी कि कुछ लोगो से 50 रुपये लेकर वैक्सीन का टोकन दिया गया हैं रुपये किसने लिए किससे लिए इसकी जानकारी नही लग पाई है मगर वैक्सीन सेंटर पर भाजपा का कब्जा और टोकन बाटने वाली बात 100% सच निकली जो फ़ोटो से साफ हो जा रही हैं जिसकी खबर मीडिया को लगी तो मीडिया ने खबर प्रकाशित करते हुए मामले को एसडीएम, कलेक्टर के संज्ञान लाया गया तो कलेक्टर ने तुरंत मामले की जांच के आदेश दे दिए।

*मामले की हुई जांच*

मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को लगते ही बिजुरी में पदस्थ नायब तहसीलदार आर के सिंह को जांच की कमान सौपी गयी। और नायब तहसीलदार 4 बजे राजनगर वैक्सीन सेंटर पहुँचे जहाँ पर पूरे टोकन बट चुके थे। और वहाँ पर मौजूद लोगों से जानकारी लेनी शुरू की जिससे जांच में बहुत कुछ सामने आया मगर पूरा सच सामने नही आ पाया।

*उपस्थित लोगों ने कहा*

इन मामले की जानकारी वहाँ पर उपस्थित 2 लोगो से ली गयी तो उन्होंने कहा कि टोकन नगर परिषद के लोगो ने बांटा हैं और सच्चाई इन्होंने भी छुपा ली सूत्र ये बताते हैं कि जिन दो लोगो से पूछा गया वो लोग आम जनता नही थे बल्कि भाजपा के कार्यकर्ता थे। वहाँ पर मौजूद लोग गोल मोल जबाब देकर जांच अधिकारी को गुमराह कर दिए।

*कर्मचारियों ने ये कहा*

जब वैक्सीन सेंटर में जांच अधिकारी पहुँचे और जांच शुरू करते हुए वहाँ पर मौजूद परिषद के कर्मचारियों से पूछा गया कि वैक्सीन लगवाने वाला टोकन आप ने बांटा है तो कर्मचारियों ने कहा कि हमने नही बांटा किसने बांटा हमको नही मालुम सवाल यह उठता है कि कर्मचारियों की मौजूदगी में टोकन किसने बांट दिए उनको पता ही नही चला हो सकता हैं कोई भूत प्रेत आकर बांट गया है कर्मचारी भाजपा के दबाब में आकर सच्चाई छुपा रहे हैं।

*जांच में आया सच*

जांच अधिकारी को सभी लोगो ने गुमराह कर तो दिया जिसके कारण पूरा सच सामने नही आया मगर जांच में भाजपा के नाम टोकन बांटने का दाग लग ही गया। जांच अधिकारी अपने जांच रिपोर्ट में साफ साफ लिख दिए कि टोकन किसने बांटा यह स्पष्ट नही हो पाया मगर भाजपा मंडल अध्यक्ष राजनगर राजेश कलशा की उपस्थिति और सक्रियता से इस बात का पता चलता हैं कि टोकन इनके द्वारा ही बंटवाया गया हैं। अब भाजपा के लोग क्या कहेंगे।

*खबर पर लगी मुहर*

जब हमने खबर टोकन बांटने वाली खबर छापी तो बहुत सारे लोगो की प्रतिक्रिया आने लगी कि हमारी खबर फर्जी हैं ऐसा नही हुआ है जब कि जांच अधिकारी को गूमराह करने के बाद भी अधिकारी ने हमारी खबर पर सच की मुहर लगा ही दी।

*खबर को बताया निराधार*

वैक्सीन सेंटर पर भाजपा का कब्जा, भाजपा के लोग बांट रहे है टोकन खबर प्रकाशित होते ही इस कार्य से जुड़े लोगो को मिर्ची लगने लगी, कुछ छुटभैये छाप लोग जो भाजपा का झंडा बाधने और ढोने का काम करते है जिंदाबाद के नारे लगाने वाले 100 रुपये में बिकने वाले लोग सोशल मीडिया में बरसाती मेढक की भांति टरटराने लगे और हमारी खबरों को किसी की साजिश बताते हुये निराधार करार दे डाला। खबरों को निराधार बताने वाले ये कौन होते है इनको जज की पदवी किसने दिया। ऐसे छुटभैये छाप लोगों से भाजपा का भला नही होने वाला है। 

*सीएमओ ने कहा था*

जब इस मामले में सीएमओ से पूछा गया था तो उन्होंने खुद यह कह दिया था कि भाजपा के लोग जबरदस्ती वैक्सीन सेंटर में टोकन बांट रहे हैं मुझे जानकारी मिली हैं मैं अभी दिखवाता हूँ।तो मामला यही पर खत्म हो जाता हैं कि भाजपा लोगो ने टोकन बांटा।

*वोट की राजनीति*

आने वाले दिनों में जल्द ही चुनाव होने वाले है इस कारण से भाजपा अपना जनाधार को बढ़ाने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपना रही हैं। इसके पहले क्या वैक्सीन सेंटर नही था क्या तो पहले समाजसेवा क्यू नही दिखाए चुनाव नजदीक आते ही समाजसेवा ध्यान आ रहा है जनता सब समझती है मौका आने पर ऐसे लोगों के मुँह पर कालिख जरूर पोतेगी।

*इनका कहना है*

एसडीएम साहब के आदेशानुसार वैक्सीन सेंटर में जाकर मैंने जांच करके पूरी रिपोर्ट बनाकर सौप दिया हूँ।

*आर के सिंह नायब तहसीलदार बिजुरी*

सर्व शिक्षा अभियान खेल इंडिया खिले इंडिया योजना में जिम्मेदारों ने खेला बड़ा खेल

बच्चों को मुफ्त खेल शिक्षा मुहैया कराने के नाम पर करोड़ों का बंदरबांट


इन्ट्रो- बच्चों की प्रतिभा को निखारने शासन द्वारा खेल इण्डिया खिले इण्डिया योजना लागू की जिससे बच्चों की छिपी प्रतिभा को वह मुकाम मिल सके जिससे देश प्रदेश मे उसका नाम रोशन होने के साथ ही क्षेत्र का भी नाम रोशन हो, लेकिन बच्चों की प्रतिभा को निखारने मे भी जिम्मेदारों ने यहां कमाई का अवसर तलाश लिया तभी तो जिले मे आये करोड़ों रूपये का वारा न्यारा बिना किसी हिसाब किताब के जिम्मेदारों ने कर दिया और किसी को कानो कान खबर तक नही हुई। अब जब इस पर हुये भ्रष्टाचार की परतें उखड़ने लगी तो एक दूसरे पर आरोप लगाकर भ्रष्टाचारी अपने आपको हरिश्चंद्र बता रहे हैं।

अनूपपुर

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को पढ़ाई के साथ ही बेहतर खिलाड़ी बनाने के लिए भी प्रयास हों। मानव संसाधन विकास विभाग ने देश में खेले जाने वाले सभी खेलों की एक मजबूत संरचना बनाने के लिए खेलो इंडिया, खिले इंडिया अभियान शुरू किया। इसमें स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे अपनी पसंद के खेल में भाग लेंगे। इस अभियान को सफल बनाने राज्य शिक्षा केंद्र ने भी प्रयास शुरू कर दिए हैं, किन्तु जिले में बैठे अधिकारियों ने योजना में पलीता लगाते हुए बड़े भ्रष्टाचार को अंजाम दे दिया।

*क्या थी योजना*

संचालक राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा जारी पत्र के अनुसार इसके लिए सभी प्राथमिक विद्यालयों को पांच हजार, उच्च प्राथमिक विद्यालयों को दस हजार रुपए, प्रदान किए गए हैं। इस धनराशि से विद्यालयों में खेल सामग्री खरीदी जाएगी, लेकिन यह खेल सामग्री स्कूलों की भौतिक स्थिति जैसे मैदान एवं स्कूल में पहले से मौजूद खेल सामग्री के आधार पर किया जाना है। इसके तहत यदि किसी स्कूल में मैदान नहीं है, तो क्रिकेट की सामग्री न खरीदी जाए। खेल सामग्री उपलब्ध कराने के पीछे विभाग का उद्देश्य स्कूलों में छिपी प्रतिभाएं सामने लाने का है। आदेश के साथ खेल सामग्री की सूची भी भेजी गई है। आदेश में साफ किया गया है कि क्षेत्रीय खेलों के लिए सामग्री खरीदी जा सकती है। खेल सामग्री के उपयोग एवं देखरेख के अतिरिक्त मैदान में खेलते समय बच्चों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी खेल शिक्षक और शिक्षकों की होगी। खेलों के लिए लकड़ी और प्लास्टिक क्रिकेट बैट, क्रिकेट स्टंप, सॉफ्ट बाल, टेनिस बाल, प्लास्टिक बाल, फुटबाल, बास्केबाल आदि की खरीदी की जा सकती है।

*विद्यालयों में रिक्त है खेल शिक्षक का पद*

विद्यालयों में खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विभाग ने योजना तो बना ली है, लेकिन धरातल पर इसमें कई खामियां सामने आ रही हैं। अधिकांश सरकारी स्कूलों में खेल प्रशिक्षकों के अभाव से विभाग की कवायद सिर्फ औपचारिक बनकर रह जाएगी। शासकीय हाईस्कूल व हायर सेकंडरी स्कूलों में पद संरचना के अनुसार खेल शिक्षकों के पद खाली है। वर्षों से स्कूलों में खेल प्रशिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को खेलों को जोड़ने के लिए खेल प्रशिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अधिकांश स्कूलों में बिना प्रशिक्षकों के बच्चे खुद ही खेलते हैं। विद्यार्थियों को सही प्रशिक्षण नहीं मिल पाता है। वहीं बच्चों को खेलने के लिए मैदान का अभाव खल रहा है। जिले की कई प्राथमिक व माध्यमिक शालाएं ऐसी हैं जिनके पास खेल का मैदान नहीं है।

*कैसे हो गया खेल*

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना 'खेले इंडिया खिले इंडिया' में बड़े फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ है। 14 साल तक की उम्र के  बच्चों को मुफ्त खेल शिक्षा मुहैया कराने के नाम पर लगभग 1 करोड़ रुपये की बड़ी रकम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। जिले में 1153 प्राथमिक विद्यालय व 356 माध्यमिक विद्यालय है इस योजना के लिए जिले को लगभग एक करोड़ रुपये का आवंटन प्राप्त हुआ था जिसमे खरीदी का जिम्मा स्कूल प्रबंधन समिति को दिया गया था किंतु जिले में ऐसा न कर सीधे जन शिक्षक के माध्यम से खेल सामग्रियों को स्कूल तक पहुचा दिया गया और भुगतान भी वही से करा दिया गया इस पूरे मामले में मध्यप्रदेश भंडार क्रय नियम का खुला उलंघन किया गया इस खेल में अब कौन कौन अधिकारी शामिल हैं और किसकी शह पर इतने बड़े भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया यह तो जांच के बाद ही सामने आ पाएगा।

*एक दूसरे पर लगा रहे आरोप*

यहां यह बात रोचक है कि जब सरकार द्वारा खेल इण्डिया खिले इण्डिया योजना लागू की गई तो इस पर कमाई का अवसर तलाशकर जिम्मेदार अपने हिसाब से पैसों को तितर बितर करने मे थोड़ी भी देरी नही की और न ही हिचकिचाये और जैसे तैसे योजना के लाभ का कोरम पूरा कर अवैध रूप से पैसों का बंदरबांट कर अपना अपना हिस्सा ले लिये। अब जब भ्रष्टाचार की परतें खुलनी शुरू हुई तो किसी के द्वारा देखा देखी कर अपनी जिम्मेदारी निभाई तो किसी ने इस बारे मे विशेष जानकारी न होने के बाद भी मनचाहा आदेश देकर अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर ली जबकि सभी जिम्मेदारों को विभाग मे आई योजना के हर पहलूू की जानकारी है, लेकिन अपने आपको बचाने एक दूसरे पर आरोप मढ़कर भ्रष्टाचार से दूर रहने का आडंबर किया जा रहा है।

*इनका कहना है*

1.  जिला कार्यालय से मौखिक आदेश मिला था। उस आधार पर पीएस, एमएस में खेल सामग्री को भेज दिया गया। 

*राम प्रकाश पटेल जन शिक्षक, अनूपपुर*

2.  बिजुरी से व्यापारी अर्णव बिल्डकॉन का फोन आया था कि हम खेल सामग्री सप्लाई कर रहे है। जन शिक्षक को हमने यही बताया था। 

*डीआर बांधव बीआरसी, जैतहरी*

3.  गोयनका समेत अनूपपुर जिले के दुकानदार ने ये सप्लाई की थी तो हमने भी बजट के आधार पर खेल सामग्री खरीदने को बोल दिया। 

*हेमंत खैरवार, डीपीसी, सर्व शिक्षा अभियान*

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