बरसात के पूर्व हल्की बारिश में निर्माणाधीन चेकडेम की एप्रोन पट्टी टूटकर बही

*टूटी एप्रोन पट्टी छुपाने के लिए ठेकेदार उसके ऊपर डाल दी मिट्टी निर्माण घटिया निर्माण अपनी कहानी खुद बयां कर रहा है*

*मनरेगा का कार्य जेसीबी से करवाकर ठेकेदार  मजदूरों के हक पर डाका डॉल रहा है*


अनूपपुर

ग्राम पंचायतों में छोटे छोटे कार्यो पर जमकर नियमो की धज्जियां  उड़ाई जाती है जमकर भ्रष्टाचार किया जाता है ठेकेदार से लेकर सचिव सरपंच एव जिले के बड़े अधिकारियों की भी अहम भूमिका रहती हैं निर्माण की रूपरेखा, स्वीकृति, भुगतान के अतिरिक्त प्रक्रिया में जिले से लेकर पंचायत तक जिम्मेदार शामिल होते है, प्रत्येक कार्य में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से कमीशन सभी का तय होता है, इसलिए भ्रष्टाचार में कार्यवाही की जगह सभी अपने हिसाब से छिपाने का प्रयास करते है और शिकायतों को ठंडे बस्ते में डालकर पैसो का बंदरबांट कर लिया जाता है।


*यह हैं मामला*

जनपद पंचायत अनूपपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलियाबडी के घेचुरी नाला में लगभग 15 लाख की लागत से निर्मित चेक डैम नीचे पानी के बहाव को कम करने, चेकडेम को नुकसान से बचाने के लिए एप्रोन की आरसीसी पट्टी बनाई जाती हैं वह पहली हल्की बारिश में नीचे से टूट कर बह गयी जिम्मेदारों ने अपने कर्मो को छिपाने के लिए उस पर जेसीबी लगाया और मिट्टा से ढक दिया गया, तांकि किसी को भ्रष्टाचार की परत दिखाई न दे। जब भ्रष्टाचार की हकीकत सामने आई तो अधिकारियों के नियम व बातें भी बदल गये, सच्चाई का जानने के लिए कुछ लोग चेक डेम स्थल पर पहुंचे तो वास्तविकता में चेक डेम की नीव ही कमजोर दिख रही हैं जिस पर रेत और मिट्टी का भराव करके नींव की कमजोरी को छुपाया जा रहा है इस लीपापोती में सचिव, इंजीनियर, सरपंच सभी शामिल है।

*पत्रकारों ने भी की शिकायत* 

यह मामला इतना ज्यादा तूल पकड़ चुका है भ्रष्टाचार की आम जनता ग्रामवासी तो इसकी शिकायत तो कर ही रहे है मगर अब जिले के कुछ पत्रकार भी खबर प्रकाशित करने के अलावा लिखित आवेदन देकर शिकायत कलेक्टर से किये हैं अब देखना यह हैं कि पत्रकारों की शिकायत का कितना असर पड़ता हैं या फिर मेरी मुर्गी के 3 टांग वाली कहावत सिद्ध हों जायेगी और जांच के बाद फ़ाइल बन्द हों जायेगी इसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा।

*कमीशन के खेल में निर्माण*

पंचायतों में होने वाले निर्माण कार्य में हर अधिकारियों का कमीशन तय कर दिया जाता है, जिसके कारण गुणवत्ता को ध्यान में न रखते हुए प्रत्येक निर्माण कार्य को अंजाम दिया जाता है। इतना ही नही अनावश्यक रूप से चेक डेम का निर्माण इसलिए किया जाता है क्योकि निर्माण के लिए स्वीकृत राशि से लगभग आधे राशि में चेक डेम निर्मित हो जाता है, इसलिए ज्यादातर पंचायतों में इंजीनियर व सचिव चेक डेम बनाने का प्रयास करते है।

*राजनैतिक पकड़ का खेल*

नियम के अनुसार ग्राम पंचायत ग्राम की निर्माण एजेन्सी होती है, लेकिन राजनीतिक पकड वाले व्यक्ति अपने स्तर पर चेक डेम को स्वीकृति करा लेते है और ठेके पर कार्य को लेकर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया जाता है, सचिव को भी कार्य से मुक्ति मिल जाती है और अपना कमीशन लेकर अन्य व्यवस्थाओं को देखता रहता है, वही कुछ इंजीनियर स्वयं ठेकेदार बन जाते है तो कुछ अपना कमीशन तय करते है और आल इज वेल की श्रेणी में निर्माण को हरी झंडी दे देते है यही हाल एसडीओ का है।

*शिकायत पर नही करते अमल*

जनपद में बैठे अधिकारी और जिले में बैठे मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित शिकायत दिया जाता है, लेकिन सालों बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नही की जाती है, किसी मामले में अगर जांच कमेटी बनाकर जांच भी किया जाये तो वह जांच कहां और किस दस्तावेज में हुआ यह न तो शिकायतकर्ता को पता होता है और न ही लोगों को इसकी जानकारी होती है, कुल मिलाकर न तो शिकायत पर अधिकारी अमल करते है और न ही कभी कार्यवाही किया जाता है। मगर शिकायतों का दौर अभी भी चालू है देखना हैं कि कार्यवाही होती है या सिर्फ जांच या अभयदान।

*भ्रष्टाचार करने का अनूठा उपाय*

जिलेभर की पंचायतों में चेक डेम की गिनती की जाये और उसके गुणवत्ता व सुनिश्चित स्थलों की जांच की जाये तो 80 प्रतिशत चेक डेम फेल हो जायेंगे, अन्य निर्माण कार्यो की अपेक्षा सबसे ज्यादा पसंद किया जाने वाला निर्माण कार्य अब चेक डेम ही है। स्वीकृति लागत अगर 15 लाख है तो ठेकेदार इसे 7 लाख में निर्मित कर देगा और एसडीओ, इंजीनियर व सीईओ इसे गुणवत्तायुक्त बताकर वाहवाही लूट लेंगे, लेकिन कहीकत यही है कि ज्यादा कमीशन के फेर में चेक डेम का निर्माण ज्यादा से ज्यादा कराया जाता है।

*नियम कानून जेब मजदूरों के हक पर डाका*

चेक डेम का कार्य जेसीबी मशीन (बैकोलोडर) से कराया गया, जबकि नियम यह कहता है कि मनरेगा मजदूर के तहत काम करना चाहिए, लेकिन कार्य जेसीबी से कराया गया हैं, अनाधिकृत ठेकेदार शीलू जोशी के द्वारा निर्माण कार्य किया गया और इंजीनियर अरविंद उइके की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा इस निर्माण कार्य में है। गुणवत्ताहीन कार्य की शिकायतें उच्चाधिकारियों को लगातार की जा रही है, चेक डैम कार्य में कमीशनबाजी और निर्माण कार्य मे नियम विरुद्ध तरीके से प्राइवेट ठेकेदार कार्य कर रहे है। इस निर्माण की यदि जांच की जाए तो तय मानक से सभी कम पाए जाएंगे। पूर्व में भी शिकायत हो चुकी है एवं जांच में गुणवत्ताहीन कार्य पाया गया यह स्थिति अभी भी बनी हुई है। चेक डैम के इस पूरे खेल में जनपद पंचायत इंजीनियर एसडीओ की जिम्मेदारी संदिग्ध है जो निर्माण कार्यों की बिना जांच किये पूर्ण राशि का भुगतान करा रहे हैं।

*इनका कहना है*

चेक डेम अभी निर्माणाधीन हैं कार्य पूरा नही हुआ है इसकी शिकायत हुई हैं जिले के उच्च अधिकारी जांच कर रहे है जांच के बाद अगर जो भी दोषी पाया जाएगा उस पर कार्यवाही की जाएगी

*बी एन मिश्रा सीईओ जनपद पंचायत अनूपपुर*

अभी कार्य निर्माणाधीन है रेत माफिया नाला से रेत चोरी करके ले गए कुछ लोग रेत निकाले गड्ढे की फ़ोटो खींचकर मेरी शिकायत कर रहे है एप्रोन पट्टी इसलिए टूट गयी की जिस दिन वो बनाई गई थी उसी दिन पानी गिर गया और सेंट्रिंग सहित एप्रोन पट्टी बह गई।

*शीलू जोशी ठेकेदार*

कोरोना से हुई मौत वाले परिवार के बच्चो को निशुल्क कोर्स कराएगी

ज्ञान प्रकाश ऑफ एजुकेशन की घोषणा, फीस नहीं आएगी शिक्षा में बाधा


अनूपपुर/कोतमा

कोविड 19 महामारी की वजह से देश का हर एक वर्ग आर्थिक परिस्थितियों की मार झेल रहा है, वहीं दूसरी ओर देश प्रदेश में महंगाई प्रतिदिन आसमान छू कर लोगों की कमर तोड़ रही है। कोरोना संक्रमण के करण किसी ने अपने घर  का मुखिया अपने माता-पिता को खोया तो किसी ने अपने पत्नी पुत्र -पुत्री को खोया ,आज उनके सामने  आर्थिक परिस्थिति ऐसी जटिल खड़ी हो गई कि घर चलाने वाला मुखिया उनका ना रहा है, उनके सिर से मुखिया का साया  हटते ही संजोए सपने पल भर में ही सब कुछ बिखर गया। फिर पढ़ने लिखने वाले छात्र-छात्राओं ने जिन्होंने अपने मुखिया को कोविड महामारी में खो दिया और उनकी शिक्षा दीक्षा अंधकार  को ज्ञान प्रकाश ऑफ एजुकेशन संस्था करेगी अब  दूर। संस्था में प्रवेश लेने वाले सभी छात्रों की चिंता करेगी अब संस्था, छात्रों के पढ़ाई लिखाई में फीस नहीं आएगी कोई बाधा एक संभव मदद करके छात्रों को दी जाएगी तीनों संस्था में शिक्षा।

संस्था में  छात्रों  की  फीस, पढ़ाई लिखाई पर नहीं होगी बाधा- राजेश जैन

   संस्था के अध्यक्ष राजेश जैन,सचिव एवं डायरेक्टर पुष्पेंद्र जैन ,संस्था  समित के सदस्यों ने कोरोना संक्रमण महामारी के वक्त दरिया दिल दिखाते हुए पैसे के कारण बच्चों के भविष्य ना बिगड़े, पढ़ने लिखने वाले छात्र देश का भविष्य उज्जैन बनाने के लिए ज्ञान प्रकाश ग्रुप ऑफ एजुकेशन द्वारा 15 जुलाई  को प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए संस्था अध्यक्ष राजेश जैन ने बताया कि ज्ञान प्रकाश आफ एजुकेशन आईटीआई 120 सीट ऐसे इलेक्ट्रीशियन एवं फिटर का प्रवेश होना है इस सत्र से लेकर विगत 2 वर्षों तक जिस किसी छात्र छात्रों ने अपने अभिभावकों को कोरोना संक्रमण महामारी में खोया है उन्हें फ्री शिक्षा विगत 2 वर्षों तक दी जाएगी उन्होंने यह भी बताया कि हमारी तीन संस्थाएं जिले में चल रही है जिसमें महाविद्यालय पारसनाथ में  बीए एंव बीकॉम में प्रवेश लेने वाले छात्र छात्राओं को परिस्थितियों के अनुरूप छोड़ दी जाएगी वही मॉडल कंप्यूटर कॉलेज DCA एंव PGDCA कोर्स करने वाले छात्र छात्राओं  को प्रवेश के वक्त परिस्थितियों के अनुरूप छूट  प्रदान किया जाएगा। 

आईटीआई संस्था में आधी फीस में छात्रों की होगी 2 वर्षो का कोर्स-

कोरोना संक्रमण के कारण आर्थिक परेशानियों से संघर्ष कर रहे तमाम बच्चो को जो हमारी संस्था से शिक्षा ग्रहण करना चाहे उन्हें आधी शुल्क लेकर दो वर्षों तक शिक्षा दी जाएगी, आईटीआई कोर्स की फीस जिसमें 30 हजार की जगह 15 हजार रूपये लेकर दो वर्षों का कोर्स पूरा कराया जाएगा।इस संस्था के सचिव व डायरेक्टर पुष्पेंद्र जैन द्वारा पत्रकारों से प्रेस वार्ता करते हुए बताया कोरोना संक्रमण के दौरान जिन बच्चों के अभिभावक को अपनी जान गवानी पड़ी है ऐसे बच्चों को हमारी संस्था के द्वारा निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाएगी जो दो वर्षों के कोर्स को पूर्ण कराएगी।

आदिम जाति ,आदिम जनजाति व पिछड़ा वर्ग छात्र तीन हजार में कर सकते दो वर्ष कोर्स पूरा-

शासन द्वारा पूर्व से आदिम जाति ,आदिम जनजाति व पिछड़ा वर्ग को जो 6 हजार रुपये की प्रतिवर्ष की छात्रवृत्ति मिल रही है वह भी यथावत रहेगी। उसके अलावा दो वर्ष में 12 हजार रुपए छात्रवृत्ति मिलेंगी, 2 वर्षों में मिलने वाली छात्रों को छात्रवृत्ति 12000 को मिलाकर छात्र अतिरिक्त मात्र 3 हजार रुपये अलग से ज्ञान प्रकाश ऑफ एजुकेशन आईटीआई संस्थान में फीस जमा करके 2 वर्ष का कोर्स आसानी से कर पाएंगे।संस्था के डायरेक्टर पुष्पेंद्र जैन ने बताया संस्था 2011 से संचालित है जो शिक्षा के अलावा सामाजिक कार्यों में भी अपनी सहभागिता समय-समय पर करती आई है।

सड़क निर्माण मे हो रही धांधली, बिना बीसी वर्क आर्डर के बारिश मे जारी है काम 


अनूपपुर/कोतमा 

एसईसीएल कंपनी के ज़मुना कोतमा क्षेत्र का  सिविल विभाग और स्टाफ़ अधिकारी सिविल की कार्यशैली नियम विरुद्ध होने के कारण पूरे क्षेत्र मे चर्चा का विषय बना हुआ है। क्षेत्र के गोविन्दा कॉलोनी मे NIT क्रमांक SECL/JK/SO(C)/E-TED/20-21/38 Dated 29/2/2020 के माध्यम से रूपये 64, 59, 745.72 /- मूल्य का सड़क डामरीकरण  करण का  कार्य किया जा  रहा है। इस  सड़क निर्माण मे स्टाफ़  अधिकारी सिविल के द्वारा  नियम विरुद्ध कार्य पद्धति  से सिविल कार्य बिना ड़रे निरंकुश होकर करवाया जाना जाहिर करता  है  कि  एक ज़िम्मेवार अधिकारी कंपनी के सारे नियम कायदों की धज्जियां उडा रहा है। इस तरह के अधिकारियों से ही कंपनी मे आर्थिक  भ्रष्टाचार को बढावा मिलता है l  ऊपर से बारिश के मौसम मे सड़क डामरीकरण का  कार्य किया जाना दर्शाता है कि कार्य मे जल्द  बाजी  से सड़क की  गुणवत्ता खराब होने से कंपनी को आर्थिक क्षति होगी। केन्द्र और राज्य  सड़क निर्माण के विभाग बारिश मे सड़क  डामरीकरण की  कभी अनुमति नही देते हैँ। संभव है कि ज़मुना कोतमा क्षेत्र के स्टाफ़  अधिकारी सिविल सड़क निर्माण की स्वयं द्वारा खोज की गई  कोई नई  तकनीक के विशेष इंजीनियर हों। इस  बिषय मे कोयला मजदूर सभा (एच एम एस ) के क्षेत्रीय अध्यक्ष  श्रीकांत शुक्ला से संवाददाता ने जानकारी मांगी तब उन्होने कहा  कि  हमें ख़ुशी है  कि श्रमिकों की सुविधा के लिये सड़क डामरीकरण का  कार्य हो रहा है  l  मेरा संघ हमेशा से क्षेत्र मे विकास कार्य की मांग करता  रहा है  l  किंतु जिस प्रकार से सड़क निर्माण का  कार्य नियम कायदों के विरुद् बिना बी सी और वर्क आर्डर के कार्य किया जा रहा है उससे क्षेत्र मे आर्थिक भ्रष्टाचार को बढावा मिलेगा l  सड़क डामरीकरण का  कार्य सूखे मौसम मे होने से सड़क की आयु ज्यादा रहता और श्रमिकों  को लंबे समय तक अच्छी सड़क की सुविधा मिलती। अधिकारी तो आये और दो तीन साल मे गये, दिक्कत तो श्रमिक झेलता है। इस  कार्य को दो तीन माह लम्बित रखकर पूरे कागजी तैयारीसे नियमानुसार कार्य करवाना था। मूलभूत आवश्यक कार्य बरसात मे घरों मे चू  रहा पानी, कॉलोनी की सफाई और स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति है। गत वर्ष से कंपनी श्रमिक आवासों मे बिट्यूमन छतों मे लगाने का ल वर्क ऑर्डर जारी है फिर भी गर्मी का मौसम बीत जाने के बाद घरों मे हो रहे रिसाव का कार्य नही किया गया  l  स्टाफ़ अधिकारी सिविल अपने करतूतों को छिपाने के लिये श्रम संघ के लोगों को हो रहे सड़क डामरीकरण स्थल मे ले जाकर फोटो शूट करवाकर उनसे लिये बयान का वीडियो जारी करवा  अपना बचाव कवच तैयार  कर रहे हैं। परंतु मै अन्य संघ के साथियों से अपील करूँगा कि श्रमिक आवास मे रिस रहे पानी और स्वच्छ पेयज़ल के बिषय मे भी श्रमिक आवासों मे स्टाफ़  अधिकारी के साथ  जाकर उनके तकलीफ का भी चर्चा करें और सिविल कार्य करवाने की मांग करें। तभी श्रमिकों  के सच्चे हितैषी  कहलायेंगे अन्यथा आपकी छवि श्रमिकों  के बीच प्रबंधन और विशेष कर  स्टाफ़  अधिकारी सिविल के नियम विरुद्ध कार्य मे भगीदार  होकर उनके प्रवक्ता  ही माने जायेंगे।

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