कलेक्टर ने कोविड को लेकर जिले में किये नए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी


अनूपपुर

जिला दण्डाधिकारी सुश्री सोनिया मीना ने कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम एवं बचाव हेतु द.प्र.सं. 1973 की धारा-144 (1) एवं मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ एक्ट 1949 की धारा 71(1), 72(2) के तहत संपूर्ण जिले के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नए सिरे से प्रतिबंधात्मक आदेश लागू कर दिया है। यह आदेश 31 जुलाई 2021 की रात्रि 12ः00 बजे तक प्रभावशील रहेगा। 

         जिला दण्डाधिकारी के आदेश के मुताबिक सभी सामाजिक, राजनैतिक, खेल, मनोरंजन, सांस्कृतिक, धार्मिक आयोजन, मेले आदि जिनमें जनसमूह एकत्र होता है, प्रतिबंधित रहेंगे। स्कूल एवं कॉलेज खोले जाने के संबंध में संबंधित विभागों द्वारा पृथक से आदेश जारी किये जा रहे हैं। तत्संबंधी आदेश उक्तानुसार जारी होने तक स्कूल एवं कॉलेज बंद रहेंगे। समस्त कोचिंग संस्थान बंद रहेंगे। ऑनलाईन क्लासेस चल सकेंगी। प्रशिक्षण कार्यक्रम हॉल 50 प्रतिशत क्षमता की सीमा तक संचालित किये जा सकेंगे। सभी धार्मिक, पूजा स्थल खुल सकेंगे, किन्तु एक समय में 06 से अधिक व्यक्ति उपस्थित नहीं रह सकेंगे तथा उपस्थित जनों को कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना बंधनकारी होगा। समस्त प्रकार की दुकानें, व्यवसायिक प्रतिष्ठान तथा निजी कार्यालय, शॉपिंग मॉल, जिम अपने नियत समय तक खुल सकेंगे। सिनेमाघर एवं थियेटर कुल क्षमता के 50 प्रतिशत की सीमा तक संचालित किये जा सकेंगे। सिनेमाघर संचालक को कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करना होगा। समस्त बृहद, मध्यम, लघु एवं सूक्ष्म उद्योग अपनी पूर्ण क्षमता पर कार्य कर सकेंगे तथा निर्माण गतिविधियां सतत् चल सकेंगी। 

    प्रतिबंधात्मक आदेश अवधि के दौरान जिम एवं फिटनेस सेंटर्स 50 प्रतिशत क्षमता पर कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करते हुए खुल सकेंगे। समस्त खेलकूद के स्टेडियम खुल सकेंगे, किन्तु खेल आयोजनों में दर्शक शामिल नहीं हो सकेंगे। समस्त रेस्टोरेंट एवं क्लब 100 प्रतिशत क्षमता से कोविड-19 प्रोटोकॉल की शर्त का पालन करते हुए रात्रि 10ः00 बजे तक खुल सकेंगे। विवाह आयोजनों में दोनों पक्षों को मिलाकर अधिकतम 100 लोगों की उपस्थिति की ही अनुमति दी जायेगी। इस प्रयोजन के लिए आयोजक को जिला प्रशासन को अतिथियों के नाम की सूची आयोजन से पूर्व प्रदाय करना आवश्यक होगा। अधिकतम 50 लोगों के साथ ही अंतिम संस्कार की अनुमति दी जा सकेगी। रूल ऑफ सिक्स अनुमत्य गतिविधियों के अलावा किसी भी स्थान पर 06 से अधिक व्यक्तियों के एकत्र होने पर प्रतिबंध रहेगा। अन्तर्राज्यीय (Inter State) तथा राज्यांतरिक (Intra State) माल (Goods) एवं सर्विसेज का आवागमन निर्बाध रहेगा। जिले के समस्त नगरीय क्षेत्रों में रात्रि 11.00 बजे से प्रातः 6.00 बजे तक नाईट कफ्र्यू रहेगा। उपरोक्त उद्देश्यों को छोड़कर कोई भी आम नागरिक का उद्देश्यहीन आवागमन पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। 

          आदेश के अनुसार इस आदेश के उल्लंघन पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 51 से धारा 60 के तहत यथास्थिति दाण्डिक एवं अभियोजन की कार्यवाही की जायेगी।

 15 वर्ष की बालिका ने घर में लगाई फांसी, कारण अज्ञात


 अनूपपुर

15 जुलाई को अनूपपुर कोतवाली अंतर्गत 10 कि,मी,दूर स्थित ग्राम बैरहनी टोला ग्राम पंचायत ताराडाड निवासी जमीलउद्दीन उर्फ महाजन मुसलमान की 15 वर्षीय पुत्री ने गत शाम अपने घर में दुपट्टा से अज्ञात कारणों के कारण फांसी लगा ली जिससे उसकी मौत हो गई घटना की जानकारी मिलने पर परिजनों द्वारा बालिका को फांसी से उतारकर कोतवाली अनूपपुर में घटना की सूचना दिए जाने पर कोतवाली पुलिस द्वारा मौके का शव पंचनामा कर साक्षियों के कथन लेकर मृतिका के शव का परीक्षण जिला चिकित्सालय के चिकित्सक से कराने बाद कफन दफन हेतु परिजनों को सौंप कर घटना की जांच प्रारंभ की ! इस दौरान परिजनों ने बताया कि घर पर वृद्ध मां रही है जो अन्य कामों में व्यस्त रहें तभी अज्ञात कारणों से कारण से बालिका द्वारा घर के अंदर बढ़ेरी मे अपने ही दो दुपट्टे को जोड़कर फांसी लगा ली जिसकी जानकारी मिलने पर आनन-फानन में परिजनों द्वारा जीवित ना हो इस उद्देश्य से फांसी की का दुपट्टा काटकर नीचे रख घरवालों उसके मृत होना पाए जाने पर तुरंत कोतवाली थाना अनूपपुर को सूचना दी गई रही है।

प्रबंधन की कुनीतियों का शिकार, कोयला उत्पादन छोड स्वहित के कामों मे ध्यान 

*पद का कर रहे है दुरुपयोग, करोड़ो खर्च करने के बाद भी हालात जर्जर*


अनूपपुर/कोतमा

ज़मुना कोतमा क्षेत्र विगत कुछ माह  से प्रबंधन की कुनीतियों  का इस कदर शिकार है कि कोयला उत्पादन मे वृद्धि करने के प्रयास  मे जोर देने की बजाय अपने निजी हित साधने मे पूरा ध्यान और प्रयास किया जा रहा है। अन्यथा ओसीएम मे 20 दिनो से एक शावेल मशीन बिना काम  के खडा रखा गया है  l  ओ बी के उत्खनन कार्य मे कार्यरत निजी ठेका कंपनी द्वारा प्रतिदिन और मासिक ओबी उत्पादन लक्ष्य से कम ओबी हटाया जा  रहा है। मुख्यालय से जारी आदेश मे उक्त ठेका कंपनी से  पैनाल्टी काटे जाने के आदेश के बावजूद आज तक एक रूपये नही काटा  गया l  क्षेत्र कई  सौ करोड के घाटे मे चल रहा है  किंतु कोई भी उच्च अधिकारी इस  बिषय मे कोई ठोस  कदम नही उठा रहे हैं l सब केवल अपने कार्यकाल और भविष्य  को सुरक्षित करने के उद्देश्य से निजी लाभ पर केन्द्रित होकर कई  लाख का मासिक वेतन और लाखों की सुविधाये कंपनी से लेकर अपने पद का दुरूपयोग  कर रहे हैं। कंपनी के आवासों  मे  डीसेंट हाऊसिंग के द्वारा  सिविल काम के बाद भी जर्जर हैं  l करोडों रूपये पेय योग्य पानी के नाम पर खर्च होने के बाद भी शुद्ध पानी को तरसता हैँ समूचा क्षेत्र, प्रत्येक आवास मे बारिश के पानी से रिसाव हो रहा है। कई लाख रूपये गत वर्ष से बिटुमन छतों मे लगाने का टेंडर के माध्यम से आवांटित होते हुये भी ठेकेदार से काम नही लिया जा रहा है  ऊपर से ठेकेदार का कुछ बिल भी पास कर भुगतान कर दिये गये। क्षेत्र के आज प्रत्येक आवास के छतों मे श्रमिक बरसाती पन्नी लगाकर रह रहा है। क्षेत्र  की और प्रबंधन की इससे ज्यादा शर्मनाक स्थिति और क्या  हो सकता हैँ। यह दूर्दशा महारत्न कंपनी के ज़मुना कोतमा क्षेत्र के श्रमिकों का है। आखिर वजह क्या है। हर श्रमिक  जनता और कहता है  सिर्फ़ प्रबंधन की भ्रष्ट नीतियां ज़िम्मेवार हैँ  किंतु प्रबंधन के कान मे जू तक नही रेंग  रहा है। भारी  बारिश मे प्रबंधन डामर की सड़क गोविन्दा-लहसुई  कॉलोनी मे बनाने मे श्रमिकों  के विरोध के बाद भी अपने त्वरित निजी लाभ के लिये आमादा  है।श्रमिक  और प्रबंधन सब जानता  समझता है कि  बरसात मे बनने वाली सड़क साल भर नही चलने वाली है, फिर प्रबंधन मूलभूत ज़रूरी कार्य छत की  मरम्मत की बजाय सड़क का  काम  पर ध्यान ज्यादा क्यो दे रही है। एक संघ के दो सदस्यों को साथ ले जाकर स्टाफ़ ऑफिसर सिविल फोटो खिचवा सड़क का सैंपल  लेकर गुणवत्ता का  प्रमाण दे रहे हैँ। जिस संघ के दो सदस्य साथ मे गये उस संघ का कहना है  कि  क्षेत्र मे  सिविल का सभी काम अच्छा किया जा रहा है एवं निर्माणाधीन सड़क की गुणवत्ता का प्रमाण दिया जा रहा है कि  सड़क की गुणवत्ता ठीक है जैसे कि वे कोई गुणवत्ता का  प्रमाण-पत्र जारी करने वाले संस्थान हो य़ा सड़क विशेषग्य  हों क्षेत्र के श्रमिकों के आवासों की जो हालात है वही श्रमिक  उस संघ को आने वाले समय मे जबाव देंगे और पहचान गये हैँ  कि  कितने श्रमिक हितैषी हैँ। जिनकी नजर मे श्रमिक के लिये सिविल विभाग और प्रबंधन का कार्य अच्छा है। इस  बिषय मे जब कोयला मजदूर सभा एचएमएस  के क्षेत्रीय अध्यक्ष श्रीकांत शुक्ला बात की गई तब उन्होने कहा कि  मुझे अपने संघ और अपने काम से मतलब है एवं मैँ कोई टिप्पणी नही करना चाहूँगा सभी संघ कोयला खान के श्रमिक साथियों के प्रति सेवा का अपना तरीका हैँ। मैँ और मेरा संघ श्रमिकों की आवाज उठाने मे विश्वास रखते हैँ न कि प्रबंधन के पक्ष मे उनकी मनचाही भाषा का उनके प्रवक्ता के तौर पर उनका  प्रचार -प्रसार का कार्य करने का। यदि प्रबंधन सड़क निर्माण की  गुणवत्ता की जांच करवाने को ज्यादा ही उत्सुक है, तब सभी श्रम संघ के पदाधिकारियों और प्रबंधन के अधिकारी- इंजीनियर को साथ लेकर सैंपल को कई जगह से एकत्र कर सील बंद कर सभी के दस्तखत के साथ किसी विश्वनीय सरकारी संस्था से करवाया जाय। सैंपल का एक सेट  संघ को भी सील बंद दिया जाय ज़िससे संघ भी जांच करवा सके l श्री कांत शुक्ला ने आगे कहा कि श्रमसंघ की ज़िम्मेवारी होती है कि श्रमिको के हितों सुख- सुविधाओं के लिये प्रबंधन को निरंकुश नही होने दें न कि प्रबंधन की कुनीतियों को सहयोग देकर बढावा दें। प्रबंधन तो चाहता ही है कि संघ आपस मे ही वैचारिक मतभेद करे ज़िससे उनके मन मुताबिक नियम विरुद्ध कार्य आचरण मे सहुलियत होती रहे। इसलिये मैँ  सभी संघों से अपील करूँगा कि आज श्रमिक आवास मे हो रहे पानी के रिसाव, शुद्ध पेय जल की पर्याप्त आपूर्ति, कॉलोनी मे व्याप्त  गंदगी की सफाई और कोयला उत्पादन मे वृद्धि सबसे ज़रूरी मुद्दे हैं। ज़िन पर शीघ्र आवश्यक कार्यवाही की मांग कर प्रबंधन से चर्चा कर श्रमिकों  के हित मे कार्य करें न कि के व्यक्तिगत  हित साधक बने l

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