बिजली कटौती, पेट्रोल, डीजल की वृद्धि को लेकर कांग्रेस ने प्रभारी मंत्री को सौपा ज्ञापन


अनूपपुर 

जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष फुन्देलाल सिंह मार्को के नेतृत्व में कांग्रेस जनों ने अनूपपुर पहुंची मध्यप्रदेश शासन की मंत्री एवं जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री मीना सिंह को बढ़ती महंगाई को लेकर एक ज्ञापन सौपी।जिला कांग्रेस कमेटी के द्वारा ज्ञापन में जो मांगे उल्लेखित की गई उनमें प्रमुख रूप से पेट्रोल, डीजल के बढ़ते दाम से परेशानी- भाजपा सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल के दामों में लगातार बेतहासा मूल्य वृद्धि से आम नागरिकों के जीवन को आर्थिक परेशानी में डाल दिया है। पूरे भारत में अनूपपुर जिला पेट्रोल, डीजल की महंगाई में चर्चा का विषय बना हुआ है। सर्वाधिक दाम पूरे भारत में अनूपपुर में है। जिससे खान-पान से संबंधित एवं आवागमन से संबंधित सामग्रियों का रेट काफी बढ़ गया है। महंगाई के चलते लोगो की कमर टूट गई। लॉकडाउन के समय मोटर वाहन चालकों को ठेकेदारों को राहत प्रदान की गई लेकिन आम जनता को किसी तरह की राहत नहीं दी गई महंगाई के चलते गरीब आदिवासी, मध्यम वर्गीय परिवार के लोगो को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि पेट्रोल, डीजल के दामों में सरकार द्वारा लिया जा रहा 67 रूपये वेट टैक्स में ही यदि कुछ कम करा दिया जाये तो प्रदेश की जनता को कम दामों में डीजल पेट्रोल प्राप्त हो सकेगा। जिससे महंगाई में भी कमी आएगी।

*अघोषित कटौती से हलाकान जनता*

दूसरी तरफ अघोषित बिजली कटौती से लोग त्रस्त हो चुके है। ग्रामीण क्षेत्र न तो कृषि कार्य कर पा रहे है और न ही घरों में चैन से रह पा रहे है। उपर से अनाप-सनाप बिल गरीब, मजदूर, आदिवासी, मध्यम वर्गीय लोग परेशान है। माननीय मंत्री महोदया से अनुरोध है कि बिजली की अघोषित कटौती को बंद कराकर किसानों को राहत प्रदान की जाए ताकि खेती के लिए सहजता से पानी की उपलब्धता हो सके एवं कोरोना काल के दौरान आए बिल को माफ कराने का प्रयत्न करें।

*अवैध उत्खनन से परेशान गरीब जनता*

अवैध रेत उत्खनन परेशानी का कारण बन रहा है, जिससे कारण प्रधानमंत्री आवास बनाने वाले गरीब लोग आवास नहीं बनवा पा रहे है। उत्खनन करने वाली कंपनी एवं उसके गुंडे, लठैत गांव में अवैध रूप से रेत का उत्खनन कराते है मना करने पर बंदूक की नोक पर जान से मारने की धमकी देते है। विगत कई वर्षों से रेत के कारण गांव का व्यक्ति डरा एवं सहमा हुआ है। जिसमें जिला प्रशासन की सहभागिता है। शिकायत करने पर जिला प्रशासन द्वारा कोईकार्यवाही नहीं की जाती। रातो-दिन कंपनी के लोग बंदूक लेके घूमते रहते है। प्रशासन द्वारा कार्यवाही न करना प्रशासन की मिलीभगत दर्शाता है।

*समय पर प्रधानमंत्री आवास का किरत भुगतान न होना*

एक ओर रेत की कमी के कारण जनता परेशान है दूसरी ओर प्रधानमंत्री आवास की किरत न आने के कारण लोग अपना घर तुडवाकर इस भरे बरसात में या तो किराये के मकान पे या फिर त्रिपाल लगाकर रहने को मजबूर है। गरीब बेसहारा लोगो को अनाप-सनाप किराया देना पड़ रहा है या बरसते पानी में रहना पड़ रहा है। जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष फुन्देलाल सिंह मार्को ने जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री मीना सिंह को ज्ञापन सौंपते हुए  अनुरोध किया है कि मध्यप्रदेश सरकार से पेट्रोल डीजल की बढ़ी कीमतों को कम करने बिजली कटौती को दूर करने एवं रेत के सहज उपलब्धता एवं सही रेट आमजन को दिलाने की कृपा करें।

जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा प्रभारी मंत्री सुश्री मीना सिंह को ज्ञापन सौंपते समय जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष फुन्देलाल सिंह मार्को, कार्यकारी अध्यक्ष संतोष पाण्डेय, राज तिवारी, चंद्रभूषण त्रिपाठी, सत्येंद्र स्वरूप दुबे, यूथ कांग्रेस अध्यक्ष गुड्डू चौहान, राघवेन्द्र पटेल, उत्तम पटेल, मनोज पटेल, सेवादल यूथ अध्यक्ष जितेन्द्र सोनी, भूरा यादव, चंदन सिंह, प्यारेलाल सिंह, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष राम खेलावन राठौर, रियाज मंसूरी, विनय कांत प्रजापति आदि कांग्रेस जन उपस्थित थे।

किरर घाट के ढहने की हो उच्चस्तरीय जांच की मांग प्रभारी मंत्री को सौपा ज्ञापन


अनूपपुर 

भाजपा नेता मनोज द्विवेदी ने जिले की प्रभारी मंत्री सुश्री मीना सिंह को पत्र सौंप कर अनूपपुर - अमरकंटक मार्ग स्थित किरर घाट के बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।* 

 12 जुलाई को सुश्री मीना सिंह के अनूपपुर प्रवास के दौरान सर्किट हाउस अनूपपुर में म प्र शासन के मंत्री बिसाहूलाल सिंह , सांसद हिमाद्री सिंह ,जिलाध्यक्ष ब्रजेश गौतम के साथ अन्य सैकड़ो कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में पत्र सौंप कर इस आशय की मांग की गयी कि अनूपपुर - अमरकंटक मार्ग स्थित किरर घाट के ढहने से विगत दिवस डेढ सौ से अधिक यात्री लगभग छ: घंटे तक खतरनाक स्थिति में फंसे रह गये थे। घाट ढहने के बाद एमपीआरडीसी के लोगों की सलाह पर यह मार्ग अनिश्चित काल तक के लिये बंद कर दिया गया है। 

  *बतलाया गया कि किरर घाट का सिद्ध बाबा मोड़ पिछले वर्ष से क्षतिग्रस्त है। इसकी सूचना उसी वक्त अधिकारियों को दी गयी थी। यदि तभी एमपीआरडीसी इसकी मरम्मत कर देता तो यह मार्ग अनिश्चित काल तक बन्द नहीं होता। इन्होंने ध्यान नहीं दिया और इनकी लापरवाही से घाट का यह हिस्सा पूरी तरह ढह गया। अब इसके निर्माण में अतिरिक्त धन, श्रम, समय लगेगा ।* 

  रीवा - अमरकंटक मार्ग व्यस्ततम मार्ग है । प्रतिदिन सैकड़ो श्रद्धालु , पर्यटक अमरकंटक आना - जाना करते हैं। मार्ग बन्द होने से आम जनता का अतिरिक्त धन, श्रम, समय व्यय हो रहा है।

   एक वर्ष से क्षति ग्रस्त है। हम लगातार इस ओर अधिकारियों ,जन प्रतिनिधियों का ध्यानाकर्षण करते रहे हैं। इसके बावजूद इन्होंने समय रहते ध्यान नहीं दिया। केवल इनकी लापरवाही से आज आम जनता परेशान है और महीनों अनूपपुर- राजेन्द्रग्राम मार्ग बन्द रहने वाला है। यह सरकारी और जनता के पैसे का अपव्यय करने और भ्रष्टाचार को बढावा देने की तरकीब क्यों ना माना जाए ?

प्रभारी मंत्री से  निवेदन किया गया  है कि किरर घाट ढहने, समय पर इसकी मरम्मत ना करने और अब अनिश्चित काल तक मार्ग बन्द होने से यात्रियों को हो रही परेशानियों के लिये जिम्मेदार लोगों की विधिवत्  जांच करवा कर कार्यवाही की जाए।

  विशेष उल्लेखनीय है कि प्रभारी मंत्री को यह पत्र सौंपने के एक दिन पूर्व श्री द्विवेदी द्वारा अनूपपुर भाजपा जिलाध्यक्ष के नाम खुला पत्र लिख कर इस विषय पर उनका ध्यानाकर्षण करते हुए कहा गया था कि 

*जिलाध्यक्ष ,भारतीय जनता पार्टी ,अनूपपुर से अनुरोध है कि किरर घाट हादसा और महीनों इसके ध्वस्त रहने की आशंका से जुडे विषय की शिकायत प्रभारी मंत्री से वे स्वयं करें या हमें करने की अनुमति दें। हम सत्ता में हैं....!  इसका मतलब यह नहीं कि हम अधिकारियों के निकम्मेपन की ओर आंखे बंद कर लें।*

*किरर घाट एक वर्ष से क्षति ग्रस्त है। हम लगातार इस ओर अधिकारियों ,जन प्रतिनिधियों का ध्यानाकर्षण करते रहे हैं। इसके बावजूद इन्होंने समय रहते ध्यान नहीं दिया। केवल इनकी लापरवाही से आज आम जनता परेशान है और महीनों अनूपपुर- राजेन्द्रग्राम मार्ग बन्द रहने वाला है। यह सरकारी और जनता के पैसे का अपव्यय करने और भ्रष्टाचार को बढावा देने की तरकीब क्यों ना माना जाए?*

   *MPRDC के संभागीय प्रबंधक कभी कार्यालय से बाहर निकलते हैं क्या ? इन्हे जैतहरी- राजेन्द्रग्राम मार्ग का स्वत: पहले अवलोकन करना चाहिए था । इस मार्ग का घाट किरर से अधिक खतरनाक और जानलेवा है। इनकी एक साल की लापरवाही के कारण अमरकंटक पर्यटन के सबसे महत्वपूर्ण मानसूनी  अवसर पर हजारों लोग रोज परेशान हो रहे हैं।*

 *जिलाध्यक्ष ,अनूपपुर स्वत: मंत्री जी का ध्यानाकर्षण कर आवश्यक कार्यवाही करवाएं या हम स्वयं इसके लिये आगे आने को बाध्य होंगे।* 

जिलाध्यक्ष ब्रजेश गौतम ने सोशल मीडिया पर ही व्यक्तिगत लेख करते हुए अगले दिन चर्चा करने की बात की थी। उन्होंने प्रभारी मंत्री से इस बावत कोई  चर्चा की या नहीं, लेकिन सभी जनप्रतिनिधियो की उपस्थिति में भाजपा नेता द्वारा प्रभारी मंत्री से की गयी जांच की मांग कितनी प्रभावी है ,यह देखना होगा।

काटे गए मानदेय एवं सेवा निवृति राशि की मांग को लेकर आंगनबाड़ी कर्मी सड़क पर

*मुख्यमंत्री के नाम सौपा ज्ञापन*


अनूपपुर/पुष्पराजगढ़

पुष्पराजगढ़ आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका एकता यूनियन मध्य प्रदेश के तत्वाधान में महिला एवं बाल विकास विभाग में जमीनी स्तर पर कार्यरत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाऐ जो पिछले 45 वर्षों से महिला एवं बाल विकास विभाग में सेवाएं दे रही हैं आंगनबाड़ी कर्मी अपने कार्य क्षेत्र में शासन के प्रतिनिधि के रूप में काम कर रही हैं वे अन्य शासकीय कर्मचारी के बराबर या उससे बढ़कर काम कर रही हैं इसके बावजूद आंगनबाड़ी कर्मियों को कर्मचारी का दर्जा एवं न्यूनतम वेतनमान से वंचित रखा गया है ।

*13 महीने बीत जाने के बाद भी नही मिला मानदेय की बढ़ी हुई राशि*

काफी संघर्षों के बाद राज्य सरकार द्वारा आदेश क्रमांक 1164/212 दिनांक28/05/ 2018 के माध्यम से मानदेय में वृद्धि कर कार्यकर्ताओं के मानदेय में राज्य का हिस्सा 7000 एवं उप कार्यकर्ताओं को मानदेय 3500 एवं सहायिकाओं के मानदेय में राज्य का हिस्सा बढ़ाकर 3500 रु कर इसे एक जून 2018 से लागू किया गया परंतु 13 महीना बीत जाने के बाद भी राज सरकार द्वारा 27/06/2019 को एक अन्य आदेश जारी कर कार्यकर्ताओं के मानदेय से 1500 रु उप कार्यकर्ताओं के मानदेय से 1250 रु एवं सहायिकाओं के मानदेय से 750 रु की राशि कटौती कर ली गई जो कि अन्याय पूर्ण एवं अवैधानिक है।

*आंगनबाड़ी कर्मियों को कर्मचारी का दर्जा दिये जाने की मांग*

आंगनबाड़ी कर्मियों को कर्मचारी श्रमिक का दर्जा दिए जाने की मांग लंबे अरसे से की जा रही है मध्यप्रदेश न्यूनतम वेतन सलाहकार बोर्ड ने आंगनबाड़ी कर्मियों को न्यूनतम वेतन की अधिसूचित श्रेणी में शामिल कर परिषद बोर्ड की 26 जनवरी 2016 की बैठक में न्यूनतम वेतन का सर्वसम्मति से निर्धारण राज्य शासन के पास अनुमोदन हेतु प्रेषित किया गया है जिसे अभी तक लागू नहीं किया गया है इसी तरह प्रदेश सरकार ने 8 अप्रैल 2018 को सरकार द्वारा सेवानिवृत्त पर कार्यकर्ताओं को 10000 एवं सहित सहायिकाओं को 7500 रु देने की घोषणा की लेकिन उसे भी लागू नहीं किया गया

*कोविड -19 करोना योद्धा के रूप में किये काम*

 कोविड-19 महामारी में संक्रमण के दौरान आंगनबाड़ी कर्मी स्वास्थ्य विभाग के अमले के साथ कंधे से कंधा मिलाकर करोना योद्धा के रूप में काम किये लेकिन उन्हें करोना योद्धा के लिए घोषित अतिरिक्त राशि से वंचित रखा गया एवं कोविड-19 ड्यूटी के दौरान मृत आंगनवाड़ी कर्मियों को परिवार को बीमा राशि तक नहीं दी गई। 

*12 सूत्रीय मांग को लेकर किया प्रदर्शन*

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका एकता यूनियन मध्य प्रदेश द्वारा आज 12 जुलाई 2021 को राष्ट्रव्यापी मांग दिवस के दौरान आयोजित प्रदर्शन के माध्यम से यह मांग करते हुये 08 सूत्रीय मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा अपनी आवाज बुलंद करते हुऐ अपनी मांग रखी जिसमें मुख्य रूप से  (1) राज्य सरकार द्वारा आंगनबाड़ी कर्मियों के मानदेय से अवैधानिक कटौती का आदेश निरस्त कर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के मानदेय से काटी गई 15 सो रुपए उप केंद्र के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के 1250 रुपए एवं सहायिकाओं के मानदेय से काटी गई राशि 750 की मासिक राशि एरियर सहित भुगतान किया जाए इस राशि का बजट आने वाले बजट सत्र में पास किया जाए

(2) प्रदेश सरकार की ओर से सेवानिवृत्ति पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 100000 रु एवं सहायिकाओं को 75000 रु देने की घोषणा को घोषणा दिनांक से लागू कर घोषणा के बाद सेवानिवृत्त सभी कर्मियों को यह राशि दिया जाए तथा इसी बजट में शामिल किया जाए

(3) आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को कर्मचारी के रूप में नियमित किया जाए आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 30000 और सहायिकाओं को 21000 न्यूनतम वेतन दिया जाए उप आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को पूर्ण केंद्र के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बराबर मानदेय एवं सुविधाएं दिया जाए तथा इसी राशि का बजट इसी वित्त वर्ष के बजट में पारित किया जाए

(4) जिला प्रशासन के अंकित निर्देशों पर आंगनबाड़ी कर्मियों की अंकित एवं अवैधानिक सेवा समाप्ति को रोका जाए इसी तरह सेवा समाप्त किए गए सभी आंगनबाड़ी कर्मियों को देश सेवा समाप्ति का आदेश निरस्त कर उन्हें तत्काल बहाल कराया जाए

(5) आईसीडीएस के किसी भी तरह के निजीकरण पर रोक लगाई जाए (6)मध्य प्रदेश श्रम सलाहकार परिषद बोर्ड के 22 जनवरी 2016 के सर्वसम्मत अनुमोदन को लागू कर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं के लिए न्यूनतम वेतन लागू किया जाए

(7) कोविड-19 की ड्यूटी के दौरान मृत सभी आंगनबाड़ी कर्मियों के परिवार को जिन्हें अब तक बीमा राशि नहीं दी गई है उन्हें 50 लाख रुपये की बीमा राशि तुरंत मुहैया कराया जाए एवं मृत कार्यकर्ता के एक आश्रित को शासकीय सेवा प्रदान किया जाए

(8) आंगनबाड़ी कर्मियों एवं यूनियनों के प्रतिनिधियों से परामर्श किए बिना विभाग द्वारा मनमाना तरीके से यूनिफार्म का डिजाइन व कलर दोनों के निर्धारण को रोका जाए वर्तमान में आंगनबाड़ी कर्मियों द्वारा विरोध के चलते पूर्व का गाजरी कलर की नीली बॉर्डर वाली साड़ी को यथावत रखा जाए।

*शीघ्र ही मांग पूरी नहीं हुई तो होगा उग्र आंदोलन*

फूल नही चिंगारी हैं हम भारत की नारी है की तर्ज पर आंदोलन करते हुऐ आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका एकता यूनियन के बैनर तले आंदोलन कर रही ब्लॉक की अध्यक्ष ज्ञानकली बनावल एवं महासचिव सरिता रजक द्वारा शासन से अपनी जायज मांगो को लेकर अपने अधिकार की लड़ाई लड़ते हुये आगाह किया की हमारी मांगे अगर सीघ्र ही पूरी नही की जाती तो उग्र आंदोलन कर अपनी मांग मनवाने के लिये हमें विवस होना पड़ेगा।

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