कलेक्टर रेट से कम मजदूरी का खुलासा, अध्यक्ष व सीएमओ की चुप्पी से उठ रहे सवाल, ठेका भी कम रेट पर स्वीकृत

 कलेक्टर रेट से कम मजदूरी का खुलासा, अध्यक्ष व सीएमओ की चुप्पी से उठ रहे सवाल, ठेका भी कम रेट पर स्वीकृत


अनूपपुर

नगर परिषद बरगवा से जुड़े निर्माण और सफाई कार्यों में कलेक्टर रेट से कम मजदूरी दिए जाने की शिकायतों के बाद अब एक और बड़ा खुलासा हुआ है। मजदूरों ने आरोप लगाया है कि न केवल उन्हें कम भुगतान किया जा रहा है, बल्कि जिस ठेके के तहत ये काम चल रहे हैं, वह भी कलेक्टर रेट से कम दर पर ही स्वीकृत किया गया है, जिससे मजदूरों को पूरा हक़ मिलना पहले से ही असंभव हो गया है।सबसे गंभीर बात यह है कि शिकायतों के बावजूद प्रशासन अब तक किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं कर रहा, जिससे मजदूरों में भारी रोष और अविश्वास पैदा हो गया है।मजदूरों ने लगाया बड़ा आरोप—“कम रेट पर ठेका देकर पहले ही मजदूरी काट ली गई”मजदूरों का कहना है कि नगर परिषद द्वारा जो ठेके स्वीकृत किए गए हैं, उनमें कलेक्टर रेट के अनुरूप बजट ही तय नहीं किया गया है। इससे ठेकेदार कम राशि में काम लेने के लिए मजबूर हैं और उसी की भरपाई मजदूरों की मजदूरी काटकर कर रहे हैं। अध्यक्ष व सीएमओ की चुप्पी इस मामले में मूंक सहमति दे रही है।

एक मजदूर ने बताया की ठेका ही कम रेट पर दे दिया है, तो ठेकेदार हमें पूरा क्यों देगा? प्रशासन ने पहले ही कम रेट में काम देकर हमारा हक़ काट दिया।”मजदूरों के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया सुनियोजित तरीके से की गई है, जिसमें बजट कम रखा गया और बाद में मजदूरों को कम मजदूरी दे दी गई 

एक नागरिक ने कहा जब ठेका ही गलत रेट में पास है तो मजदूरों का हक़ कौन दिलाएगा? प्रशासन जान-बूझकर अनदेखी कर रहा है। कानून कहता है कलेक्टर रेट से कम भुगतान बिल्कुल गैर-कानूनी व अपराध है। ऐसा आदेश पास करना या लागू करना दोनों गैर-कानूनी हैं दोषियों पर सजा और जुर्माना अनिवार्य है। लेकिन बरगवा में कानून का पालन न होना, जिला स्तर पर निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मजदूरी भुगतान की गड़बड़ी का मूल कारण यही है कि नगर परिषद ने ठेका स्वीकृत करते समय कलेक्टर रेट को ही नजरअंदाज कर दिया। जब ठेके का बजट ही कम है, तो मजदूरों को पूरा भुगतान कैसे मिलेगा?”ये गंभीर आरोप नगर परिषद की प्रक्रियाओं और पारदर्शिता को लेकर गंभीर संदेह खड़ा करते हैं। मजदूरों की मांग ठेके की पूरी जांच हो, भुगतान कलेक्टर रेट पर मिले। ठेके की फीस और रेट की जांच की जाए ठेका कैसे और किस दर पर स्वीकृत हुआ, इसकी कॉपी सार्वजनिक की जाए मजदूरों को बकाया राशि तुरंत दी जाए। दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों पर एफआईआर दर्ज हो।

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