*ग्राउंड रिपोर्ट: सीएम का रूट 'सैनिटाइज' करने में चूका प्रशासन? कागजों पर सुरक्षा के दावे, जमीन पर धधकता खतरा*
*बुढार/शहडोल:
8 फरवरी को माननीय मुख्यमंत्री का काफिला लालपुर हवाई पट्टी से नेशनल हाईवे होते हुए धनपुरी की ओर बढ़ेगा। सुरक्षा एजेंसियां (आईबी, स्पेशल सेल और जिला पुलिस) इस रूट को 'जीरो टॉलरेंस जोन' घोषित कर चुकी हैं। लेकिन, हाईवे किनारे स्थित शिव बर्मन की जली दुकान और वहां रात भर जलता गैस सिलेंडर सुरक्षा के इन दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहा है।
सुरक्षा एजेंसियों के 'ब्लू बुक' प्रोटोकॉल के अनुसार, मुख्यमंत्री के गुजरने वाले मार्ग पर निम्नलिखित सुरक्षा उपाय अनिवार्य हैं। एंटी-सबोटैज चेक (AS चेक) दौरे से 48 घंटे पहले बम निरोधक दस्ता (BDDS) पूरे मार्ग की जांच करता है। मार्ग में आने वाले हर गड्ढे, पुलिया और दुकान की तलाशी ली जाती है। सवाल: क्या इस जांच में जलता हुआ सिलेंडर नहीं दिखा।
मार्ग के किनारे से हर संदिग्ध वस्तु, लावारिस वाहन या ज्वलनशील पदार्थ को हटा दिया जाता है। चूक: घटनास्थल से मात्र 100 मीटर दूर पेट्रोल पंप है और वहां रात भर सिलेंडर का जलना एक बड़े धमाके को न्यौता दे रहा था। रूट पर हर 500 मीटर पर पुलिस पॉइंट होता है और मोबाइल पेट्रोलिंग वैन लगातार गश्त करती है। यदि गश्त हो रही थी, तो बुढार पुलिस को रात 2 बजे लगी इस आग और जलते सिलेंडर की गंभीरता का अंदाजा क्यों नहीं हुआ।
*स्ट्रीट ऑडिट: रूट पर पड़ने वाले पेट्रोल पंपों और गैस गोदामों के लिए विशेष सुरक्षा निर्देश जारी किए जाते हैं।*
*पत्रकारों का तीखा सवाल:*
*'वीवीआईपी रूट' पर इतनी बड़ी ढिलाई क्यों?आज जब हमने हेलीपैड की चाक-चौबंद व्यवस्था देखी, तो लगा कि प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। लेकिन उसी मार्ग पर एक गरीब की दुकान जला दी गई और विस्फोटक स्थिति पैदा करने वाला सिलेंडर घंटों जलता रहा।*
*क्या यह महज एक हादसा है या सुरक्षा में जानबूझकर की गई सेंध?**
*क्या मुख्यमंत्री के आगमन से पहले इस मार्ग को सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी सिर्फ कागजों तक सीमित थी?*
मुख्यमंत्री की सुरक्षा का मतलब सिर्फ उनके आसपास कमांडो की तैनाती नहीं है, बल्कि उस पूरे मार्ग का सुरक्षित होना है जिससे वे गुजरेंगे। शिव बर्मन की दुकान की आग बुझ गई होगी, लेकिन सुरक्षा में हुई इस चूक की तपिश प्रशासनिक गलियारों तक जरूर पहुंचनी चाहिए। 8 फरवरी को जब मुख्यमंत्री का काफिला यहां से गुजरेगा, तो यह जली हुई दुकान सुरक्षा एजेंसियों की विफलता का मौन गवाह बनेगी।*