विधवा को नही मिला न्याय तो तहसील के सामने भूख हड़ताल करके जीवन समाप्त करने का दिया अल्टीमेटम

विधवा को नही मिला न्याय तो तहसील के सामने भूख हड़ताल करके जीवन समाप्त करने का दिया अल्टीमेटम 

*तहसीलदार ने कलेक्टर के आदेश को किया दरकिनार*


अनूपपुर

जिले में पति के निधन के बाद अपनों के लूट से त्रस्त महिला बेलकुवर राठौर का अब सब्र का बांध टूट चुकी है। अब वह अपने साथ हो रहे लूट के खिलाफ आंदोलन का रास्ता अपनाने का संकल्प ली है। मामला तहसीलदार जैतहरी के न्यायिक व्यवस्था से आहत वृद्ध विधवा व बेसहारा महिला बेलकुवर राठौर ने अनुविभागीय दंडाधिकारी जैतहरी को सूचना देते हुए बताया कि ग्राम पंचायत चोरभठी स्थित आराजी खसरा नंबर 1291/1/1/2 रकवा 0.113 हेक्टेयर भूमि पर अनावेदक मनमोहन राठौर पिता स्वर्गीय सुखराम राठौर के द्वारा जबरन निर्माण कार्य किया जा रहा था। मना करने पर गाली गलौज एवं जान से मारने की धमकी दिए जाने पर न्यायालय तहसीलदार जैतहरी में बेदखली एवं निर्माण कार्य पर रोक लगाएं जाने का गुहार लगाई थी। जिस पर न्यायालय तहसीलदार जैतहरी ने दिनांक 20 अगस्त 2025 को स्थगन आदेश जारी किया गया था, किन्तु अनावेदक साधन सम्पन्न होने व नेताओं के संरक्षण में रहने का रौब जमाते हुए न्यायालय के स्थगन आदेश का लगातार उल्लंघन करता रहा। यहां तक कि पुलिस को डांटकर भगा देता था।

बेल कुंवर का कहना है कि कई बार तक जनसुनवाई में कलेक्टर के पास गुहार लगाई जहां से तहसीलदार जैतहरी को निर्देश दिया गया, किन्तु तहसीलदार जैतहरी ने कलेक्टर के निर्देश को भी नहीं माना। हद तो तब पार हो गई कि उसे बिना सुने झूठी एवं पक्षपात पूर्ण तैयार शपथ पत्र एवं पंचनामा को आधार बनाकर स्थगन आदेश को अपात्र कर दिया। जबकि आदेश दिनांक 2 दिसंबर 2025 को तहसीलदार तहसील में मौजूद नहीं थे और प्रवाचक के द्वारा बताया गया कि SIR के कार्य में व्यस्त होने के कारण आगामी सुनवाई तारीख 24 दिसंबर 2025 को नियत किया गया।

बेल कुंवर का कहना है कि वह शारीरिक एवं आर्थिक रूप से  कमजोर है, आने जाने में असहनीय शारीरिक पीड़ा को झेलते हुए अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई है। पुत्र मानसिक रूप से विकलांग है जिसका नाजायज फायदा उठाते हुए उसके वेशकीमती जमीन को अनावेदक हड़प लेना चाहता है।

बेल कुंवर ने अनुविभागीय दंडाधिकारी को लिखित सूचना देते हुए कहा कि समय रहते उसे न्याय नहीं मिली तो दिनांक 30 दिसंबर 2025 को मानसिक रूप से विकलांग पुत्र के साथ तहसील कार्यालय जैतहरी के समक्ष भूख-हड़ताल कर अपने जीवन लीला को समाप्त कर देंगे। जिससे उत्पन्न समस्त क्षतियो की जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी। अनुविभागीय दंडाधिकारी जैतहरी द्वारा कापी नहीं लिए जाने पर रजिस्टर्ड डाक से आवेदिका ने कापी भेजी है।

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