रेलवे स्टेशन हालत बदहाल, यात्रियों को भारी परेशानी दशकों से उपेक्षा का शिकार
*चारों तरफ कचरा व गंदगी*
कोतमा/अनूपपुर।
जिले का कोतमा रेलवे स्टेशन आज बदहाली और उपेक्षा का सबसे बड़ा उदाहरण बन चुका है। प्रतिदिन हजारों यात्रियों की आवाजाही वाले इस स्टेशन में यात्री असुविधा, गंदगी और अव्यवस्था से घिरा हुआ महसूस करते है। कोयला उत्पादन और राजस्व के लिहाज़ से महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस क्षेत्र को रेलवे व्यवस्था के स्तर पर आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसना पड़ रहा है।
प्लेटफ़ॉर्म के किनारों पर कचरा, प्लास्टिक की खाली बोतलें, गुटखा पाउच और झाड़ियों के ढेर ने पूरे परिसर को बदहाल बना दिया है। बरसात में पानी भरने और नालियों के बंद रहने से बदबू, कीचड़ और फिसलन की स्थिति बन जाती है। कई बार प्लेटफॉर्म पर सांप-बिच्छू दिखाई देने की घटनाएँ सामने आई हैं जिससे यात्रियों में डर और असुरक्षा की भावना और अधिक बढ़ जाती है। स्टेशन पर मौजूद पीने के पानी की व्यवस्था भी बेहद खराब है। कई नलों और हैंडपंपों से गंदा व पीला पानी निकलता है, जिसे पीना तो दूर यात्री हाथ धोने में भी झिझकते हैं।
स्टेशन परिसर में रात के समय रोशनी की कमी यात्रियों की असुरक्षा को और बढ़ा देती है। महज़ कुछ बल्ब ही जलते हैं और वे भी कई बार खराब मिलते हैं। स्टेशन के कई हिस्सों में सीसीटीवी कैमरों का अभाव है, जिससे किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में सबूत और निगरानी का अभाव बना रहता है। स्थानीय यात्रियों के अनुसार देर रात यहां चोरी, झपटमारी और संदिग्ध गतिविधियाँ देखी जाती हैं। यात्रियों को टिकट व्यवस्था में भी भारी अव्यवस्था का सामना करना पड़ रहा है। कई बार सुबह टिकट मिल जाता है, लेकिन शाम और रात के समय काउंटर बंद मिलने से लोगों को बिना टिकट यात्रा करनी पड़ती है।
स्टेशन परिसर में बने शौचालयों की हालत भी अत्यंत खराब है। गंदगी, टूटी सीटें और असहनीय दुर्गंध के कारण यात्री इन्हें उपयोग करने से बचते हैं। प्रतीक्षालय की कमी भी यात्रियों को कठिनाई में डालती है। तेज धूप, सर्दी या बारिश की स्थिति में यात्रियों को खुले प्लेटफॉर्म पर खड़े रहना पड़ता है। बुजुर्ग, दिव्यांग और छोटे बच्चों के साथ यात्रा कर रहे लोगों को घंटों असुविधा झेलनी पड़ती है।