पीएम आवास की किस्त 3 महीने से अटकी, हितग्राही कीचड़ मे जिंदगी बिताने को मजबूर

पीएम आवास की किस्त 3 महीने से अटकी, हितग्राही कीचड़ मे जिंदगी बिताने को मजबूर

*टूटा पुराना आशियाना, नए नए छत नही*


उमरिया।

जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना की राशि बंद होने से गरीबों के सपनों को बड़ा झटका लगा है। ग्रामीण अंचलों मे सैकड़ों हितग्राही महीनों से अगली किस्त का इंतजार कर रहे हैं। कई परिवारों ने पुराना घर तोड़कर नई छत की उम्मीद में निर्माण शुरू तो कर दिया, पर पैसा न मिलने से वह अधर में लटक गया है। हालात ऐसे हैं कि गरीब बारिश के मौसम में खुले मकान, कीचड़ और गंदगी के बीच रहने पर मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि किस्त मिलने की उम्मीद में प्लिंथ तक बनवा ली थी, कई घरों में टॉप बीम तक डाल दी गई, लेकिन उसके बाद से भुगतान पूरी तरह बंद हो गया। कुछ गांवों में तीन-तीन महीनों से एक रुपया भी नहीं आया है। परिवार न पुराने टूटे घर में रह पा रहे हैं और न नया पूरा करा पा रहे हैं।

सूत्र बताते हैं कि बीते कुछ वर्षों में पीएम आवास, जनमन और मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं में भुगतान की स्थिति बेहद बदतर हो गई है। मनरेगा में तो कर्मचारियों को चार महीने से वेतन तक नहीं मिल पाया है। योजना के अंतर्गत पिछले वर्ष हुए कार्यों और वेंडरों के भुगतान भी अटके पड़े हैं। हाल ही में जिले को कुछ राशि अवश्य आवंटित हुई है, लेकिन जरूरत की तुलना में बेहद कम है। भुगतान में देरी के कारण सरपंच-सचिवों को प्रतिदिन वेंडरों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है।

विभाग द्वारा लागू नए ‘सना स्पर्श’ सॉफ्टवेयर ने भी परेशानी बढ़ा दी है। अभी तक आवंटन और भुगतान की कार्रवाई पीएमएवाई सॉफ्टवेयर से होती थी, लेकिन अब अचानक बदलाव कर सभी योजनाओं का क्रियान्वयन इसी पर कर दिया गया है। अत्याधुनिक होने के कारण स्टाफ पूरी तरह प्रशिक्षित नहीं है, जिससे कामकाज ठप हो गया है।

सॉफ्टवेयर परिवर्तन के चलते कुछ समय के लिए कार्य प्रभावित हुआ था, लेकिन अब समस्या दूर हो गई है। पिछले 15 दिनों से पीएम आवास और जनमन योजना के भुगतान पुनः शुरू कर दिए गए हैं।

*अभय सिंह, सीईओ, जिला पंचायत, उमरिया*

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