विद्यालय में मीनू के अनुसार नही बन रहा है मध्यान्ह भोजन, बच्चो के हक पर स्वसहायता समूह डाल रहा है डाका
*मध्यान्ह भोजन बनाने वाली वाली महिलाओं कई माह से नही मिला वेतन*
अनूपपुर /कोतमा
बच्चो को शिक्षा से जोडऩे के लिए सरकार ने मध्यान्ह भोजन को शामिल किया है। किन्तु यह व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है ग्रामीण क्षेत्रो के विद्यालयों में कई-कई दिनों तक बच्चो को मध्यान्ह भोजन नही मिलता, जिम्मेदार लोगो के ध्यान न देने के कारण स्वसहायता समूह भोजन व्यवस्था अपनी मर्जी से नियम विरुद्घ चला रहे है। जिससे शासन की जनहितकारी योजनाओं पर पानी फिर रहा है। सरकार का कहना है हमारे तरफ से मध्यान्ह भोजन की सामग्री भेजने में कोई भी लापरवाही नही बरती जा रही है तो फिर गड़बड़ी कहा से हो रही है इस मामले में सवालिया निशान लग रहा है, गरीब बच्चों के मुंह से निवाला छीना जा रहा है। ऐसा क्यू हो रहा है जिम्मेदार ही बता सकते हैं जिले में सैकड़ो विद्यालय होंगे जहाँ मध्यान्ह भोजन नही बनता होगा लेकिन फिर भी यह व्यवस्था को देखने वाला कोई नही है केवल कागजो में सारी व्यवस्था चल रही है। शासकीय विद्यालय सड्डी में मीनू के हिसाब से खाना नहीं बनाया जा रहा है कभी दाल तो सब्जी नहीं बनती, ऐसा ही इस विद्यालय में ऐसा जी मध्यान भोजन चल रहा है ना तो सही तरीके से खाना बनता है और ना ही बच्चों को भरपेट भोजन प्राप्त होता है। आए दिन कुछ ना कुछ कमियां पाई जाती है अब देखना यह है कि समूह संचालकों पर कार्यवाही होती है या इसी तरह मध्यांह भोजन बच्चो को मिलता रहेगा। मध्यान भोजन बना रही महिलाओं का कहना है कि हमें कई माह से वेतन प्राप्त नहीं हुआ है करें तो करें क्या हमारे भी बाल बच्चे हैं ना तो समूह ध्यान दे रहा है ना उच्चस्तर पर बैठे अधिकारी ध्यान दे रहे हैं हमारा जीवन भगवान भरोसे ही चल रही है।
*इनका कहना है*
मैं जांच करवा लेती हूं अगर ऐसा है तो समूह को पत्र जारी कर कार्यवाही की जाएगी।
*पूनम सिंह मध्यान्ह भोजन प्रभारी जिला पंचायत अनूपपुर*
