मांगो को लेकर विद्युत कर्मचारियों की जेल भरो आंदोलन से होगी से हड़ताल की शुरूआत
*चरमरायेगी विद्युत व्यवस्था, विभाग ने नियमित कर्मचारियों की लगाई ड्यूटी*
अनूपपुर
मध्य प्रदेश विद्युत मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ के साथ अन्य संघ के द्वारा शुक्रवार 30 दिसंबर को कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक तथा अधीक्षण, कार्यपालन अभियंता को संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण तथा आउटसोर्स कर्मचारियों की संविलियन की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था तथा मांग पूरी नहीं होने पर 6 जनवरी से आउटसोर्सिंग एवं संविदा कर्मचारी काम का बहिष्कार की बात कही गई थी। जिसके तहत मांग पूरी नही होने पर आज से प्रदेश समेत जिले भर के सभी संविदा व आउटसोर्स कर्मचारी कल से काम बंद हड़ताल पर जा रहे हैं जिसकी सूचना 5 जनवरी को ही संबंधितों को दे दी गई है।
*बैठक कर बनाई रणनीति*
अपनी मांगों को लेकर संविदा व आउटसोर्स कर्मचारी इंजीनियर एलएन सोनवानी के नेतृत्व मे जिला मुख्यालय मे पहले भी बैठक कर चुके हैं तथा विगत दिवस गुरूवार को भी बैठक का आयोजन कर हड़ताल मे संबंध मे रणनीति तैयार किया गया। कोतमा मे भी कनिष्ठ अभियंता खीरसागर पटेल की अगुवाई मे बैठक आहुत कर आज की रैली, आंदोलन हड़ताल की रूपरेखा तैयार की गई तथा सभी संविदा व आउटसोर्स अधिकारी कर्मचारियों के शामिल होकर कार्य बहिष्कार पर भी चर्चा की गई।
*इन संगठनों की रहेगी भूमिका*
विद्युत विभाग मे कल से होने वाले आंदोलन मे मध्य प्रदेश अधिकारी कर्मचारी कल्याण संघ, विद्युत मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ, मध्य प्रदेश बिजली आउटसोर्स कर्मचारी संगठन, मध्य प्रदेश बाह्य स्त्रोत विद्युत कर्मचारी संगठन, विद्युत आउट सोर्स कर्मचारी संगठन, आउट सोर्स परिषद ने संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण और बिजली आउट सोर्स कर्मचारियों के विभागीय संविलयन को लेकर कई बार ज्ञापन सौंपा है, लेकिन अभी तक मध्य प्रदेश सरकार की ओर से संविदा और आउटसोर्स दोनों वर्गों की मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया है। जिसके कारण उक्त संगठन आज से प्रदेश व्यापी हड़ताल पर जाने को मजबूर हैं।
*हड़ताल की ऐसी होगी रूपरेखा*
कर्मचारी संगठन के 18 दिसंबर को आयोजित प्रांतीय अधिवेशन में 6 जनवरी को जेल भरो आंदोलन और 7 जनवरी से प्रदेश की राजधानी भोपाल में एकत्र होकर सामूहिक कार्य बहिष्कार किया जाएगा। बताया गया कि 5 जनवरी की रात्रि 12 बजे के बाद समस्त संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी कार्य बहिष्कार कर देंगे। जिले के बिजली उप केंद्रों एवं वितरण केंद्रों में विद्युत सप्लाई की वैकल्पिक व्यवस्था बनाने की बात कही गई थी, अन्यथा सम्पूर्ण जिम्मेदारी कम्पनी प्रशासन एवं मध्य प्रदेश शासन की रहेगी।
*चरमरा जायेगी विद्युत व्यवस्था*
बता दें कि जिले भर मे विद्युत विभाग मे संविदा व आउटसोर्स कर्मचारी तथा नियमित कर्मचारी के आंकड़े लगभग 70 व 30 प्रतिशत है। अगर संविदा व आउटसोर्स कर्मचारियों का कल से होने वाला हड़ताल सफल होता है तो यह स्पष्ट है कि विभाग के 70 प्रतिशत कर्मचारियों की मौजूदगी नही होगी, ऐसी स्थिति मे 30 प्रतिशत कर्मचारी किस तरह अपने तथा 70 प्रतिशत कम हुये कर्मचारियों के कार्यों की भरपाई करेंगे अर्थात जिले भर मे विद्युत की सुचारू व्यवस्था पर निश्चित ही व्यवधान होगा। जिसका व्यापक असर जिला ही नही प्रदेश स्तर पर देखने को मिलेगा।
*विभाग ने नियमित कर्मचारियों की लगाई ड्यूटी*
कल से होने वाले आंदोलन के मद्देनजर जानकारी के अनुसार विद्युत विभाग के अधिकारियों ने विद्युत की सुचारू व्यवस्था के लिए नियमित अधिकारी कर्मचारियों की ड्यूटी के लिए आदेश जारी कर दिये हैं परंतु यदि सब स्टेशन व फील्ड मे एक साथ फाल्ट आने पर वे कब और कहां जल्द से जल्द व्यवस्था सुधारेंगे यह बड़ा सवाल है इस बीच विद्युत उपभोक्ताओं को होने वाली परेशानी का सामना भी करना पड़ेगा।
कोतमा / मध्य प्रदेश विद्युत मंडल तकनीकी कर्मचारी संघ के साथ अन्य संघ के द्वारा शुक्रवार 30 दिसंबर को कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक तथा अधीक्षण, कार्यपालन अभियंता को संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण तथा आउटसोर्स कर्मचारियों की संविलियन की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा गया था तथा मांग पूरी नहीं होने पर 6 जनवरी से आउटसोर्सिंग एवं संविदा कर्मचारी काम का बहिष्कार की बात कही गई थी। जिसके तहत मांग पूरी नही होने पर 6 जनवरी से प्रदेश समेत जिले भर के सभी संविदा व आउटसोर्स कर्मचारी काम बंद हड़ताल पर जा रहे हैं जिसकी सूचना 5 जनवरी को ही विद्युत वितरण केंद्र कोतमा के सहायक अभियंता राहुल कुमार श्रीवास्तव को ज्ञापन सौंपकर जानकारी दी गई थी ।
अपनी मांगों को लेकर संविदा व आउटसोर्स कर्मचारी इंजीनियर के नेतृत्व मे हड़ताल मे जाने के संबंध मे रणनीति तैयार किया गया। कोतमा मे भी कनिष्ठ अभियंता खीरसागर पटेल की अगुवाई मे बैठक आहुत कर रैली, आंदोलन हड़ताल की रूपरेखा तैयार की गई तथा सभी संविदा व आउटसोर्स अधिकारी कर्मचारियों के शामिल होकर कार्य बहिष्कार पर भी चर्चा की गई।
6 जनवरी को जानकारी देते हुए कर्मचारी संघ ने बताया कि ऊपर से यह निर्देश मिले हैं कि 15 दिन तक हड़ताल स्थगित की जाती है यदि 15 दिन के अंदर मांगे पूरी नहीं की गई तो दोबारा रणनीति तैयार करते हुए सभी कर्मचारी हड़ताल पर जाने को बाध्य होंगे ।
