अभद्रता पर पार्षदों पर गिरेगी गाज या नेता जी के दम पर मिलेगा अभयदान, नगरपालिका बना अखाड़ा

अभद्रता पर पार्षदों पर गिरेगी गाज या नेता जी के दम पर मिलेगा अभयदान, नगरपालिका बना अखाड़ा



अनूपपुर 

नगर पालिका परिषद अनूपपुर  इन दिनों चुनाव के बाद से जन सेवा केंद्र नही बल्कि नागपंचमी जैसा कुश्ती मैदान व अखाड़ा बन कर रह गया है। परिषद के शपथ ग्रहण दिनांक के बाद से अभी तक "आ देखे जरा तुममें कितना है दम"  "नेता जी का खास हूँ वही होगा जो मैं बोलूंगा" विवाद में उलझे नेता जी व उनके खास का खामियाजा पूरा शहर भुगत रहा है 9 वर्ष बाद चुनाव हुआ तो आम जनता को लगा कि जो विकास 9 वर्षों से रुका था वह अब होगा मगर नगरपालिका अनूपपुर में विकास के नाम पर पूरी तरह ग्रहण लग चुका है। नगरपालिका में जातिवाद की लड़ाई कुछ दिनों से चल रही है। चुनाव कोई और जीता है हुकुम पूरे घरवालों के चल रहा है पत्नियों की जगह पति, ससुर, देवर नगरपालिका चला रहे हैं। ज्यादातर पार्षद महिला हो या पुरूष युवा चेहरे जीत कर आये थे मगर इनमें अभी 6 माह में ही बुढापा नजर आने लगा तो 5 वर्ष नगरपालिका रामभरोसे ही चलने वाली है ऐसी अभी से दिखाई दे रही है।

                     पूरे मामले को लेकर विगत माह पूर्व में पदस्थ नगरपालिका सीएमओ ज्योति सिंह के द्वारा नगर पालिका परिषद अनूपपुर के दो पार्षदों के विरुद्ध अभद्रता किए जाने के आरोप में कलेक्टर को शिकायत करते हुए नगरी प्रशासन विभाग को कापी भेजी गई थी जिसमें सीएमओ ने उल्लेख किया था कि इनके द्वारा पीआईसी की बैठक में अभद्रता किया गया है जिससे नियमानुसार धारा अंतर्गत इन्हें पार्षद पद से अयोग्य घोषित किया जाए साथ ही सीएमओ द्वारा पी आईसी भंग किए जाने की कार्यवाही कर कलेक्टर एवं नगरी प्रशासन विभाग सहित जिम्मेदारों को प्रतिलिपि भेजी गई थी उसी तारतम में मध्य प्रदेश नगरी प्रशासन एवं आवास विभाग मंत्रालय भोपाल के उप सचिव आर के कार्तिकेय द्वारा जारी पत्र क्रमांक 545/992525/2022/18-3 भोपाल दिनांक 27 /12/2022 को पत्र जारी करते हुए कलेक्टर अनूपपुर से पूरे मामले की तथ्यात्मक जांच कार्यवाही प्रतिवेदन को लेकर कार्यवाही किए जाने हेतु अभिमत मांगा गया है।

अब देखना यह है कि पूरे मामले एवं शिकायत को लेकर कलेक्टर अनूपपुर के द्वारा नियमानुसार निष्पक्ष जांच करते हुए दोषियों के विरुद्ध कार्यवाही किए जाने हेतु अभिमत दिया जाएगा या की नेता जी के दबाव में जांच व अभिमत कलेक्टर कार्यालय में ही बस्तों के बीच दबकर रह जाएगी।

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