चिकित्सको ने नर्सिंग अधिकारी की कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल, सिविल सर्जन को सौपा ज्ञापन


शहडोल

जिला चिकित्सालय शहडोल के मेटरनिटी विंग में कार्यप्रणाली को लेकर विवाद की स्थिति बन गई है। गायनिक विभाग के समस्त चिकित्सकों ने मेटरनिटी ओटी में पदस्थ एक नर्सिंग अधिकारी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए सिविल सर्जन को सामूहिक ज्ञापन सौंपा है। डॉक्टरों ने संबंधित नर्स को मेटरनिटी ओटी से हटाकर अन्य वार्ड या विभाग में पदस्थ करने की मांग की है।

सिविल सर्जन, को दिए गए ज्ञापन में चिकित्सकों ने उल्लेख किया है कि नर्सिंग ऑफिसर रश्मि राव की ड्यूटी मेटरनिटी ओटी में लगाई गई है, लेकिन उनके द्वारा ओटी के कार्यों में अपेक्षित रुचि नहीं ली जा रही है। विशेष रूप से ऑपरेशन के दौरान केस असिस्ट करने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि कार्यकुशलता और व्यवहार में कमी स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती है, जिससे ऑपरेशन के दौरान अनावश्यक जटिलताएं उत्पन्न हो रही हैं।

चिकित्सकों का आरोप है कि सामान्य मामलों में भी गंभीर परिस्थितियां निर्मित हो जाती हैं और मरीज की स्थिति बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि भविष्य में इस प्रकार की किसी जटिलता की स्थिति में उपस्थित चिकित्सक एवं नर्सिंग अधिकारी जिम्मेदार नहीं होंगे। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि संबंधित नर्स द्वारा कार्य में रुचि न लेने के कारण अन्य नर्सिंग अधिकारियों पर अतिरिक्त कार्यभार पड़ रहा है।ज्ञापन में मेटरनिटी विंग के समस्त चिकित्सकों के हस्ताक्षर हैं। डॉक्टरों ने प्रशासन से शीघ्र आवश्यक कार्यवाही करते हुए मरीज हित में उचित निर्णय लेने की मांग की है। अब देखना होगा कि अस्पताल प्रबंधन इस मामले में क्या कदम उठाता है।

इस संबंध में जब सिविल सर्जन डॉ. शिल्पी सराफ से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अस्पताल में पूरे स्टाफ का रोटेशन किया जा रहा है। ड्यूटी लगाने और हटाने का कार्य अस्पताल प्रबंधन के अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि वर्तमान में संबंधित अधिकारी अवकाश पर हैं।

उल्लेखनीय है कि बीती माह पहले सर्जरी ओटी से संबंधित उक्त नर्स की ड्यूटी बदले जाने के बाद मामला तूल पकड़ गया था। ओटी के चार चिकित्सकों और वही नर्स ने मिलकर विरोध किया और सवाल उठाया कि उसे वहां से क्यों हटाया गया। इस निर्णय को लेकर अस्पताल परिसर में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया और मामला शिकायतों तक पहुंच गया। बताया जाता है कि इस संबंध में कई स्तरों पर लिखित शिकायतें की गईं, जिसके बाद प्रकरण की जांच वर्तमान में सीएमएचओ कार्यालय में जारी है।

चकमा देकर 3 वर्ष से गांजा तस्करी मामले में फरार आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार


शहडोल

जिले की ब्यौहारी पुलिस ने गांजा तस्करी के एक बड़े मामले में फरार चल रहे आरोपी को आखिरकार गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया है। वर्ष 2023 में पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक इकोस्पोर्ट कार रीवा की ओर जा रही है, जिसमें भारी मात्रा में गांजा रखा हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस ने घेराबंदी कर वाहन का पीछा किया, लेकिन चालक कार को जंगल के रास्ते ले गया और अंधेरे का फायदा उठाकर गांजा से भरी कार छोड़कर फरार हो गया था।

घटना के दिन पुलिस ने मौके से कार जब्त कर तलाशी ली थी। तलाशी के दौरान वाहन से 87 किलो गांजा बरामद किया गया था। हालांकि आरोपी की पहचान नहीं हो सकी थी और वह लगातार पुलिस की गिरफ्त से बाहर रहा। मामले की फाइल खुली रही, लेकिन ठोस सुराग नहीं मिल पा रहा था।

हाल ही में थाना प्रभारी जिया उल हक ने मामले की जांच दोबारा तेज की। कार के नंबर के आधार पर वाहन की जानकारी खंगाली गई तो पता चला कि वाहन छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा थाना क्षेत्र में पंजीकृत था। पुलिस जब वाहन मालिक तक पहुंची तो उसने बताया कि उसने घटना से पहले वर्ष 2023 में बिलासपुर स्थित एक ऑटो डीलर के माध्यम से वाहन इमरान पिता मुबारक खान को बेच दिया था। पुलिस टीम ने बिलासपुर पहुंचकर दबिश दी और आरोपी इमरान पिता मुबारक खान को गिरफ्तार कर लिया। मंगलवार को आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह कार खरीदने के बाद गांजे की खेप लेकर जा रहा था, 

 पीसीसी रोड निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल, ठेकेदार और अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप


अनूपपुर

जिले की ग्राम पंचायत सकोला में इन दिनों पीसीसी रोड का निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन इस कार्य की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। बताया जा रहा है कि राजू भरिया के घर से मुख्य मार्ग तक बनाई जा रही इस सड़क के निर्माण में स्वीकृत एस्टीमेट (अनुमानित लागत और मानक) की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है।

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता विहीन सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे भविष्य में इसके जल्दी क्षतिग्रस्त होने की आशंका है। उनका कहना है कि न तो तय पैमाने के अनुसार सीमेंट-बालू का मिश्रण हो रहा है और न ही मोटाई का ध्यान रखा जा रहा है। इससे पूरा निर्माण कार्य संदेह के घेरे में आ गया है।

स्थानीय निवासियों ने इस घटिया निर्माण के लिए पंचायत के सचिव और सहायक यंत्री (इंजीनियर) लव श्रीवास्तव की मिलीभगत का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि इंजीनियर लव श्रीवास्तव का नाम विभागीय मामलों को लेकर अक्सर चर्चा और सुर्खियों में रहता है, और अब इस निर्माण कार्य में भी उनकी भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। आरोप है कि वे ठेकेदार को मानकों के विपरीत निर्माण की छूट दे रहे हैं, जिससे जनता के पैसे का दुरुपयोग हो रहा है।

क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निर्माण कार्य की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। फिलहाल इस मामले में किसी भी अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

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