नियम का उल्लंघन व मास्क न लगाने वालो पर पुलिस की चालानी कार्यवाही


अनूपपुर/भालूमाड़ा

अनुविभागीय अधिकारी कोतमा सहित भालूमाड़ा पुलिस द्वारा कुशियरा हनुमान तिराहा सहित अन्य स्थानों मास्क न लगाने वाले लोगो पर की गई चालानी कार्यवाही ,

कोरोना संक्रमण को दृष्टिगत रखते हुए पुलिस अधीक्षक अनूपपुर श्री मांगीलाल सोलंकी के दिशा निर्देशों के अनुसार अनूपपुर जिले में लगाया गए  सम्पूर्ण लॉक डाउन पर अनुविभागीय अधिकारी कोतमा शिवेंद्र सिंह बघेल के मार्गदर्शन में भालूमाड़ा थाना प्रभारी श्री हरिशंकर शुक्ला के साथ आज कुशियरा हनुमान तिराहा,बदरा सहित कई स्थानों पर  चेकिंग चलाया  गया है  अभी तक मास्क न लगाने तथा बेवजह घूमने वाले कई लोगों पर चालानी कार्यवाही की गई है कार्यवाही में अनुविभागीय अधिकारी कोतमा शिवेंद्र सिंह बघेल थाना प्रभारी भालूमाड़ा हरिशंकर शुक्ला उप त्रिलोक सिंह,, आरक्षक कर्मजीत सिंह आरक्षणक विश्वजीत मिश्रा स्वदेश सिंह संजय वर्मा आरक्षक राकेश समेत पुलिस बल उपस्थित रहा है

तेजी से हो रहा कोरोना टीकाकरण में युवाओं में काफी उत्साह का माहौल


अनूपपुर/कोतमा

कोरोना से बचाव के लिए शासन के द्वारा टीकाकरण का  कार्य 18 वर्ष से 44 वर्ष के लोगों का तेजी से किया जा रहा है जिसको लेकर प्रशासन के द्वारा प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है लोगों के दिमाग में जो भ्रम फैला है उसे भी दूर करने का प्रयास किया जा रहा है । 28 मई को नगर के उत्कृष्ट विद्यालय में 18 वर्ष से ऊपर के लोगों को टीकाकरण  कार्य किया जा रहा है जिसमें युवाओं में काफी उत्साह टीका को लेकर देखने को मिल रहा है टीकाकरण केंद्र में युवाओं की संख्या ज्यादा देखने को मिली ग्रामीण क्षेत्र के ग्राम रेउला से आए युवा मोहन यादव ने बताया कि जिस तरह से वर्तमान में ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है उसको देखते हुए अपनी एवं अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर वह 6 किलोमीटर दूर से कोतमा टीकाकरण केंद्र पहुंचकर आज टीका लगवाया उन्होंने सभी युवाओं से भी अपील की है कि टीका से डरे नहीं कोरोना से बचाव के लिए टीका लगवाना अति आवश्यक है अतः आगे आकर टीका लगवाए । वही नगर के वार्ड क्रमांक 6 निवासी रोहित जैन ने कहां की आज मैंने भी कोरोना से बचाव के लिए टीका लगवाया है उन्होंने कहा कि लोगों के बीच में टीका को लेकर जो भय का माहौल व्याप्त है उसे दूर करें और आगे आकर टीका लगवाएं ।

मानवता अपराधी की तरह जंजीरों में जकड़कर कैद, कब मिलेगी आजादी

*पड़ोसियों को पत्थर मारकर कर रहा था घायल, पुलिस औरचिकित्सा विभाग को भी दी जानकारी*


अनूपपुर 

 बिजुरी नगर में मानसिक रूप से विक्षिप्त युवक को परिजनों के द्वारा शासकीय सहायता न मिलने से परेशान होकर घर में ही जंजीरों से जकड़ कर रखा गया है । जंजीरों को देखकर ऐसा लगता है जैसे वह कोई अपराधी हो लेकिन इसके अलावा परिजनों के पास और कोई रास्ता भी नहीं है । विक्षिप्त युवक के द्वारा पड़ोसियों को पत्थर मारकर घायल करने के साथ ही परिजनों को भी मारने का प्रयास किया जाता है । ऐसे में उनके पास इस उपाय के सिवा कोई रास्ता भी विक्षिप्त युवक को नियंत्रित करने के लिए नहीं बचा था ।

*लगभग 10 वर्षों से बीमार है साकिर*

बिजुरी नगर के वार्ड क्रमांक 6 निवासी 30 वर्षीय साकिर मोहम्मद बचपन से ही ऐसा नहीं था बल्कि स्नातक की पढ़ाई के दौरान मानसिक अवसाद से ग्रसित हो जाने के कारण वह इस बीमारी की चपेट में आ गया । जिसके पश्चात एसईसीएल में कार्यरत पिता के द्वारा इलाज कराया जाता रहा । तब तक वह कुछ ठीक अवस्था में था । पिता का निधन हो जाने के पश्चात घर की हालत बिगड़ने लगी इसके साथ ही इलाज के लिए रुपए का अभाव भी हो गया । जिसके कारण बीते 10 वर्षों से साकिर मानसिक बीमारी से ग्रसित है । बीच-बीच में इलाज हो जाने से वह कुछ समय के लिए ठीक भी हो जाता है । लेकिन फिर से परिजनों की बात ना मानने तथा समय पर दवाइयों का सेवन न करने से वह गंभीर रूप से इस बीमारी से ग्रसित हो चुका है ।

*पड़ोसियों को पत्थर मार कर कर देता है घायल*

लगभग 1 वर्ष पूर्व शाकिर की मानसिक स्थिति ठीक हो जाने के कारण वह अंबिकापुर में नौकरी कर रहा था । जिसके पश्चात मानसिक दौरा पड़ने पर बीते 4 महीने से वह ऐसी ही स्थिति में है । जिसके बाद परिजन उसे घर लेकर आ गए लेकिन यहां उसने पड़ोसियों को पत्थर मारकर घायल करना शुरू कर दिया । जिसके बाद मजबूरी में परिजनों को उसे जंजीरों से कैद करना पड़ा ।

*इलाज की व्यवस्था ना होने से बनी परेशानी*

इलाज के लिए शासकीय सहायता तथा मानसिक चिकित्सालय आसपास ना होने के कारण साकिर के परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है । कुछ वर्ष पूर्व तक मानसिक स्थिति ठीक थी बीच-बीच में कुछ महीने के लिए वह अस्वस्थ हो जाता था । इसी बीच पागलपन से परेशान होकर पत्नी द्वारा तलाक ले लिए जाने से वह और भी मानसिक अवसाद से ग्रसित हो गया । परिजनों द्वारा इलाज के लिए भी चिकित्सालय जाकर मदद मांगी गई लेकिन वहां कोई सहायता नहीं मिलने से परिजन भी परेशान हैं । पुलिस से सहायता मांगने पर बताया गया कि पूर्व में पागल एक्ट था जिसे समाप्त कर दिया गया । जिसके कारण अब पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है ।

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