अतिथि शिक्षक ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, माँ की मौत के सदमें से मानसिक रूप में था अस्वस्थ


शहडोल

मां की मृत्यु के गहरे सदमे में एक अतिथि शिक्षक ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह दर्दनाक घटना शहडोल के गोहपारू थाना क्षेत्र के चुहिरी गांव की है। मृतक लंबे समय से अकेलेपन और मानसिक अवसाद से जूझ रहा था। मां के निधन के बाद वह और अधिक गुमसुम रहने लगा था।

पुलिस के अनुसार चुहिरी निवासी अतिथि शिक्षक दिलीप गुप्ता पिता स्वर्गीय नत्थूलाल गुप्ता (उम्र 43 वर्ष) ने अपने ही घर में फांसी लगाकर जीवन समाप्त कर लिया। दिलीप गुप्ता पड़ोसी गांव बरेली स्थित एक स्कूल में अतिथि शिक्षक के पद पर कार्यरत थे। उनका विवाह नहीं हुआ था। परिवार में केवल एक बहन है, जिसकी शादी पहले ही हो चुकी है।

बताया गया कि लगभग दो माह पूर्व बीमारी के चलते उनकी बुजुर्ग मां का निधन हो गया था। इसके बाद से दिलीप मानसिक रूप से पूरी तरह टूट गए थे और अधिकतर समय अकेले रहते हुए चुपचाप रहते थे।

बुधवार सुबह जब काफी देर तक दिलीप ने घर का दरवाजा नहीं खोला तो पड़ोसियों को अनहोनी की आशंका हुई। एक पड़ोसी ने कई बार दरवाजा खटखटाया, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद दरवाजा तोड़ा गया, जहां दिलीप का शव फांसी के फंदे पर लटका मिला। घटना की सूचना तत्काल गोहपारू पुलिस को दी गई।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई की। मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या का कारण मानसिक अवसाद और मां की मृत्यु का सदमा माना जा रहा है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। घटना के बाद गांव में शोक की लहर फैल गई है।

नसबंदी ऑपरेशन हुआ फेल, महिला हुई गर्भवती, मुआवजे की मांग, दिव्यांग ने खेती करने की दी चेतावनी


अनूपपुर 

जनसुनवाई के दौरान दो ऐसे मामले प्रशासन का ध्यान खींचा, नसबंदी ऑपरेशन फेल होने से परेशान महिला न्याय की गुहार लगाने पहुंची, वहीं दूसरी ओर एक दिव्यांग किसान वर्षों से लंबित मुआवजे की मांग करता नजर आया।

कोतमा तहसील के थानगांव की रहने वाली 27 वर्षीय चांदनी केवट ने स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। चांदनी ने बताया कि उनके पहले से दो बच्चे हैं, इसलिए उन्होंने वर्ष 2022 में कोतमा स्वास्थ्य केंद्र में एलटीटी नसबंदी ऑपरेशन कराया था। ऑपरेशन के बाद विभाग द्वारा उन्हें सफल नसबंदी का प्रमाण पत्र भी दिया गया, लेकिन तीन साल बाद वह फिर से गर्भवती हो गईं।

चांदनी केवट ने बताया कि तीन महीने की गर्भवती होने की पुष्टि के बाद से पूरा परिवार मानसिक और आर्थिक तनाव में है। उन्होंने इसे पूरी तरह डॉक्टरों की विफलता बताया और शासन से मुआवजे की मांग की। इस पर कलेक्टर हर्षल पंचोली ने मामले को गंभीर मानते हुए सीएमएचओ (CMHO) को तत्काल उचित सलाह और नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए।

इसी जनसुनवाई में ग्राम रक्सा के दिव्यांग किसान रामदीन राठौर भी अपनी शिकायत लेकर पहुंचे। उन्होंने बताया कि न्यूजोन कंपनी ने पावर प्लांट लगाने के लिए उनकी करीब 7 एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी, लेकिन काफी समय बीत जाने के बावजूद उन्हें अब तक मुआवजे की राशि नहीं मिली है।

रामदीन राठौर ने कहा कि वे कई बार प्रशासन और कंपनी के अधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं और पहले ही 7 दिन का अल्टीमेटम दे चुके हैं। किसान ने चेतावनी दी कि अगर जल्द ही मुआवजे की राशि उनके खाते में नहीं डाली गई, तो वे अधिग्रहित जमीन पर दोबारा खेती शुरू कर देंगे। कलेक्टर ने इस मामले में भी जांच के निर्देश दिए हैं।

दसवीं पास युवक दे रहा 12वीं के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण, कृषि विज्ञान प्रदर्शनी पर उठे सवाल

*छात्रों का भविष्य संकट में, निष्पक्ष जांच कराने की उठी मांग*


अनूपपुर

कोतमा नगर के शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कोतमा एवं शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कोतमा में आयोजित की जा रही तथाकथित कृषि विज्ञान प्रदर्शनी को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने पूरे आयोजन की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

जानकारी के अनुसार रोहित कुमार नामक व्यक्ति ने स्वयं लिखित रूप से यह स्वीकार किया है कि वह केवल 10वीं पास है, इसके बावजूद वही व्यक्ति 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने का दावा कर रहा है। इस तथ्य के सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था और छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं उत्पन्न हो गई हैं

स्थानीय लोगों का कहना है कि जो व्यक्ति स्वयं 10वीं पास है, वह 12वीं स्तर के विद्यार्थियों को किस प्रकार और किस स्तर का प्रशिक्षण दे सकता है, यह अपने आप में बड़ा सवाल है। ऐसे में यह आशंका भी जताई जा रही है कि पूरी कृषि विज्ञान प्रदर्शनी केवल कागज़ी औपचारिकताओं और फोटो तक सीमित खानापूर्ति बनकर न रह जाए

यह मामला सामान्य नहीं है, बल्कि सीधे-सीधे शिक्षा की गुणवत्ता, विद्यार्थियों के भविष्य और शासन की योजनाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसे व्यक्ति को प्रशिक्षण देने की अनुमति किस आधार पर दी गई और क्या उसकी शैक्षणिक योग्यता की कोई जांच की गई थी

इस पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कोतमा की प्राचार्य निर्मला दुबे एवं शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कोतमा के प्राचार्य आर.के. मिश्रा से निवेदन किया गया है कि वे इस मामले का तत्काल संज्ञान लें और आवश्यक जांच कराकर स्थिति स्पष्ट करें।

स्थानीय नागरिकों एवं अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि कहीं लापरवाही पाई जाती है तो दोषियों पर सख़्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में शिक्षा के नाम पर इस तरह का दिखावा दोबारा न हो सवाल छात्रों के भविष्य का है, इसलिए सच्चाई का सामने आना बेहद ज़रूरी है।

MKRdezign

,

संपर्क फ़ॉर्म

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget