खैर के वृक्षों की अवैध कटाई, 8 वृक्षो की कटाई के जगह 60 वृक्षो की हुई कटाई, वन परिक्षेत्राधिकारी की सांठगांठ
खैर के वृक्षों की अवैध कटाई, 8 वृक्षो की कटाई के जगह 60 वृक्षो की हुई कटाई, वन परिक्षेत्राधिकारी की सांठगांठ
उमरिया
जिले के वन परिक्षेत्र नौरोजाबाद के कल्दा ग्राम पंचायत में अवैध खैर लकड़ी की कटाई मामले में वन विभाग के परिक्षेत्र स्तर के अधिकारियों की संलिप्तता के उजागर होने से मामले में नया मोड़ आ गया है, इस मामले की जांच अनुविभागीय अधिकारी कुलदीप त्रिपाठी के व्दारा की जा रही है। बताया जाता है कि कल्दा ग्राम पंचायत नौरोजाबाद परिक्षेत्र में आता है, वहाँ पर अनूपपुर जिले के जमुडी गाँव का रहने वाला शाबिर खान व मुसताक खान लकड़ी तस्कर खैर की लकड़ी की तस्करी एक लंबे समय से कर रहे हैं,यह दोनों तस्करों का नेटवर्क नौरोजाबाद के परिक्षेत्राधिकारी पीयूष त्रिपाठी की कृपा दृष्टि से चल रहा था , कतिपय तस्कर का आना जाना वन परिक्षेत्राधिकारी के यहाँ बराबर बना रहता था, लगभग एक महीने पहले शाबिर खान नामक ठेकेदार रात आठ से नौ बजे के बीच वन परिक्षेत्राधिकारी पीयूष त्रिपाठी जी के बंगले में बैठे देखे गये थे। इस तरह देखा जाये तो नौरोजाबाद परिक्षेत्र में लकडियों की तस्करी इन अधिकारियों की सलिप्तता से होती रही है। अभी हाल में इस पर चौकाने वाले तथ्य सामने आये है।
बताया जाता है कि खैर लकड़ी के तस्कर शाबिर खान ने कल्दा ग्राम के संग्राम सिंह के नाम से ग्राम पंचायत से खैर के आठ वृक्षों की कटाई की अनुमति लेकर साठ वृक्षों की कटाई कर डाली और चोरी -छिपे इन लकडियों का परिवहन करता रहा, इसकी जानकारी नौरोजाबाद परिक्षेत्र के वन अधिकारियों को बराबर रहती रही है, लेकिन अधिकारियों की कृपा दृष्टि के कारण मातहत कर्मचारियों ने कार्यवाही की हिम्मत नहीं जुटा पायी। देखने में आया है कि खैर प्रजाति की लकड़ी वन विभाग के कर्मचारियों के आवास के सामने जो गिरकर वन विभाग के प्रांगण में गिरे हुए हैं और लकड़ी का संग्रह वन कार्यालय के बगल में इस तरह कराया गया था जिससे सहजता से यह अंदाजा लगाया जा सके कि यह लकड़ी कटाई का काम वन विभाग की देख रेख में संचालित हो रहा है। यद्यपि इस मामले में वन परिक्षेत्राधिकारी पीयूष त्रिपाठी ने खैर की लकड़ी राजस्व सीमा पर होने की बात कहकर अपनी डियूटी पूरी कर लिये हैं जबकि अनुविभागीय अधिकारी कुलदीप त्रिपाठी ने मामले में संदेह व्यक्त करते हुए जांच का बिषय बताया है। फिलहाल खैर की अवैध कटी गयी लगभग बीस चट्टा लकड़ी को जब्त कर डिपो उमरिया ले जाया गया है। देखना है कि खैर प्रजाति के राष्ट व्यापी तस्करी के इस मामले में विभाग के आला कमान अधिकारी किस नतीजे पर पहुचते है। फिर भी पूरे मामले में वन विभाग के कतिपय अधिकारियों के ऊपर लग रहे तीखे आरोप उनका पीछा करते दिखाई दे रहे हैं।
आखिर कार वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारी जब इस तरह तस्करों से मिलीभगत करते देखे जायेगें, भले ही मामला राजस्व भूमि के अन्तर्गत काटी गयी संपदा का है वन भूमि पर पेड़ नहीं कटे पर जिन अधिकारियों के भरोसे अपार वन संपदा वह कब तक और कितनी सुरक्षित रह पायेगी यह सवाल जन मानस में फैला हुआ है ।इस संदर्भ में वन मंडलाधिकारी उमरिया विवेक सिंह से मामले की विस्तृत जानकारी लेने की कोशिश की गयी, लेकिन बात नहीं हो पायी।


