जंगल में गश्त के दौरान सुरक्षा श्रमिक पर बाघ ने किया हमला, आई गंभीर चोट


उमरिया 

जिले के मानपुर बफर परिक्षेत्र में जंगल गश्त के दौरान एक सुरक्षा श्रमिक पर बाघ ने हमला कर दिया। इस हमले में डोभा गांव निवासी दयाराम बैगा (48) गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना गुरुवाही बीट के पीएफ 612 अंतर्गत राजस्व क्षेत्र बोदवाह में हुई।

बाघ के हमले से दयाराम बैगा के सिर, आंख और बाएं हाथ में गंभीर चोटें आई हैं। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और घायल श्रमिक को मानपुर अस्पताल में प्राथमिक उपचार के लिए भर्ती कराया। उनकी गंभीर हालत को देखते हुए, बेहतर इलाज के लिए उन्हें जबलपुर रेफर कर दिया गया है।

मानपुर बफर परिक्षेत्र के अधिकारी मुकेश अहिरवार ने बताया कि घायल श्रमिक के साथ वन विभाग की टीम लगातार संपर्क में है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह क्षेत्र कोर जोन से सटा हुआ है, जहां बाघों की आवाजाही सामान्य है। इस घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और गश्त भी बढ़ा दी गई है।

वन विभाग ने आसपास के ग्रामीणों और जंगल में काम करने वाले श्रमिकों से सतर्क रहने की अपील की है। विभाग द्वारा क्षेत्र में बाघ की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

अधूरे पुल पर चढ़ी कार हुई क्षतिग्रस्त, बाल-बाल बचे लोग, कोहरे के कारण हुआ हादसा


शहडोल

जिले में इन दिनों कड़ाके की ठंड के साथ घना कोहरा जनजीवन और यातायात दोनों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। रात और सुबह के समय कोहरे की सफेद चादर सड़कों पर छा जाती है, जिससे दृश्यता बेहद कम हो जाती है। इसी कोहरे के चलते उमरिया–अनूपपुर नेशनल हाईवे 43 पर एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया।

घटना सोहागपुर थाना क्षेत्र के ठीक सामने निर्माणाधीन अधूरे पुल की है। बताया जा रहा है कि कोहरे की वजह से सड़क ठीक से दिखाई नहीं दी और तेज रफ्तार कार सीधे अधूरे पुल पर चढ़ गई। हादसे में कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जबकि कार सवार लोगों को मामूली चोटें आई हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुल कई वर्षों से निर्माणाधीन है, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका है। हाईवे से पुल की ओर जाने के लिए मिट्टी की पिचिंग कर दी गई है, जिससे हाईवे और पुल की सड़क का लेवल लगभग एक जैसा हो गया है। इसी कारण वाहन चालक भ्रमित हो जाते हैं और आए दिन हादसे हो रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि निर्माण एजेंसी की ओर से न तो कोई सूचना पटल लगाया गया है और न ही चेतावनी के लिए सांकेतिक बोर्ड।

स्थानीय निवासी निलेश कुशवाहा ने बताया कि इस अधूरे पुल के आसपास पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें लोगों की जान तक जा चुकी है। इस समस्या को लेकर सीएम हेल्पलाइन और जिला प्रशासन में कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वाहन मालिक अब्दुल हुसैन ने बताया कि वह रात में महेंद्रगढ़ से दियापीपर जा रहे थे। घने कोहरे के कारण उन्हें सड़क का अंदाजा नहीं लग पाया और पुल व हाईवे के बीच कोई स्पष्ट संकेत नहीं होने से कार सीधे पुल पर चढ़ गई। 

दिन में जलती हैं स्ट्रीट लाइट,  लाखों का नुकसान, सीएमओ की चुप्पी पर सवाल


शहडोल

नगर परिषद बकहो में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था से हो रहा लगातार आर्थिक नुकसान अब प्रशासनिक उदासीनता का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है। जानकारी के अनुसार नगर परिषद बकहो क्षेत्र में लगी 90 वाट की लगभग 200 स्ट्रीट लाइटें सुबह 11:30 बजे तक दिन के उजाले में भी चालू रहती हैं, जिससे परिषद को प्रतिदिन हजारों रुपये का अनावश्यक नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रतिवर्ष अनुमानित नुकसान लगभग ₹2.26800/- लाख यह राशि नगर परिषद के विकास कार्यों के बजट से सीधे कटकर बेवजह बिजली बिल में खर्च हो रही है।

आधी ड्यूटी, पूरी व्यवस्था लावारिस सूत्रों के अनुसार नगर परिषद बकहो में पदस्थ इलेक्ट्रिशियन जितेंद्र दाहिया नगर परिषद बकहो में सुबह 12.00 बजे तक ड्यूटी पर उपस्थित लगने पहुंचते हैं। इसके बाद स्ट्रीट लाइट नियंत्रण और निगरानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं रहती, जिसके चलते दिन में भी लाइटें बंद नहीं हो पातीं। मुख्यालय में निवास न करना, नियमों की अनदेखी नगर परिषद बकहो के कई कर्मचारियों द्वारा—पदस्थ मुख्यालय बकहो में निवास नहीं किया जा रहा है,बल्कि शहडोल से आकर सीमित समय ड्यूटी कर वापस लौटने की बात सामने आ रही है। जबकि मध्यप्रदेश नगर पालिका कर्मचारी सेवा नियम, 1968 के तहत कर्मचारियों का मुख्यालय में रहना अनिवार्य है। लोक सेवक द्वारा जानबूझकर लापरवाही बकहो सीएमओ की निष्क्रियता पर उठ रहे सवाल सबसे अहम सवाल यह है कि इतनी स्पष्ट जानकारी, लिखित शिकायत और आर्थिक नुकसान के बावजूद मुख्य नगर पालिका अधिकारी बकहो द्वारा अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई। न तो—विभागीय जांच शुरू हुई,न जिम्मेदारी तय की गई,न ही आर्थिक नुकसान की रिकवरी का आदेश जारी हुआ। जानकारों का कहना है कि कार्रवाई न करना भी सेवा अपराध की श्रेणी में आता है।अब ऊपर से कार्रवाई की मांग तेज स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा मांग की जा रही है कि—जिला कलेक्टर शहडोल इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराएं जिम्मेदार कर्मचारी के साथ-साथ कार्रवाई न करने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही तय हो नगर परिषद को हुए नुकसान की रिकवरी सुनिश्चित की जाए।

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