गाली गलौच, मारपीट कर जान से मारने की दी धमकी, थाने में हुई शिकायत


अनूपपुर। 

जिले के ग्राम भाद निवासी शिवकुमार मिश्रा पिता रामप्रमोद मिश्रा उम्र 33 वर्ष ने थाना भालूमाड़ा मे शिकायत दर्ज कराई है कि उसने 13 अक्टूबर को अपने भांजे को शाम करीब 7 बजे फोन लगाकर बताया कि उदित मिश्रा व प्रहलाद सिंह मुझे पुरानी ग्राम पंचायत के पास मारपीट किये हैं। तब फरियादी अपने घर के सामने भांजे से बात कर रहा था तभी फोन की बातों को सुनकर उदित मिश्रा बोला कि बुला ले कौन गुण्डा है यह कहते हुये लोहे की पाइप लेकर गालियां देने लगा। इसी बीच उदित मिश्रा के पिता रामसुफल मिश्रा, आदित्य मिश्रा दोनो हाथ मे डण्डा व प्रहलाद सिंह लोहे की पाइप से मुझसे मारपीट करने लगे। इसी बीच मैं और पिताजी घर के अंदर भागे तो चारो घर मे घुसकर मारपीट किये। हल्ला सुनकर पड़ोसी लक्ष्मण गुप्ता व राजकुमार मिश्रा आकर बीच बचाव किये। इस दौरान चारों बोल रहे थे कि आज तो बच गये अगर दोबारा मिले तो जान से खत्म कर देंगे। मारपीट से फरियादी को बायें हाथ की भुजा, दाहिने हाथ की कलाई, पिता के नाक, सिर मे चोट आई है वही भांजे प्रशांत को गर्दन मे पीट चोट पहुंची है। शिवकुमार मिश्रा की शिकायत पर आरोपी उदित मिश्रा, प्रहलाद सिंह, आदित्य मिश्रा, रामसुफल मिश्रा के विरूद्ध अपराध धारा 296, 115 (2), 351 (3), 3 (5), 331 (6) बीएनएस कायम कर पुलिस विवेचना कर रही है।

आशा व आशासंगिनी कर्मचारी संघ ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर सौपा ज्ञापन


अनूपपुर

आशा/आशासंगिनी कर्मचारी संघ (संबद्ध- भारतीय मजदूर संघ) के राष्ट्रव्यापी आव्हान पर आशा संघ जिला अनूपपुर द्वारा धरना प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिला कलेक्टर अनूपपुर के माध्यम से सौपा गया।

भारत सरकार को स्यारूय एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अधीन देश ने लगभग 22 लाख आशा वर्कर्स कार्यरत है। जो ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में लोगों का स्वास्थ्य सम्बन्धी जानकारी टीकाकरण, स्वाभा जच्चा बच्चा देखमल संस्थागत प्रसव आदि के अलावा राज्य सरकार इनसे कई अन्य कार्य पौ संचालित करवाती है। केन्द्र और राज्य सरकार क्रो मिलाकर 22 लाख से अधिक आशा कार्यकर्ता ग्रामीण क्षेत्र में कार्य करती है। इसके बदले इन्हें कोई मानधन अथवा कोई वेतन नहीं दिया जाता बल्कि अपल प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जाता है। समाज का कुपोषण दूर करते-करते आशा परिवार सहित कुपोषण का शिकार हो रही है। इन्ही कार्यों को राज्य के सरकारी कर्मचारी भी करते हैं। जो वेतन के साथ अन्य सुविधाएं ले रहे हैं। 11 सितम्बर 2011 को प्रधानमंत्री जी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए आशा वर्कर्स से वार्तालाप कर प्रोत्साहन राशि को दोगुना करने का ऐलान किया, लेकिन मंत्रालय से मात्र 1000 रु की वृद्धि की गई। वर्कर्स में हताशा व्याप्त है। वे लोग खुद को ठगा महसूस कर रहीं है। आंकड़ों पर नजर डाले तो आशा वर्कर्स से प्रयासों से ही जच्चा-बच्या मृत्यु दर में भारी कमी आई है। और समाज में अनितम सहाय व्यक्तियों तक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुंच पा रहा है। कोरोना काल में भी बहने खुद को बत्तरे में डालकर पूरी ईमानदानी के साथ अपना कर्तव्य निभा रही है, और लोगो को इस वायरस के प्रति जागरूक कर रही है।

ज्ञापन कार्यक्रम में आशा संघ अनूपपुर की पदाधिकारी संपतिया राठौर, भामसं प्रदेश कार्यसमिती सदस्य ताराचंद यादव, भामसं के कार्यकारी जिलाध्यक्ष संतोष रैकवार, जिला मंत्री सुमित बक्सरिया, कार्यालय मंत्री जवाहर साहू, सहित आशा संघ अनूपपुर की सैकड़ो बहनें उपस्थित रही।जैसा की सर्वविदित हैं कि कुछ दिन पूर्व भारतीय मजदूर संघ के अखिल भारतीय उप महामंत्री एवं आशा -आंगनवाड़ी संघ प्रभारी सुरेन्द्र पांडे का अल्प प्रवास अनूपपुर जिला में हुआ था, तभी उन्होंने दिनांक 14 अक्टूबर 2024 को राष्ट्रव्यापी आव्हान के विषय में बताते हुये आशा वर्कर्स की समस्याओं के निराकरण हेतु ज्ञापन कार्यक्रम के विषय में जानकारी दी थी।

बढ़ते महिला अपराध के विरोध में पूर्व विधायक के नेतृत्व में हुआ विरोध प्रदर्शन

*राज्यपाल के नाम, एस डी एम को सौंपा गया ज्ञापन*


अनूपपुर

मध्यप्रदेश में महिलाओं पर हो रहे अपराधों की खबरे सामने आ रही है और इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस द्वारा लगातार प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। इसी मुद्दे को लेकर दिनांक 14 अक्टूबर को अनूपपुर जिले के कोतमा विधानसभा में पूर्व विधायक मनोज कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में कोतमा नगर के हृदय स्थल गांधी चौक में विरोध प्रदर्शन कर प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और फिर महामहिम राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन एस डी एम कोतमा को सौंपा गया। ज्ञापन में महिला अपराधों का उल्लेख कर लेख किया गया कि मध्यप्रदेश लगातार महिलाओं पर अपराध की संख्या बढ़ती जा रही है, मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार के शासनकाल में महिलायें सुरक्षित नही हैं। मध्यप्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अपराधों में वृद्धि हुई है, जिसमें बलात्कार, घरेलू हिंसा, और यौन उत्पीड़न शामिल हैं। राज्य में महिलाओं के लिए कानूनी सुरक्षा की कमी है, जिससे अपराधियों को प्रोत्साहन मिलता है। पुलिस और न्यायपालिका को महिला अपराधों के मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए। राज्य में महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए कदम उठाने चाहिए। महिला अपराधों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए अभियान चलाना चाहिए। महिला अपराधों के लिए विशेष अदालतें स्थापित करना। पुलिस और न्यायपालिका को महिला अपराधों के मामलों में प्रशिक्षित करना चाहिए। महिला सुरक्षा के लिए विशेष बल का गठन करना चाहिए। महिला सशक्तिकरण के लिए विशेष कार्यक्रम चलाना चाहिए। अंत में अनुरोध करते हुए मांग किया गया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में मध्यप्रदेश में लगातार महिला अपराधों की संख्या बढ़ती जा रही है, जल्द से जल्द महिला सुरक्षा के संबंध में आवश्यक कार्यवाही करने की कृपा करें। ज्ञापन  का वाचन वरिष्ठ कांग्रेस नेता जे पी श्रीवास्तव ने किया। 

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