अतिक्रमणकारियो के ऊपर वन विभाग का चला बुलडोजर वन भूमि से हटाया अवैध अतिक्रमण


उमरिया

जिले के मानपुर परिक्षेत्र अंतर्गत लगातार वन भूमि में अतिक्रमण करने की खबरे वन अमले को लग रही थी वन भूमि पर अवैध अतिक्रमण को रोकने व वन भूमि को मुक्त कराने उपवन मंडल अधिकारी मानपुर बी एस ऊपल के निर्देशन में वन परिक्षेत्र अधिकारी मानपुर मुकेश अहिरवार ने वन भूमि से अतिक्रमण हटाए जाने के लिए वनकर्मियो की टीम गठित करते हुए वन भूमि से अतिक्रमण हटाए जाने के निर्देश दिए आदेश के पालन में आज वन कर्मियों की गठित टीम द्वारा पीएफ 346 सरमनिया वीड अंतर्गत वन भूमि में अवैध अतिक्रमणकारियों के बाड़ी,झोपड़ी को बुलडोजर से ध्वस्त करते हुए वन भूमि को क्रमशः राजमणि सिंह, जय लाल बैग, संतोष चौधरी, मोहन चौधरी, दयाशंकर शुक्ल, राजा मिश्रा, परमलाल कुशवाहा, राजीव तिवारी,सभी अतिक्रमण कारियो से वन भूमि को खाली कराया गया एवं वन क्षेत्र मानपुर पीएफ 345 में सखेंद्र तिवारी,अमरनाथ पटेल के द्वारा अतिक्रमण की गई वन भूमि को भी खाली करा भविष्य में वन भूमि में बाड़ी, झोपड़ी बना अतिक्रमण न करने की समझाइएस दी गई उक्त कार्यवाही में उपवन क्षेत्रपाल रविशंकर महोबिया, डिप्टी रेंजर नंदलाल मरावी, वनपाल रोशन लाल तिवारी, वनपाल विक्रम सिंह, वनपाल अनीता दहायत, सुरक्षा कर्मी मानिक लाल यादव, विजय मिश्रा, इंद्रजीत वर्मा, शिवपूजन सिंह, भगवानदास सभी की वन भूमि से अतिक्रमण हटाने में अहम भूमिका रही।

मॉ के डांटने पर दत्तक पुत्र ने कुल्हाड़ी मारकर की हत्या, आरोपी हुआ फरार 

*झाडिय़ों में महिला का मिला सड़ा-गला शव, जांच में जुटी पुलिस*


देर रात घर आने पर मां ने डाटा आवेश में दत्तक पुत्र ने सिर पर कुल्हाड़ी मार की हत्या, फरार

अनूपपुर। 

जिले के बिजुरी थाना अंतगर्त गलिया टोला में अज्ञात महिला के शव झाडियों होने की सूचना पर पुलिस मौका निरिक्षण करने पर ज्ञात हुआ कि सरोज कोल पति प्रदीप निवासी गलैया टोला बिजुरी का शव दो से तीन दिन पुराना झाडियो में पड़ा हैं जिस पर पंचनामा बना पोस्ट मार्डम उपरांत शव परिजनों को सौंप कर जांच प्रारंभ कर दी।

मृतक महिला की पहचान गलैया टोला निवासी 45 वर्षीय सरोज कोल उर्फ मुन्नी बाई पति प्रदीप कोल जो शव घर के समीप ही झाड़ियां में पड़ा हुआ पाया गया। जब शव से दुर्गंध आने लगी तो मोहल्ले के लोगों को जानकारी पुलिस को दी गई। जिस पर थाना प्रभारी विकास सिंह परिहार सहित अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक इसरार मंसूरी के मौके पर पहुंचकर के घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। इसके साथ ही एफएसएल तथा डॉग स्क्वाड के द्वारा मौके में साक्ष्य जुटाए गयें। महिला का शव कई दिन पुराना है।

बताया जा रहा हैं कि मृतिका के दत्तक पुत्र ने मृतिका द्वारा 19-20 सितंबर की रात उसे घर देर से आने पर डटने मारने पर आवेश में मृतिका के सिर में कुल्हाड़ी से जानलेवा हमला कर हत्या की गई है। पुलिस ने हत्या में उपयोग की गई हथियार जप्त कर लिया हैं। उल्लेखनीय है कि हत्यारा दत्तक पुत्र मृतिका की छोटी बहन का वास्तविक पुत्र है जिसे मृतिका ने बचपन से पाला है उसके दस्तावेज आधार कार्ड मार्कशीट आदि में मृतिका का पति ही आरोपी का पिता है। पुलिस ने आरोपित पुलिस पकड़ से बाहर हैं।

जान हथेली में रखकर तेज बहाव में नदी को पार करते हैं स्कूली छात्र- छात्राएं व ग्रामीण

*आजादी के 77 वर्ष बाद भी लोगो को नही मिली सुविधा, क्या यही है विकास*


शहडोल 

जिले में पुल निर्माण नहीं होने से 50 से अधिक गांव के लोग नरकीय जीवन जीने को मजबूर है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की लापरवाही के चलते आधर में लटका पुल लोगों को नसीब नहीं हो रहा है।

*यह है पूरा मामला*

आलम ये है कि गांव के लोगों को बरूहा नदी (नाला) के तेज धार के बीच नदी पार करके आना-जाना पड़ रहा है, सबसे से ज्यादा दुर्दशा स्कूली छात्रों की है,जो रोजान अपनी जान हथेली में लेकर नदी के तेज धार पार कर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। बच्चों का कहना है कि उन्हें डर लगता है नदी पार करते समय कहीं किसी दिन वो इस नदी पार करते समय बह न जाए। ऐसा कोई दिन नहीं जाता जिस दिन बच्चे नदी पार करते समय भीगते न हो और उनका यूनिफॉर्म और कॉपी किताब गीली ना होती हो। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना की लापरवाही के चलते आधर में लटका पुल लोगों को नसीब नहीं हो रहा। जिससे रोजाना ग्रामीण युवा स्कूली बच्चे जान जोखी में डालकर नदी पार कर रहे और प्रशासन इस इंतजार में है की कोई बड़ी घटना हो जिसके बाद इस आधर में लटके पुल का निर्माण कराए।

*हजारी लोग नदी करते हैं पार*

आदिवासी बाहुल्य शहडोल जिले के जनपद पंचायत सोहागपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत मंडवा में बहने वाली बरुहा नदी ( नाला ) लगभग 50 से अधिक गांव के लोगों के जान का खतरा बना हुआ है। आलम ये है की पुल निर्माण नहीं होने से गांव के लोग जान जोखिम में डालकर नदी पार कर इस और से उस और जाते है। बच्चों के परिजन व ग्रामीण खुद की जान जोखिम में डालकर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए नदी पार कराते है। ऐसा कोई दिन नहीं जाता जिस दिन बच्चे नदी पार करते समय भीगते न हो और उनका यूनिफॉर्म और कॉपी किताब गीली ना होती हो।

कहने को तो प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना विभाग द्वारा एक पुल निर्माण करा रहा, लेकिन विभाग की दावपेच के चलते पिछले एक साल से पुल अधूरा बना बना पड़ा है, पुल की सौगात मिलने के बाद भी ग्रामीणों को पुल की सुविधा नसीब नहीं हो रही है,जिससे आज भी लोग रोजाना जान जोखिम में डालकर अपने जीवन का सफर तय कर रहे है। वहीं इस पुरे मामले में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के जीएमएस के मौर्य का कहना है की पुल का अलयामेंट का इशू होने व ठेकेदार की लापरवाही के चलते पुल निर्माण नहीं हो सका है। जल्द ही पुल निर्माण कर कराया जाएगा।

*आजादी के 77 वर्ष बाद भी पुल नही*

आजादी के 77 साल बाद भी बच्चों के स्कूल जाने के लिए नदी पर पुल या अन्य कोई संसाधन सरकार नहीं बना पाई है। छोटे-छोटे बच्चों को स्कूल पहुंचने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। सैकड़ों ऐसे बच्चे हैं जो अपनी जान जोखिम में डालकर गांव से स्कूल जाते हैं। छात्रों के परिजन उन्हें उफनती नदी में उतार कर नदी पार कराते हैं। मंडवा गांव में इस समस्या से छात्र ही नहीं बल्कि कई किसानों को भी काफी समस्या उठानी पढ़ रही है। जिले में आज भी पुल व सड़क नही होने से ग्रामीण व मासूम बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार कर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर है, और शासन प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना के इंतजार में पुल निर्माण नहीं करा रहा है।

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