समस्या का समाधान नहीं हुआ तो पीड़ित किसान करेंगे चुनाव का सामूहिक बहिष्कार- भूपेश भूषण
समस्या का समाधान नहीं हुआ तो पीड़ित किसान करेंगे चुनाव का सामूहिक बहिष्कार- भूपेश भूषण
शहड़ोल
शहड़ोल जिले के रामपुर बटुरा खुली खदान परियोजना में प्रभावित किसान, प्रबंधन एवं प्रशासनिक रवैय्या से लंबे अरसे से प्रताड़ित हैं। इस आशय की जानकारी सुप्रसिद्ध गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता एवं किसान नेता भूपेश भूषण ने कहा कि लंबे अरसे से किसान अपनी मांगों को स्थानीय जनप्रतिनिधियों , खान प्रबंधन एवं प्रशासनिक अधिकारी कर्मचारियों से लेकर बिलासपुर "खान मुख्य प्रबंध निदेशक" तक लिखित रूप से दिया गया। अपने मांग पत्रों को लेकर प्रभावित ग्रामीण जानो द्वारा कई बार धरना, प्रदर्शन, आंदोलन किया गया किंतु प्रबंधन एवं प्रशासन के लोग कोरा आश्वासन देकर जनसत्याग्रह को अनदेखी –अनसुनी कर कुंभकर्णी चिरनिद्रा में लीन हो गई। जिससे आक्रोशित किसान बंधुओं द्वारा पिछले दो माह पूर्व 15 दिसंबर 2023 को अहिंसक जन आंदोलन कर खदान को पूर्णतः बंद कर दिया गया। चार दिन तक सतत चले खदान बंद जन सत्याग्रह को जिला प्रशासन के प्रतिनिधि तहसीलदार बुढ़ार और एसईसीएल प्रबंधन द्वारा दो माह के अंदर समस्या का समाधान करने लिखित आश्वासन दे यह आंदोलन भी समाप्त करा दिया गया। किंतु आज इनके वादे वही ढाक के तीन पात ही साबित हुए। क्षेत्रीय किसानों की ओर से अपनी बात रखते हुए गांधीवादी कार्यकर्ता भूपेश भूषण ने कहा की दिनांक 18 दिसंबर 2023 से आज दो माह से भी अधिक वक्त बीत गई किंतु आज दिनांक 27 फरवरी 2024 तक भी मामला ज्यों का त्यों है। ग्राम पंचायत रामपुर या किसी किसान के समस्या का समाधान किया ऐसा नहीं हुआ और ना ही कोई लिखित जानकारी ही दी गई कि किसानों की समस्या का समाधान करेंगे या हमारे देश के परिधान मंत्री जैसे कोरा और झूठा आश्वासन ही दे किसानों को ठेंगा दिखाते रहेंगे। अब किसानों ने संयुक्त रूप से तय किया है की आपके नियम कानून में चाहे जो भी हो हम हमारी पुरखौती जमीन के अधिग्रहण के बदले हमारा त्वरित अधिकार चाहिए ही। अगर आप अक्षम हो तो हमे हमारा जमीन वापस करो। इतना ही नहीं ग्राम सभा को संपूर्ण अधिकार पेशा एक्ट कानून के तहत ग्राम सभा अपने गांव के हित में जो निर्णय लेना चाहेगी ले सकती है। ग्राम सभा ने यह निर्णय लिया है कि हमारे गांव के किसानों को धारा 9–1 2016 अंतिम नोटिफिकेशन के तारीख को अंतिम गाइडलाइन मानते हुए आपसी बटनबारे के आधार पर किसानों को प्रथक–प्रथक रोजगार उपलब्ध कराया जाए, मकान का मुआवजा, पेड़ और जमीनों अर्थात समस्त परिसंपत्तियों का मुआवजा का त्वरित भुगतान किया जाए। आर एंड आर (पुनर्वास) के तहत 2016 में ₹300000/– निर्धारित हुआ था तब से अब तक लगभग 8 साल बीत चुके हैं अतः इसे बढ़ाकर 10 लाख रुपया के हिसाब से भुगतान किया जाए। क्योंकि अन्य माइन्स जैसे गेवरा, कुसमुंडा सिंगरौली आदि में इसी दर पर भुगतान किया जा चुका है, वही यहां भी किया जाए, पुनर्वास के अंतर्गत बसाहट की जमीन अति शीघ्र आवंटित किया जाए, रोजगार की फाइलों को अनावश्यक रूप से विसंगति बढ़ा कर न रोका जाए, नाहक रोज नए-नए आदेश जो किसानों के हाथ में है ही नहीं पारित नहीं किया जाए। इन सभी बिंदुओं पर एक सप्ताह के अंदर विचार नहीं किया जाता है तो प्रभावित किसानों द्वारा उग्र आंदोलन किया जाएगा। आगे अपने बताया कि ग्रामीणों द्वारा निर्णय लिया गया है की अबकी बार समस्या का समाधान नहीं हुआ तो इस गांवों में लोकसभा चुनाव भी नही होगा। ज्ञात हो कि ग्राम पंचायत रामपुर और बेलिया गांव के ग्रामीणों द्वारा विगत विधानसभा चुनाव के दौरान भी मतदान रोक दिया गया था जो पुनः 3 घंटे देरी से प्रारंभ हुआ मतदान जिला कलेक्टर शहडोल की पूरी टीम सहित हाजिर हो शीघ्र ही काम करने का आशासन देने के बाद से मतदान बहिष्कार आंदोलन रोका गया था लेकिन इस बार ऐसा कदापि नहीं होगा। कोल प्रबंधन एवं प्रशासन को पूर्व समाचार पत्र के माध्यम से सूचित किया जाता है की समस्या के संधान से पूर्व चुनाव की किसी भी प्रक्रिया को रामपुर और बेलिया के किसानों के द्वारा पूरा नहीं करने दिया जाए गा। चारों तरफ बैनर लगाकर मतदान का सामूहिक बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। 2015-16 से किसानों के समस्या का समाधान न कर केवल लॉलीपॉप दिखाया जा रहा है। एक सप्ताह के अंदर जिला प्रशासन और एसईसीएल ग्रामीणों के साथ बैठकर समस्याओं का समाधान नहीं करते हैं तो आने वाले समय में लोकसभा चुनाव का सामूहिक बहिष्कार किया जाएगा।


