थाना में अधिकारियों के सामने पुलिस वालों ने उड़ाई नियम कानून की धज्जियां

*वरिष्ठ अधिकारियों का कोई डर नही फोटो खिंचाने की होड़ में भूल गए सारे नियम कायदे, इनके ऊपर कौन करेगा कार्यवाही*


अनूपपुर/भालूमाड़ा

अनुविभागीय पुलिस अधिकारी कोतमा शिवेन्द्र सिंह बघेल ने थाना भालूमाडा का वार्षिक निरीक्षण करने पहुँचे जहाँ पर समस्त अधिकारियों और कर्मचारियों को परेड़ लेते हुए थाना के माल खाना, हवालात स्टॉक,रजिस्टर तथा समस्त कमरों का निरीक्षण किया और पेंडिंग अपराध,गंभीर अपराध तथा चालान की समीक्षा करते हुए उन्होंने गंभीर अपराध के मामले में फरार चल रहे दो अपराधियों को शीघ्र गिरफ्तार करने के निर्देश दिए साथ में जनसुनवाई एवं सीएम हेल्पलाइन के तमाम मामलों के निराकरण करने हेतु भालूमाडा थाना प्रभारी हरिशंकर शुक्ला को निर्देशित किया।थाना भालूमाडा के उन तमाम उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को सम्मानित किया।


 पूरे भारत मे कोरोना महामारी की दूसरी लहर काफी खतरनाक साबित हुई लाखो लोग काल के गाल में समा चुके है कोरोना महामारी जैसे जैसे कम हो रहा हैं लगभग सभी जगह से कोरोना कर्फ़्यू हट चुका का बाजार खुलने लगा है। वैसे लोग लापरवाही करने से बाज नही आ रहे है आम आदमी तो लापरवाही करे तो प्रशासन उनके ऊपर कार्यवाही करता है और अगर प्रशासन के लोग जो नियमो का पालन करवाते हैं वो लोग ही नियमो का उल्लंघन करने लगे तो इनके ऊपर कौन कार्यवाही करेगा मामला भालूमाड़ा थाने की हैं जहाँ पर एसडीओपी साहब वार्षिक निरीक्षण करने गए थे परेड के समय तो कुछ लोगो को छोड़कर बाकी सभी लोग कोरोना नियमो का पालन करते नजर आए मगर जैसे ही परेड खत्म हुई तो थाने के सामने 15 अधिकारी कर्मचारी बिना मास्क के कोरोना नियमो की खुले आम धज्जियां उड़ा डाली फ़ोटो खिंचाने की होड़ मे सारे नियम कानून भूल गए उनको अपने आला अधिकारियों का भी बिल्कुल भी भय नही रहा। वही कोरोना कम हुआ है खत्म नही हुआ है पूरे देश मे कोरोना डेल्टा प्लस की एंट्री हो चुकी है ये वायरस अभी तक के वायरस से खतरनाक माना जा रहा है। पुलिस विभाग अभी तक कोरोना नियमो का पालन न करने पर आम जनता से लाखों रुपये मास्क न लगाने के नाम पर वसूली कर चुके हैं मगर किसी बड़े नेता, विधायक, सांसद, मंत्री, अधिकारी और कर्मचारी के ऊपर अभी तक कोई भी वसूली नही हुई हैं जब कि कई बार नियमो का उल्लंघन करते हुए देखा गया है खबरे भी प्रकाशित हुआ है और अब खाकी वर्दी वाले लोग भी वही करने लगे हैं अब इनके मास्क न लगाने पर इनसे कौन वसूली करेगा। अब देखना यह है कि जिले में बैठे आला अधिकारी इन पर कार्यवाही करते हैं या केवल नियम आम जनता और गरीबो के लिये भर बने है।

*इनका कहना है*

*इस मामले पर पुलिस अधीक्षक एम एल सोलंकी से मोबाइल न. पर बात करना चाहे तो कॉल रिसीव नही हुआ*

*इस मामले पर जब अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेख राजन से 2 बार बात करना चाहे तो उनका न. बिजी आ रहा था*

कोरोना अभी खत्म नही हुआ है कोरोना नियमो का पालन सभी को करना है चाहे पुलिस हो या आम जनता परेड़ वके समय सभी लोग मास्क लगाए थे बिना मास्क वाली फ़ोटो की मुझे कोई जानकारी नही है मैं मामले को दिखवाता हूँ

*शिवेंद्र सिंह बघेल एसडीओपी कोतमा*



 लोकसभा, विधानसभा, पंचायत प्रतिनिधियों की जानकारी होगी सार्वजनिक आयोग का फैसला


 *मप्र राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह का पंचायत चुनाव को लेकर ऐतिहासिक फैसला* 

 *लोस और विस प्रतिनिधियों की तरह पंचायत प्रतिनिधियों की भी जानकारी हो सार्वजनिक* 

 *चुनाव आयोग और जिले की वेबसाइट पर शपथ पत्र और कच्चा चिट्ठा किया जाए अपलोड* 

 *आमजन को पंचायत जनप्रतिनिधियों की मिल सकेगी जानकारी* 

 *दूसरे राज्यों में पंचायत प्रतिनिधियों की जानकारी की जाती है अपलोड* 

 *एक अपील की सुनवाई के दौरान इंफॉर्मेशन कमिश्नर ने सुनाया फैसला* 

 *आगामी चुनाव और कोरोना काल को देखते हुए सुनाया निर्णय* 

मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए मध्यप्रदेश के आगामी  पंचायत चुनाव में सभी उम्मीदवारों की सूची और शपथ पत्र वेबसाइट पर पब्लिक के लिए अपलोड करने के निर्देश मप्र राज्य चुनाव आयोग को दिए हैं। सिंह ने कहा है कि यह लोगों का संवैधानिक अधिकार है, इसके लिए आरटीआई लगाने की भी जरूरत नहीं है।

साथ ही सिंह ने वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों के शपथ पत्र RTI दायर होने के 30 दिन के भीतर उपलब्ध कराने के निर्देश भी जारी किए है। इसके अलवा आगामी पंचायत चुनाव के बाद चुने हुए पंचायत प्रतिनिधियों की सभी जानकारी अब प्रत्येक जिले की वेबसाइट पर एक क्लिक पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए है। 

राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने पंचायत चुनाव के समय सभी उम्मीदवारों की जानकारी जनता को उपलब्ध कराने के अपने निर्णय को *संविधान के अनुच्छेद 19 (1) के तहत जनता का संवैधानिक अधिकार माना है।* सिंह ने अपने आदेश में *कोरोना संक्रमण के बदलते स्वरूप के चलते पंचायत चुनाव के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर के दफ्तर में  सूचना के लिए भीड़ कम से कम लगे और जानकारी स्वतः पब्लिक प्लेटफॉर्म पर लोगों को उपलब्ध होने को भी आधार बनाया है।* 

*क्या है पंचायत चुनाव में उम्मीदवारों की जानकारी की वर्तमान व्यवस्था?* 

मध्य प्रदेश चुनाव आयोग द्वारा अपने खुद के राजपत्र में हर पंचायत चुनाव में निर्देश जारी किए जाते हैं कि उम्मीदवारों की जानकारी जैसे शपथ पत्र क्रिमिनल रिकॉर्ड, शैक्षणिक योग्यता, संपत्ति की जानकारी  जनता के अवलोकन के लिए चुनाव आयोग की वेबसाइट और जिले के वेब पेज पर प्रदर्शित की जाए। इसके अलावा इस जानकारी को जिले के रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय में प्रदर्शित करने का भी नियम है। पर स्वयं चुनाव आयोग इस नियम का पालन नहीं करता है और ना ही जिले के वेबपेज पर भी यह जानकारी उपलब्ध है।

मध्य प्रदेश चुनाव आयोग के नियम में प्रति पेज 2 के हिसाब से उम्मीदवारों की शपथ पत्र की कॉपी जनता को उपलब्ध कराने का नियम भी है, पर रिटर्निंग ऑफिसर जानकारी सीलबंद लिफाफे में होने का बहाना करके आरटीआई आवेदन को टरका देते हैं। 

*क्या है अन्य राज्यों में व्यवस्था*

उड़ीसा राज्य में पंचायत उम्मीदवारों की सारी जानकारियां वहां के जिले के वेब पेज पर उपलब्ध है। बिहार और झारखंड राज्य के कुछ जिलों में यह जानकारियां वेब पेज पर उपलब्ध है। कर्नाटक राज्य में भी नगरीय निकाय से संबंधित उम्मीदवारों की जानकारी शपथ पत्र आदि उपलब्ध है। राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह का कहना है कि जब अन्य राज्य इस जानकारी को उपलब्ध करा सकते हैं तो मध्यप्रदेश क्यों नही। कोरोना के चलते यह और भी जरूरी हो गया है की जानकारियां लोगों को स्वतः वेबसाइट पर उपलब्ध हो। उसके लिए जनता को सरकारी दफ्तर के चक्कर नहीं काटना पड़े।

राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह का मानना है कि पंचायत चुनाव में रिटर्निंग ऑफिसर के दफ्तर पर जानकारी प्रदर्शित होने से बहुत कम लोगों को इसकी जानकारी मिल पाती है। वेबसाइट पर आने पर अब सभी लोग इसका अवलोकन कर सकते हैं। जैसी कसावट और पारदर्शिता लोकसभा और विधानसभा चुनाव में होती है वैसे ही पंचायत चुनाव में भी होनी चाहिए। सिंह का कहना है कि गांव के वोटर्स को भी यह जानने का हक है कि उनके जनप्रतिनिधियों ने चुनाव दर चुनाव कितनी संपत्ति अर्जित की है या उनके खिलाफ़ कौन से अपराधिक मामले दर्ज हुए हैं।

राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह  ने आदेश जारी करते हुए सामान्य प्रशासन विभाग को कहा है कि सूचना आयोग के इस आदेश की प्रति जिले के समस्त कलेक्टरों को उपलब्ध कराकर पालन सुनिश्चित करवाए।  इस आदेश में सिंह ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 4 के तहत स्वतः  पब्लिक प्लेटफॉर्म पर जारी करने के निर्देश दिए हैं ताकि इसके लिए आरटीआई भी ना लगाना पड़े। 

*क्या थी अपील और शिकायत?*

राज्य सूचना आयोग ने यह निर्णय एक शिकायत और अपील के प्रकरणों का निराकरण एक साथ करते हुए दिया है।

मामले में शिकायतकर्ता आरटीआई एक्टिविस्ट शिवानंद द्विवेदी ने जब आरटीआई लगाकर के रीवा जिले में वर्तमान के पंचायत प्रतिनिधि के शपथ पत्र की जानकारी मांगी तो तहसीलदार ने यह कहते हुए मना कर दिया कि जानकारी मध्य प्रदेश चुनाव आयोग के निर्णय के अनुसार सील बंद लिफाफे में रखी है और उसे खोलने का उन्हें कोई अधिकार नहीं है। इस जवाब के बाद मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने इस प्रकरण में धारा 18 के तहत जांच शुरू की। इस प्रकरण में मध्य प्रदेश चुनाव आयोग से नियमो को लेकर जवाब तलब किए गए। मध्य प्रदेश सूचना आयोग ने पाया कि चुनाव आयोग के नियमों में कहीं भी शपथ पत्रों को सीलबंद लिफाफे में रखने का नियम नहीं है, बल्कि मतपत्र को सीलबंद लिफाफे में रखने का नियम है। इस अपील के अलावा शिवानंद द्विवेदी ने एक शिकायत भी राज्य सूचना आयोग के समक्ष रखी जिसमें रीवा संभाग के अलावा अन्य जिलों में वेबसाइट पर जानकारी उपलब्ध नहीं होने के तथ्य को सामने रखा। 

मध्य प्रदेश चुनाव आयोग द्वारा खुद के राजपत्र में पंचायत चुनाव के उम्मीदवारों की लिस्ट को अपनी वेबसाइट और जिले की वेबसाइट पर डालने की व्यवस्था है, पर इसके बावजूद दोनों जगह से यह जानकारी गायब है। सूचना आयुक्त सिंह ने इस बात पर भी सवाल उठाया है कि जब कई राज्यों के जिले की वेबसाइट पर जब चुने हुए पंचायत प्रतिनिधियों की जानकारी उपलब्ध है तो मध्यप्रदेश में क्यों नहीं। सिंह का कहना है की जिस तरह से लोक सभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में जनता के चुने हुए जनप्रतिनिधि पूरा कच्चा चिट्ठा जनता के सामने होता है, उसी तरह पंचायत चुनाव के जनप्रतिनिधियों की भी जानकारी जनता के पास होनी चाहिए, ताकि चुनाव के समय जनता बेहतर निर्णय ले सके। 

कपिलधारा में आवारा कुत्तों का हमले से 2 हिरणों की गई जान


अनूपपुर/अमरकंटक

आज सुबह लगभग 7 बजे के आस पास हिरणों का एक समूह कपिलधारा के पास चारा चर रहा था, तभी आवारा कुत्तों के द्वारा हिरणों पर हमला कर दिया गया । इससे घबराकर एक हिरण कपिलधारा जल प्रपात के गिर गया और हिरण की जान चली गई । इसी भागा दौड़ी में एक और हिरण कुत्तों से अपनी जान बचाकर कपिलधारा पार्किंग के पास बसी हुई बस्ती में जाकर छुप गया । स्थानीय लोगों के द्वारा तत्काल सूचना देने की वजह से मौके पर वन विभाग के रेंजर मिथुन सिसोदिया, समाजसेवी रामगोपाल द्विवेदी, पशुचिकित्सक, नर्मदा प्रहरियों आदि की टीम द्वारा हिरण का इलाज किया जा रहा था। किंतु चोट कभी गहरी थी जिसकी वजह से काफी खून बह गया था । पशु चिकित्सक द्वारा जान बचाने की बहुत कोशिश की गई लेकिन हिरण की जान नही बचा पाए । कपिलधारा में आवारा कुत्तों का आतंक बहुत बढ़ गया है।  आए दिन इस प्रकार कि हिरण पर जान लेवा हमले का मामला सामने आ रहा है । इस पर तुरंत कोई कड़ी कार्यवाही करने की आवश्यकता है, नहीं तो अमरकंटक में जो थोड़े बहुत हिरणों का झुंड दिखाई पड़ता है वह दिखाना बंद हो जाएगा और कही ऐसा न हो कि अमरकंटक के जंगल से हिरण पूरी तरह लुप्त ही हो जाए।

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