ट्रैक्टर चालक की हत्या मौके पर पहुँची पुलिस, कारण अज्ञात


अनूपपुर

जिले के बिजुरी थाना अंतर्गत नगरपालिका बिजुरी के  वार्ड नंबर  12 के घोड़हा मोहल्ला मे बीती रात नृशंस  हत्या  टैक्टर चालक की हत्या किराए के क्वार्टर मे रहता था 30 वर्षीय मृतक बलराम सिंह गोड़ मृतक  ट्रैक्टर चलाकर करता था जिवोकोपार्जन हत्या से सनसनी  घटनास्थल पर पहुँची पुलिस हत्या का कारण  अब तक   अज्ञात बिती रात हत्या की वारदात हत्यारा फरार बिजुरी पुलिस कर रही है तलाश।

7 नग आम की रखवाली के लिए 4 गार्ड और 6 कुत्ते जाने आम की कीमत


जबलपुर 

चोरों के डर से लाठी-डंडों के साथ बगीचों में आमों की रखवाली करना आम बात है, मगर मध्य प्रदेश के जबलपुर में आम के दो पेड़ों की रखवाली करने के लिए चार गार्ड और 6-6 कुत्तों के इंतजाम किए गए हैं। जबलपुर में बाग से कोई आम चुरा कर न ले जाए, इसलिए पेड़ के मालिक ने आम के दो पेड़ों को चार गार्ड और छह कुत्तों का विशेष सुरक्षा कवच दिया है। इसका कारण आम की किस्म है, जो भारत में दुर्लभ है और दुनिया में सबसे महंगे आमों में से एक है।

दरअसल, यह कोई नॉर्मल आम नहीं है, जिसकी सुरक्षा के लिए इतने सारे बंदोबस्त किए गए हैं, बल्कि यह जापान का लाल रंग वाला आम मियाजाकी है, जिसे सूर्य के अंडे के रूप में भी जाना जाता है। दुनिया के सबसे महंगे आम का दर्जा इसी किस्म को मिला हुआ है। इस आम को लेकर किसान दंपति ने दावा किया कि पिछले साल अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसे 2.70 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बेचा गया था। किसान दंपति संकल्प और रानी परिहार ने तीन साल पहले जबलपुर में अपने बगीचे में इस आम के दो पौधे लगाए थे, जिसे चेन्नई के एक व्यक्ति ने दिया था।इस कपल को आम की इस बड़ी कीमत के बारे में कुछ नहीं पता था। पहले इस दंपत्ति को लाल रंग के दो आम के फल दिखाई दिए। जब उन्होंने इसके किस्म के बारे में पता लगाया तो उन्होंने पाया कि यह मियाजाकी आम है, जो पिछले साल अंतरराष्ट्रीय बाजार में 2.70 लाख रुपये प्रति किलो बिक रहा था। संकल्प परिहार ने कहा कि जब यह कहानी पिछले साल बाजार में फैली तो चोरों ने बाग पर हमला कर दिया। उन्होंने पेड़ के दो फल और डालियां चुरा लीं। हम किसी तरह पेड़ को बचाने में कामयाब हुए और इस साल हमने उस पेड़ की सुरक्षा का विशेष इंतजाम किया है, जिसमें सात आम हैं।

उन्होंने कहा कि तीन साल पहले जब मैं कुछ पौधे खरीदने के लिए चेन्नई जा रहा था तो ट्रेन में मैं एक आदमी से मिला और उसने मुझे ये पौधे दिए और उनके बच्चों की तरह पौधों की देखभाल करने के लिए कहा। हमने किस्म के बारे में जाने बिना बाग में रोप दिया। पिछले साल जब हमने फल देखे तो हमने सामान्य आम से उन्हें बहुत अलग पाया। क्योंकि मैं नाम नहीं जानता था, इसलिए मैंने अपनी मां के नाम दामिनी के नाम पर फलों का नाम रखा। बाद में हमने इस किस्म के बारे में खोज की तो असली नाम का पता चला, मगर यह अभी भी मेरे लिए दामिनी ही है।

रानी परिहार ने कहा कि अब आम की खेती करने वाले और फल प्रेमी मुझसे संपर्क कर रहे हैं। फलों के एक व्यापारी रमेश तनेजा ने मुझे एक आम के लिए 21000 रुपये देने की पेशकश की है, जबकि मुंबई के जौहरी इस आम के लिए बड़ी कीमत देने को तैयार हैं। मगर मैंने साफ तौर पर कहा है कि हम इसे किसी को नहीं बेचेंगे। हम फल का उपयोग अधिक पौधे उगाने के लिए करेंगे।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इस आम की महंगी कीमत के पीछे का कारण जानने के लिए फल का ठीक से निरीक्षण करने की जरूरत है। एक वैज्ञानिक और बागवानी विभाग के सेवानिवृत्त निदेशक जीएस कौशल ने कहा कि अफगानिस्तान की नूरजहां के बाद यह जापानी आम स्वाद के कारण नहीं कीमत के कारण सुर्खियों में है। मैंने कुछ स्थानीय वैज्ञानिकों से कहा कि वे जाकर पेड़ और फलों का निरीक्षण करें ताकि यह पता चल सके कि यह असली है या हाईब्रिड है और यह इतना महंगा क्यों है।

बिजली बनाने का कीर्तिमान के बाद आग, अब होगा करोड़ो के मेंटीनेंस के नाम पर गोलमाल


अनूपपुर/चचाई

अमरकंटक थर्मल  प्लांट चचाई की यूनिट को आनन फानन में ओवरहालिंग के नाम पर बन्द करने की  क्या बन रही  योजना , कम खर्च में जल्द सुधर सकने वाली यूनिट पर,करोड़ो खर्च का हो सकता है खेल .....

अमरकंटक ताप बिजली घर चचाई  में  16 जून को प्रातः 10.10  मिनट पर अचानक आग लगने की  अप्रत्याशित घटना के बाद तुरन्त ही यूनिट से बिजली उत्पादन बन्द कर आग पर नियंत्रण पाया गया। 

दुर्घटना का कारण चौथी मंजिल पर एमसीआर के बगल में आयल पाइप लाइन में अचानक छिद्र हो जाने से आयल तीव्र प्रेशर के साथ निकल कर आसपास में लगे बिजली के बोर्ड और खुले तारों केसंपर्क में आ जाने से आग लगने की दुर्घटना घटित होने का अनुमान है ,आग लगने से केबिलो रबर , गैस्केट पैकिंग आदि  जो ज्वलनशील समान में  तेजी से लगी , जिसमे हुई क्षति का आंकलन किया जा रहा है ,  इसी के साथ यह भी चर्चा है कि मुख्यालय में बैठे कतिपय  उच्चाधिकारी ने लीपापोती करने के लिए ,इस यूनिट को जो प्रदेश की सबसे बेहतर यूनिट है जिसने 15 जून 2021 को 150 दिनों तक लगातार चलने और 97 % से ज्यादा बिजली बनाने का कीर्तिमान बनाया , को ओवरहालिंग के नाम पर कई हफ़्तों  बन्द करने की  मंशा चर्चित है। जबकि इसमें हुए थोड़े बहुत नुकसान  में  केबिल रबर गास्केट आदि बदल कर दो चार दिनो मे पुनः बिजली उत्पादन  कम खर्च पर शुरू हो सकता है। 

परन्तु  ओवर हालिंग के नाम कर करोड़ों का अनावश्यक खर्च कर पैसों की बर्बादी की बिसात फैलाने की जोरदार चर्चा प्लांट में हो रही है।  जैसा संत सिंगाजी  प्लांट की 660 मेगावाट की यूनिट में HP टरबाईन  ब्लेड 05 अगस्त 2020 से यूनिट आज तक 10 महिनों से ठप्प है  एनुअल ओवर हालिंग के नाम पर दिखलाया जा रहा है। 

  उसी तर्ज पर ओवर हालिंग के नाम पर  यूनिट बन्द कर करोडो रु की बरबादी और बन्दरबांट से नकारा नही जा सकता !!!

इस पर सरकार को सतर्क और पूरी नज़र रखना  प्रदेश और जनहित में अत्यावश्यक है।

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