नगरीय निकाय चुनाव में अब पार्षद चुनेंगे अध्यक्ष और महापौर


 

भोपाल

 मध्य प्रदेश के नगरीय निकाय चुनाव कोरोना संक्रमण और ग्वालियर हाईकोर्ट के आरक्षण के फैसले के चलते फिलहाल बढ़ गए है। इसी बीच शिवराज सरकार ने महापौर / अध्यक्षों के पद का चुनाव  सीधे जनता से कराने की बजाय पार्षदों से कराने का निर्णय लिया है। शासन ने  सीधे चुनाव कराने सम्बन्धी विधेयक वापिस ले लिया है। यह जानकारी नगरीय प्रशासन मन्त्री भूपेंद्र सिंह ने आज साग़र में मीडिया से अनोपचारिक चर्चा में दी। कांग्रेस की  कमलनाथ सरकार ने  जनता की बजाय पार्षद के जरिये चुनाव कराना तय किया था। सरकार बदलने के बाद भाजपा सीधे चुनाव कराने के पक्ष में थी। लेकिन अब भाजपा सरकार भी  पार्षदों में से ही महापौर और नगर पालिका/ पंचायतों के अध्यक्षो चुनाव कराएगी। अब इनके दावेदारों को वार्ड पार्षद का चुनाव जीतना अनिवार्य रहेगा।

वरिष्ठ पत्रकार महामारी के हुए शिकार नायडू जी को श्रद्धांजलि- प. अजय मिश्र


अनूपपुर

 नायडू जी जैसे आप गए तो ऐसा लगा कि शरीर निष्प्राण हो गया है. छाती फटने को है और दिमाग़ जैसे सुन्न... न कुछ कह पा रहा, न ही कुछ लिखने की  हिम्मत हो रही है. जानता हूँ मृत्यु अटल है, अकाट्य है और प्रकृति में चलने वाला अनवरत क्रम है लेकिन अगर उसका आगमन असमय या अकाल हो तो दुख असहनीय हो जाता है. वही मनस्थिति खिन्न कर रही है. मगर 'बेबाक तरीके से अपनी बात कहने वाला वो पत्रकार जो किसी  से नहीं डरा, उसकी मौत की 'दस्तक' हुकूमत को सुनाई देना ज़रूरी है।

महामारी में जैसे मौत का नर्तन चौतरफ़ा है. संवेदनाएं ज़ख़्मी हैं, पूरी सरकारी व्यवस्था एक ऐसे फोड़े की तरह है, जिससे लगातार मवाद रिस रहा है. मौत के ऐसे नंगे नाच से आँखों का पानी भी सूखने लगा है और आत्मा तक कराह रही है. कभी आक्सीजन तो कभी दवाओं की कमी तो कभी आईसीयू और बेड न मिलने से तड़प-तड़प कर मरते लोग. अपनों को सामने प्राण छोड़ते देखना और संसाधनों का अभाव, व्यवस्था के कुप्रबंधन और असंवेदनशीलता के आगे खुद को बेबस चेहरे और निराशा और अवसाद से सनी उनकी पथराई प्रतिक्रिया देखने को सब अभिशप्त हैं. इस वेदना से लगभग हर परिवार या ख़ानदान गुजर रहा है।

उसी कड़ी में आपका जाना भी किसी भी सिस्टम के लिए सिर्फ एक आँकड़ा हो सकता है. सरकारों के लिए तो आप भी सिर्फ वोटरलिस्ट से हटने वाला बस एक नाम हो जाओगे. मगर आपका परिवार जो पत्नी और बेटा या ख़ानदान के रिश्तों तक ही सीमित नहीं था, आपके निधन की सूचना उसकी सहनशक्ति को कमजोर कर रही है. हमने एक तेजतर्रार पत्रकार ही नहीं बल्कि एक सरल और सहज व्यक्तित्व के धनी को खोया है।

ये सच है कि मेरा संबध न पुराना था. न ही हमने साथ बहुत समय बिताया. पेशेवर साथी होने के नाते एक दूसरे को जाना और फिर एक दूसरे से गिनती की मुलाक़ातें होने के बावजूद अपनेपन ने कब जगह बना ली पता ही नहीं चला. दरअसल, शख्सीयत ही ऐसी रही. मर्यादा में रहकर कैसे सवाल पूछे जाते हैं. किसी को बिना बेइज़्ज़त किए और खुद पर किसी को हावी न होने देने के हुनर ने हम जैसे लोगों का अज़ीज़ बना दिया।

जाहिर है कि निधन से पूरा जिला स्तब्ध रहा गया. सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलियों का सिलसिला चल पड़ा. आम लोगों की छोड़िए, जिले का हर महत्वपूर्ण व्यक्ति मर्माहत है और शोक संवेदना प्रकट कर रहा है. लेकिन रामचन्द्र नायडू के निधन और इन्हीं शोक संवेदनाओं के बीच से एक प्रश्न भी उठता है जिस पर गौर करने की जरूरत हर उस खास व्यक्ति को है जो आज एक युवा और काबिल पत्रकार के निधन पर शोक में डूबे हुए हैं।

रामचंद्र जी ने जिले से जुड़े हर महत्वपूर्ण सवाल पर सवाल किया और उन्हीं  के कोरोना से निधन के बाद एक सवाल मैं उठा रहा हूं. सवाल ये कि कोरोना महामारी के इस भयानक दौर में रामचन्द्र के साथ ही साथ हमने कई युवा, अनुभवी और वरिष्ठ पत्रकारों को खोया है. ऐसे तमाम पत्रकारों के कोरोना की वजह से कालकलवित हो जाने की न तो चर्चा हुई और न ही किसी जनप्रतिनिधि की शोक संवेदना।

प्रश्न ये है कि फ्रंटलाइन पर अपने जान को जोखिम में डालकर देश को जागरुक करने वाला पत्रकार, सरकार से लेकर सिस्टम तक हाशिए पर क्यों है? आखिर क्या वजह है कि हर महत्वपूर्ण सरकारी कदम और फैसले का प्रसार जनता तक करने वाल पत्रकार व्यवस्था की नजरों में गौण है? 

*पं अजय मिश्र की कलम से*

कट्टा सहित 130 बॉटल नशीली दवाओं के साथ 3 आरोपी गिरफ्तार


शहडोल

पुलिस को बड़ी सफलता मिली है पुलिस ने नशे का कारोबार करने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है पुलिस अधीक्षक अवधेश कुमार गोस्वामी के निर्देशन में जिले में लगातार नशे के खिलाफ कार्यवाही हो रही हैं पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मामले का संक्षिप्त विवरण इस प्रकार 6 जून को मुखबिर द्वारा सूचना मिली कि तीन व्यक्ति विना नंबर की नीले रंग की वेलेनो कार में काफी मात्रा मे नशीली अनरेक्स कफ सिरप लेकर घुनघटी से कल्याणपुर होकर शहडोल आ रहे है। उनमे एक व्यक्ति का नाम शिवम राव पिता रामनरेश राव दूसरे व्यक्ति का नाम , सूरज पटेल पिता सियालाल पटेल एवं तीसरे व्यक्ति का नाम विवेक केवट पिता रामसजीवन केवट है यदि तत्काल कार्यवाही की जायेगी तो वह लोग माल सहित मिल जायेगे । मुखविर द्वारा सूचना प्राप्त होते ही तत्काल पुलिस अधीक्षक के निर्देशन एवं श्रीमान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक व उपपुलिस अधीक्षक मुख्यालय शहडोल के मार्गदर्शन में केन्द्रीय विधालय के पास कल्याणपुर पहुंचाकर सूचना की तस्दीक की गयी जो कुछ देर बाद शाहपुर तरफ से एक बिना नंबर की

नीले रंग की वेलेनो कार आयौ जिसे रोककर पूंछताछ किया गया तो संदेही अपना नाम आरोपी शिबम राव पित्ता रामनरेश राव उम्र 29 वर्ष निवासी वार्ड क्रमांक । जनकपुर रोड जैसिंहनगर जिला शहडोल, सूरज पटेल पिता सिवालाल पटेल उम्र 24 वर्ष निवासी ग्राम केरहा थाना सिंहपुर हाल नानी की दुकान के पासबपाण्डवनगर जिला शहडोल, विवेक केवट पिता रामसजीवन केवट उम्र 20 वर्ष निवासी कान्वेट स्कूल के पास पाण्डवनगर शहडोल बताये जिन्हें मुखविर सूचना से अवगत कराकर विधिवत तलाशी ली गयी तो वेलेनो कार में 130 बाटल नशीली अनरेक्स कफ सिरप कीमती 15600 रूपये एवं एक 315 बोर का देशी

*कट्टा, 3 नग जिंदा कारतूस बरामद हुआ*

बरामद 130 वाटल अवैध नशीली अनरेक्स कफ सिरप, कट्टा, कारतूस, चार मोबाईल, एवं कार को कीमती तीनो आरोपियो के संयुक्त कब्जे से विधिवत जप्त किया गया जिसकी कुल कीमत करीब 900000 रूपये होगी। अपराध प्रमाणित पाया जाने से तीनो आरोपी (1) शिवम राव (2) सूरज पटेल (3) बिबेक केवट को गिरफ्तार कर वापसी पर अपराध धारा 5/13 म.प्र. ड्रग कन्ट्रोल एकट, 21,22 एनडीपीएस एक्ट कायम कर विवेचना मे लिया गया है। आरोपी शिवम राव काफी खूखार एवं खतरनाक अपराधी है जिसके विरूद्ध पूर्व से कोतवाली मे नशीली कफ सिरप तस्करी के आधा दर्जन मामले व अन्य धाराओं के कई अपराध पंजीबद्ध है।

आरोपीगणो की गिरफ्तारी में निरीक्षक राजेशचन्द्र मिश्रा थाना प्रभारी कोतवाली, उपनिरी0 गोविंदराम भगत, सउनि) राकेश सिंह बागरी, सउनि) रामनारायण पाण्डेय, प्र0आर0 अरविंद पयासी, प्र0 आर0 बिपिन बागरी, आर0 589 मायाराम अहिरवार, आर0 चालक 707 हरेन्द्र सिंह की विशेष भूमिका रही है।

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