कॉलरी प्रबंधक का कारनामा, युवक को मानसिक रूप से कर रहे हैं। प्रताडि़त 

अनूपपुर/बिजुरी


एस ई सी एल हसदेव क्षेत्र के बिजुरी उपक्षेत्र में संचालित भूमिगत बहेराबांध काॅलरी अपने कामगारों कि लापरवाही के कारण सदैव से सुर्खियों में बना रहता है। बीते वर्षों में ऐसा कोई वर्ष नही बीता जब यहां के खान-सुरक्षा अधिकारी एवं काॅलरी प्रबंधन कि लापरवाही से कोल कर्मियों के साथ हादसा ना घटित हुआ हो। और कयी मामलो में जान तक चली गयी है। बावजूद इसके काॅलरी प्रशासन कि मूक-दर्शिता के कारण यहां पदस्थ काॅलरी प्रबंधक एवं खान-सुरक्षा अधिकारी के हौसले बरकार हैं। और काॅलरी के ऐ जिम्मेदार नित नऐ-नऐ कारनामों को अंजाम दे रहे हैं। इनके द्वारा किया गया ऐसा ही शर्मनाक कारनामा इन दिनों सोषल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है। और जिसने भी इस वीडियो को देखा वह जिम्मेदार काॅलरी प्रबंधन, सुरक्षा अधिकारी एवं मजदूरों के नेता बने श्रम-नेता को धिक्कार कर अपनी भडा़स मिटा रहे हैं। साथ ही प्रशासन से इन जिम्मेदारों पर उचित कार्यवाही किऐ जाने कि मांग भी किया जा रहा है। वायरल वीडियो 2-3 दिवस पुराना बताया जा रहा है। जिसमें प्रबंधक के शह पर खान सुरक्षा अधिकारी माइनिंग ट्रेनिंग में प्रशिक्षण के लिये आये अभ्यर्थियों से लिंक से हट कर काम कराने और काम न करने पर परिवारिक सदस्यों के नाम से गाली गालौज जैसे अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं।

*यह हैं मामला* 

एस ई सी एल हसदेव क्षेत्र के बिजुरी उपक्षेत्र में बहेराबाध काॅलरी प्रबंधक एस.के. मित्रा और खान सुरक्षा अधिकारी डी.सी.राय के सामने अपनी समस्या को रखा गया तो खान-सुरक्षा अधिकारी डी.सी. राय ने ट्रेनिंग कर रहे लड़कों के साथ अभद्रता का प्रयोग करते हुए उल्टा सीधा बोला गया जबकि मॉर्निंग ट्रेन कर रहे लड़के ने निवेदन से अपने बात रखने का प्रयास किया परंतु अधिकारी अपने मद में मस्त होकर प्रशिक्षण कर रहे युवा वर्ग के साथ समझाईस के बजाय गलत शब्दों का उपयोग कर नीचता का पराकाष्ठा पर्दर्शित कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है। कि काॅलरी के जिम्मेदार पदों पर असीन जिम्मेदारों द्वारा इस तरह के शर्मनाक कारनामों से युवा मानसिकता पर क्या प्रभाव पडे़गा। और मानसिकता पर बुरा असर पड़ने से युवाओं का भविष्य कैसा होगा, चिंतनीय है।

*चुप्पी साधे बैठें रहे श्रम नेता* 

वहीं पूरे मामले में माइनिंग कि ट्रेनिंग कर रहे अभ्यार्थियों पर जब एसईसीएल के अधिकारी द्वारा बहेरा बांध कालरी प्रबंधक कार्यालय पर गाली गलौज कि घटना को अंजाम दिया जा रहा था। मौके पर बैठे एच.एम.एस. बहेरा बांध कॉलरी अध्यक्ष जीवन लाल राठौर भी उस वक्त वहां मूक दर्शक बन मौजूद रहे। जबकि इन्ही नेताओं द्वारा एसईसीएल के बाहर श्रमिकों के हित में माईक पकड़कर बड़े-बड़े वादे किये जाते हैं, सुरक्षा की बात करते हैं। तो वहीं दूसरी ओर आंख के सामने श्रमिकों पर अत्याचार कर रहे अधिकारियों के सामने बैठकर इनकि घिग्घी बंद पडी़ है। लानत है ऐसे नेता, और जिम्मेदार अधिकारियों पर जो अपने ओहदे का अनुचित प्रयोग कर लोगों कि मानसिता पर बुरा प्रभाव डाल रहे हैं। काॅलरी प्रशासन को अपनी मूक दर्शिता से बाहर निकलकर ऐसी घटनाओं पर संज्ञान लेते हुये दोनों अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्यवाही करनी चाहिए। ताकि वहां काम कर रहे कर्मचारियो में प्रबंधन के प्रति विश्वास और सम्मान बना रहे।

नई दुनिया के जिला ब्यूरो वरिष्ठ पत्रकार रामचंद्र नायडू हमारे बीच नही रहे

अनूपपुर

नई दुनिया के अनूपपुर के जिला ब्यूरो जिले के वरिष्ठ पत्रकार रामचंद्र नायडू का आज 6 जून को उपचार के दौरान निधन हो गया, इस खबर को सुनते ही पूरे जिले के पत्रकार जगत में शोक की लहर हैं। ज्ञात हो कि वह कुछ दिन पहले कोरोना पॉजिटिव हो गए थे और उसके बाद ब्लैक फंगस की चपेट में आ गए जिनका ऑपरेशन बिलासपुर स्थित अपोलो हॉस्पिटल में हुआ, इनके बाद इन्हें बिलासपुर के ही सिम्स हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था उसके बाद हार्ट अटैक के बाद बिलासपुर में स्थित नारायणी अस्पताल में पिछले तीन दिनों से वेंटिलेटर में थे जहां उपचार के दौरान दुखद निधन हो गया है इस दुखद घड़ी में उनके परिवार को दुख सहने की शक्ति प्रदान करे दूर मृत आत्मा को शांति प्रदान करे भगवान अपनी चरणों मे जगह दे इनके निधन पर जिले भर के पत्रकार एवं अन्य लोगो ने शोक व्यक्त किया हैं। है इनके निधन पर जिले के पत्रकार, कैलाश पांडेय, मनोज द्विवेदी, राजेश शिवहरे, शशिधर अग्रवाल, प्रेम अग्रवाल, अरविंद बियाणी, राजेश शुक्ला अरविंद पांडे, चैतन्य मिश्रा, मनोज शुक्ला, आशीष द्विवेदी, बिज्जू थॉमस, अजित मिश्रा, आनंद पाण्डेय, विकास पांडे , बिरेन्द्र सिंह, गणेश रजक, मो अनीश तिगाला, विजय उर्मलिया, भरत मिश्रा, राजेश पयाशी, अनुपम सिंह, किशोर सोनी, आकाश नामदेव, सुमिता शर्मा, अनिल दुबे, अविरल गौतम, ज्ञानेंद्र पाण्डेय, संतोष चौरसिया, सुरेश शर्मा,  पंजवानी, विजय जैसवाल, बी एल सिंह, संतोष चौरसिया, सुनील चौरसिया, पुष्पेंद्र, आशुतोष सिंह दीक्षित, चंद्रिका चंद्रा, रजक, पुरन चंदेल, मुन्नु पांडेय, श्रवण उपाध्याय, गिरिजा शंकर पांडेय, गजानंद गर्ग, राजन सिंह, ज्ञानचंद जयसवाल, अभिषेक द्विवेदी, आदर्श दुबे, सतेंद्र दुबे, प्रमोद सोनी, रामनारायण पाण्डेय, उमेश सिंह, बासुदेव जगवानी, बाल गंगाधर सेंगर जनप्रतिनिधियों एवं


जिले के समस्त पत्रकारों ने श्रद्धांजलि अर्पित की है। 


भर्ती में इतना बड़ा घोटाला, कि सीएमओ को नही मालूम कि आफिस में कितने कर्मचारी

नगर परिषद बनगवा, डोला, डूंमरकछार में भर्ती घोटाला

इंट्रो- जब जिम्मेदार ही घोटाले पर घोटाले करने लगे स्थानीय जनप्रतिनिधि देने लगे तो आप मान लीजिए की फिर जनता की  पूछ परख खत्म हो जाती है आज स्थानीय युवा रोजगार के लिए दर-दर भटक रहे नवगठित नगर परिषद में पैसे लेकर पात्र हो चाहे अपात्र भर्ती कर ली गई युवाओं ने आंदोलन किया नतीजा कुछ ना निकला जिम्मेदारों ने एक सुर में कह दिया हमारे पास नहीं किसी प्रकार की जानकारी हालांकि तत्कालीन कलेक्टर ने जांच कमेटी गठित कर चलते बने लेकिन जांच कमेटी कहां है गई यह भी लोगों को आज तक पता ना चल सका !

अनूपपुर/बनगवां/डोला


अनूपपुर जिले के सबसे अंतिम छोर पर बसे बनगवां, डोला, डूमरकछार को ग्राम पंचायत से नगर पंचायत की घोषणा शिवराज सिंह चौहान ने पूर्व में की थी इसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इसे रद्द  कर दी, भाजपा की सरकार आते ही शिवराज सिंह चौहान ने नगर परिषद बनाने का आदेश जारी करवा दिया फिर क्या था स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित प्रशासन ने मिलकर जिस तरीके से खेल खेला उसमें तो मानो स्थानीय लोगों को भनक ही ना लगे भर्ती पर भर्ती चालू हुए लेकिन स्थानीय युवाओं को कहीं भी मौका ना मिला अब तो साफ तौर पर या माने जाना जाने लगा कि जब नवगठित नगर परिषद में भ्रष्टाचार की न्यू ही रख दी गई है तो विकास कैसे संभव होगा !

*नहीं किसी प्रकार से जानकारी*

बड़े आश्चर्य की बात है कि नगर परिषद में सीएमओ को अपने कर्मचारियों का ही पता नहीं है जब इस संबंध में उनसे पूछा गया कि आपके नगर परिषद में कितने कर्मचारी पदस्थ हैं और कहां-कहां पदस्थ हैं तो उन्होंने साफ कहा मैं नहीं जानता कि कितने मेरे नगर परिषद में कर्मचारी पदस्थ हैं दो-चार लोगों को छोड़ किसी प्रकार से मुझे जानकारी नहीं है हालांकि उन्होंने साफ तौर पर कहा पूरे दस्तावेज ज्वाइंट डायरेक्टर के यहां रखा हुआ है आप वहां बात कर लीजिए हम आपको किसी प्रकार से कोई जानकारी उपलब्ध नहीं करा सकते ,जब नगर परिषद में कर्मचारियों की जानकारी सीएमओ को नहीं है तो फिर  नगर परिषद में किस प्रकार से कार्य होते होंगे ! इस भर्ती घोटाले को छिपाने के लिए इस तरीके से जवाब सीएमओ के द्वारा दिया जा रहा है बहरहाल मामला जो भी हो लेकिन स्थानीय  युवा रोजगार से वंचित रह गए !

*रोजगार को लेकर हुआ था आंदोलन*

नवगठित नगर परिषद में जब स्थानीय लोगों को पता चला कि पैसे लेकर नगर परिषद से बाहर के लोगों को नौकरी पर रखा जा रहा है तब स्थानीय लोगों ने इसकी जानकारी नगर परिषद से चाही गई लेकिन नगर पार्षद ने इन्हें भी गोलमाल जवाब देकर चलता कर दिया, स्थानीय लोगों ने मिलकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंप आंदोलन भी किया तत्कालीन कलेक्टर ने जांच के आदेश देते हुए एक टीम गठित की लेकिन आज तक उस टीम के द्वारा क्या जांच की गई यह भी स्थानीय लोगों को पता नहीं है कुल मिलाकर जिले में बैठे प्रशासन ने भी नगर परिषद में हुए भर्ती घोटाले का पूरा सहयोग किया जिसका नतीजा रहा युवाओं का आंदोलन भी कोई काम ना आ सका !

*आपदा में अवसर कर गए जिम्मेदार अधिकारी*

जहां एक और कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए जिला प्रशासन तैयारी करने में जुटा रहा तो दूसरी ओर नगर परिषद में भर्ती करने का सिलसिला जारी रहा इसीलिए इसकी जानकारी स्थानीय लोगों को काफी देर में मिली बताया तो यहां तक जाता है कि नगर परिषद में स्थानीय जनप्रतिनिधियों के रिश्तेदार, परिवार, दोस्त, मित्रों को नौकरी में रखे गए वहीं कई भर्तियां अच्छी खासी मोटी रकम लेकर की गई ! अगर सब कुछ सही है तो नगर परिषद अपने कर्मचारियों के नाम उजागर करने में क्यों डर रहा यह भी समझ से परे है अब लोगों की निगाह उस जांच कमेटी पर टिकी हुई है जिस जांच कमेटी को तत्कालीन कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर ने गठित किया था  !

*इनका कहना है*

मुझे किसी प्रकार से जानकारी नहीं है कि नगर परिषद में कितने कर्मचारी तैनात हैं आपको ज्वाइंट डायरेक्टर के यहां से जानकारी लेना पड़ेगा कि नगर परिषद में कितने-कितने कर्मचारी अभी भी उपस्थित है !

*राजेंद्र कुशवाहा* 

सीएमओ नगर परिषद डोला, डूमरकछार, बनगवां

कर्मचारियों की जानकारी नगर परिषद से ही मिलेगी मैं अभी तत्काल वहां के सीएमओ को बोलता हूं वह जानकारी आपको उपलब्ध कराएंगे 

मकबूल खान संयुक्त निदेशक शहडोल

MKRdezign

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