एक मृत पिता पर अपनी ही 6 साल की मासूम बेटी की हत्या का प्रकरण पुलिस ने दर्ज किया है। 

जबलपुर

*क्या है मामला?*

जबलपुर हनुमानताल थाना में बीती 17 मार्च को प्रेम सागर पुलिस चौकी के पीछे रहने वाले एक व्यक्ति ने अपनी 6 साल की पुत्री के साथ फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी, आपको बता दे की हनुमानताल टीआई उमेश गोल्हानी के अनुसार बीती 17 मार्च को प्रेम सागर पुलिस चौकी के पीछ रहने वाले संतोष केशरवानी के मकान में किराए से रहने वाले रामकृष्ण सोंधिया और उसकी 6 साल की मासूम बेटी  गुड़िया उर्फ सपना की फांसी लगने के कारण मौत हो गई थी। दोनों के शव कमरे में फंदे पर लटके मिले थे, जिस पर पुलिस ने पंचनामा कार्रवाई कर शवों का पोस्टमार्टम कराते हुए मर्ग कायम कर मामले की विवेचना शुरू की थी।  इस मामले में मृतक पिता को दोषी पाया गया जिस पर पुलिस ने मृत पिता पर 302 प्रकरण दर्ज किया है। 

*इस वजह से पिता पर दर्ज़ हुआ मामला*

मृतका गुड़िया उर्फ सपना जिस फंदे से फांसी पर लटकी मिली, वह करीब 9 फिट की उंचाई पर था। गुड़िया और उसके पिता की मौत का समय भी एक जैसा पता चला है, जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि गुस्से में आकर पिता रामकृष्ण ने पहले अपनी बेटी गुड़िया को फांसी पर लटकाकर हत्या की, इसके बाद खुद भी फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इसलिए मर्ग जांच, पीएम रिपोर्ट एवं घटनास्थल पर मिले साक्ष्यों के आधार पर आरोपी पिता रामकृष्ण के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज किया गया है. टीआई गोल्हानी ने यह भी बताया है कि चूंकि आरोपी की भी मौत हो चुकी है, इसलिए प्रकरण में विधिवत कार्रवाई कर खात्मा पेश किया जाएगा।

संकट प्रबंधन समिति के माननीयों को शराबियों की सर्वाधिक चिंता- संतोष द्विवेदी


*सुबह 8:00 बजे से रात 10:00 बजे तक खुलेंगी  मदिरा दुकानें* 

उमरिया

संकट प्रबंधन  समिति के सदस्यों द्वारा कोरोना कर्फ्यू में ढील देने के क्रम में शराब और गुटके को सर्वाधिक वरीयता देने से लोग हैरान हैं उन्हें समझ नहीं आ रहा कि जब जन जीवन से जुड़ी सभी महत्वपूर्ण गतिविधियों में सीमित छूट दी गई है तब शराब के लिए 14 घंटे और पान-गुटखे के लिए 8 घंटे की छूट क्यों ? क्या यहां से कोरोना के संक्रमण का खतरा नहीं है ? एक ओर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक कोरोना कर्फ्यू लागू है, दूसरी ओर शराब दुकानों और रिसोर्ट बार के संचालन के लिए क्रमशः रात 10 और 11 बजे तक की छूट दी गई है । इन दोनों आदेशों को मिलाकर देखें तो ऐसा प्रतीत होता है कि शराबियों को रात्रिकालीन कोरोना कर्फ्यू के उल्लंघन की भी अघोषित  छूट दे दी गई है ।* 

             उल्लेखनीय है कि जिले में नोबेल कोरोना वायरस कोविड-19 के संक्रमण की दर 5 फ़ीसदी से कम होने के कारण 1 जून से कोरोना कर्फ्यू में ढील देने की प्रक्रिया आरंभ हुई है और संकट प्रबंधन समिति की सलाह के अनुसार कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव ने विभिन्न व्यावसायिक एवं सामाजिक गतिविधियों के सीमित संचालन के आदेश जारी किए हैं । जिसमें पान दुकान को दोपहर 12 बजे से रात 8 बजे तक, शराब दुकान को सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक और रिसोर्ट बार को रात 11 बजे तक संचालित किए जाने की छूट है । जबकि फल, सब्जी से लेकर किराना आदि सभी आवश्यक सेवाओं के संचालन हेतु अधिकतम 5 घंटे ही निर्धारित हैं । यही वजह है कि लोग सवाल पूछ रहे हैं कि जनता के चुने हुए नुमाइंदे चुनाव और राजस्व के फेर में जनता को बार बार संकट में क्यों डालते हैं ? 

               बांधवगढ़ विधायक शिवनारायण सिंह ने माना कि संकट प्रबंधन समिति में यह विषय आया था । चूंकि राज्य सरकार को शराब और गुटखा से सर्वाधिक राजस्व मिलता है, इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए ही शराब और पान दुकान को अधिकतम छूट दी गई है । उन्होंने ये जरूर माना कि इस आदेश से कोरोना कर्फ्यू उल्लंघन की स्थिति जरूर निर्मित होगी ! इस सम्बन्ध में  मैं कलेक्टर से चर्चा करके कोई बीच का रास्ता निकालने के लिए कहूंगा । 

             एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि कलेक्टर के आदेशानुसार कोई भी रात 10 बजे तक शराब की दुकान से शराब खरीद सकता है । रात 11 बजे तक रिसोर्ट बार में शराब पी सकता है, लेकिन इसके बाद जैसे ही वह घर जाने के लिए सड़क पर आएगा, रात्रिकालीन कोरोना कर्फ्यू के उल्लंघन का गुनहगार होगा । अब पुलिस या तो उसकी दलील पर उसे छोड़ दे या उस पर कोरोना कर्फ्यू के उल्लंघन का केस दर्ज करे । उनका कहना था कि ऐसे आदेश पुलिस के लिए सरदर्द होते हैं । न वह उनका ठीक से पालन सुनिश्चित करा सकती न खुली छूट दे सकती । इस संध का ही लोग नाजायज फायदा उठाते हैं तथा पुलिस और सरकारी आदेश उपहास के पात्र बनते हैं । 

              वरिष्ठ पत्रकार और बुद्धिजीवी डॉ प्रेम नारायण सोनी ने इस पर चिंता जाहिर करते हुए कहा है कि ऐसे समय में जब महामारी सर पर काल बनकर मंडरा रही हो तब हमें राजस्व की नही जानमाल की चिंता करनी चाहिए । आपने कहा कि संकट प्रबंधन समिति ने शराबियों और पान-गुटखा खाकर सड़क पर थूकने वालों के लिए तो ज्यादा दरियादिली दिखाई है, जबकि यह बेहद खतरनाक हो सकता है । दूसरी ओर धोबी और चाय दुकानों के लिए विचार ही नही किया, जो निर्णय में असंतुलन को दर्शाता है । समिति और जिला प्रशासन को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए ।

कोरोना कॉल में मानवता और सेवा की सच्ची मिशाल एवं कोरोना योद्धा हैं वैभव जैन


अनूपपुर/कोतमा

अनूपपुर जिले के कोतमा निवासी वैभव जैन निवासी पिता निर्मल कुमार जैन माता उषा जैन यह हमारे कोतमा नगर के ऐसे वालेंटियर है जो हमेशा निस्वार्थ तैयार रहते हैं जो सच्चे भाव से 24 घंटे सेवाएं देते हैं इनका एक छोटा सा रेस्टोरेंट है लॉक डाउन की वजह से रेस्टोरेंट बंद होने के कारण इनकी आर्थिक स्थिति पर भी बहुत प्रभाव पड़ा लेकिन इसके बावजूद भी यह निरंतर सेवा करते रहे कभी वैक्सीनेशन सेंटर में कभी कोविड केयर में चाहे वह को भी टेस्टिंग हो या शव‌ को घर तक पहुंचाना मास्क वितरण करना मरीजों को रेफर से लेकर उनके लिए हर मदद करने का प्रयास करना ऐसे कई कार्य है जो प्रतिदिन इनके द्वारा बिना डर से किए जाते हैं जबकि कोरोना के समय इतना खतरा मोल लेकर कोई आगे नही आ रहा हैं इस संकट की घड़ी में ये गरीबो के लिए काफी मददगार साबित हुए न तो अपनी परवाह किये  न अपने परिवार की हमेशा ही सेवा के लिए 24 घंटे तत्पर रहते है। इनके कार्य को देखकर लोग दंग रह जाते हैं यह किसी भी काम में पीछे नहीं दिखते 32 साल की उम्र में उन्होंने 45 बार रक्तदान दिया इन्होंने कई बार लावारिस लाशों का संस्कार करने में भी सहयोग किया बिना जान की परवाह किए इस महामारी में भी जब भी कोई पुकारता बिना किसी डर के सबकी मदद के लिए हमेशा तैयार है रहना यही सच्ची सेवा ऐसे शख्स को देखकर अच्छे-अच्छे भी दातों की तरह उंगली दबा लेते हैं हम क्या पूरा जिला  इन पर बहुत गर्व करता हैं।

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