कलेक्टर के आदेश का खुलेआम उल्लंघन, कॉलेज में प्राचार्य कर्फ्यू में करवा रहे है निर्माण कार्य

कोरोना नियमो का उल्लंघन,मजदूरों के पास मास्क नही हैं न सोशल डिस्टेंस का पालन नही कर रहे है



अनुपपुर। 

जिला मुख्यालय स्थित  शासकीय तुलसी महाविद्यालय में पदस्थ प्राचार्य परमानंद तिवारी हमेशा किसी न किसी कारण में सुर्खियों में रहते हैं इनके दबंगई और मनमाना पूर्ण कार्य करने के चर्चे पूरे जिले में विख्यात हैं अपने से बड़े अधिकारियों के आदेश की अवहेलना करने में इनको बहुत खुशी प्राप्त होती हैं ये अपने कार्य के आगे किसी को नही भजते ये महाशय बात करते करते आपा खो बैठते हैं उसके बाद मारना गाली देना धक्का देना इनके स्वभाव में है सीधे मुह किसी से बात करना पसंद नही करते सामने छात्र , छात्रा हो चाहे आम लोग इस समय प्राचार्य महोदय रिटायरमेंट के बेहद करीब है और इस दौरान वह जनभागीदारी के बजट को पूरी तरह गोल माल करना चाह रहे है। इस कोरोना कॉल में लोगो के यहाँ रोजी रोटी का संकट है इस बीमारी से हर कोई डरा हुआ है , जिले में  सख्त लॉक डाउन का आदेश है 31 मई तक  जिला प्रशासन द्वारा  लागू किया गया है इस दौरान निर्माण कार्य भी बंद किया गया था जहाँ पूरा जिला कलेक्टर के लॉक डाउन आदेश का पालन कर रहा है,  वही तुलसी महा विद्यालय अनुपपुर के प्राचार्य  डॉ परमानंद तिवारी कलेक्टर के आदेश की जमकर धज्जियां उड़ा रहे है  और महाविद्यालय में  15 दिनों से नाली का कार्य और 3 दिनों से फर्श रिपेयरिंग निर्माण कार्य जोरो से चल रहा  है, जहाँ पर मजदूरों में न तो  सोसल डिस्टेन्स है और ना ही मास्क।


*समय कम रुपयों का गोलमाल*

प्राचार्य के पास नौकरी का समय बहुत कम बचा हुआ है इसलिए  वह अब खर्च करने से रुकना नही  चाह रहे,  प्रतिवर्ष  निर्धारित शुल्क के  अतिरिक्त  जनभागीदारी  में  छात्र कल्याण के नाम से  प्रति छात्र 600 रु जमा  होने वाले  पैसे का  इस कार्यकाल में  जबरदस्त  दुरुपयोग  किया जा रहा है, जन भागीदारी के बजट को  चौपट कर दिया गया है, प्राचार्य महोदय का इस महाविद्यालय में केवल  उद्देश आर्थिक गतिविधि ही रही है ,  अनावश्यक निर्माण कार्य करा कर छात्रों के पैसों की होली खेली  जा रही है।

*पिछले लॉक डाउन में भी कार्य*

सूत्र बताते है की  पिछले लॉक डाउन में भी स्कूल कॉलेज बंद थी लेकिन  तुलसी महाविद्यालय के प्राचार्य महोदय द्वारा चुपके- चुपके महाविद्यालय में बिजली फिटिंग का काम कराया गया था  और इस बार फिर लॉकडाउन में गुणवत्ता विहीन कार्यों को ढकने के लिए आपदा में अवसर खोज कर महा विद्यालय में  नाली व फर्श निर्माण कराया जा रहा है।जहाँ एक तरफ जरूरत मंद लोग  अपने घरों की छत इस लॉक डाउन आदेश के कारण नही बनवा पा रहे है वही प्राचार्य बड़ी ही बेशर्मी से जिला प्रशासन के आदेश को दर किनार कर निर्माण कार्य करवा रहे है।

*इनका कहना है*

*नवागत कलेक्टर महोदया सोनिया मीना के शासकीय न.पर इस मामले के लिये बात करना चाहे तो उनका मोबाइल रिसीव नही हुआ*

*इस मामले के लिए अपर कलेक्टर सरोधन सिंह से बात करना चाहे तो उनका मोबाइल भी रिसीव नही हुआ*

कॉलेज में जो भी कार्य कराया जा रहा हैं पुराना जनभागीदारी का अनुमोदित कार्य कराया जा रहा 50 मजदूरों से कार्य नही कराया जा रहा है आपको जो करना हो कर ले।

*परमानंद तिवारी प्राचार्य तुलसी महाविद्यालय अनूपपुर*

बिजली मीटर रीडिंग भेजे और लकी ड्रा के माध्यम से स्मार्ट फोन पाए


अनूपपुर/कोतमा 

विद्युत मंडल कोतमा के सहायक अभियंता सुशील कुमार यादव ने बताया कि म.प्र. पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा उपभोक्ताओं को सेल्फ फोटो रीडिंग की सुविधा प्रदान की गई है । कुछ बिजली उपभोक्ता घर बैठे अपने मीटर की रीडिंग स्मार्ट बिजली एप के माध्यम से स्वयं अपलोड कर वास्तविक रीडिंग का बिजली बिल प्राप्त कर रहे हैं ।  बिजली उपभोक्ताओं द्वारा माह की 01 से 05 तारीख तक फोटो रीडिंग अपलोड करना अनिवार्य है ।  सेल्फ फोटो रीडिंग के प्रति उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करने के लिए कंपनी द्वारा एक ईनामी योजना भी लागू की गई है जिसके तहत उपभोक्ता द्वारा अपलोड की गई फोटो रीडिंग स्पष्ट एवं मान्य होने पर लकी ड्रा निकाला जाएगा तथा चयनित उपभोक्ताओं को स्मार्ट फोन ईनाम में दिया जाएगा ।

कोविड -19 महामारी के कारण, संक्रमण से बचाव के लिए मीटर रीडर को उपभोक्ता के परिसर के बाहर स्थापित मीटर की रीडिंग करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि उपभोक्ता एवं मीटर रीडर दोनों ही सुरक्षित रहें । ऐसे उपभोक्ता जो सेल्फ फोटो रीडिंग का उपयोग कर रहे हैं उन्हें अपलोड की गई रीडिंग का बिल भेजा जा रहा है ।

कैसे भेजे सेल्फ फोटो रीडिंग - स्मार्ट बिजली एप डाउनलोड करने के लिए कंपनी द्वारा बिजली उपभोक्ताओं के रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर मैसेज के माध्यम से लिंक भेजी गई है । एप्प को डाउनलोड करने के बाद पहली बार मोबाइल नंबर एवं ईमेल आईडी के साथ रजिस्टर्ड करना होगा । नए उपभोक्ता ‘‘गेस्ट यूजर’’ विकल्प का उपयोग कर भी रीडिंग अपलोड कर सकते हैं । रीडिंग अपलोड करने के लिए स्मार्ट बिजली एप के ‘‘मीटर रीडिंग-अपलोड फोटो’’ विकल्प को चुनें । अपना आईवीआरएस नंबर दर्ज करने पर उपभोक्ता का विवरण डिस्प्ले होगा । मीटर में दिखाई दे रही kwh वाली रीडिंग को टाइप करें तथा फोटो विकल्प के माध्यम से फोटो लेक़र उसे सबमिट करें । स्पष्ट फोटो की रीडिंग मान्य होने पर उपभोक्ता का बिजली बिल जनरेट होगा । अधिक जानकारी के लिए 1912 पर संपर्क किया जा सकता है । बिजली उपभोक्ता स्मार्ट बिजली एप को गूगल प्ले स्टोर से भी डाउनलोड कर सकते हैं तथा एप में उपलब्ध अन्य सुविधाओं का उपयोग कर बिजली संबंधी किसी भी समस्या का निराकरण भी करवा सकते हैं ।


कोयला चोरी में बड़े मगरमच्छों को बचाने की तैयारी जारी कॉलरी प्रबंधन

अनूपपुर/अमलाई

विगत दिनों सोहागपुर क्षेत्र अंतर्गत संचालित धनपुरी ओसियम खदान के डी सेक्टर से गाड़ी का नंबर प्लेट बदलकर लगभग 32 टन कोयला चोरी का मामला पुलिस ने पकड़ा था, और आनन-फानन में कॉलरी प्रबंधन ने अपने दो बाबुओं को निलंबित भी कर दिया, किंतु मामला यह निकल कर आ रहा है कि यह कोई पहला मामला तो हो नहीं सकता जब कोयला चोरी यहां से हो रहा हो,यह बात अलग है कि इस बार पुलिस ने इसे पकड़ लिया प्रारंभिक जांच में पुलिस ने जो अपनी प्रेस नोट रिलीज की थी उसमें किसी भी कर्मचारी का नाम नहीं था किंतु अगले दिन धनपुरी ओसियम सब एरिया व मैनेजर ने दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया पर यह पूरे प्रकरण को देखने के बाद यह समझ में आता है कि इस पूरे मामले में कुछ और भी कर्मचारी शामिल हो सकते हैं जिन्हें बचाया जा रहा है जब बाबुओं की इसमें सहभागिता है तब टेक्निकल इंस्पेक्टर,फील्ड इंचार्ज मैनेजर,सब एरिया सभी लोग जिन्हें यह पूरी जानकारी थी उन्हें शामिल क्यों नहीं किया गया जबकि टेक्निकल इंस्पेक्टर व फील्ड इंचार्ज पूरे समय लोडिंग क्षेत्र में मौजूद रहते हैं अब एक बात यह निकल कर आती है जब ट्रक को कोयला चोरी में पकड़ा गया तब उसके मालिक के ऊपर भी कार्यवाही की जाती है किंतु जिस लोडर से कोयला को ट्रक में लोड किया गया उसके ऑपरेटर को तो आरोपी बना दिया गया किंतु लोडर के मालिक को आरोपी क्यों नहीं माना गया? अगली बात यह निकल कर आती है कि सुरक्षा गार्ड के जो चेक पोस्ट बनाए जाते हैं जो ट्रकों के आवाजाही पर चेकिंग कर पूर्ण रूप से सहमत होते हैं तब ही जाने देते हैं,वह यहां क्यों नहीं मौजूद था ? इन सभी मामलों को जब देखा जाता है तो कहीं ना कहीं सभी वरिष्ठ कर्मचारियो की संलिप्तता बराबर समझ में आती है अभी तो एक प्रकरण संज्ञान में आया है ऐसे कई गाड़ियां कोयला प्रतिदिन पार हो जाता होगा जिसकी पुलिस प्रशासन को कोई जानकारी नहीं, ये कोयला चोरी करके कितने लोग करोड़पति बन गए यह भी एक जांच का विषय है जिन कर्मचारियों को इस पूरे मामले में आरोपी बनाया गया हैं और जिन कर्मचारियों को बचाया जा रहा है सभी कर्मचारियों की संपत्ति की भी जांच की जानी चाहिए की यह लोग कोयला चोरी में कितनी संपत्ति के मालिक बने बैठे हुए हैं,और देश की इस धरोहर को कौड़ियों के दाम में बेच रहै है और यह चोर बेखौफ रूप से घूम रहे हैं और आगामी काम को अंजाम देने की फिराक में लगे हुए हैं।

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