जीवनदायनी नदियों पर केजी डेवलेपर्स के रेत दलालो का बरस रहा कहर*

*खनिज विभाग के आंख पर नोटों की पट्टी रात के अंधेरे में किया जा रहा उत्खनन*

*एन.जी.टी. के कायदों को धता बताकर नदियों का सीना चीर रहे के.जी डेवलपर्स*


इंट्रो - अनूपपुर जिले में जगह जगह नियम विरुद्ध नदियों पर खनन का कार्य किया जा रहा है, जिसके लिये प्रमुख रूप से खादीधारी जिम्मेदार है जिले में कैबिनेट मंत्री व 3 जिले के प्रभारी मंत्री एवं अनूपपुर विधानसभा के विधायक का घर भी होने के बाद भी  सोन नदी का सीना लगातार छलनी किया जा रहा है फिर चाहे बात सोन नदी की हो या फिर केवई या जिले की जीवन देनी अन्य नदियों की हर तरफ बस एक सा हाल है। अनूपपुर के खनिज विभाग के जिम्मेदार मानो ठेकेदार एवं खादी के सामने नतमस्तक है बगल में होता रहता है उत्खनन पर माईनिंग अधिकारी के कानों में जू नही रेंगता खनिज विभाग जिला कार्यालय से चंद कदमो पर होता रेत माफियाओ द्वारा अवैध उत्खनन मगर प्रशासन को कार्यवाही करने में 6 माह लग जाते हैं केजी डेवलपर्स ने कटनी के एक बहुत बड़े रेत माफिया को जिले की सारी खदाने सौप रखी हैं और वो कटनी का  दलाल अनूपपुर के दलालो को दलाली का जिम्मा दे रखा हैं जिसके दम पर पूरे जिले में अवैध उत्खनन कराया जा रहा हैं जो ज्यादा विरोध करता है उसके मुँह में नोटो की गड्डी भर दी जाती सारे लोगो को मैनेज करके अवैध धंधा करके करोड़ो कमाया जा रहा हैं यह नही की प्रशासन या जिले में बैठे जनप्रतिनिधियों को नही मालूम इस रेत के कारोबार में क्या काला पीला किया जा रहा है मगर सब मौन हैं क्यू इसका जबाब तो दो कौड़ी के रेत दलाल ही दे सकते है दलालो का मैनेजमेंट और नेटवर्क बहुत ही तगड़ा हैं चंद रुपये के लिए जीवन दायनी नदियो का सीना छलनी करवा रहे है।

अनूपपुर 

अनूपपुर जो की एक समय जीवनदायनी नदियों के लिए प्रदेश भर में अपनी अलग पहचान रखता था अब माफियाओं और ठेका कम्पनी की कहर की वजह से अपने अस्तित्व की लताश में जुटा हुआ है। अनूपपुर के सोन केवई नदी पर नियम विरुद्ध तरीके से खनन चल रहा है इस आपदा काल में भी के केजी डेवलपर्स द्वारा जिले के खनिज का दोहन करते नजर आए लेकिन जनता की मदद के लिए किसी प्रकार की व्यवस्था को लेकर नजर नहीं आई फिर भी कई जगहों में दिन हो या रात तेजी से उत्खनन कर जिला कलेक्टर के आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए नजर आ रही है जस्ट माइनिंग विभाग ऑफिस के बगल में सीतापुर रेत खदान में रात के अंधेरे में हेवी मशीन उतार कर लगातार उत्खनन किया जा रहा है फिर भी जिम्मेदारों के कानों में जूं न रेंगना उनकी कार्यशैली पर प्रश्न चिन्हं लगा रहे हैं।

*सोन नदी के प्रवाह को छिछले तालाबों में किया परिवर्तित*

बात यदि अनूपपुर की जाएं तो वहां तो जिला मुख्यालय से महज एक किलोमीटर दूर भगवा के रंग से रंगे केजी डेवलपर्स ठेंका कंपनी के करिन्दों के द्वारा सोन नदी जो कि तेज प्रवाह के साथ बहती थी। उसे छिछले तालाबों में परिवर्तित कर दिया गया है। आश्चर्य की बात तो यह है कि मुख्यालय से महज एक किलोमीटर की दूरी पर खनिज विभाग के अधिकारियों एवं एक अरसे से पदस्थ जिला खनिज अधिकारी का कार्यालय है, तो कार्यालय के बगल में जिले के मुखिया कलेक्टर का दरबार है। जहां हर कोई न्याय की उम्मीद से आता है। पर मां की तरह जिले में पूजी जाने वाली नदी को इंसाफ दिलाने में  क्यों असफल साबित हो रहे है।जहां रेत के नाम पर माफिया सक्रिय है और टी.पी. के नाम पर बिना टी.पी. रेत का खनन जारी है।

*सुनहरी रेत पर खादी और रेत दलाल का कब्जा*

प्रदेश में भाजपा शासन आने के बाद जिले व संभाग में कुर्ते की क्रीज चढ़ाकर जगह-जगह माफिया जिम्मेदार अधिकरियों के उपर दबाव बनाकर अवैध खनन करा रहे है वही अनूपपर में तो प्रत्यक्ष रूप से  भगवाधारी ने जिले भर में अपना आतंक जमा रखा है, बात यदि प्रशासन की जाएं तो हर जिले में खनिज निरीक्षक खनिज अधिकारी, एस.डी.एम. व कलेक्टर एवं पुलिस का समुचित अमला मौजूद होने के बाद भी कार्यवाही शून्य प्रतीत हो रही है।

*आपदा काल में के.जी डेवलपर्स नहीं आई मदद के लिए आगे*

जिले में स्थित चचाई धर्मल पावर प्लांट, मोजर बेयर प्लांट, रिलायंस गैस प्लांट द्वारा इस संक्रमण काल को देखते हुए व्यवस्था के अभाव में जूझ रहे लोगों को देखते हुए कंपनियों द्वारा लगातार हॉस्पिटल के लिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पीपीटी ऑक्सीजन सिलेंडर वह तरह-तरह की मेडिकल उपकरणों को जिला कलेक्टर के सामने देते दिखाई दे रहे हैं वहीं दूसरी ओर जिले के सक्षम लोग भी मदद करते दिखाई दे रहे हैं लेकिन जिले के खनिज की जान कहे जाने वाली रेत खदानों का ठेका लेने वाला कंपनी के.जी डेवलपर द्वारा किसी भी मदद के लिए नहीं नजर आई और लगातार जगह जगह वैध खदानों के आड़ में अवैध खदान संचालित करते हुए उत्खनन किया जा रहा है जन चर्चाओं की माने तो माइनिंग विभाग के बगल में स्थित सीतापुर रेत खदान व चचाई में भी रात के अंधेरे में हैबी पोकलैंड मशीन उतार कर लीज क्षेत्र से हटकर उत्खनन जारी कर एन.जी.टी के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए नदी से गीले रेत का उत्खनन कर परिवहन किया जा रहा है जो सीधे-सीधे माइनिंग विभाग की मौन सहमति को प्रदर्शित करता है।

कोरोना नियमो के उल्लंघन पर दुकानदारों पर कार्यवाही 5 दुकाने सील


अनूपपुर/कोतमा

बढ़ते करुणा संक्रमण के फैलाव को रोकने के लिए जिला प्रशासन के द्वारा लॉकडाउन घोषित करते हुए कोरोना कर्फ्यू लगाया गया है । लेकिन नगर के दुकानदारों के द्वारा नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दुकानों के शटर खोलकर व्यवसाय किया जा रहा है बार-बार प्रशासन के समझाइश देने के बाद भी मानने को तैयार नहीं है । 30 मई को एसडीएम  ऋषि सिंघई  के निर्देशन में आर आई प्रेम लाल चौधरी  पटवारी राजीव द्विवेदी राम सिंह एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम के द्वारा चेकिंग के दौरान 5 दुकाने शटर खोलकर बिक्री कर दे पाए गए जिनमें परिधान वस्त्रालय चंदेरिया किराना दुकान सफीक किराना मुखर्जी चौक में मोबाइल रिपेयरिंग की दुकान  मां शारदा दुकान को नियमों के तहत सील करते हुए कार्यवाही की गई ।

जंगलों को लगी भू माफिया की नजर, करोड़ों की सरकारी जमीनों पर हो रहा कब्जा


अनूपपुर/अमरकंटक 

मप्र की पवित्र नगरी अमरकंटक में पिछले 2 वर्षों के लॉकडाउन में हजारों पेड़ काट दिए  गए हैं। किसी को आश्रम के लिए, किसी को विद्यालय के लिए जमीन चाहिए, किसी को खेती के लिए, किसी को घर बनाने के लिए , किसी को लकड़ी चाहिए । अमरकंटक तो किसी को चाहिए ही नहीं । अमरकंटक में लोग बिना किसी सरोकार, बे वजह हरे - भरे पेड़ काटे जा रहे हैं । यहां के पर्यावरण को बेतहाशा क्षति पहुंचाई जा रही है । लोग अपना घर जंगल में बना लेते हैं, जंगली जानवरों से बचाओ के लिए कोई करेंट लगाता है तो कोई पेड़ ही काट रहा है । अमरकंटक के प्राकृतिक वातावरण से प्रभावित होकर लोग यहां आ तो जाते हैं, घर भी बना लेते हैं, इतने पर भी लोगों का जी नही भरता, फिर बाड़ी चाहिए, इसके बाद उन्हें पूरा गांव चाहिए । इसके बाद शुरू हो जाता अमरकंटक के प्राकृतिक वातावरण को क्षति पहुंचाने का कार्यक्रम । इस प्रकार अतिक्रमण करने, पेड़ काटने की आज़ादी यहां प्रशासन की लचीली व्यवस्था के कारण ही होता है । अमरकंटक में तीन विभाग नगर पालिका, वन विभाग, राजस्व विभाग इन तीनों को एक साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है । क्योंकि अभी तक की अमरकंटक की दुर्दशा का कारण ही इन तीन विभाग का मिलजुलकर काम न करना रहा है । एक विभाग अपनी जिम्मेदारी से पल्ला इसलिए झाड़ लेता है क्योंकि वह तो उनकी जमीन है हमारी नही है । प्रशासन को अमरकंटक निर्माण के विषय में गहन चिन्तन की आवश्यकता है । इसके पश्चात् एक कड़ी न्याय व्यवस्था की रूपरेखा तैयार करनी होगी। जल, जंगल, जमीन बचाने के लिए एक निष्पक्ष समिति बनानी होगी । जो अमरकंटक के पर्यावरण को क्षति पहुंचाने वाले लोगों के खिलाफ आवाज उठा सके । तभी अमरकंटक में मां नर्मदा के उद्गम के जल स्रोत, अमरकंटक के पेड़, जमीन बच सकेंगें । नहीं तो अमरकंटक का सर्वनाश निश्चित है ।

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