दुकानदारों को वैक्सीन लगाने के निर्देश बगैर मास्क के आने वाले ग्राहकों को सामान देने वाले दुकानदारों की दुकानें होंगी सील

अनूपपुर 30 मई 

 कलेक्टर सुश्री सोनिया मीना ने अनुविभागीय दण्डाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे 1 जून 2021 से प्रदेश में आरंभ होने जा रही अनलाॅक की प्रक्रिया पर जिले में अमल के लिए दुकानें खोलने हेतु होमवर्क कर लें। कलेक्टर ने अनुविभागीय दण्डाधिकारियों से कहा कि यह उन्हें सुनिष्चित करना है कि शासन की गाइडलाइन के मुताबिक 50 फीसद दुकानों को खोलने के किस क्रम को अपनाया जाए। इसके लिए उन्होंने होमवर्क कर पूरी तैयारी करने के अनुविभागीय दण्डाधिकारियों को निर्देश दिए। 

कलेक्टर सुश्री मीना आज निवास से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जिले में ‘‘अनलाॅक’’ के संबंध में अपर जिला दण्डाधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिले के अनुविभागीय दण्डाधिकारियों, मुख्य नगरपालिका अधिकारियों से चर्चा कर रही थीं। 

कलेक्टर ने अनुविभागीय दण्डाधिकारियों को निर्देश दिए कि वे सभी लोगों से बात कर शहरी क्षेत्र में 50 फीसद दुकानें खोलने का निर्धारण करें। आपने कहा कि दुकानदारों से सोशल डिस्टेंसिंग एवं मास्क लगाने का पालन कराना सुनिष्चित किया जाए। दुकानदार स्वयं भी मास्क लगाएं और उन ग्राहकों को सामान दें, जो मास्क लगाए हों। बगैर मास्क के आने वाले ग्राहकों को सामान देने वाले दुकानदारों की दुकानें सील कर दी जाएं। आपने दुकानदारों को वैक्सीन लगवाने के अनुविभागीय दण्डाधिकारियों को निर्देश दिए। 

कलेक्टर ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए कि वे शहरी क्षेत्र में वैक्सीनेशन शुरु कराना सुनिष्चित करें। आपने खण्ड चिकित्सा अधिकारियों से बात कर कैम्प लगाकर शत प्रतिषत दुकानदारों का वैक्सीनेशन कराने के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को निर्देश दिए। कलेक्टर ने रेड जोन अथवा जहां ज्यादा पाॅजीटिव केस पाए गए हैं, उन क्षेत्रों में गाइडलाइन के दिशानिर्देषों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए। आपने ऐसे क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही बंद रखने के निर्देश दिए।

PPE किट पहन नदी में कोरोना संक्रमित शव फेंक रहे लोगों का वीडियो हुआ वायरल


*बलरामपुर उत्तरप्रदेश*

कोरोना की दूसरी लहर में ऐसी कई तस्वीरें आई जिसने मानवता को शर्मसार किया. कई जगह नदियों में शव उतराते नजर आए. कहा गया कि सभी शव कोरोना संक्रमित हैं और आर्थिक तंगी की वजह से अंतिम संस्कार न कर पाने की स्थिति में परिजनों ने इन्हें नदियों में प्रवाहित किया. इस मुद्दे को लेकर विपक्ष ने सरकार पर निशाना साधा जिसके बाद शवों के प्रवाह पर रोक लगाने के साथ ही जल पुलिस की तैनाती गई. इस बीच उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले से एक वीडियो सामने आया है. इस वायरल वीडियो में 2 युवक एक शव को पुल से राप्ती नदी में फेंकते हुए नजर आ रहे हैं. शव फेंकने वाले दोनों युवकों में से एक युवक पीपीई किट पहने नजर आ रहा है.

घटना कोतवाली नगर क्षेत्र के राप्ती नदी पर बने सिसई घाट पुल की बताई जा रही है. वायरल वीडियो के संदर्भ में सीएमओ डॉ विजय बहादुर सिंह ने बताया कि राप्ती नदी में फेंका जा रहा शव सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ के रहने वाले प्रेम नाथ मिश्र का है. उन्होंने बताया कि 25 मई को कोरोना संक्रमित होने पर उन्हें संयुक्त जिला अस्पताल के एल टू वार्ड में भर्ती कराया गया था. 28 मई को इलाज के दौरान प्रेमनाथ मिश्र की मृत्यु हो गई थी. सीएमओ ने बताया कि कोरोना प्रोटोकॉल के तहत मृतक के शव को उनके परिजनों को सौंप दिया गया था. सीएमओ ने बताया वायरल वीडियो में शव को राप्ती नदी में फेकते हुए दर्शाया गया है. इस संबंध में कोतवाली नगर में केस दर्ज करा दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है.

शव को पुल से राप्ती नदी में फेंके जाने के समय वहां से गुजर रहे कुछ लोगों ने इसका वीडियो बनाकर वायरल किया है. शव फेंकने वाले दोनों युवक कौन हैं उनकी पहचान की जा रही है. उन दोनों युवकों में से एक ने पीपीई किट पहन रखी है. यह भी जांच का विषय है कि पीपीई किट पहनने वाला युवक स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी है या कोई और. यहां यह बात भी महत्वपूर्ण है कि कोरोना संक्रमण से मरने वाले लोगों के दाह संस्कार के लिए सरकार ने 5000 रुपए देने की व्यवस्था की है. बावजूद इसके पुल से शव को नदी में फेंका जाना एक गंभीर आपराधिक घटना मानी जा रही है.

बन्द कमरे में  निर्णय ले जारी किया तुगलकी फरमान - आशुतोष सिंह


अनूपपुर/पुष्पराजगढ़

तहसील स्तरीय आपदा प्रबंधन समिति के नाम चंद लोगों को जनपद पंचायत के प्रथम तल के बंद कमरे में गोपनीय तरीके से बैठाकर लगभग 2 महीने से बंद पड़े बाजार को कैसे खोलना है का निर्णय कर लिया जाता है जिसकी भनक तक नही लगती। ऐसा जिला ही नही पूरे प्रदेश में कंही सम्भव है तो वह पुष्पराजगढ़ है जहाँ एक ओर सन्नाटा पसरा हुआ है फुटपाथ में ब्यवसाय कर अपना जीवकोपार्जन करने वाले व्यापारियों को खाने के लाले पड़ रहे हैं, उनकी तो सुध लेने वाला कोई नहीं वही दूसरी ओर आपदा प्रबंधन के नाम से तहसील मुख्यालय में बनाई गई कमेटी मनमाना निर्णय थोपने के लिए पहले से ही जगजाहिर है इस कमेटी में ना तो ब्यापारयों का प्रतिनिधि मंडल सामिल है और ना ही क्षेत्रीय विधायक इस तरह जनप्रतिनिधियो पत्रकारों की उपेक्षा कर मनमाने तरीके से चंद लोगो से सलाह मसबरा कर निर्णय लेकर ब्यापारियों के ऊपर ज़बरदस्ती थोपना कितना जायज है कितना न्यौचित है यह सवाल खुद खड़ा हो रहा है। एक तरफ जनता कॅरोना जैसी वैश्विक महामारी से जूझ रही है वही प्रशानिक अधिकारी बगैर ब्यापारियों से चर्चा करे तथाकथित लोगो के कहने पर निर्णय ले फरमान जारी कर रहे हैं आगामी दिनों के नफा नुकसान का जिम्मवार कौन होगा ? यही बन्द कमरा और चंद लोग। बैठक में लिए गए ऐसे निर्णयों की जानकारी के अभाव में अगले दिन बेकसूर जनता और फुटपाथ के ब्यापारियों पे लाठी भांजना उन्हें अर्थदंड से आरोपित करना जो कोविड 19 जो क्राइसेस मैनेजमेंट ग्रुप की कार्यप्रणाली पर गहरा सवाल खड़ा करती है।

क्योंकि जंनता तक बात पहुंचाने वाले मीडिया प्रेतनिधियों को 2 माह बाद भी ऐसे कार्यक्रमों में नही बुलाया जा रहा। यह कैसी समिति है जिसमे समाज सेवियो ब्यापारियों जनप्रतिनिधियों मीडियाकर्मियों की उपेक्षा कर उनकी अनुपस्थिति में निर्णय लेकर कागजी खानापूर्ती कर वाहवाही लूटी जा रही है। ऐसी कार्य प्रणाली और तुगलकी फरमान समझ के परे है।

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