विभाग की मिलीभगत से बंद पडी खदान से लगातार कोयला चोरी, जिम्मेदार अंजान


अनूपपुर/कोतमा

जमुना कोतमा एसईसीएल के जमुना कोतमा क्षेत्र में बंद पड़ी दैखल हरद जमुना ओसिएम से प्रतिदिन कोल माफियाओं द्वारा बकायदा मजदूर लगाकर पहले तो सुरा नुमा कोयले को खोदते हैं और उसे एकत्र करके फिर ट्रैक्टर द्वारा ले जाकर उन्हें ईटा  भट्ठा में 4 से 5 हजार रुपए प्रति ट्रैक्टर बेचा जाता है यह  कार्य अनवरत जारी है जिसे देखने और सुनने वाला कोई नहीं है ज्ञात हो कि इस कोयले की चोरी की जानकारी जब कालरी विभाग के सुरक्षा डिपार्टमेंट को दिया गया तो उन्होंने कोई कार्यवाही नहीं किया जिससे इनकी भूमिका संदिग्ध लग रही है अभी कुछ दिन पूर्व भी बंद पड़ी 11/12 खदान से इन माफियाओं द्वारा सैकड़ों ट्रैक्टर कोयला खोद कर बेच दिया गया वह भी सुरक्षा विभाग के नाक के नीचे लेकिन उन्होंने कोई कार्यवाही करना उचित नहीं समझा यहां तक की शिकायत कर्ताओं ने कोयला खोदकर बोरी में भरकर  ट्रैक्टर में ले जाते हुए का वीडियो तक बनाकर वायरल किया लेकिन बाह रे कालरी का सुरक्षा विभाग उन पर कार्यवाही करने की बजाय उन माफियाओं को उल्टा इसकी जानकारी दे दी की यह लोग तुम्हारी शिकायत कर रहे हैं अब सवाल ये उठता है कि जब कालरी का सुरक्षा विभाग ही अवैध कारोबारियों से मिला रहेगा तो कालरी की सुरक्षा कैसे होगी यह अपने आप में बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा हो रहा है क्षेत्र की जनता ने जिले के पुलिस अधीक्षक महोदय व लोकप्रिय महाप्रबंधक सुधीर कुमार से मांग किया है कि जमुना ओसिएम में दिनदहाड़े मेन रोड के बगल में चल रहे कोयले की अवैध खुदाई जिसे किसी भी समय जाकर देखा जा सकता है उसे देख कर उस पर रोक लगाने की जनहित में कृपा करें साथ ही जो सुरक्षा विभाग के अधिकारी कर्मचारी इस कोयला चोरी में संलिप्त हैं उनके खिलाफ कठोर से कठोर कानूनी कार्यवाही किया जाए ताकि राष्ट्र और कोल इंडिया की संपदा को बचाया जा सके अब देखना यह है कि महाप्रबंधक महोदय इस ओर ध्यान देते हैं या इसी तरह राष्ट्र की संपदा लुटती रहेगी और कोल माफिया और मिलीभगत करने वाले कर्मचारी अधिकारी मालामाल होते रहेंगे यह तो आने वाला समय बताएगा हां इतना जरूर है कि क्षेत्र में सैकड़ों की संख्या में ईटा भट्ठा पक रहा है तो कोयला कहां से आ रहा है यह भी अपने आप में जांच का विषय है

*इनका कहना है*

ठीक है अगर जमुना ओसिएम से कोयले की चोरी हो गई है तो शाम को जाकर हम लोग देखते हैं

मारकंडे सिंह सिक्योरिटी विभाग जमुना कोतमा क्षेत्र

पुलिस की दादागिरी, नगरपालिका कर्मचारी को भी नही छोड़ा वसूल लिए रुपये


*एक तरफ पुलिस कप्तान पुलिस की छवि सुधारने की सारी कवायद कर रहे, वही दूसरी तरफ बुढार पुलिस कप्तान के अरमानों पर पलीता लगा रही*

शहडोल/बुढ़ार

बुढार पुलिस इन दिनों वसूली में व्यस्त है वही नगर पालिका धनपुरी के कर्मचारियों को भी नहीं छोड़ रही है अभी तक तो यह आरोप कोयला ट्रांसपोर्टर  व मोटर ड्राइवर लगा रहे थे लेकिन बुढार पुलिस के भ्रष्टाचार और वसूली का किस्सा अब आम हो चला है बुढार पुलिस अभी तक ट्रक चालकों से हजार पंद्रह सौ की वसूली कर रही थी अब कोरोना योद्धाओं को बिना वजह रोक कर उनसे जबरन पैसा वसूल रही है घटना  बीते दिनों की है नगर पालिका धनपुरी में कार्यरत सचिन कुमार कचेर सरकारी काम से बुढार से वापस लौट रहे थे तभी गिध्द दृष्टि जमाए झारिया ने सचिन कुमार को बिना वजह पहले तो गाड़ियों के पेपर और तरह तरह के नियम बताए और सब कुछ मुकम्मल होने पर भी झरिया ने कहा कि पैसा तो तू दे कर जाएगा चालान तो कटेगा एस पी साहब का आदेश है। दिन रात नगर की सेवा के लिए तत्पर्य रहने वाले नगर पालिका धनपुरी के कर्मचारियों से इस तरह का बर्ताव क्या उचित है। पुलिस की वर्दी और जन सेवा की भावना को भूल झारिया आज गरीब जनता को लॉक डाउन का भय दिखा कर उगाही में मसगूल है।

पुलिस कप्तान की साफ सुथरी छवि को दागदार करने में उनका ही महकमा जब जुटा हो तो दूसरों से क्या उम्मीद की जा सकती है। बहरहाल, जबरदस्ती बुढार पुलिस कर्मियों  ने नगरपालिका कर्मचारी सचिन कचेर से ढाई सौ रुपए का चालान काटकर वाहवाही और सुर्खियों के बटोर ली।जब इस बाबत सचिन कचेर से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि बुढार में झरिया जैसे पुलिस वाले को सरकार ने क्यू तैनात किया है?? सचिन ने कहा अब इस नगर का भगवान ही मालिक है जहां पुलिस कप्तान सुस्त पुलिस की कार्यप्रणाली को सुधारने के लिए रात दिन मेहनत कर रहे हैं वही चालान के नाम पर वसूली बाज पुलिस कर्मियों को किसने छूट दी यह गंभीर विषय है

केजी डेवलपर्स रेत दलालो और गुंडो के दम पर करा रहा नदियों से अवैध उत्खनन

*रेत दलालो के आगे खनिज विभाग नतमस्तक, केवल खानापूर्ति की कार्यवाही*

रेत खदान के नाम पर नियम विरुद्ध मानको को धता बताकर रेत उत्खनन करा रही केजी डेवलपर्स जीवनदायिनी नदी सोन के भौगोलिक संरचना से कर रहे खिलवाड़ कलेक्टर के लॉकडाउन आदेश की अवहेलना करते हुए कर रही अवैध उत्खनन व भंडारण जिस प्रकार से अनूपपुर जिले में ठेका कंपनी केजी डेवलपर्स की मनमानी चल रही है उससे तो यही प्रतीत हो रहा है की हमाम में सब... की तर्ज पर अपनी जिम्मेदारियों को खनिज विभाग के अधिकारियों ने तिलांजली देकर ठेका कंपनी के कर्ता धर्ताओं का दामन थाम लिया है सबसे बड़ा सवाल तो यह है की अवैध उत्खनन एवं प्राप्त शिकायतो पर माईनिंग विभाग मौन धारण की है जबकि केजी डेवलपर्स कटनी के रेत दलाल और अनूपपुर के रेत दलाल एवं उनके गुंडो के दम पर अवैध रेत उत्खनन का काम बड़ी मात्रा में किया जा रहा हैं अनूपपुर चंदास नदी अमरकंटक रोड के पास रेत दलाली का कार्यालय चल रहा हैं जिसका सरगना कोई एक कटनी का दलाल हैं जो पूरे जिले के खदान की जबाबदारी ले ली हैं और ज्यादातर खदान किसी न किसी को उस क्षेत्र के दबंगो को देकर अवैध खनन कराकर नदियो का आकार परिवर्तन किया जा रहा हैं जब कुछ ज्यादा मामला बिगड़ जाता हैं तो प्रशासन एक दो कार्यवाही करके अपना कोरम पूरा कर लेता हैं रेत दलालो के दम पर खनिज विभाग का कार्यालय चलता हैं। 


अनूपपुर- 

अनूपपुर जिले के 22 खदानों का ठेका केजी डेवलपमेंट्स कंपनी को दिया गया है लेकिन कंपनी ने सारे नियमों को दरकिनार करते हुए अपनी मनमानी तरीके से लगातार जिले के जीवन रेखा कही जाने वाली नदियों का सीना छलनी कर रही है। जिले में स्थित सीतापुर घाट पर ठेकेदार के गुर्गों ने  रेत का कारोबार अंधरे में  जारी कर दिया है  यहां पर न ही  लीज एरिया का पता है, बहरहाल सरकार ने रेत ठेकेदार को ठेका देकर मानो जिले के लोगों को लूटने का ठेका केजी डेवलपर्स को  दे दिया हो इनके ऊपर अभी तक विभाग ने कोई ठोस कार्यवाही नहीं कि। जिसका नतीजा यह रहा कि मनमाने दर, पर मनमाना उत्खनन जारी है ! हालांकि इसकी शिकायत स्थानीय लोगों द्वारा समय-समय पर प्रशासन के पास पहुंचाई जाती है लेकिन पता नहीं प्रशासन को कार्यवाही से क्या गुरेज है।

*लीज एरिया से बाहर उत्खनन*

जिले की जीवनदायिनी नदी कहीं जाने वाली सोन नदी में इन दिनों अवैध उत्खनन तेजी से किया जा रहा है जब से केजी डेवलपर्स द्वारा जिले में रेत का ठेका लिया गया है तब से वह अवैध उत्खनन को लेकर वह अपनी कार्यप्रणाली को लेकर सुर्खियां बटोरते नजर आ रही है कहीं पर गाड़ी जाने के लिए सोन नदी में रेता के ढेर लगा कर सड़क बनाकर नदी के बीचो-बीच रात के अंधेरे में हैबी मशीनों को उतारकर नदियों का सीना छलनी करते नजर आ रही है और मानसून सत्र के पहले जगह-जगह भंडारण किया जा रहा है माइनिंग ऑफिस के बगल में स्थित सीतापुर रेत खदान जिसमें अवैध उत्खनन को लेकर हुई शिकायत में नपाई की गई थी जिसमे कार्यवाही न होने पर  ठेकेदार के हौसले बुलंद इतने हो गए की भारी मशीन को नदी के बीचो-बीच उतारकर रात के अंधेरे पर कहीं बिना टी.पी. के अवैध उत्खनन कर मानसून सत्र के पहले भंडारण किया जा रहा है। जिसमें जिला प्रशासन को सख्ती से ध्यान देने की जरूरत है।

*लॉकडाउन में नही है प्रशाशन का भय-अवैध उत्खनन जारी*

जिले के सीतापुर,जैतहरी, बकही,चचाई बाबा कुटी धाम के पीछे और साथ ही भालूमाड़ा क्षेत्र के  पोड़ी घाट, खरिका टोला, चोलना सोन नदी घाट ग्राम पंचायत दारसागर गौशाला के पीछे शिवलहरा घाट व केवई नदी से दिन के उजाले में दोपहर में कुछ रेत माफिया अवैध रेत का खनन परिवहन कर रहे है रेत का अवैध खेल इस समय लॉक डाउन में खनन माफिया के लिए सुनहरा अवसर लेकर आया है।लॉकडाउन होते ही क्षेत्र के रेत कारोबारी नदियों से अवैध रूप से रेत का खनन परिवहन कर रहे हैं,यहां रेत की कोई भी खदान लीज पर नहीं है फिर भी रेत की चोरी बेखौफ हो रही है। यहां वह खदान है जो विगत कुछ महीनों पहले ट्रैक्टर ट्राली पलटने से एक गरीब ड्राइवर  की दबने से मौत मौके पर हो गई थी इसके बाद भी माइनिंग अधिकारी के कान में जो नहीं रेंगा और लगातार अवैध रेत उत्खनन चला आ रहा है शासन-प्रशासन, खनिज,वन विभाग लाख सफाई दे,कार्रवाई की बात करें लेकिन आज भी वर्षों से स्थानीय कुछ लोग अवैध रेत के कारोबार में निरंतर लगे हुए हैं उनके इस कारोबार पर आज तक कोई कार्यवाही नही हुई।

*मानको की उड़ रही धज्जियां*

 वैसे तो कोई भी निर्माण कार्य  या फिर सरकार द्वारा संचालित किए गए कार्यों का कंस्ट्रक्शन एरिया में बोर्ड आवश्यक रूप से लगाने के निर्देश होते है जिसमें ठेका कंपनी का नाम, कंस्ट्रक्शन क्षेत्र व कीमत इत्यादि दर्शाया जाता है जिससे कार्य की पारदर्शिता बनी रहे लेकिन सारे नियमों को दरकिनार करते हुए रेत ठेकेदार ने सिर्फ और सिर्फ उत्खनन पर ध्यान दिया ना तो यहां पर  बोर्ड का पता है ना ही कितने घन मीटर रुपए रेत की कीमत है एक ही चीज यहां पर है ‘‘आइए पैसा दीजिए और रेत ले जाइए’’ हालांकि इसकी शिकायत कई बार मीडिया एवं नेताओं द्वारा माइनिंग अधिकारी को दी गई है लेकिन पता नहीं अभी तक जिम्मेदारों को फुर्सत क्यों नहीं मिली कि आकर रेत ठेकेदार की लापरवाही को देख सके व कार्यवाही कर सके।

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