दबंग पब्लिक प्रवक्ता

शांति सिंह का स्वर्णिम प्रदर्शन, राज्य स्तरीय खेलो एमपी यूथ गेम्स में एक दिन में दो पदक जीतकर रचा इतिहास

*राष्ट्रीय चैंपियनशिप इवेंट में करेंगी प्रदेश का प्रतिनिधित्व*


उमरिया

उमरिया की प्रतिभाशाली धावक शांति सिंह ने दोहरी सफलता अर्जित कर अपने शानदार प्रदर्शन से प्रदेश और शहर का नाम रोशन किया है।
मध्य प्रदेश शासन द्वारा आयोजित खेलो एमपी यूथ गेम्स, भोपाल में 800 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक और 400 दौड़ में रजत पदक जीतकर उन्होंने अपनी प्रतिभा का उत्कृष्ट परिचय दिया। साथ ही यह अत्यंत गर्व का विषय है कि आगामी राष्ट्रीय चैंपियनशिप 2026, के 800 मीटर इवेंट में वे मध्य प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगी। प्रदेश शासन खेल और युवा कल्याण विभाग के द्वारा आयोजित खेलो एम पी यूथ गेम्स 2025 का आयोजन सम्पूर्ण प्रदेश में ब्लाक स्तर से जिला और संभाग स्तर से राज्य स्तर तक लगभग 9 संभागों में आयोजित किया जा रहा हैं जिसका उद्घाटन प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के द्वारा विभिन्न मंत्रियों की उपस्थिति में टी टी नगर स्टेडियम भोपाल में प्रखर गायक कैलाश खेर की उपस्थिति में किया गया था।

खेलो एम पी यूथ गेम्स के राज्य स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता भोपाल के 800 मीटर दौड़ में उमरिया जिला विकासखंड मानपुर ग्राम बारहुत पिपरहा टोला निवासी शांति सिंह जिन्होंने स्वर्ण पदक जीत कर जिले को गौरवान्वित किया है। शांति ने एक साथ दो पदक अर्जित किए हैं 400 मीटर दौड़ में रजत पदक प्राप्त कर जिले की पहली बालिका एथलीट बनी, जिसने राज्य स्तर पर एक ही दिन में दो पदक प्राप्त किए हैं। शांति के पिता मोल सिंह कृषक और माता सुमित्रा बाई गृहणी का कार्य करती हैं शांति सिंह वर्तमान में मध्य प्रदेश राज्य एथलेटिक अकादमी भोपाल की छात्रा हैं जो राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय  प्रतियोगिता में पदक जीतने के लिए प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। खेल और युवा कल्याण विभाग की जिला स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेकर शांति सिंह ने राज्य स्तर की पात्रता प्राप्त की थी एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सीताराम से मुलाकात कर जिले को राज्य स्तर पर पदक दिलाने का भरोसा दिया था। जिले की होनहार बेटी की उपलब्धि पर लोगो ने शांति को बधाई देते हुए उज्ज्वल भविष्य की कामना की है, वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी देश व उमरिया का गौरव बढ़ाएँ।

सुलगते सवाल, सत्ता का मद या जनता की प्यास? मंत्री दिलीप जायसवाल के बिगड़े बोलों से बढ़ा विवाद

*अमर्यादित टिप्पणी बन सकता है गले की फांस*


अनूपपुर

नगरपालिका परिषद बिजुरी में दूषित पेयजल की समस्या अब केवल स्थानीय असुविधा नहीं, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक बहस का मुद्दा बन चुकी है। काला पानी सप्लाई होने की शिकायतों के बीच जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी पर सवाल उठ रहे हैं। इसी दौरान राज्य मंत्री दिलीप जायसवाल की पत्रकारों के प्रति कथित अमर्यादित टिप्पणी ने मामले को और तूल दे दिया है। जनता जहां पीने के साफ पानी की मांग कर रही है, वहीं इस मुद्दे पर दिए गए मंत्री के बयान को लेकर जनमानस और मीडिया जगत में नाराज़गी देखी जा रही है।

नगरवासियों का आरोप है कि बिजुरी में फिल्टर प्लांट और टैंकरों के माध्यम से जो पानी सप्लाई किया जा रहा है, वह साफ पेयजल की कसौटी पर खरा नहीं उतर रहा। कई वार्डों में गंदे, बदरंग पानी की शिकायतें सामने आई हैं। अनेक बोरवेल वर्षों से महज कुछ समय तक ही सुचारू रूप से पानी देकर बंद पड़ जाते हैं, जबकी लोग पूरी तरह नगरपालिका सप्लाई पर निर्भर हैं। पानी की गुणवत्ता को लेकर नियमित जांच और पारदर्शिता का अभाव है। कुछ नागरिकों ने पेट और त्वचा संबंधी समस्याएं बढ़ने की आशंका जताई है, हालांकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस पर कोई आधिकारिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।

जब इस विषय पर मंत्री दिलीप जायसवाल से सवाल किया गया, तो उनके बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया। उपस्थित पत्रकारों के अनुसार, मंत्री ने कथित रूप से यह टिप्पणी की कि यह पानी बर्तन धोने या सब्जी-भाजी सींचने के उपयोग का है। यह बयान सामने आने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या जनता को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी नहीं है? यदि पानी पीने योग्य नहीं है, तो वैकल्पिक व्यवस्था क्या है — इस पर स्पष्टता अब तक नहीं मिल पाई है।

मामले को लेकर स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि सवाल पूछने पर मंत्री का रवैया असहज और आक्रामक था। इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद की स्वस्थ परंपरा के विपरीत बताया जा रहा है। लोकतंत्र में मीडिया को चौथा स्तंभ माना जाता है, और जनसमस्याओं को सामने लाना उसकी जिम्मेदारी है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों की ओर से संयमित और जवाबदेह व्यवहार की अपेक्षा की जाती है।

बिजुरी में पेयजल संकट और मंत्री के बयान के बाद अब कई बुनियादी प्रश्न चर्चा में हैं क्या क्षेत्र में पेयजल गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी? यदि पानी पीने योग्य नहीं, तो सुरक्षित पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था कब तक? क्या जनप्रतिनिधियों द्वारा मीडिया के प्रति कथित असम्मानजनक व्यवहार पर कोई स्पष्टीकरण आएगा? दशकों से एक ही राजनीतिक दल के प्रतिनिधित्व के बावजूद बुनियादी सुविधाओं का अभाव क्या प्रशासनिक विफलता नहीं दर्शाता। बड़ी आबादी नगरपालिका सप्लाई पर निर्भर है, वहां पानी केवल सुविधा नहीं, जीवन का प्रश्न है।राजनीतिक बयानबाज़ी से इतर, लोग ठोस समाधान चाहते हैं साफ पानी, पारदर्शी व्यवस्था और जवाबदेही। 

कोतमा का भाजपा कार्यकर्ता अनूपपुर मंडल अध्यक्ष की कर रहा है दावेदारी, मंत्री व जिलाध्यक्ष का खास, उठे सवाल



अनूपपुर 

सबका साथ सबका विकास की तर्ज पर भाजपा सरकार ने देश और प्रदेश में नि:संदेह कई आयाम स्थापित किए हैं, लेकिन संगठन को लेकर वर्तमान की तस्वीर कुछ और ही बयां कर रही है। जिले के भारतीय जनता पार्टी संगठन के इस मनभावन स्लोगन के विपरीत ही नजारा देखने को मिल रहा है। पार्टी संगठन ने जहां एक और जिले के 16 मंडलों में से 15 मंडलों का गठन कर गंगा नहा लेने जैसा कार्य किया है, कुछ में पुराने तो कुछ में नए सेनापतियों को कमान सौंप गई है, वही सबसे महत्वपूर्ण जिला मुख्यालय अनूपपुर शहर मंडल की घोषणा विशेष होने कारण शेष है। अनूपपुर शहरी मंडल में अध्यक्ष पद हेतु दावेदारी कर रहे दिग्गज नेताओं की करगुजारियों पर यदि एक नजर डाली जाए तो निश्चित संगठन के कार्यकर्ताओं की तस्वीर साफ हो जाएगी, मंडल अध्यक्ष बनने की होड़ में अनूपपुर से भोपाल तक दौड़ लगा रहे हैं दिग्गज नेताओं में राजा से लेकर रंक तक कई बाहुबलियों के नाम शुमार है, इसी क्रम में कोतमा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत पिपराहा निवासी भाजपा कार्यकर्ता बृजेश चतुर्वेदी की भी प्रबल दावेदारी मानी जा रही है, गौरतलब है कि नेताजी कोतमा विधानसभा के मूल निवासी हैं तथा अनूपपुर में कार पार्लर का व्यवसाय करते हैं, अब सवाल यह उठता है कि अनूपपुर मंडल से अध्यक्ष पद की दावेदारी कर रहे बृजेश चतुर्वेदी की राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है और कोतमा विधानसभा क्षेत्र का होने के बावजूद विधानसभा अनूपपुर मंडल में दावेदारी का क्या औचित्य है, क्या अनूपपुर शहर नेता तथा नेतृत्व विहीन है, क्या मंडल अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण दायित्व को संभालने की क्षमता अनूपपुर के किसी भी नेता में नहीं है या फिर यह माना जाए की पार्टी हाई कमान और मंत्री जी की जी हजूरी करने वाले पिछलग्गू नेताओं को ही हर बार की तरह इस बार भी मौका देकर उनकी चापलूसी का फल दे दिया जाएगा और पार्टी संगठन को एक बार फिर से गर्त में धकेलना का काम किया जाएगा। कोतमा विधानसभा क्षेत्र के छोटा सा कार्यकर्ता अनूपपुर मंडल में जमीनी नेताओ को टक्कर देने की कोशिश कर रहा है। बृजेश चतुर्वेदी भाजपा जिलाध्यक्ष हीरा सिंह श्याम व मंत्री दिलीप जैसवाल का खास होने के कारण अनूपपुर मंडल का ताज देने की कोशिश की जा रही है। अगर ऐसा होता है तो भाजपा अनूपपुर के बड़े नेता पार्टी से बगावत की राह अपनाकर भाजपा को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

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