दबंग पब्लिक प्रवक्ता

पशु अस्पताल में लटकता रहता है ताला, कर्मचारी नही आते अस्पताल, प्रभारी डॉक्टर फील्ड का बहाना बनाकर रहते हैं गायब


अनूपपुर

जनपद पंचायत अनूपपुर के ग्राम बेलिया बड़ी स्थित पशु अस्पताल हमेशा बन्द रहता है। सूत्रों का मानना है कि इस अस्पताल में नियमित कर्मचारी लगभग हमेशा नदारद रहते हैं। पूर्व में भी इस मामले को उजागर किया जा चुका है, लेकिन विभागीय अधिकारी कोई गंभीर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। प्रभारी डॉक्टर फील्ड के काम का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेते हैं

जनपद पंचायत अनूपपुर क्षेत्र के ग्राम बेलिया बड़ी स्थित पशु अस्पताल की स्थिति दयनीय बनी हुई है। अस्पताल के गेट पर लटकता ताला बताता है कि यहां न तो नियमित इलाज हो पा रहा है और न ही मवेशियों के लिए कोई स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध है। स्थानीय पशुपालकों के अनुसार, इस अस्पताल में तैनात कर्मचारी लगभग हर समय अनुपस्थित रहते हैं।

यह पहला मौका नहीं है जब इस अस्पताल की अनियमितताएं सामने आई हैं। इससे पहले भी स्थानीय  ग्रामीणों ने इस मामले को उठाया था, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जब मामले को लेकर प्रभारी डॉक्टर से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कहा कि वे “फील्ड के काम में गए हैं।” ग्रामीणों का आरोप है कि यह बहाना हर बार दोहराया जाता है, जिससे अस्पताल की स्थिति और खराब होती जा रही है।

पशुपालकों ने बताया कि बीमार पशुओं को लेकर आने वाले किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ता है। कई बार गंभीर स्थिति में पशुओं का इलाज न हो पाने से उनकी मौत भी हो चुकी है प्रशासन से गुहार ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने जनपद पंचायत अनूपपुर एवं पशुपालन विभाग के उच्चाधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल में नियमित रूप से डॉक्टर एवं स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की जाए और ताले खोलकर पशुओं के उपचार की व्यवस्था बहाल की जाए।

इनका कहना है।

*इस मामले को लेकर जब पशु चिकित्सालय में पदस्थ डॉक्टर शिवेंद्र पाण्डेय को कॉल किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नही किया*

नदी का पानी बना जहर, सोन को कौन पिला रहा है, केमिकल वाला शरबत, नगर परिषद व ओपीएम के बीच छिड़ी जंग

पार्षद ने अनशन चेतावनी देकर कलेक्टर के यहाँ की थी शिकायत, प्रशासन ने नही की कार्यवाही*


शहडोल

सोन नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर उठे सवाल अब आरोप-प्रत्यारोप के बीच और गहराते जा रहे हैं। एक ओर सामाजिक कार्यकर्ता अवधेश पांडे ने इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए मध्यप्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहडोल के क्षेत्रीय अधिकारी को पत्र लिखकर जांच और कार्रवाई की मांग की है, वहीं दूसरी ओर मामले में जिम्मेदारी तय करने को लेकर मिल प्रबंधन और नगर परिषद के बीच बयानबाजी शुरू हो गई है।

सामाजिक कार्यकर्ता अवधेश पांडे ने अपने पत्र में अमलाई स्थित ओरिएंट पेपर मिल से निकलने वाले रसायनयुक्त अपशिष्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस अपशिष्ट के कारण सोन नदी का जल लगातार प्रदूषित हो रहा है, जिससे जलीय जीवों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है और आसपास के ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो सकती है। पांडे ने अपशिष्ट जल के शोधन के लिए स्थापित एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करते हुए मौके पर निरीक्षण और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

*अब ‘पानी’ पर शुरू हुआ पेंच*

मामला तब और दिलचस्प हो गया, जब इस संबंध में ओरिएंट पेपर मिल (ओपीएम) प्रबंधन से बात की गई। मिल प्रबंधन ने साफ तौर पर कहा कि नदी में जा रहा पानी फैक्ट्री का रासायनिक अपशिष्ट नहीं है, बल्कि आसपास की कालोनियों से निकलने वाला उपयोग किया गया घरेलू पानी है। उनका कहना है कि इस पानी के उपचार और प्रबंधन की जिम्मेदारी नगर परिषद बकहो की है, न कि फैक्ट्री की।

*नगर परिषद ने पलटा खेल*

मिल प्रबंधन के इस दावे को नगर परिषद बकहो के जिम्मेदारों ने सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि नदी में बह रहा पानी केमिकल युक्त है और यह सीधे तौर पर फैक्ट्री से ही निकल रहा है। परिषद के अनुसार, घरेलू उपयोग का पानी इस स्तर का प्रदूषण नहीं फैला सकता।

*स्थानीय लोगों की गवाही भी अहम*

इस पूरे विवाद के बीच स्थानीय नागरिकों की राय भी सामने आई है, जो स्थिति को और स्पष्ट करती है। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से देख रहे हैं कि फैक्ट्री क्षेत्र से निकलने वाला गंदा और दुर्गंधयुक्त पानी नदी में मिल रहा है। उनका दावा है कि यह पानी सामान्य घरेलू अपशिष्ट नहीं, बल्कि रसायनयुक्त औद्योगिक अपशिष्ट है। ग्रामीणों ने बताया कि नदी का पानी अब पहले जैसा साफ नहीं रहा और इसका असर खेती, पेयजल और पशुओं के स्वास्थ्य पर भी दिखने लगा है। कई लोगों ने जलजनित बीमारियों की आशंका भी जताई है।

*जांच की मांग तेज*

अवधेश पांडे ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से मांग की है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी मौके पर जाकर पारदर्शिता के साथ वास्तविक स्थिति की जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि पर्यावरणीय मानकों का पालन हो रहा है या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि बिना शोधन के किसी भी प्रकार का अपशिष्ट नदी में छोड़ा जाना पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए।

*इनका कहना है*

इस विषय में शिकायत प्राप्त हुई है,जांच दल गठित कर मामले की जांच करवाई जाएगी, जहां तक मुझे मालूम है कि पानी नरगड़ा नाले और सोन नदी में नहीं जा रहा है।

अशोक तिवारी, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहडोल 

"जहां की आप बात कर रहे हैं ,वहां मिल द्वारा पानी नहीं छोड़ा जाता,यह पूरा पानी कालोनियों का है ,जहां घरों का उपयोग किया पानी जाता है, पहले भी शिकायतें होती रहीं हैं ,लोग ब्लैकमेल करते हैं"

*रवि शर्मा , पीआरओ, ओपीएम अमलाई*

इस संबंध में नगर परिषद के पार्षद रामशरण चौधरी के द्वारा कलेक्टर शहडोल के समक्ष शिकायत की गई थी , और इस प्रदूषित पानी को रोकने के लिए अनशन की चेतावनी भी दी गई थी,लेकिन मिल प्रबंधन की ओर से आज तक इस पानी पर रोक नहीं लगाई गई और न प्रशासन ने सुध ली । प्रबंधन द्वारा यह कहना कि यह कालोनी के मकानों का पानी है सरासर गलत है ,यह प्रदूषित पानी मिल के द्वारा छोड़ कर नगर में प्रदूषण का जहर घोला जा रहा है।" 

मौसमी केवट, अध्यक्ष नगर परिषद , बकहो

समाचार 01 फ़ोटो 01

नदी का पानी बना जहर, सोन को कौन पिला रहा है, केमिकल वाला शरबत, नगर परिषद व ओपीएम के बीच छिड़ी जंग

पार्षद ने अनशन चेतावनी देकर कलेक्टर के यहाँ की थी शिकायत, प्रशासन ने नही की कार्यवाही*

शहडोल

सोन नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर उठे सवाल अब आरोप-प्रत्यारोप के बीच और गहराते जा रहे हैं। एक ओर सामाजिक कार्यकर्ता अवधेश पांडे ने इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए मध्यप्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहडोल के क्षेत्रीय अधिकारी को पत्र लिखकर जांच और कार्रवाई की मांग की है, वहीं दूसरी ओर मामले में जिम्मेदारी तय करने को लेकर मिल प्रबंधन और नगर परिषद के बीच बयानबाजी शुरू हो गई है।

सामाजिक कार्यकर्ता अवधेश पांडे ने अपने पत्र में अमलाई स्थित ओरिएंट पेपर मिल से निकलने वाले रसायनयुक्त अपशिष्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस अपशिष्ट के कारण सोन नदी का जल लगातार प्रदूषित हो रहा है, जिससे जलीय जीवों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है और आसपास के ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो सकती है। पांडे ने अपशिष्ट जल के शोधन के लिए स्थापित एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करते हुए मौके पर निरीक्षण और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

*अब ‘पानी’ पर शुरू हुआ पेंच*

मामला तब और दिलचस्प हो गया, जब इस संबंध में ओरिएंट पेपर मिल (ओपीएम) प्रबंधन से बात की गई। मिल प्रबंधन ने साफ तौर पर कहा कि नदी में जा रहा पानी फैक्ट्री का रासायनिक अपशिष्ट नहीं है, बल्कि आसपास की कालोनियों से निकलने वाला उपयोग किया गया घरेलू पानी है। उनका कहना है कि इस पानी के उपचार और प्रबंधन की जिम्मेदारी नगर परिषद बकहो की है, न कि फैक्ट्री की।

*नगर परिषद ने पलटा खेल*

मिल प्रबंधन के इस दावे को नगर परिषद बकहो के जिम्मेदारों ने सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि नदी में बह रहा पानी केमिकल युक्त है और यह सीधे तौर पर फैक्ट्री से ही निकल रहा है। परिषद के अनुसार, घरेलू उपयोग का पानी इस स्तर का प्रदूषण नहीं फैला सकता।

*स्थानीय लोगों की गवाही भी अहम*

इस पूरे विवाद के बीच स्थानीय नागरिकों की राय भी सामने आई है, जो स्थिति को और स्पष्ट करती है। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से देख रहे हैं कि फैक्ट्री क्षेत्र से निकलने वाला गंदा और दुर्गंधयुक्त पानी नदी में मिल रहा है। उनका दावा है कि यह पानी सामान्य घरेलू अपशिष्ट नहीं, बल्कि रसायनयुक्त औद्योगिक अपशिष्ट है। ग्रामीणों ने बताया कि नदी का पानी अब पहले जैसा साफ नहीं रहा और इसका असर खेती, पेयजल और पशुओं के स्वास्थ्य पर भी दिखने लगा है। कई लोगों ने जलजनित बीमारियों की आशंका भी जताई है।

*जांच की मांग तेज*

अवधेश पांडे ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से मांग की है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी मौके पर जाकर पारदर्शिता के साथ वास्तविक स्थिति की जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि पर्यावरणीय मानकों का पालन हो रहा है या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि बिना शोधन के किसी भी प्रकार का अपशिष्ट नदी में छोड़ा जाना पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए।

*इनका कहना है*

इस विषय में शिकायत प्राप्त हुई है,जांच दल गठित कर मामले की जांच करवाई जाएगी, जहां तक मुझे मालूम है कि पानी नरगड़ा नाले और सोन नदी में नहीं जा रहा है।

अशोक तिवारी, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहडोल 

"जहां की आप बात कर रहे हैं ,वहां मिल द्वारा पानी नहीं छोड़ा जाता,यह पूरा पानी कालोनियों का है ,जहां घरों का उपयोग किया पानी जाता है, पहले भी शिकायतें होती रहीं हैं ,लोग ब्लैकमेल करते हैं"

*रवि शर्मा , पीआरओ, ओपीएम अमलाई*

इस संबंध में नगर परिषद के पार्षद रामशरण चौधरी के द्वारा कलेक्टर शहडोल के समक्ष शिकायत की गई थी , और इस प्रदूषित पानी को रोकने के लिए अनशन की चेतावनी भी दी गई थी,लेकिन मिल प्रबंधन की ओर से आज तक इस पानी पर रोक नहीं लगाई गई और न प्रशासन ने सुध ली । प्रबंधन द्वारा यह कहना कि यह कालोनी के मकानों का पानी है सरासर गलत है ,यह प्रदूषित पानी मिल के द्वारा छोड़ कर नगर में प्रदूषण का जहर घोला जा रहा है।" 

मौसमी केवट, अध्यक्ष नगर परिषद , बकहो

समाचार 02 फ़ोटो 02

पशु अस्पताल में लटकता रहता है ताला, कर्मचारी नही आते अस्पताल, प्रभारी डॉक्टर फील्ड का बहाना बनाकर रहते हैं गायब

अनूपपुर

जनपद पंचायत अनूपपुर के ग्राम बेलिया बड़ी स्थित पशु अस्पताल हमेशा बन्द रहता है। सूत्रों का मानना है कि इस अस्पताल में नियमित कर्मचारी लगभग हमेशा नदारद रहते हैं। पूर्व में भी इस मामले को उजागर किया जा चुका है, लेकिन विभागीय अधिकारी कोई गंभीर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। प्रभारी डॉक्टर फील्ड के काम का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेते हैं

जनपद पंचायत अनूपपुर क्षेत्र के ग्राम बेलिया बड़ी स्थित पशु अस्पताल की स्थिति दयनीय बनी हुई है। अस्पताल के गेट पर लटकता ताला बताता है कि यहां न तो नियमित इलाज हो पा रहा है और न ही मवेशियों के लिए कोई स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध है। स्थानीय पशुपालकों के अनुसार, इस अस्पताल में तैनात कर्मचारी लगभग हर समय अनुपस्थित रहते हैं।

यह पहला मौका नहीं है जब इस अस्पताल की अनियमितताएं सामने आई हैं। इससे पहले भी स्थानीय  ग्रामीणों ने इस मामले को उठाया था, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जब मामले को लेकर प्रभारी डॉक्टर से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कहा कि वे “फील्ड के काम में गए हैं।” ग्रामीणों का आरोप है कि यह बहाना हर बार दोहराया जाता है, जिससे अस्पताल की स्थिति और खराब होती जा रही है।

पशुपालकों ने बताया कि बीमार पशुओं को लेकर आने वाले किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ता है। कई बार गंभीर स्थिति में पशुओं का इलाज न हो पाने से उनकी मौत भी हो चुकी है प्रशासन से गुहार ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने जनपद पंचायत अनूपपुर एवं पशुपालन विभाग के उच्चाधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल में नियमित रूप से डॉक्टर एवं स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की जाए और ताले खोलकर पशुओं के उपचार की व्यवस्था बहाल की जाए।

इनका कहना है।

*इस मामले को लेकर जब पशु चिकित्सालय में पदस्थ डॉक्टर शिवेंद्र पाण्डेय को कॉल किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नही किया*

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आधी रात नाचती है मामा की घोड़ी, चतुरा, लवली, संजय मामा, चंगा, राजेश व आलम है अवैध नाल के सौदागर

किसके संरक्षण में जंगल मे रोज हो रहा है लाखो का वारा न्यारा, संदेह के घेरे में पुलिस प्रशासन*

अनूपपुर

जिले भर में चल रहे अवैध कार्यों पर पूर्ण विराम लगाने का दम भरने वाली हमारी मध्य प्रदेश पुलिस के दावे चचाई थाना क्षेत्र की सीमा में आकर खोखले साबित हो रहे हैं, या फिर शायद कोयलांचल नगरी अमलाई मे खाकी की नजरे करम और जेब गरम है, हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं, क्योंकि यदि पुलिस रिकॉर्ड पर अगर एक नजर डाली जाए  तो थाना चचाई अंतर्गत आने वाले अमलाई नगर के गुनहगारों ने अपने अवैध कृत्यो के दम पर जिले भर में अपनी एक अलग ही पहचान बनाई है, या फिर यह कहना अतिशयोक्ति न होगा की निश्चित तौर पर जिले की आपराधिक रिकॉर्ड टॉप 10 सूची में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल किया है। अवैध शराब बिक्री कोयला कबाड़ आईपीएल जुआ सट्टा जैसे अवैध कार्यों का बेखौफ संचालन धड़ल्ले से करवाया जा रहा है, वही संजय मामा द्वारा जुआ का दूसरा स्वरूप घोड़ी का संचालन रात के अंधेरे में  जंगलों में करवा कर दोनों जिले शहडोल व अनूपपुर के अपराधियों का अपनी और ध्यान आकर्षित करवाते हुए, नगर को अपराधियों का चारागाह बना दिया है। कभी शिक्षा के क्षेत्र में अपना लोहा बनाने वाले होनहार विद्यार्थियों के नाम से विख्यात तो कभी अपनी आध्यात्मिक यात्रा को आगे बढ़ाने वाली नगरी अमलाई इन दिनों अपराधी तथा अवैध कार्यों का गढ़ बन कर रहे गई है, शाम ढलते ही डुमरिया टोला तथा गीता ग्राम के जंगलों में घोड़ी बेखौफ होकर नाचती है, लेकिन अचरज की बात है कि क्षेत्र मे रात भर में ग्रस्त कर रही हमारी कर्तव्य निष्ठ खाकी  की नजरे सैकड़ो जुआरिंयो के जमवाड़ा को देख नहीं पाती हैं, पुलिस के गैर जिम्मेदार नुमाइंदों के संरक्षण में चल रहे इस पूरे खेल को बकायदे सिंडिकेट बनाकर इसमें शामिल सदस्यों चतुरा धनपुरी, लवली धनपुरी संजय मामा, चंगा, राजेश तथा आलम को माध्यम बनाकर जंगलों में घोड़ी दौड़ाइ जा रही है। इस मामा की घोड़ी दौड़ाने से सैकड़ो घर बर्बाद हो रहे हैं। हजारो नौजवान इस अवैध कार्य मे लिप्त होकर अपनी जिंदगी बर्बाद कर रहे। इस कारण से इस क्षेत्र में अपराध बढ़ता ही जा रहा है। अगर प्रशासन इस ओर ध्यान नही दिया तो आने वाले समय मे पूरा क्षेत्र मामा की घोड़ी से बर्बाद हो जाएगा। वही जिले के अपराधियों के साथ सख्ती के साथ निपटने वाले जनप्रिय पुलिस अधीक्षक के अब तक मामला संज्ञान में ना आना यह समझ से परे हैं

*रोज होता है लाखों का वारा न्यारा*

रात के अंधेरों में जंगल की राह पर भरपूर जोश खरोस के साथ बिंदास नाच रही यह घोड़ी, किसी बारात मे दूल्हे के लिए नहीं सजाई जाती बल्कि रोज दूल्हा बनने वाले संजय मामा के जुआ फड़ में बिसात के तौर पर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली यह घोड़ी लाखों रुपए की नाल  वसूली कर अपने कार्य को अंजाम दे रही है। वहीं सूत्रों की माने तो इस पूरे खेल में हर महीने लाखों रुपए के वारे न्यारे होते हैं, जिसमें से  एक टका लगभग 10 से 12 हजार प्रभारी की झोली में एवं कुछ से प्रशासनिक नुमाइंदों के चाय पान के खर्च इसी घोड़ी के दम पर पूरे होते हैं।

इनका कहना है।

आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया है कि दो माह से जुआं चल रहा है तो मैं पूरे मामले की जांच करवाकर कार्यवाही करवाता हूँ।

*जगन्नाथ मरकाम एएसपी अनूपपुर*

समाचार 04 फ़ोटो 04

अवैध रेत से भरे तीन ट्रैक्टर जप्त, एसडीएम ने की कार्यवाही, मामला हुआ दर्ज

शहडोल 

जिले में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन ट्रैक्टर जब्त किए हैं। जयसिंहनगर एसडीएम काजोल सिंह (आईएएस) ने गोहपारू थाना क्षेत्र के टेटकी इलाके में कार्रवाई करते हुए रेत से भरे तीन ट्रैक्टर जब्त कर पुलिस के हवाले कर दिए। यह ट्रैक्टर अमझोर स्थित गोडना नदी से अवैध रूप से रेत निकालकर परिवहन कर रहे थे। प्रशासन की इस कार्रवाई ने जिले में सक्रिय रेत माफियाओं की बेखौफ गतिविधियों को फिर उजागर कर दिया है। हाल

जानकारी के अनुसार, जब्त किए गए ट्रैक्टरों के मालिक मुन्नू यादव, रनजीत मिश्रा और प्रभाकर तिवारी बताए जा रहे हैं, जो लमार क्षेत्र के निवासी हैं। गोहपारू पुलिस ने ट्रैक्टर चालकों और मालिकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि अवैध खनन और परिवहन पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।

देवलौंद में स्थित नदियों के किनारे ट्रैक्टरों से रेत निकालकर अलग-अलग स्थानों पर जमा की जाती है। इसके बाद रात के समय जेसीबी की मदद से ट्रकों और हाइवा में रेत लोड कर रीवा और उत्तर प्रदेश तक भेजी जाती है। लोगों का कहना है कि इस अवैध कारोबार में शामिल लोगों को किसी कार्रवाई का डर नहीं है।

जिले के कई इलाकों, खासकर देवलौंद के गोपालपुर सथनी सहित कई स्थानों से दिन रात चंबल की तर्ज में रेत चोरी हो रही है।जैतपुर के बिरौड़ी, गाड़ाघाट और जयसिंहनगर क्षेत्र में लगातार अवैध उत्खनन की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों ने नाम न छापने की शर्त पर आरोप लगाया कि कुछ पुलिसकर्मियों की भूमिका संदिग्ध है, जिसके चलते खनिज और राजस्व अमले की कार्रवाई भी कमजोर पड़ जाती है।

समाचार 05 फ़ोटो 05

टीईटी की अनिवार्यता को समाप्त करने अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

अनूपपुर

पुष्पराजगढ़ तहसील मुख्यालय में अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा संघ मध्यप्रदेश के तहसील इकाई पुष्पराजगढ़ के तत्वावधान में सैकड़ो  की तादात में शिक्षक संघ लखौरा ग्राउंड में एकत्रित होकर शांति पूर्ण रैली निकालकर अपनी मांगों की आवाज बुलंद करते नारेबाजी करते हुये तहसील प्रांगण पहुँच कर मध्य प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम पुष्पराजगढ़ को ज्ञापन सौंप कर मांग की गई की शिक्षक पद के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता को समाप्त करने और सेवा अवधि की गणना पहली नियुक्ति की तिथि से करने के संबंध में यथा शीघ्र मध्य प्रदेश सरकार तक हमारी जायज मांगो को पहुँचा कर हमारे संगठन को अवगत कराई जाय।

पुष्पराजगढ़ ब्लॉक इकाई की शिक्षक संयुक्त मंच संघ शिक्षक वर्ग ने प्रमुख समस्याओं के सीघ्र समाधान हेतु ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया गया की सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित उस निर्णय के विरुद्ध जिसमें गैर-टीईटी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करने के निर्देश जारी किए गए हैं, मध्य प्रदेश सरकार को यथाशीघ्र सर्वोच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करनी चाहिए।

लोक शिक्षा निदेशालय भोपाल के आयुक्त द्वारा 2 मार्च, 2026 को और जनजातीय मामलों के विभाग भोपाल के आयुक्त द्वारा 26 मार्च 2026 को जारी शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के आदेशों को तत्काल रद्द किया जाना चाहिए। शिक्षक वर्ग की लंबे समय से चली आ रही ज्वलंत मांग को ध्यान में रखते हुए, पहली नियुक्ति की तिथि से सेवा अवधि की गणना करते हुए पुरानी पेंशन, ग्रेच्युटी, अर्जित अवकाशों के नकदीकरण और अन्य लाभों के लिए तत्काल आदेश जारी किये जाएं।

समाचार 06 फ़ोटो 06

ऑल इंडिया वालीबॉल चैलेंजर्स टूर्नामेंट आयोजन की तैयारी हुई पूर्ण

अनूपपुर

फ्रेंड्स यूनियन क्लब पौराधार के तत्वाधान,नगर परिषद डूमरकछार एवं संधान ट्रस्ट के सहयोग से मुख्य पंडाल पौराधार  में 12 अप्रैल 2026 से 15 अप्रैल 2026 तक ऑल इंडिया वालीबॉल चैलेंजर्स टूर्नामेंट का आयोजन किया जा रहा है,इस प्रतियोगिता में देश की राष्ट्रीय स्तर की महिला एवं पुरुष टीमें अपने खेल का प्रदर्शन करेेंगी,मुख्य रूप से पुरुष टीमें  डब्लूसीआर रेलवे जबलपुर,नदीयाड एकैडमी गुजरात, जयपुर (राजस्थान) देहरादून एकैडमी (उत्तराखंड) गुड़गांव (हरियाणा) एवं महिला टीम में रायपुर (छत्तीसगढ़) रविंद्र भारती एकैडमी (कोलकाता) उत्तराखंड एकेडमी गर्ल्स टीम, जयपुर (राजस्थान) आर.एन.सी क्लब (नागपुर) की टीमें प्रमुख रूप से भाग ले रही है, पौराधार मुख्य दुर्गा पूजा पंडाल (वालीबॉल ग्राउंड) में दो ग्राउंड के माध्यम से यह प्रतियोगिता संपन्न किया जाएगा,ज्ञात हो कि यह आयोजन 1994 से लगातार प्रतिवर्ष कोयलांचल क्षेत्र पौराधार में आयोजित होता आ रहा है, बड़ी संख्या में पहली बार महिलाओं की टीमें भी इस प्रतियोगिता में शामिल हो रही है,महिला एवं पुरुष वालीबॉल की टीम एक साथ प्रतियोगिता में सहभागिता कर रही है, आयोजन क्लब ने जिले एवं क्षेत्र के खेल प्रेमियों ,नागरिकों से आग्रह करते हुऎ 12 अप्रैल से 15 अप्रैल तक प्रतिदिन के प्रतियोगिता में सादर आमंत्रित किया है,अधिक से अधिक खेल प्रेमी इस प्रतियोगिता को देखने के लिए अवश्य पहुंचे।

समाचार 07 फ़ोटो 07

संत शिरोमणि सेन महाराज की जयंती पर कानून व्यवस्था के लिए एसडीएम अधिकृत

उमरिया

प्रधान वन संरक्षक (वन्यप्राणी) भोपाल एवं क्षेत्र संचालक, बाँधवगढ टाईगर रिजर्व उमरिया द्वारा 14 अप्रैल 2026 को संत शिरोमणि सेन महाराज के पूजन एवं जन्मोत्सव मनाने हेतु सीमित संख्या में पंजीकृत वाहनों से (अधिकतम 100) व्यक्तियों को निःशुल्क प्रवेश की अनुमति प्रदान की गयी है। अनुज सेन संभाग अध्यक्ष एवं जिला अध्यक्ष सेन समाज विकास संगठन जिला उमरिया एवं लखन सेन अध्यक्ष,भारतीय सेन समाज उमरिया द्वारा संत शिरोमणि सेन जी महाराज के पूजन एवं जन्मोत्सव कार्यक्रम आयोजन की सूचना प्रदान की गयी है।

डिप्टी कलेक्टर ने संत शिरोमणि सेन जी महाराज की जयंती कार्यक्रम  14 अप्रैल 2026 को सेन समाज के उक्त आयोजन में कानून एवं शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुश्री हरनीत कौर कलसी,अनुविभागीय दण्डाधिकारी मानपुर को अधिकृत किया है। अनुविभागीय दण्डाधिकारी मानपुर अपने स्तर से सहयोग हेतु अन्य अधिकारियोंध्कर्मचारियों की ड्यूटी लगाकर कार्यक्रम सम्पन्न कराए जाने हेतु पूर्ण रूप से उत्तरदायी रहेंगी। जयंती कार्यक्रम का आयोजन बांधवगढ ताला में किया जाना है। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की सीमित संख्या (अधिकतम 100 व्यक्तियों के) निःशुल्क प्रवेश की अनुमति प्रधान वन संरक्षक (वन्यप्राणी) भोपाल द्वारा प्रदान की गयी है। जिसके तहत सेन जी महराज की जयंती कार्यक्रम मनाए जाने हेतु श्रद्धालुगण बांधवगढ क्षेत्र अंतर्गत ग्राम ताला वि.ख. मानपुर में स्मारक स्थल पर श्रद्धालुओं का आवागमन जारी रहेगा।

उन्होने आने वाले श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य को दृष्टिगत रखते हुए चिकित्सा दल की आवश्यक किट के साथ ड्युटी लगाए जाने के निर्देश मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को दिए हैं।

समाचार 08

मजदूर की हुई थी मौत,  इंजीनियर व सुपरवाइजर हुए सस्पेंड

शहडोल

जिले के एसईसीएल सोहागपुर क्षेत्र अंतर्गत बंगवार भूमिगत कोयला खदान में हुए दर्दनाक हादसे में मेंटेनेंस कार्य के दौरान बिजली के पोल से गिरकर ठेका मजदूर की मौत के मामले में एसईसीएल प्रबंधन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मैकेनिकल इंजीनियर और इलेक्ट्रिकल सुपरवाइजर को सस्पेंड कर दिया है। ग्राम डोंगरा टोला, पोस्ट चचाई निवासी 43 वर्षीय मोहे लाल सिंह, पिता ठुन्नू सिंह, एसईसीएल में ठेका मजदूर के रूप में काम करते थे। 

सहकर्मियों की मदद से उन्हें तत्काल केंद्रीय चिकित्सालय बुढ़ार ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर हालत को देखते हुए आदित्य अस्पताल शहडोल रेफर किया गया। लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर के निर्देश पर मैकेनिकल इंजीनियर विकास सिंह को सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं इलेक्ट्रिकल सुपरवाइजर जय कुमार वर्मा पर भी उप क्षेत्रीय प्रबंधक द्वारा निलंबन की कार्रवाई की गई है।

समाचार 09

पांच हजार रूपये का ईनाम घोषित

उमरिया

पुलिस अधीक्षक विजय कुमार भागवानी ने थाना चंदिया जिला उमरिया के अपराध क्रमांक धारा 64 (1), 351(3), बी एन एस , 3/ 4 पाक्सो एक्ट के आरोपी पंकज रैदास पर पांच हजार रूपये का ईनाम घोषित किया है। ईनाम वितरण के संबंध में पुलिस अधीक्षक जिला उमरिया का अंतिम निर्णय होगा। 


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