स्वयंसेवक शोधछात्रों ने दोषी प्रोफेसरों पर FIR दर्ज करने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री से लगाईं गुहार
स्वयंसेवक शोधछात्रों ने दोषी प्रोफेसरों पर FIR दर्ज करने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, शिक्षा मंत्री, मुख्यमंत्री से लगाईं गुहार
*गैरजमानती धाराओं पर मामला दर्ज, FIR के तथ्य विरोधाभासी व झूठ का पुलिंदा*
अनूपपुर
स्वयंसेवक शोध छात्रों को जिन्हें पीएचडी कोर्स से बर्खास्त करके, हॉस्टल से बाहर निकाल दिया गया है, साथ ही उनके विरुद्ध झूठी प्राथमिक की अमरकंटक थाने में दर्ज कर दी गई है। इन सभी स्वयंसेवको की शाखा लगाने की समान भागवा ध्वज, झंडा की पिलर एवं सभी सामान को छात्रावास अधीक्षकों ने जप्त कर लिया है। इनके कमरों लगी भारत माता की फोटो को हॉस्टल के कमरों से फाड़कर उसे जला दिया है। इन सभी घटना से दुखी सभी शोध छात्रों आर्यन कुमार गर्ग, सुरेश यादव, अभय यादव, ब्रिजेश यादव, राहुल कुमार पाल, दयाशंकर मिश्रा, रितिक कुमार, अनिकेत सिंह, शिवेन्द्र कुमार तिवारी, कुमार मंगलम ने आज महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव तथा जिलाधीश जिला अनूपपुर एवं पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौपा है।
*प्रोफेसर होंगे बर्खास्त*
शोध छात्रों ने बताया की भारत सरकार के सीसीएस रूल की धारा 7 एवं भारत सरकार के डीओपीटी तथा यूजीसी द्वारा जारी निर्देश के अनुसार शासकीय सेवा में कार्यरत प्रोफेसर या लोक सेवक एक साथ एकत्रित होकर आंदोलन, धरना, प्रदर्शन नहीं कर सकते हैं। ऐसा पाए जाने पर उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही मोबलीचिंग के साथ इकट्ठा होने पर उनकी बर्खास्तगी होना तय है। ज्ञात हो की इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय एक्ट में तथा इसके ऑर्डिनेंस में टीचर एसोसिएशन बनाने का कोई प्रावधान नहीं है, जब एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है तब इस प्रकार का गैर-सरकारी संगठन बनाकर उसके बैनर तले इकट्ठा होकर धरना प्रदर्शन करके छात्रों पर फर्जी और झूठी एफआईआर लिखवाने तथा उन्हें बर्खास्त करवाने के लिए की गई कार्रवाई अपने आप में छात्र विरोधी और राष्ट्र विरोधी गतिविधि को प्रमाणित करता है। इस मामले में छात्रों ने सभी वीडियो, व्हाट्सएप पर की गई चैटिंग तथा फोटोग्राफ्स को भी संलग्न करके भेजा गया है। इसकी प्रतिलिपि कार्य परिषद के सदस्य तथा छत्तीसगढ़ भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री मोरध्वज पैकरा को भी दिया गया है, मध्यप्रदेश और छग के दो दर्जन सांसद महामहिम राष्ट्रपति से मिलकर दोषी शिक्षकों के विरुद्ध विजिटर के रूप में राष्ट्रपति को अधिकृत पावर के तहत इन दोषी कठोर कार्यवाही की मांग कर ऐसी घटना की पुनरावृति को रोकने की अपील करेंगे।
*करवाया जा रहा है झूठी शिकायत*
धर्मांतरित हुए छात्र तथा उसके अन्य सहयोगी कम्युनिस्ट विचारधारा के एससी-एसटी छात्रों द्वारा कुलपति के ईमेल पर राष्ट्रवादी लोगों के विरुद्ध झूठी शिकायत प्रेषित की जा रही है ताकि कुलपति से जाँच कमेटी बनवाकर उन्हें भी फसाया जा सकें, प्रशासन के नजदीकी कुछ प्रोफेसरों द्वारा चोरी करके प्राप्त दस्तावेजों का हाईकोर्ट में झूठी केश करने की पोल खुल गई है, । धर्मांतरित हुए छात्र हॉस्टल में अवैध कार्यों को लगातार अंजाम दे रहे हैं तथा इसकी पर्याप्त साक्ष्य भी मौजूद है, डॉ. चार्ल्स वर्गीज, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. मनोहर, डॉ. सुगंधे, प्रो भुमिनाथ सहित लगभग 10 शिक्षकों द्वारा संगठित आपराधिक षड्यंत्र रचकर निर्दोष के करियर को क्षति पहुँचाने हेतु अवैध कार्य के लिए समझौता करने, करियर खराब करने या जान-माल को नुकसान पहुँचाने की धमकी देने, धर्म, जाति, या समुदाय के आधार पर शत्रुता को बढ़ावा देकर और सद्भाव बिगाड़ने वाले कार्य करने, षड्यंत्र के तहत झूठा लांछन लगाकर करियर को बदनाम करने, नुकसान पहुँचाने के इरादे से झूठा केस दर्ज करवाने, पुलिस को गुमराह करने के लिए झूठी FIR रिपोर्ट लिखवाने, झूठे साक्ष्य गढ़ना तथा झूठी गवाही देने, झूठे केस के कारण प्रतिष्ठा धूमिल करने, भारत सरकार के प्रचलित सेवा नियमों के विरुद्ध जाकर सामूहिक रूप से धरना, प्रदर्शन एवं आंदोलन करके सेवा आचरण के विरुद्ध कार्य करने, विश्वविद्यालय अधिनियम, ऑर्डिनेंस एवं स्टेट्यूट के प्रावधानों के विरुद्ध जाकर गैर-शासकीय एसोसिएशन (NGO) का गठन कर अवैधानिक कार्य करने, छात्रों के लिए बने हुए हॉस्टल में अवैध रूप से आबंटित करवाकर छात्रों के हक़ के विपरीत रहने के मामले में कानूनी कार्यवाही करने तथा एफआईआर रिपोर्ट दर्ज कर निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराई जाए तथा उनके विरुद्ध विधि अनुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई करने की माँग छात्रों ने किया है।
*गैरजमानती धाराओं का FIR दर्ज*
जनजातीय विवि के शोध छात्र एवं आरएसएस के विभिन्न दायित्व में राष्ट्र सेवा कर रहे आर्यन कुमार गर्ग, सुरेश यादव, अभय यादव, ब्रिजेश यादव, राहुल कुमार पाल, दयाशंकर मिश्रा, रितिक कुमार, अनिकेत सिंह, शिवेन्द्र कुमार तिवारी, कुमार मंगलम पर अपराध क्रमांक प्र.सू.रि.सं. 0048 दिनाँक 21/03/2026 को भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराएं 126(2), 296, 351(3), 3(5) के तहत अमरकंटक थाना में एफआईआर दर्ज कर लिया गया है, इस एफआईआर में शोध छात्र जय गणेश दीक्षित का भी नाम है। चार्ल्स वर्गीस पिता सी. के. वर्गीस ने एफआईआर दर्ज करवाई है, एफआईआर में उल्लेख है की- ‘सुबह मेरा पड़ोसी डक्टर अनीता शर्मा ने मुझे बताई कि रात में करीब 9 बजे ट्रांजिट आवास में आकर आपके मकान संख्या 24 जो बंद था जिसमे जोर से धक्का मारने की आवाज सुनकर मैं अपने क्वार्टर से बाहर निकली।
*FIR के तथ्य विरोधाभासी व झूठ का पुलिंदा*
एफआईआर दर्ज करने वालों ने पुलिस को सच्चाई नहीं बताई है, छात्र जिस ओबीसी ट्रांसिट हॉस्टल में रात में गए थे, वह शिक्षकों का रेजिडेंट नहीं बल्कि छात्रों के रहने के लिए बना हुआ छात्रावास है, विवि प्रशासन सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय भारत सरकार को 200 ओबीसी छात्रों के सूची बनाकर भारत सरकार को और मध्य प्रदेश सरकार को भेजा है कि उस ट्रांजिट हॉस्टल में ओबीसी छात्र रहते हैं, जबकि एफआईआर बताता है कि उसमें डॉ चार्ल्स वर्गीज तथा 40 अन्य परिवार रहता है। सवाल यह है कि जब छात्रावास अधीक्षक स्वयं छात्रावास पर कब्जा कर लिए हैं तथा विवि प्रशासन छात्रावास को रेजिडेंस के रूप में दस्तावेज सौपकर भारत सरकार और मध्य प्रदेश शासन को धोखा दिया है, और इससे सम्पूर्ण एफआईआर स्वमेव झूठी सिद्ध हो जाती है, शिकायतकर्ता और विवि प्रशासन पर झूठी एफआईआर दर्ज करवाने, छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने और भारत सरकार के साथ धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज होना चाहिए। इस कारण से यह मामला अब बेहद संगीन हो गया है।सुत्रों के अनुसार एफआईआर में जिस डॉक्टर अनीता शर्मा का नाम लिखा गया है, वह अब पलट गई है कह रही है की मैंने ऐसी कोई भी बात डॉक्टर चार्ल्स को नहीं बताया है, जिससे मामला और पेचीदा हो गया है और अब इस एफआईआर का खात्मा होगा तथा झूठी एफआईआर दर्ज करवाने वालों पर ही झूठ एफआईआर लिखवाने, भारत सरकार एवं मध्य प्रदेश सरकार की ओबीसी लाभार्थी छात्रों के साथ धोखा देने का मामला दर्ज हो सकता है।

