दबंग पब्लिक प्रवक्ता



अतिक्रमण की कार्यवाही में नपा अध्यक्ष व वन विभाग की टीम के साथ तीखी बहस, रुपए माँगने के लगाए आरोप

*वन बिहार ढाबे के पास की घटना, वीडियो हुआ वायरल*


शहडोल

शहडोल

जिले के ब्यौहारी क्षेत्र में शहडोल रीवा मुख्य मार्ग स्थित वन बिहार ढाबे के पास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई उस समय विवाद का रूप ले बैठी, जब मौके पर पहुंचे नगर पालिका अध्यक्ष और वन विभाग की टीम के बीच तीखी बहस हो गई। घटना का वीडियो किसी व्यक्ति ने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया और सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। प्राप्त जानकारी के अनुसार वन विभाग की टीम वन बिहार ढाबे के पास सड़क किनारे लगी कुछ दुकानों को हटाने के लिए पहुंची थी। बताया जा रहा है कि टीम जेसीबी मशीन की मदद से गड्ढे खुदवाकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर रही थी। इसी दौरान वहां मौजूद दुकानदारों ने इसकी सूचना नगर पालिका अध्यक्ष एवं भाजपा नेता राजन गुप्ता को दी।

सूचना मिलते ही नगर पालिका अध्यक्ष मौके पर पहुंचे और वन विभाग के कर्मचारियों से कार्रवाई को लेकर सवाल-जवाब करने लगे। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच बहस तेज हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ समय तक माहौल तनावपूर्ण बना रहा और मौके पर मौजूद लोगों की भीड़ भी बढ़ गई। नगर पालिका अध्यक्ष राजन गुप्ता का कहना है कि जिस जमीन पर दुकानें संचालित हो रही हैं, वह नगर पालिका के अधिकार क्षेत्र में आती है। उनका आरोप है कि वन विभाग बिना किसी पूर्व सूचना या नगर पालिका की अनुमति के जेसीबी मशीन लगाकर खुदाई करवा रहा था, जिसे उन्होंने मौके पर रुकवा दिया। उन्होंने कहा कि यदि जमीन नगर पालिका की है तो वन विभाग को इस तरह कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। वहीं दूसरी ओर कुछ दुकानदारों ने वन विभाग के कर्मचारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दुकानदारों का कहना है कि विभाग के कुछ कर्मचारी उनसे अवैध वसूली करने पहुंचे थे। उनका आरोप है कि जब उन्होंने पैसे देने से इंकार किया तो अतिक्रमण हटाने के नाम पर कार्रवाई शुरू कर दी गई। इस मामले में दुकानदार राजकुमार चतुर्वेदी, गोलू पटेल सहित अन्य लोगों ने ब्यौहारी थाने में लिखित शिकायत भी दी है। इधर मामले को लेकर ब्यौहारी थाना प्रभारी जिया उल हक ने बताया कि अभी तक वन विभाग या नगर पालिका की ओर से कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि किसी पक्ष की ओर से शिकायत दर्ज कराई जाती है तो मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

उधर वन विभाग के रेंजर संदीप गौतम का कहना है कि संबंधित जमीन से जुड़े दस्तावेज एकत्र किए जा रहे हैं। उनका कहना है कि सभी अभिलेखों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उक्त भूमि वन विभाग की है या नगर पालिका के अधिकार क्षेत्र में आती है। फिलहाल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुआ यह विवाद पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। जमीन के अधिकार को लेकर दोनों विभागों के बीच स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही मामले की असल तस्वीर सामने आ सकेगी।

युवती के अपहरण के तीन आरोपियों को स्कॉर्पियो वाहन सहित पुलिस ने गिरफ्तार कर भेजा जेल


अनूपपुर

जिले के थाना जैतहरी में पीड़िता द्वारा लिखित आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसमें बताया गया कि जयप्रकाश राठौर द्वारा उसे जबरन स्कॉर्पियो वाहन में बैठाकर विवाह के उद्देश्य से अपहरण किया। युवती की रिपोर्ट पर थाना जैतहरी में अपराध कायम कर विवेचना में लिया।

पीड़िता ने बताया कि वह पैरामेडिकल कॉलेज शहडोल में अध्ययनरत है। लगभग तीन वर्ष पूर्व उसकी इंस्टाग्राम आईडी के माध्यम से जयप्रकाश राठौर (निवासी चोरभठी) से पहचान हुई थी। फोन पर हुई बातचीत में जयप्रकाश ने उससे विवाह करने की बात कही, लेकिन पीड़िता ने स्पष्ट किया कि वह केवल अपने माता-पिता की इच्छा अनुसार ही विवाह करेगी और दिनांक 28 फरवरी 2026 से वह अपने बड़े पापा के घर जैतहरी में आकर रह रही थी। दिनांक 13 मार्च 2026 को दोपहर में जब वह अपनी सहेली के साथ घर के बाहर बैठी थी। तभी एक काले रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी से जयप्रकाश राठौर, जिसने अपना चेहरा साफे से ढका था ने पीड़िता को जबरन गाड़ी में बैठाकर अपहरण कर लिया। वाहन में चालक सहित एक अन्य व्यक्ति भी मौजूद था।

सूचना मिलने पर पुलिस ने तत्परता से वाहन और आरोपियों का पीछा किया। जयप्रकाश ने पिपरिया में पीड़िता को छोड़कर भाग गया। वहां ग्रामीण और पीड़िता के परिजनों को घटना की जानकारी दी गई। उसके भाई और मामा पिपरिया पहुंचकर पीड़िता को सुरक्षित वापस ले आए। पुलिस अधीक्षक द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम का गठन किया गया और आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी हेतु निर्देश दिए गए। जैतहरी पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए महज कुछ घंटे में अपहरण में  शामिल तीनो आरोपी जयप्रकाश राठौर, पिता ललन राठौर, उम्र 23 वर्ष, निवासी चोरभठी थाना जैतहरी, शुभम राठौर, पिता दुलारे राठौर, उम्र 23 वर्ष, निवासी बेला, थाना अनूपपुर, सागर पटेल, पिता संतोष पटेल, उम्र 22 वर्ष, निवासी मौहरी, थाना कोतवाली अनूपपुर को गिरफ्तार कर लिया है।

घटना में प्रयुक्त स्कॉर्पियो वाहन क्रमांक MP 65 ZB 4472 को जप्त कर पुलिस अभिरक्षा में लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों को न्यायालय अनूपपुर में पेश किया गया जहां से रिमांड पर जिला जेल अनूपपुर भेजा गया है।

पंचायत दर्पण में 'धुंधले बिलों' का महाघोटाला, सीईओ की मौन सहमति, आँखों में बंधी है पट्टी

*बिना सत्यापन के वित्तीय स्वीकृति कैसे, सरकारी खजाने की लूट*


अनूपपुर

जिले की जनपद पंचायत अनूपपुर इन दिनों भ्रष्टाचार की एक नई और शातिर प्रयोगशाला बन गई है। सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता लाने और लीकेज रोकने के लिए शासन द्वारा बनाए गए 'पंचायत दर्पण' पोर्टल का इस्तेमाल अब भ्रष्टाचारियों द्वारा अपने सुबूत मिटाने के लिए किया जा रहा है। बदरा जनपद के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी खजाने की खुलेआम लूट हो रही है, और इसका जरिया बने हैं— 'धुंधले बिल'।

पंचायत दर्पण पोर्टल की पड़ताल से एक बेहद चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। ग्राम पंचायतों द्वारा पोर्टल पर सामग्री खरीदी और निर्माण कार्यों के बिल तो अपलोड किए जा रहे हैं, लेकिन उन्हें एक सोची-समझी साजिश के तहत इतना 'धुंधला' (Blur) कर दिया जाता है कि उनमें लिखी गई कोई भी जानकारी स्पष्ट रूप से पढ़ी ही न जा सके।

इन धुंधले बिलों को देखकर यह पता लगाना नामुमकिन है कि निर्माण सामग्री किस फर्म या दुकान से खरीदी गई है। बिल में सामग्री की मात्रा (Quantity) क्या है और किस दर (Rate) पर खरीदी गई है, यह सब धुंधलेपन के पीछे छिपा दिया जाता है। बिल पर तारीख तक स्पष्ट नहीं होती, जिससे एक ही बिल को बार-बार इस्तेमाल करने की आशंका बढ़ जाती है। इस तकनीकी खेल के जरिए बिना वास्तविक काम किए या बेहद घटिया सामग्री का उपयोग करके लाखों रुपये के फर्जी बिल आसानी से पास कराए जा रहे हैं।

इस पूरे सुनियोजित घोटाले में सबसे बड़ा सवाल जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी रवि ग्वाल की भूमिका पर खड़ा हो रहा है। एक सीईओ के कंधों पर जनपद के अंतर्गत आने वाली सभी ग्राम पंचायतों की सीधी निगरानी, बिलों के भौतिक सत्यापन और वित्तीय कार्यों की पारदर्शी समीक्षा की अहम जिम्मेदारी होती है। यदि पोर्टल पर लगातार धुंधले और अपठनीय बिल अपलोड हो रहे हैं, तो सीईओ कार्यालय द्वारा उन्हें बिना सत्यापन के वित्तीय स्वीकृति कैसे दी जा रही है?

पंचायत के पैसों की इस बंदरबांट को लेकर नागरिकों ने जिला कलेक्टर और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। अपलोड किए गए सभी संदिग्ध और धुंधले बिलों की एक उच्च स्तरीय समिति से जांच कराई जाए और मौके पर जाकर कार्यों का भौतिक सत्यापन हो। इस कृत्य में संलिप्त पंचायत सचिवों, सरपंचों और बिना देखे बिल पास करने वाले अधिकारियों पर गबन का आपराधिक मामला दर्ज कर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

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