दबंग पब्लिक प्रवक्ता

अंधी हत्या का खुलासा, तीनो आरोपियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार, बंदूक जप्त


अनूपपुर         

जिले के चौकी सरई थाना करनपठार के द्वारा अंधी हत्या जैसी जघन्य अपराध का खुलासा कर आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।

जिले के देवरी टोला बीहर बाबा मंदिर के उपर जैतहरी के जंगल में अज्ञात शव की पडे होने की सूचना प्राप्त होने पर मर्ग क्रमांक 0/26 धारा 194 बी. एन. एस. एस. एव  अप. क्र. 0/26 धारा 103(1) बी. एन. एस एवं असल नम्बरी अपराध क्रमांक अप. क्र. 78/2026 धारा 103(1), 3(5) बी. एन. एस 25, 27 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। अंधी हत्या जैसे अपराध पर आरोपियों की तलाश के लिए वैज्ञानिक पद्धति का सहारा लेकर विवेचना की गई विवेचना के दौरान सूचना कर्ता एवं पीडित परिजनो के संदेह के अनुसार आरोपीगण जंगल में छिपे हुए हैं। आरोपीगणो को संदेह के आधार पर संभावित स्थानो पर पता तलाश कर हिरासत में लेकर पूछतांछ करने पर जुर्म स्वीकार करते हुये बताया कि घटना दिनांक को देवरी टोला बीहर बाबा मंदिर के उपर जैतहरी के जंगल दिन में जंगली जानवर का शिकार करने जाने व शिकार व शराब पीने की बात को लेकर विवाद करना इसी दौरान आरोपी दरयाब पिता राम चरण सिंह उम्र 40 वर्ष निवासी देवरी टोला थाना कोतवाली जिला शहडोल, दउआ उर्फ अजय सिंह पिता नवल सिंह उम्र 28 वर्ष निवासी जैतहरी चौकी सरई थाना करनपठार जिला अनूपपुर, ऊडानी उर्फ भान सिंह पिता झाम सिंह उम्र 30 वर्ष निवासी जैतहरी चौकी सरई थाना करनपठार जिला अनूपपुर के द्वारा अपने पास रखे लोड भरमार बंदूक से मृतक झूरू उर्फ धन सिंह के सीने में गोली मारकर हत्या कर देना स्वीकार किये, हत्या करने के बाद शव को जंगल में छोडकर भाग गये जो घटना स्थल से घटना में प्रयुक्त बंदूक भरमार एवं लोहे का राड बारूद भरने वाला मृत के पास रखे जप्त किया गया।  आरोपियों से पुछतांछ दौरान एक नग और बंदूक भरमार जिससे गोली चलाया गया था, जिसे अन्य जगह छिपाया गया था, जिसे जप्त किया गया है। तीनो आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया।

वेंटिलेटर पर एम्बुलेंस, धक्का प्लेट स्वास्थ्य व्यवस्था, मरीज की जान बचाने परिजन लगा रहे हैं धक्का

*कबाड़ गाड़ियों से मरीजो को जीवनदान देने का सपना अधूरा*


इंट्रो -अनूपपुर की सड़कों पर दौड़ती एंबुलेंस का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है जिसने जिला स्वास्थ्य विभाग के दावों की धज्जियाँ उड़ा दी हैं। वीडियो में सायरन की गूँज नहीं, बल्कि लाचार परिजनों के कराहने और गाड़ी को धक्का मारने की आवाजें सुनाई दे रही हैं। लोग इस वीडियो को शेयर करते हुए पूछ रहे हैं कि क्या डिजिटल इंडिया में अब मरीजों की जान बचाने के लिए धक्का मार तकनीक ही आखिरी विकल्प बची है? यह वीडियो न केवल विभाग की किरकिरी करा रहा है, बल्कि सिस्टम के गाल पर एक जोरदार तमाचा भी है।

अनूपपुर

जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था अब भगवान भरोसे नहीं बल्कि जनता के धक्कों के भरोसे चल रही है। जिले में आपातकालीन सेवा की 108 एंबुलेंस खुद आपातकाल के दौर से गुजर रही है। जिस जीवनदायिनी गाड़ी को सायरन बजाते हुए सड़कों पर रफ्तार भरनी चाहिए थी वह अब धक्का स्टार्ट तकनीक के भरोसे खड़ी है। ऐसा लगता है कि प्रशासन ने मरीजों को अस्पताल पहुँचाने के लिए वाहनों के रखरखाव के बजाय राहगीरों और परिजनों की शारीरिक शक्ति पर निर्भर रहने का नया और शर्मनाक मानक तय कर लिया है।

मेडिकल साइंस में गोल्डन ऑवर यानी वह शुरुआती घंटा जिसमें मरीज की जान बचाई जा सकती है अनूपपुर में एंबुलेंस को स्टार्ट करने की मशक्कत में ही बर्बाद हो रहा है। ताज़ा हालातों ने यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर एंबुलेंस के मेंटेनेंस का बजट किसकी फाइलों में दबा है? जब गाड़ी खुद वेंटिलेटर पर हो, तो वह किसी मरणासन्न मरीज के लिए संजीवनी कैसे साबित हो सकती है। सड़कों पर दम तोड़ती ये गाड़ियाँ किसी भी वक्त किसी बड़े हादसे या असमय मौत का कारण बन सकती हैं, जिसका जवाबदेह कोई नहीं है।

सड़कों पर दिखने वाले ये दृश्य दिल दहला देने वाले हैं जहाँ एक बदहवास परिजन अपने मरीज की फिक्र छोड़कर गाड़ी को धक्का लगाता नजर आता है। अस्पताल पहुँचने की जल्दी और गाड़ी के स्टार्ट न होने का डर, परिजनों को मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ रहा है। विडंबना देखिए कि जिस व्यवस्था को जनता को राहत देनी थी, वही व्यवस्था आज जनता के कंधों पर बोझ बन गई है। प्रशासनिक अधिकारियों की चुप्पी और इस कबाड़ हो चुकी सेवा का निरंतर संचालन स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता को उजागर करता है।

डॉक्टर ने ऑपरेशन करने के नाम मरीज के परिवार से लिये 25 हजार, सिविल सर्जन से हुई शिकायत


शहडोल

जिला चिकित्सालय शहडोल में इलाज के नाम पर मरीजों से अवैध वसूली का मामला एक बार फिर सामने आया है। इस बार धनपुरी निवासी एक गरीब परिवार ने अस्पताल के सर्जन वी पी पटेल पर ऑपरेशन के बदले 25 हजार रुपये लेने का आरोप लगाया है। पीड़ित परिवार ने सिविल सर्जन से लिखित शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।

जानकारी के अनुसार धनपुरी के आलमगंज चीप हाउस निवासी मो. शिराजुद्दीन ने अपनी पत्नी असगरी बेगम (34) को 10 फरवरी को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। 12 फरवरी को ऑपरेशन होना था। परिजनों का आरोप है की ऑपरेशन से पहले ही सर्जन बीपी पटेल ने 25 हजार रुपये नकद देने की शर्त रख दी।

परिजनों के मुताबिक शिराजुद्दीन मूंगफली बेचकर परिवार का गुजारा करते हैं। पत्नी की जान बचाने के लिए उन्होंने रिश्तेदारों से उधार लेकर डॉक्टर को 25 हजार रुपये दिए। आरोप है कि रकम देने के बाद ही चिकित्सक ने ऑपरेशन किया। पर मरीज़ की हालत और भी ज्यादा बिगड़ गई।

हालांकि ऑपरेशन के करीब 22 दिन बीत जाने के बाद भी मरीज की हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। परिजनों का कहना है कि अब डॉक्टर जिम्मेदारी से बचते हुए मरीज को दूसरे अस्पताल रेफर करने की बात कह रहे हैं। इससे परिवार की चिंता और बढ़ गई है।

पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की शिकायत सिविल सर्जन से की है और आरोप लगाया है कि सरकारी अस्पताल में गरीबों के मुफ्त इलाज के दावे केवल कागजों तक सीमित हैं। उनका कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों से भी इलाज के नाम पर पैसे लिए जा रहे हैं।

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