दबंग पब्लिक प्रवक्ता

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फर्जी प्रमाण पत्र से बन गए एसडीओ, हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस, अवैध संपत्ति को कुर्क करने की उठी मांग

अनूपपुर

जिले के जल संसाधन संभाग के अनुभाग राजेंद्रग्राम में पदस्थ अनुविभागीय अधिकारी जे.एल. नंदा के खिलाफ उच्च न्यायालय जबलपुर ने एक कड़ी कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक कूटचरित और पूरी तरह फर्जी आदिवासी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग कर न केवल सरकारी नौकरी हथियाई, बल्कि दशकों तक ऊंचे पदों पर आसीन रहकर सरकारी व्यवस्था को ठगा है।

​उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष दायर रीट पिटीशन क्रमांक WP/11846/2026 (दीपक कुमार मिश्रा बनाम म.प्र. राज्य) की प्रारंभिक सुनवाई में ही मामले की गंभीरता को स्वीकार किया गया। न्यायमूर्ति ने कथित फर्जीवाड़े को आदिवासी वर्ग के संवैधानिक अधिकारों पर बड़ा हमला मानते हुए जे.एल. नंदा और संबंधित विभागीय अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

​शिकायतकर्ता एडवोकेट दीपक कुमार मिश्रा ने बताया कि इस संबंध में पहले भी कलेक्टर, कमिश्नर और भोपाल स्थित छानबीन समिति को ठोस सबूत सौंपे गए थे। लेकिन उनको बचाने का प्रयास किया गया है।शहडोल और अनूपपुर संभाग लंबे समय से "बाहरी" लोगों द्वारा फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरियां हथियाने का केंद्र बना हुआ है। जे.एल. नंदा पर लगे आरोपों ने इस आग में घी डालने का काम किया है। ग्रामीणों का कहना है कि नंदा जैसे अधिकारियों ने न केवल एक गरीब और पात्र आदिवासी का हक छीना, बल्कि पद का दुरुपयोग कर भारी भरकम निजी संपत्ति भी इकट्ठा की है। लोगो की मांग कर है कि नंदा के कार्यकाल के दौरान खरीदे गए भूखंडों, मकानों और बैंक खातों की विशेष जांच कराई जाए। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो न केवल उन्हें बर्खास्त किया जाए, बल्कि उनकी पूरी संपत्ति कुर्क कर सरकारी खजाने में जमा की जानी चाहिए।

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इलेक्ट्रिक स्कूटी में अचानक हुआ ब्लास्ट, घर का सामान जलकर हुआ खाक

अनूपपुर

दो पहिया इलेक्ट्रिक वाहन में अचानक हुए ब्लास्ट से घर में रखा समान पूरी तरह जलकर खाक हो गए हैं यह हादसा उसे समय घटित हुआ जिस दौरान घर में कोई भी सदस्य मौजूद नहीं था। आंगन में खड़ी एक इलेक्ट्रिक बैटरी कंपनी की स्कूटी में हुए ब्लास्ट के चलते घर के कई इलेक्ट्रिक समान आगजनि का शिकार हो गए। घर वालो की माने तो गाड़ी बिना चार्जिंग के खड़ी हुई थी बावजूद के गाड़ी की बैटरी में धमाका हुआ इसके बाद घर के कई सामान जल गए। फिलहाल वाहन मालिक में आगजनी की शिकायत थाने में कर दी है। जैतहरी जनपद के ग्राम पंचायत धनगवा के वार्ड नंबर 5 निवासी राजेंद्र विश्वकर्मा को जरूरी काम से घर से बाहर गए हुए थे उनके घर के आंगन में एक बैटरी कंपनी की स्कूटी में मंगलवार की शाम 5:30 बजे के आसपास बैटरी में ब्लास्ट हो गया। गाड़ी में हुए धमाके के चलते घर के कई इलेक्ट्रिक सामान बुरी तरह झुलस गए हैं जिसमें फ्रिज, कूलर, वाशिंग मशीन व टेबल फैन बताया जा रहे हैं जिस समय बैटरी वाली गाड़ी में धमाका हुआ। उस समय घर में कोई भी मौजूद नहीं था राजेंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि गाड़ी की बैटरी में ब्लास्ट होने के चलते घर का सारा सामान जलकर नष्ट हो गया है। हैरानी इस बात की है की गाड़ी बिना चार्जिंग के खड़ी हुई थी। वाहन मालिक ने इस आगजनी की जानकारी जैतहरी थाने में दी है।

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दूषित पेय जल की आपूर्ति पर, जल समस्या निराकरण समिति ने अजय सिंह को सौंपा ज्ञापन 

अनूपपुर

अजय सिंह राहुल अनूपपुर जिले की यात्रा के दौरान पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष रामखेलावन राठौर के निवास पर पधारे तब यह ज्ञापन, अनूपपुर में नगरपालिका द्वारा दूषित पेय जल की आपूर्ति, नदियों में जिला अस्पताल सहित कई अस्पतालों सरकारी व ग़ैर सरकारी संस्थानों तथा तमाम वार्डों से निःसरित दूषित जल जोकि सीधे अनूपपुर की नदियों तिपान व चंदास में प्रवाहित किया जा रहा है जिससे नदियों का अस्तित्व ख़तरे में पड़ गया है, के संबंध में था। जल समस्या निराकरण समिति के संयोजक गिरीश पटेल ने ज्ञापन सौंपते हुए राहुल जी को बताया कि नदियों का अस्तित्व ख़तरे में है,तिपान तथा चंदास दोनों ही नदियाँ बहुत ही बुरी स्थिति में हैं और चंदास तो लगभग नाले के रूप में परिवर्तित हो गई है यदि समय रहते इस समस्या का निराकरण नहीं किया गया तो इनका अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।तिपान नदी में ही नगरपालिका का साधारण फिल्टर प्लांट लगा है और वहीं पर अत्यंत अपशिष्ट पदार्थों से युक्त जल निरंतर प्रवाहित हो रहा है जोकि केवल फिटकरी और क्लोरीन से साफ कर पेयजल के रूप में प्रदाय किया जा रहा है, इस संबंध में नगर पालिका, स्वास्थ्य विभाग और कलेक्टर को लिखित रूप से अवगत कराया गया पर बड़े आश्वासन के बावजूद कलेक्टर ने न तो कोई कार्रवाई की और न ही अपने वादे के अनुसार उन नदियों को देखने गए जहां इनका हाल बदतर हो चुका है। यहां पर जो एस टी पी प्लांट लगाने की योजना बनाई गई है वो ऐसे स्थानों पर हैं जहां अभी इसकी तत्काल में ज़रूरत नहीं है और जहां ज़रूरत है वहाँ प्लांट कीं कोई योजना नहीं है। गंगा संवर्धन योजना के तहत सरकार से जिस राशि का आवंटन हुआ उसे आवश्यक जगह पर खर्च न करके ऐसे स्थानों पर खर्च किया गया और किया जा रहा है जहां इसकी फ़ौरी तौर पर कोई ज़रूरत नहीं थी, जहां पर खर्च हो रहा है वे स्थान क्रमानुसार बाद में आते है। ज्ञापन सौंपते हुए आयोजन समिति ने राहुल से माँग की कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सूचित कर के कार्यवाही कराने की कृपा करें ताकि इस समस्या का निराकरण हो सके। राहुल ने पूरे ज्ञापन को गंभीरता पूर्वक पढ़ा और आश्वासन दिया कि वे इस पर ठोस कार्यवाही करवाने की पूरी कोशिश करेंगे। ज्ञातव्य है कि पूर्व नगरपालिका उपाध्यक्ष जीवेंद्र सिंह ने नदियों का सर्वेक्षण कर आवश्यक रिपोर्ट प्रस्तुत की है।

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जर्जर पुल बना जानलेवा, हादसे का इंतजार, विभागीय लापरवाही से बढ़ा खतरा

अनूपपुर/कोतमा

एसईसीएल जमुना-कोतमा क्षेत्र अंतर्गत लहसुई कैंप कालरी की मीरा खदान के पास स्थित पुल वर्षों से क्षतिग्रस्त अवस्था में पड़ा है। मरम्मत कार्य नहीं होने के कारण यहां से गुजरने वाले लोगों को प्रतिदिन हादसे का जोखिम उठाना पड़ रहा है। पुलिया में लगी लोहे की सुरक्षा रेलिंग कबाड़ चोरों द्वारा काटकर ले जाने के बाद स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है। रेलिंग के अभाव में विशेषकर रात के समय वाहन चालकों और राहगीरों के लिए पुल से नीचे गिरने का खतरा बना रहता है। रात के समय अंधेरे में पुल का क्षतिग्रस्त हिस्सा स्पष्ट दिखाई नहीं देता, जिससे वाहन चालक अनजाने में खतरे के करीब पहुंच जाते हैं। वहीं पुल पर बने गड्ढे आवागमन को और अधिक जोखिमपूर्ण बना रहे हैं।

यह पुल गोविंदा कालरी, गोविंदा गांव, भालूमाड़ा और कोतमा कॉलेज सहित आसपास की कॉलोनियों को जोड़ने वाला प्रमुख मार्ग है। प्रतिदिन सैकड़ों लोगों का आवागमन इस मार्ग से होता है, जिससे जोखिम और अधिक बढ़ जाता है। इसके बावजूद पुल की मरम्मत को लेकर अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

स्थानीय नागरिकों और कोलरी श्रमिकों द्वारा समय-समय पर मरम्मत की मांग उठाई जाती रही है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। क्षेत्रवासियों के अनुसार इस पुल पर आए दिन छोटी-बड़ी घटनाएं होती रहती हैं। मानसून के दौरान स्थिति और गंभीर होने की आशंका बनी रहती है। बारिश में पुल पर फिसलन और जलभराव के कारण दुर्घटनाओं की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। रेलिंग के अभाव में पुल से नीचे गिरने का खतरा लगातार बना रहता है, जिससे लोगों में भय का माहौल बना हुआ है।

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मॉडल रोड में दरारें, जगह-जगह गड्ढे, गुणवत्ता पर उठ रहे सवाल, दो वर्ष में ही हो गयी खराब 

अनूपपुर/कोतमा

कोतमा नगर की मॉडल रोड, जिसे क्षेत्रीय यातायात सुविधा को बेहतर बनाने के उद्देश्य से विकसित किया गया था, निर्माण के 2 ही वर्षों के भीतर खराब स्थिति में पहुंच गई है। सड़क की सतह कई स्थानों पर उखड़ चुकी है, गिट्टियाँ बाहर आ गई हैं और दरारें स्पष्ट दिखाई देती हैं। जगह-जगह गड्ढों के कारण आवागमन प्रभावित हो रहा है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों के लिए जोखिम बढ़ गया है और रात के समय दुर्घटना की आशंका और अधिक बनी रहती है।

निर्माण कार्य में तकनीकी मानकों को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आ रही हैं। डिवाइडर की निर्धारित चौड़ाई 1 मीटर के स्थान पर कहीं-कहीं आधा फीट तक रह जाने, सड़क की चौड़ाई का एक समान न होना और कहीं 5 मीटर, कहीं 6 मीटर तथा कहीं 7 मीटर तक भिन्नता पाए जाने से निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। इसके अलावा कई स्थानों पर नालियों के ऊपर ही सड़क निर्माण कर दिए जाने और केराहा नाला क्षेत्र में संकरी व असुरक्षित पुलिया बनाए जाने की स्थिति भी सामने आई है।

सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों में भी खामियां देखी जा रही हैं। कई स्थानों पर बिजली और लोहे के खंभों को शिफ्ट किए बिना ही सड़क का निर्माण कर दिया गया है, जिससे ये खंभे आज भी मार्ग के बीचों-बीच स्थित हैं और संभावित दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। बस स्टैंड क्षेत्र में अघोषित पार्किंग और कुछ स्थानों पर सड़क किनारे अनियंत्रित वाहन खड़े रहने से यातायात जाम की स्थिति भी बनी रहती है। लोगो का कहना है की पूरे मामले की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए।

फर्जी प्रमाण पत्र से बन गए एसडीओ, हाई कोर्ट ने जारी किया नोटिस, अवैध संपत्ति को कुर्क करने की उठी मांग

*भ्रष्टाचारियों का जिला बना अनूपपुर, सत्ता एवं विपक्ष भ्रष्टाचारियों को चुपके-चुपके दे रहे संरक्षण, उच्च स्तरीय जांच आवश्यक*


अनूपपुर

मध्य प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में भ्रष्टाचार और जालसाजी की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका एक सनसनीखेज उदाहरण अनूपपुर जिले में सामने आया है। जल संसाधन संभाग के अनुभाग राजेंद्रग्राम में पदस्थ अनुविभागीय अधिकारी (SDO) जे.एल. नंदा के खिलाफ उच्च न्यायालय जबलपुर ने एक कड़ी कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक कूटचरित और पूरी तरह फर्जी आदिवासी जाति प्रमाण पत्र का उपयोग कर न केवल सरकारी नौकरी हथियाई, बल्कि दशकों तक ऊंचे पदों पर आसीन रहकर सरकारी व्यवस्था को ठगा है।

​उच्च न्यायालय के इस कड़े रुख के बाद अब स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक नई और बड़ी मांग बुलंद कर दी है। मांग यह है कि नंदा ने इस फर्जी नौकरी के कालखंड में जो अकूत चल और अचल संपत्ति बनाई है, उसकी भी बारीकी से जांच की जाए। यह तर्क दिया जा रहा है कि जब नियुक्ति का आधार ही धोखाधड़ी है, तो उस दौरान अर्जित की गई हर पाई "अपराध की आय" (Proceeds of Crime) की श्रेणी में आती है।

​उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष दायर रीट पिटीशन क्रमांक WP/11846/2026 (दीपक कुमार मिश्रा बनाम म.प्र. राज्य) की प्रारंभिक सुनवाई में ही मामले की गंभीरता को स्वीकार किया गया। न्यायमूर्ति ने कथित फर्जीवाड़े को आदिवासी वर्ग के संवैधानिक अधिकारों पर बड़ा हमला मानते हुए जे.एल. नंदा और संबंधित विभागीय अधिकारियों को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

​शिकायतकर्ता एडवोकेट दीपक कुमार मिश्रा ने बताया कि इस संबंध में पहले भी कलेक्टर, कमिश्नर और भोपाल स्थित छानबीन समिति को ठोस सबूत सौंपे गए थे। लेकिन विडंबना यह रही कि प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी ही बिरादरी के व्यक्ति को बचाने के लिए मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। संतोषजनक कार्रवाई न होने पर ही मामला न्यायालय की चौखट तक पहुँचा, जहाँ अब दूध का दूध और पानी का पानी होने की उम्मीद जगी है।

​शहडोल और अनूपपुर संभाग लंबे समय से "बाहरी" लोगों द्वारा फर्जी सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरियां हथियाने का केंद्र बना हुआ है। जे.एल. नंदा पर लगे आरोपों ने इस आग में घी डालने का काम किया है। ग्रामीणों का कहना है कि नंदा जैसे अधिकारियों ने न केवल एक गरीब और पात्र आदिवासी का हक छीना, बल्कि पद का दुरुपयोग कर भारी भरकम निजी संपत्ति भी इकट्ठा की है।

​क्षेत्रीय जनता अब मुख्यमंत्री और लोकायुक्त से यह मांग कर रही है कि नंदा के कार्यकाल के दौरान खरीदे गए भूखंडों, मकानों और बैंक खातों की विशेष जांच कराई जाए। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो न केवल उन्हें बर्खास्त किया जाए, बल्कि उनकी पूरी संपत्ति कुर्क कर सरकारी खजाने में जमा की जानी चाहिए ताकि भविष्य में कोई दूसरा व्यक्ति आदिवासियों के हक पर डाका डालने की जुर्रत न कर सके। उच्च न्यायालय का यह हस्तक्षेप प्रदेश के हजारों फर्जी प्रमाण पत्र धारकों के लिए एक चेतावनी की तरह है, जो व्यवस्था की खामियों का फायदा उठाकर सत्ता के गलियारों में जमे बैठे हैं।

कर्मचारियों ने 17 मांगों पर कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की दी चेतावनी, रुकवाया गया बाल विवाह


अनूपपुर

जिले में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को एकजुटता का परिचय देते हुए सशक्त प्रदर्शन किया। भारतीय मजदूर संघ, जिला अनूपपुर के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के सैकड़ों कर्मचारियों ने भाग लेकर अपनी आवाज बुलंद की। दोपहर 2:00 बजे ज्येष्ठ एवं वरिष्ठ पदाधिकारियों के नेतृत्व में 17 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन मध्यप्रदेश शासन के माननीय मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर अनूपपुर को सौंपा गया।

यह ज्ञापन दादा ताराचंद यादव, मजदूर संघ जमुना-कोतमा एरिया के विभाग प्रमुख राजेश सिंह परिहार, जिला मंत्री सुमित बक्सरिया एवं विद्युत वितरण कंपनी अनूपपुर के जिलाध्यक्ष सुनील चौरसिया के नेतृत्व में प्रस्तुत कर ज्ञापन सौपा गया।

ज्ञापन में आउटसोर्स कर्मचारियों की समस्याओं को विस्तारपूर्वक रखते हुए राज्य सरकार से ठोस एवं व्यापक नीति निर्माण की मांग की गई। कर्मचारियों ने कहा कि वर्तमान आउटसोर्स व्यवस्था में कार्यरत श्रमिकों को न तो सामाजिक सुरक्षा प्राप्त है और न ही उन्हें उनके कार्य के अनुरूप उचित वेतन मिल रहा है। इससे उनका आर्थिक और सामाजिक जीवन प्रभावित हो रहा है। कर्मचारियों ने आउटसोर्स सर्विस सिक्योरिटी एक्ट अथवा आउटसोर्स निगम मंडल के गठन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे कर्मचारियों को स्थायित्व, पारदर्शिता और सुरक्षा मिल सकेगी। ज्ञापन में 200 से अधिक कर्मचारियों की रही भागीदारी। संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार द्वारा उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। 

*प्रशासन की तत्परता से मोहिनी ग्राम में रूका बाल विवाह*


शहडोल

कलेक्टर डॉ. केदार सिंह द्वारा शहडोल जिले में बाल विवाह की रोकथाम हेतु जिला एवं खंड स्तरीय दल गठित किया गया है। जिले की तहसील जयसिंहनगर अंतर्गत ग्राम मोहिनी में अक्षय तृतीया के अवसर पर बाल विवाह की शिकायत प्राप्त होने पर प्रशासन ने त्वरित कार्यवाही करते हुए बालिका का बाल विवाह रूकवा दिया। शिकायत की जांच के दौरान बालिका की आयु 18 वर्ष कम पाई गई। 

जिला कार्यक्रम अधिकारी महिला बाल विकास अखिलेश मिश्रा ने बताया कि अनुविभागीय अधिकारी राजस्व काजोल सिंह के मार्गदर्शन में  तत्काल खंड स्तरीय टीम को मौके पर भेजा गया । यह टीम बालिका के घर मोहिनी एवं उसके मामा के घर जगडा पहुंचकर  बाल विवाह रूकवाया। टीम द्वारा परिजनो को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के प्रावधानो की जानकारी दी गई तथा  बालिका का विवाह 18 वर्ष पूर्ण होने के बाद ही विवाह करने की समझाइश दी गई। 

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