दबंग पब्लिक प्रवक्ता

अवैध मुरूम उत्तखनन कर परिवहन पर ट्रैक्टर ट्रॉली जप्त, मामला हुआ दर्ज


अनूपपुर

जिले के वेंकटनगर चौकी पुलिस को दौरान भ्रमण ग्राम कदमसरा में मुखबिर से सूचना प्राप्त हुई कि, ग्राम मुण्डा का राजेश राठौर आमाडांड की पहाडी किनारे से अवैध खनिज मुरूम का चोरी से उत्तखनन कर अपने नीले रंग के ट्रेक्टर ट्राली में ट्रेक्टर चालक से मुरूम लोड करवाकर ग्राम कदमसरा रानी तालाब तरफ मुरूम बेंचने आने वाला हैं। मुखबिर के बताये स्थान ग्राम कदमसरा रानी तालाब के पास पहुंचे तो मुण्डा तरफ से एक ट्रेक्टर आते दिखा, उक्त ट्रेक्टर को रूकवाकर चेक किया गया तो ट्रेक्टर की ट्राली में मुरूम लोड था, जो ट्रेक्टर चालक से पूछतांछ की गई तो चालक अपना अपना नाम बबलू सिंह भैना पिता लाल सिंह भैना उम्र 21 वर्ष निवासी ग्राम मुण्डा गढ़ियाटोला थाना जैतहरी जिला अनूपपुर का होना बताया। उक्त ट्रेक्टर राजेश राठौर निवासी गढ़ियाटोला मुण्डा का होना बताया, राजेश राठौर के कहने पर अवैध रूप से आमाडांड की पहाडी किनारे से मुरूम लोड करके लाना बताया, उक्त मुरूम की कोई टी.पी. या वैध दस्ताबेज नही होना बताया, ट्रेक्टर चालक बबलू सिंह भैना एवं वाहन स्वामी राजेश राठौर का कृत्य धारा 303(2),317(5), 305(ई) बीएनएस एवं  4/21 खान एवं खान खनिज विकास अधिनियम 1957 के तहत दण्डनीय पाये जाने पर मामला दर्ज किया। चालक बबलू सिंह भैना के कब्जे से बिना रजिस्ट्रेशन नंबर के स्वराज कंपनी का ट्रेक्टर मय ट्राली में लोड 03 घन मीटर अवैध मुरूम (खनिज) वाहन एवं मुरूम कुल कीमती 503000/- रूपये की जप्त कर कब्जे पुलिस लिया, जप्त शुदा सम्पत्ति को चौकी वेंकटनगर चौकी परिसर में खड़ा कराया गया है।

पशु अस्पताल में लटकता रहता है ताला, कर्मचारी नही आते अस्पताल, प्रभारी डॉक्टर फील्ड का बहाना बनाकर रहते हैं गायब


अनूपपुर

जनपद पंचायत अनूपपुर के ग्राम बेलिया बड़ी स्थित पशु अस्पताल हमेशा बन्द रहता है। सूत्रों का मानना है कि इस अस्पताल में नियमित कर्मचारी लगभग हमेशा नदारद रहते हैं। पूर्व में भी इस मामले को उजागर किया जा चुका है, लेकिन विभागीय अधिकारी कोई गंभीर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। प्रभारी डॉक्टर फील्ड के काम का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेते हैं

जनपद पंचायत अनूपपुर क्षेत्र के ग्राम बेलिया बड़ी स्थित पशु अस्पताल की स्थिति दयनीय बनी हुई है। अस्पताल के गेट पर लटकता ताला बताता है कि यहां न तो नियमित इलाज हो पा रहा है और न ही मवेशियों के लिए कोई स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध है। स्थानीय पशुपालकों के अनुसार, इस अस्पताल में तैनात कर्मचारी लगभग हर समय अनुपस्थित रहते हैं।

यह पहला मौका नहीं है जब इस अस्पताल की अनियमितताएं सामने आई हैं। इससे पहले भी स्थानीय  ग्रामीणों ने इस मामले को उठाया था, लेकिन विभागीय अधिकारियों ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जब मामले को लेकर प्रभारी डॉक्टर से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने कहा कि वे “फील्ड के काम में गए हैं।” ग्रामीणों का आरोप है कि यह बहाना हर बार दोहराया जाता है, जिससे अस्पताल की स्थिति और खराब होती जा रही है।

पशुपालकों ने बताया कि बीमार पशुओं को लेकर आने वाले किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ता है। कई बार गंभीर स्थिति में पशुओं का इलाज न हो पाने से उनकी मौत भी हो चुकी है प्रशासन से गुहार ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने जनपद पंचायत अनूपपुर एवं पशुपालन विभाग के उच्चाधिकारियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि अस्पताल में नियमित रूप से डॉक्टर एवं स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की जाए और ताले खोलकर पशुओं के उपचार की व्यवस्था बहाल की जाए।

इनका कहना है।

*इस मामले को लेकर जब पशु चिकित्सालय में पदस्थ डॉक्टर शिवेंद्र पाण्डेय को कॉल किया गया तो उन्होंने कॉल रिसीव नही किया*

नदी का पानी बना जहर, सोन को कौन पिला रहा है, केमिकल वाला शरबत, नगर परिषद व ओपीएम के बीच छिड़ी जंग

पार्षद ने अनशन चेतावनी देकर कलेक्टर के यहाँ की थी शिकायत, प्रशासन ने नही की कार्यवाही*


शहडोल

सोन नदी में बढ़ते प्रदूषण को लेकर उठे सवाल अब आरोप-प्रत्यारोप के बीच और गहराते जा रहे हैं। एक ओर सामाजिक कार्यकर्ता अवधेश पांडे ने इस गंभीर मुद्दे को उठाते हुए मध्यप्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहडोल के क्षेत्रीय अधिकारी को पत्र लिखकर जांच और कार्रवाई की मांग की है, वहीं दूसरी ओर मामले में जिम्मेदारी तय करने को लेकर मिल प्रबंधन और नगर परिषद के बीच बयानबाजी शुरू हो गई है।

सामाजिक कार्यकर्ता अवधेश पांडे ने अपने पत्र में अमलाई स्थित ओरिएंट पेपर मिल से निकलने वाले रसायनयुक्त अपशिष्ट पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि इस अपशिष्ट के कारण सोन नदी का जल लगातार प्रदूषित हो रहा है, जिससे जलीय जीवों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है और आसपास के ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि समय रहते इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में स्थिति और भयावह हो सकती है। पांडे ने अपशिष्ट जल के शोधन के लिए स्थापित एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करते हुए मौके पर निरीक्षण और सख्त कार्रवाई की मांग की है।

*अब ‘पानी’ पर शुरू हुआ पेंच*

मामला तब और दिलचस्प हो गया, जब इस संबंध में ओरिएंट पेपर मिल (ओपीएम) प्रबंधन से बात की गई। मिल प्रबंधन ने साफ तौर पर कहा कि नदी में जा रहा पानी फैक्ट्री का रासायनिक अपशिष्ट नहीं है, बल्कि आसपास की कालोनियों से निकलने वाला उपयोग किया गया घरेलू पानी है। उनका कहना है कि इस पानी के उपचार और प्रबंधन की जिम्मेदारी नगर परिषद बकहो की है, न कि फैक्ट्री की।

*नगर परिषद ने पलटा खेल*

मिल प्रबंधन के इस दावे को नगर परिषद बकहो के जिम्मेदारों ने सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना है कि नदी में बह रहा पानी केमिकल युक्त है और यह सीधे तौर पर फैक्ट्री से ही निकल रहा है। परिषद के अनुसार, घरेलू उपयोग का पानी इस स्तर का प्रदूषण नहीं फैला सकता।

*स्थानीय लोगों की गवाही भी अहम*

इस पूरे विवाद के बीच स्थानीय नागरिकों की राय भी सामने आई है, जो स्थिति को और स्पष्ट करती है। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से देख रहे हैं कि फैक्ट्री क्षेत्र से निकलने वाला गंदा और दुर्गंधयुक्त पानी नदी में मिल रहा है। उनका दावा है कि यह पानी सामान्य घरेलू अपशिष्ट नहीं, बल्कि रसायनयुक्त औद्योगिक अपशिष्ट है। ग्रामीणों ने बताया कि नदी का पानी अब पहले जैसा साफ नहीं रहा और इसका असर खेती, पेयजल और पशुओं के स्वास्थ्य पर भी दिखने लगा है। कई लोगों ने जलजनित बीमारियों की आशंका भी जताई है।

*जांच की मांग तेज*

अवधेश पांडे ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से मांग की है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी मौके पर जाकर पारदर्शिता के साथ वास्तविक स्थिति की जांच करें और यह सुनिश्चित करें कि पर्यावरणीय मानकों का पालन हो रहा है या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि बिना शोधन के किसी भी प्रकार का अपशिष्ट नदी में छोड़ा जाना पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए।

*इनका कहना है*

इस विषय में शिकायत प्राप्त हुई है,जांच दल गठित कर मामले की जांच करवाई जाएगी, जहां तक मुझे मालूम है कि पानी नरगड़ा नाले और सोन नदी में नहीं जा रहा है।

अशोक तिवारी, क्षेत्रीय अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहडोल 

"जहां की आप बात कर रहे हैं ,वहां मिल द्वारा पानी नहीं छोड़ा जाता,यह पूरा पानी कालोनियों का है ,जहां घरों का उपयोग किया पानी जाता है, पहले भी शिकायतें होती रहीं हैं ,लोग ब्लैकमेल करते हैं"

*रवि शर्मा , पीआरओ, ओपीएम अमलाई*

इस संबंध में नगर परिषद के पार्षद रामशरण चौधरी के द्वारा कलेक्टर शहडोल के समक्ष शिकायत की गई थी , और इस प्रदूषित पानी को रोकने के लिए अनशन की चेतावनी भी दी गई थी,लेकिन मिल प्रबंधन की ओर से आज तक इस पानी पर रोक नहीं लगाई गई और न प्रशासन ने सुध ली । प्रबंधन द्वारा यह कहना कि यह कालोनी के मकानों का पानी है सरासर गलत है ,यह प्रदूषित पानी मिल के द्वारा छोड़ कर नगर में प्रदूषण का जहर घोला जा रहा है।" 

मौसमी केवट, अध्यक्ष नगर परिषद , बकहो

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