दबंग पब्लिक प्रवक्ता

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आरपीएफ ने स्टेशन से 7.7 लाख का गाँजा किया जब्त, दो आरोपी तस्कर गिरफ्तार

अनूपपुर

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे अनूपपुर के आरपीएफ टास्क फ़ोर्स टीम ने निगौरा रेलवे स्टेशन पर भेष बदल कर गांजे की तस्करी कर रहे दो आरोपियों को पकड़ा। आरोपियों के कब्जे से कुल 15.540 किलोग्राम गांजा (जिसकी अनुमानित कीमत करीब 7.77 लाख रुपये है) बरामद किया गया।

रात करीब 1:15 बजे सहायक उप निरीक्षक अमरेंद्र सिंह के नेतृत्व में आरपीएफ टास्क फोर्स टीम द्वारा निगौरा रेलवे स्टेशन के सर्कुलेटिंग एरिया में संदिग्ध व्यक्तियों एवं सामान की जांच की जा रही थी। इसी दौरान भेष बदले हुए दो व्यक्तियों की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत होने पर उन्हें रोककर पूछताछ की गई। उनके पास रखी कपड़ों की पोटलियों की तलाशी लेने पर बड़ी मात्रा में गांजा बरामद हुआ।

पकड़े गए आरोपियों की पहचान हंसा नाथ 40 वर्ष, निवासी जिला संगरूर, पंजाब तथा मनता नाथ उर्फ लंबू 39 वर्ष, निवासी जिला संगरूर, पंजाब के रूप में हुई। तलाशी के दौरान हंसा नाथ के कब्जे से 7.280 किलोग्राम तथा मनता नाथ के कब्जे से 8.260 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया।

आरपीएफ द्वारा दोनों आरोपियों को बरामद गांजे सहित पुलिस थाना जैतहरी के सुपुर्द किया गया। पुलिस द्वारा अपराध क्रमांक 285/2026, धारा 8/20(ख) एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर अग्रिम जांच की जा रही है। 

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शिव मंदिर प्रांगण में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब, विशाल भंडारे के साथ सावन सोमवार संपन्न

अनूपपुर

नगर परिषद बरगवां अमलाई अंतर्गत वार्ड क्रमांक 07 स्थित पुरानी शिव मंदिर, सीआरओ कैंप अमलाई के प्रांगण में सावन के अंतिम सोमवार के अवसर पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भगवान भोलेनाथ के दर्शन एवं पूजन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर परिसर में पहुंचने लगी। पूजा-अर्चना के पश्चात श्रद्धालुओं ने विशाल भंडारे में प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

वार्ड क्रमांक 07 के पार्षद एवं समाजसेवी पवन चीनी तथा उनकी मित्र मंडली द्वारा हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सावन के अंतिम सोमवार पर विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में क्षेत्र सहित आसपास के विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद वितरण की समुचित व्यवस्था की गई, जिससे पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।

आयोजन समिति के अनुसार, लगभग 5 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर में दिनभर भक्तिमय वातावरण बना रहा तथा श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के जयकारों के साथ धार्मिक उत्साह में नजर आए।

भंडारे में प्रसाद ग्रहण करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने पवन चीनी एवं उनकी मित्र मंडली द्वारा किए गए इस धार्मिक आयोजन की सराहना की। श्रद्धालुओं का कहना था कि सावन के अंतिम सोमवार पर आयोजित यह भंडारा धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक एकता, सेवा और समर्पण की भावना का भी संदेश देता है। इस अवसर पर पवन चीनी एवं उनकी मित्र मंडली ने कहा कि भगवान शिव की आराधना करने के साथ श्रद्धालुओं की सेवा करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। 

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बरगवां नगर परिषद के मनोनीत पार्षद ने सुधारी मुक्तिधाम मार्ग की सूरत, कीचड़ से मिली राहत

अनूपपुर

जिले के नगर परिषद बरगवां से जनसरोकार और तत्परता की एक अनुकरणीय तस्वीर सामने आई है। यहाँ के मुक्तिधाम जाने वाला मुख्य मार्ग लंबे समय से बदहाली का शिकार था। पूरे रास्ते में गहरा कीचड़ और जलभराव होने के कारण शवयात्रा ले जाने वाले लोगों और स्थानीय नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। इस गंभीर समस्या को देखते हुए नगर परिषद के नवनियुक्त मनोनीत पार्षद सुभाष मिश्रा ने तुरंत मोर्चा संभाला।

पार्षद सुभाष मिश्रा ने मामले को संज्ञान में लेते हुए बिना समय गंवाए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम शुरू कराया। उन्होंने व्यक्तिगत और परिषद के तत्पर प्रयासों से मुक्तिधाम मार्ग पर ट्रैक्टरों के माध्यम से कई ट्रिप मिट्टी और मुरम गिरवाई। इसके बाद श्रमदान और आपसी सहयोग से मार्ग को समतल कराया गया।

इस त्वरित कार्यवाई से सड़क पर फैला कीचड़ साफ हो गया है और अब यह मार्ग हाल में  काम चलाने लायक  बन चुका है। नवनियुक्त पार्षद की इस सक्रियता और जनहित के प्रति समर्पण की स्थानीय निवासियों द्वारा जमकर सराहना की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग के सुधरने से अब अंतिम संस्कार में शामिल होने वाले लोगों को होने वाली भारी असुविधा से  कुछ हद तक  निजात मिल गई है।

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18 चक्के के नाम पर 14 चक्कों में ओवरलोडिंग एसईसीएल हसदेव क्षेत्र में कोयला परिवहन पर उठे गंभीर सवाल

*अधिकारियों ने कहा होगी कार्यवाही*

अनूपपुर

एसईसीएल हसदेव क्षेत्र अंतर्गत कोयला डिस्पैच के नाम पर संचालित भारी वाहनों में कथित ओवरलोडिंग को लेकर अब सड़क सुरक्षा और परिवहन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कागजों में 18 चक्का पंजीकृत कई वाहनों को कथित तौर पर 14 चक्कों के स्वरूप में संचालित किया जा रहा है। आरोप है कि अधिक कोयला लोड करने के उद्देश्य से वाहन के पिछले चार चक्कों के सिस्टम में बदलाव कर दिया जाता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार इससे एक ओर जहां क्षेत्र की सड़कों पर भारी दबाव पड़ रहा है और सड़कें लगातार खराब हो रही हैं, वहीं दूसरी ओर इन भारी वाहनों के बगल से निकलने वाले छोटे वाहन चालकों और राहगीरों के लिए भी दुर्घटना का खतरा बना रहता है। कई बार ओवरलोड वाहन अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतरने अथवा पेड़ों से टकराने जैसी घटनाओं का शिकार होने की बात भी सामने आती रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार बहरावन, हल्दीबाड़ी छत्तीसगढ़, पौराधार, राजनगर, ओसियां सहित आसपास के क्षेत्रों से प्रतिदिन लगभग 25 से 30 वाहन कोयला परिवहन में लगे हुए हैं। इनमें कुछ वाहनों के परमिट और अन्य दस्तावेजों को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी।

कोयला परिवहन में लगे वाहनों पर तिरपाल की व्यवस्था को लेकर भी स्थानीय लोगों ने सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कई बार वाहन बिना पर्याप्त तिरपाल के चलते हैं, जिसके कारण कोयले के छोटे-छोटे टुकड़े सड़क पर गिरते रहते हैं। इससे पीछे चलने वाले दोपहिया और छोटे वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है।

इस संबंध में अनूपपुर आरटीओ सुरेंद्र सिंह गौतम ने कहा कि यदि 18 चक्का पंजीकृत वाहनों को 14 चक्कों के स्वरूप में संचालित कर ओवरलोडिंग की जा रही है तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा हो रहा है तो तत्काल रामनगर प्रभारी को कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे।

वहीं रामनगर प्रभारी गौरव दीक्षित ने कहा कि यदि इस तरह के वाहन संचालित हो रहे हैं तो निश्चित रूप से उनके द्वारा कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की बात कही।

राजनगर क्षेत्रीय प्रबंधक राजेश राय ने कहा कि यह मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इस तरह से वाहनों में ओवरलोडिंग या नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है तो तत्काल संबंधित ट्रांसपोर्टरों को नोटिस जारी कराया जाएगा।

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घर मे छत के बीच 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन का गाड़ दिया खंबा, अधिकारियों ने सुरक्षा नियमों उड़ाई धज्जियां 

शहडोल

पपौंध क्षेत्र में बिजली का पोल सड़क किनारे या खेत में नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के घर की छत के बीचों-बीच गाड़ दिया गया है। ऊपर से इसी पोल के सहारे गुजर रही है 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन, यानी जिस छत पर परिवार का रहना-जाना है, उसी के ऊपर मौत का करंट दौड़ रहा है। छत के ऊपर से हाईटेंशन लाइन ले जाने के इस ‘खतरनाक जुगाड़’ का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। 

जिले के अंतिम छोर पर स्थित पपौंध क्षेत्र की ग्राम पंचायत सकन्दी साकेत मोहल्ला में बिजली विभाग का एक अजब-गजब कारनामा सामने आया है। यहाँ जिम्मेदारों ने इंजीनियरिंग और सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक ग्रामीण के घर की पक्की छत के बीचों-बीच बिजली का खंभा गाड़ दिया। 

छत को चीरकर खड़े किए गए इस पोल से 11 हजार वोल्ट 11 KV की हाईटेंशन बिजली लाइन गुजर रही है। घरों के बेहद करीब और सिर के ठीक ऊपर से गुजरती यह मौत की लाइन पूरे मोहल्ले के लिए 24 घंटे का खतरा बन चुकी है। छत पर पैर रखते ही करंट का डर सताने लगता है। ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में भी कई लोग इस हाईटेंशन तार की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस चुके हैं। हर वक्त किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है और लोग अपने ही आशियाने में खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं। 

ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या को लेकर कई बार बिजली विभाग के चक्कर काटे गए और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, स्थानीय निवासियों ने बिजली विभाग और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि किसी बड़ी जनहानि या अनहोनी से पहले इस खंभे व हाईटेंशन लाइन को तुरंत सुरक्षित दूरी पर शिफ्ट किया जाए।

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शिवम पब्लिक स्कूल की बदहाली उजागर, बच्चों के भविष्य के साथ हो रहा है खिलवाड़, मूलभूत सुविधाएं नदारद

शहडोल

बीआरसी बुढार अंतर्गत संचालित शिवम पब्लिक स्कूल, सेमरिया वर्ष 1917 से संचालित होने का दावा करता है, लेकिन आज भी यह विद्यालय मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को पीने के स्वच्छ पानी तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहीं शौचालय की व्यवस्था भी नदारद बताई जा रही है। ऐसे में विद्यार्थियों, विशेषकर छात्राओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय के प्राचार्य मनोज सिंह की मनमानी के कारण स्कूल की व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं। स्कूल प्रशासन बच्चों की बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में विफल साबित हो रहा है, जबकि शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार प्रत्येक विद्यालय में स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाएं अनिवार्य हैं।

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का भी सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी में पानी की व्यवस्था न होने से विद्यार्थियों को घर से पानी लाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। वहीं शौचालय न होने से छात्राओं की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी अब तक इस गंभीर समस्या से अनजान कैसे बने हुए हैं? यदि स्कूल में वास्तव में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा निरीक्षण कर तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

क्षेत्र के अभिभावकों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन तथा शिक्षा विभाग से मांग की है कि शिवम पब्लिक स्कूल की व्यवस्थाओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा बच्चों को आवश्यक सुविधाएं तत्काल उपलब्ध कराई जाएं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोका जा सके।

*इनका कहना है*

स्कूल प्राचार्य को नोटिस जारी कर दिया है, जांच कर उचित कार्यवाही करेंगे।

*सीताराम दुबे, जिला शिक्षा अधिकारी, शहडोल*

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ज्वाला धाम ऊंचेहरा में पारदर्शिता का अभाव, भक्तों का चंदा बना कमाई का धंधा, भक्तों के आस्था का केंद्र पर सवाल

उमरिया। 

जिले स्थित प्रसिद्ध आस्था केंद्र ज्वाला धाम ऊंचेहरा इन दिनों अपनी अव्यवस्थाओं और हिसाब की गोपनीयता को लेकर सवालों के घेरे में है। जो मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है, वहीं भक्तों के दान-दक्षिणा का सार्वजनिक लेखा-जोखा आज तक सामने नहीं आ सका है, जिसके चलते श्रद्धालुओं में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

हर नवरात्रि और मेले में यहां लाखों श्रद्धालु माथा टेकने आते हैं और माँ के दरबार में दिल खोलकर दान करते हैं, जिससे मंदिर की दान पेटियां नकदी, सोने-चांदी के आभूषणों और सिक्कों से लबालब भर जाती हैं। अनुमान है कि हर साल यहां करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है, लेकिन यह दान जाता कहां है, इसका कोई हिसाब सार्वजनिक नहीं है। मंदिर की स्थापना से लेकर अब तक कुल आय कितनी हुई, खर्च कितना हुआ, बैंक खातों में कितनी राशि जमा है, कितनी एफडीआर बनी है और उस पर कितना ब्याज आया है, साथ ही सोना-चांदी कितना चढ़ा और वह कहां रखा गया है, इसका कोई सूचना पटल, कोई स्टॉक रजिस्टर या कोई अधिकृत वेबसाइट आज तक सार्वजनिक नहीं की गई है।

चर्चा यह भी है कि मंदिर की संपूर्ण व्यवस्था एक ही परिवार के सदस्यों द्वारा बनाई गई समिति द्वारा संचालित की जा रही है, जिसका कोई वैधानिक पंजीयन या ट्रस्ट डीड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। जबकि मध्यप्रदेश में बड़े धार्मिक स्थलों का संचालन धर्मस्व विभाग या पंजीकृत लोक न्यास के अधीन होता है, ऐसे में सवाल उठता है कि ज्वाला धाम ऊंचेहरा किस शासकीय आदेश या वैधानिक अधिकार से संचालित हो रहा है। 

करोड़ों के सालाना चढ़ावे के बावजूद जिला प्रशासन और धर्मस्व विभाग द्वारा कोई हस्तक्षेप न करना भी कई संदेहों को जन्म दे रहा है। अब श्रद्धालुओं ने जिला कलेक्टर उमरिया और कमिश्नर शहडोल से मांग की है कि मंदिर के संचालन के लिए एक पंजीकृत लोक न्यास का गठन किया जाए, पिछले दस वर्षों की आय-व्यय का शासकीय ऑडिटर से ऑडिट कराकर रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

समाचार 08

स्कूली छात्र सड़क पुल की मांग पर पहुँचे कलेक्ट्रेट

उमरिया

कलेक्टर कार्यालय में उस दौरान हड़कंप मच गया, जब स्कूली छात्र विद्यालय जाने के लिए सड़क और पुल की मांग को लेकर कलेक्टर कार्यालय में आकर प्रदर्शन करने लगे लिए, ग्राम बड़ागांव के शासकीय हाई स्कूल के छात्रों ने बताया की उनके विद्यालय तक पंहुच मार्ग नहीं होने से उन्हें कीचड़ भरे रास्ते से सफर करना पड़ता है, लिहाजा कई दिन वे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं, विद्यालय में तीन कक्षाएं एक कमरे में संचालित होती हैँ, छात्र पढ़ाई नहीं कर पाते लिए, छात्र कलेक्टर परिसर में ही प्रदर्शन करते हुए सड़क मांग को लेकर नारेबाजी करने लगे, जिसके बाद कलेक्टर राखी सहाय ने मौके पर आकर छात्रों से मुलाक़ात की और उनकी समस्याएँ सुनी, जिसके बाद कलेक्टर ने मौके पर मौजूद जिला शिक्षा अधिकारी को तत्काल ग्राम का विजिट कर सड़क निर्माण कराने के निर्देश दिए हैँ।

समाचार 09

छत से पानी रिसने के कारण कामकाज प्रभावित

उमरिया

बाल विकास परियोजना कार्यालय करकेली का भवन इन दिनों जर्जर हालत में पहुंच चुका है। भवन की छत से बारिश का पानी लगातार रिसने के कारण कार्यालय में काम करना कर्मचारियों के लिए मुश्किल हो गया है। कार्यालय के कंप्यूटर कक्ष सहित अन्य कमरों में पानी से बचाव के लिए कंप्यूटर और जरूरी सामान को बैनर आदि से ढककर किसी तरह काम किया जा रहा है। बारिश के दौरान छत से पानी टपकने के कारण कार्यालय में दस्तावेज, कंप्यूटर एवं अन्य जरूरी सामग्री के खराब होने का खतरा बना रहता है। पानी रिसने से कार्यालय का सामान्य कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। कर्मचारियों को अपनी सुरक्षा के साथ-साथ शासकीय रिकॉर्ड और उपकरणों को सुरक्षित रखने की चिंता बनी रहती है।

घर मे छत के बीच 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन का गाड़ दिया खंबा, अधिकारियों ने सुरक्षा नियमों उड़ाई धज्जियां 


शहडोल

पपौंध क्षेत्र में बिजली का पोल सड़क किनारे या खेत में नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के घर की छत के बीचों-बीच गाड़ दिया गया है। ऊपर से इसी पोल के सहारे गुजर रही है 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन लाइन, यानी जिस छत पर परिवार का रहना-जाना है, उसी के ऊपर मौत का करंट दौड़ रहा है। छत के ऊपर से हाईटेंशन लाइन ले जाने के इस ‘खतरनाक जुगाड़’ का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। 

जिले के अंतिम छोर पर स्थित पपौंध क्षेत्र की ग्राम पंचायत सकन्दी साकेत मोहल्ला में बिजली विभाग का एक अजब-गजब कारनामा सामने आया है। यहाँ जिम्मेदारों ने इंजीनियरिंग और सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक ग्रामीण के घर की पक्की छत के बीचों-बीच बिजली का खंभा गाड़ दिया। 

छत को चीरकर खड़े किए गए इस पोल से 11 हजार वोल्ट (11 KV) की हाईटेंशन बिजली लाइन गुजर रही है। घरों के बेहद करीब और सिर के ठीक ऊपर से गुजरती यह मौत की लाइन पूरे मोहल्ले के लिए 24 घंटे का खतरा बन चुकी है। छत पर पैर रखते ही करंट का डर सताने लगता है। ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में भी कई लोग इस हाईटेंशन तार की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस चुके हैं। हर वक्त किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है और लोग अपने ही आशियाने में खौफ के साए में जीने को मजबूर हैं। 

ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या को लेकर कई बार बिजली विभाग के चक्कर काटे गए और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, स्थानीय निवासियों ने बिजली विभाग और जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि किसी बड़ी जनहानि या अनहोनी से पहले इस खंभे व हाईटेंशन लाइन को तुरंत सुरक्षित दूरी पर शिफ्ट किया जाए।

माँ बीरासिनी देवी मंदिर के आय व्यय में पारदर्शिता क्यों नहीं?आस्था के केंद्र में पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी जितनी श्रद्धा

*13 वर्षों के लेखा-जोखा को हो सार्वजनिक, जनहित की मांगें लागू हो*


(आलेख -संतोष कुमार द्विवेदी)

समाज सेवी, कवि कलमकार पत्रकार उमरिया म. प्र )

उमरिया

माँ बीरासिनी देवी मंदिर बीरसिंहपुर पाली जिला उमरिया में लाखों श्रद्धालु अपनी आस्था से दान अर्पित करते हैं, यह दान किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं बल्कि भक्तों की श्रद्धा और जन विश्वास से जुडी सार्वजनिक सम्पदा है।

देश के बड़े और प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों से जुड़े दान, संपत्ति, आभूषणों तथा वित्तीय प्रबंधन में कथित अनियमितताओं और हेराफेरी के मामले समय-समय पर सार्वजनिक चर्चा का विषय बनते रहे हैं। अयोध्या के राम मंदिर सहित विभिन्न बड़े आस्था केंद्रों से जुड़े विवादों ने यह महत्वपूर्ण प्रश्न सामने रखा है कि, जहाँ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और बड़ी मात्रा में जनसहयोग एवं दान जुड़ा हो, वहाँ पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक लेखा-जोखा सर्वोच्च प्राथमिकता क्यों न हो।

इसी व्यापक जनहित और श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए माँ बीरासिनी देवी मंदिर, बिरसिंहपुर पाली, जिला उमरिया की व्यवस्था में भी पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित किया जाना समय की आवश्यकता है।

*13 वर्षों के लेखा-जोखा को हो सार्वजनिक*

मई 2013 से वर्तमान समय तक मंदिर की आय, व्यय, दान, बैंक जमा, FDR, सोने-चाँदी के आभूषणों तथा अन्य चल-अचल संपत्तियों से संबंधित जानकारी नियमित रूप से सार्वजनिक किए जाने की आवश्यकता है।

यदि यह जानकारी अब तक मंदिर के सूचना-पटल, अधिकृत माध्यमों, समाचार पत्रों, समाचार चैनलों अथवा अन्य सार्वजनिक माध्यमों से श्रद्धालुओं और आम नागरिकों के सामने नियमित रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई है, तो यह स्वाभाविक जनहित का प्रश्न है कि ऐसा क्यों है और वर्तमान व्यवस्था किस नियम, आदेश अथवा प्राधिकृत अनुमति के आधार पर संचालित हो रही है?

यह सवाल किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि मंदिर की व्यवस्था के प्रति जनविश्वास को और मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

*जनहित मे प्रमुख माँगें*

माँ बीरासिनी देवी मंदिर के श्रद्धालुओं और आम नागरिकों के हित में मई 2013 से वर्तमान समय तक की निम्न जानकारी वर्षवार, प्रमाणित एवं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए।

1. आय एवं दान: प्रत्येक वित्तीय वर्ष में प्राप्त कुल दान एवं अन्य आय का पूरा विवरण।

2. व्यय: प्रत्येक वर्ष किए गए व्यय का मदवार एवं प्रमाणित विवरण।

3. दान पेटियाँ: दान पेटियाँ किन-किन तारीखों को खोली गईं, प्रत्येक अवसर पर कितनी नकद राशि तथा सोना, चाँदी अथवा अन्य मूल्यवान सामग्री प्राप्त हुई, इसकी दिनांकवार जानकारी।

4. बैंक में जमा राशि: दान पेटियों एवं अन्य स्रोतों से प्राप्त राशि में से कितनी राशि किस बैंक खाते में, किस तारीख को जमा की गई—इसका विवरण।

5. FDR एवं ब्याज: मंदिर की FDR/सावधि जमा का वर्षवार विवरण तथा उनसे प्राप्त वार्षिक ब्याज की जानकारी।

6. सोना-चाँदी एवं आभूषण: मंदिर में उपलब्ध सोने-चाँदी के आभूषणों एवं अन्य मूल्यवान वस्तुओं की वर्षवार सूची, उनका वजन/मात्रा, उपलब्धता तथा रख-रखाव का अधिकृत अभिलेख।

7. बैंक लॉकर/सुरक्षित भंडारण: यदि सोने-चाँदी अथवा अन्य मूल्यवान वस्तुएँ बैंक लॉकर या किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर रखी गई हैं, तो उनके संबंध में उपलब्ध अधिकृत रिकॉर्ड, जमा/निकासी की दिनांक तथा वर्तमान स्थिति की जानकारी।

8. चल-अचल संपत्ति: मंदिर की समस्त चल-अचल संपत्तियों का विवरण, उनके अभिलेख तथा वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए।

9. ऑडिट: प्रत्येक वर्ष की आय-व्यय एवं संपत्ति का विधिवत ऑडिट कराया जाए तथा ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

10. वेबसाइट एवं डिजिटल पारदर्शिता: मंदिर की अधिकृत वेबसाइट बनाई जाए और उस पर वर्षवार आय-व्यय, ऑडिट रिपोर्ट, दान, FDR, संपत्ति एवं अन्य महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाए।

11. वैधानिक एवं जवाबदेह प्रबंधन: मंदिर की व्यवस्था को स्पष्ट वैधानिक ढाँचे में संचालित करने के लिए पंजीकृत ट्रस्ट अथवा उपयुक्त वैधानिक संस्था के गठन पर गंभीरता से विचार किया जाए।

12. जनसहभागिता: मंदिर की व्यवस्था में नियमसम्मत तरीके से आम नागरिकों, माताओं-बहनों, युवाओं और श्रद्धालुओं की सहभागिता सुनिश्चित की जाए, ताकि मंदिर का संचालन व्यापक जनविश्वास और जवाबदेही के साथ हो।

*पारदर्शिता से आस्था व विश्वास होगा मजबूत*

माँ बीरासिनी देवी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र है। इसलिए मंदिर की आय, संपत्ति और प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित जानकारी को सार्वजनिक करना किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध कार्रवाई नहीं, बल्कि जनविश्वास की रक्षा का माध्यम माना जाना चाहिए।

देश के विभिन्न बड़े मंदिरों में वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर सामने आने वाली चर्चाएँ यह संकेत देती हैं कि किसी भी बड़े आस्था स्थल पर ऐसी व्यवस्था पहले से स्थापित होनी चाहिए, जिसमें न तो संदेह की गुंजाइश रहे और न ही भविष्य में किसी प्रकार की हेराफेरी की संभावना।

अतः माँ बीरासिनी देवी मंदिर की व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता, नियमित ऑडिट, सार्वजनिक लेखा-जोखा, डिजिटल सूचना प्रणाली और जनसहभागिता सुनिश्चित की जाए।

यह पहल किसी व्यक्ति, अधिकारी अथवा संस्था को कटघरे में खड़ा करने के लिए नहीं, बल्कि माँ बीरासिनी देवी मंदिर की गरिमा, श्रद्धालुओं की आस्था और जनविश्वास को और अधिक मजबूत करने के लिए है। जनहित में स्पष्ट, नियमित और सार्वजनिक लेखा-जोखा—यही पारदर्शिता है और यही मजबूत जनविश्वास का आधार है। 

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