दबंग पब्लिक प्रवक्ता

गुरुनानक मटकी फोड़ प्रतियोगिता में विजेता टीम को 1.51 लाख की जगह मिले 21 हजार, धार्मिक आयोजन पर छल का आरोप

*विजेता टीम पर डरा धमकाकर दबाब बनाया गया, समिति के पंजीयन पर उठे सवाल*


शहडोल

कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शहडोल के गुरुनानक चौक में आयोजित दही हांडी एवं मटकी फोड़ प्रतियोगिता अब विवादों में घिर गई है। प्रतियोगिता में विजेता बनी अनूपपुर जिले के ग्राम केल्होरी की टीम ने आयोजन समिति पर घोषित पुरस्कार राशि देने के बजाय कम राशि देकर धोखा करने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले को लेकर क्षेत्र में नाराजगी और चर्चा का माहौल है।

जानकारी के अनुसार, गुरुनानक चौक सेवा समिति द्वारा आयोजित मटकी फोड़ प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार के रूप में ₹1 लाख 51 हजार की राशि घोषित की गई थी। इस प्रतियोगिता में विभिन्न क्षेत्रों से टीमों ने हिस्सा लिया। अनूपपुर जिले के केल्होरी गांव से पहुंची युवाओं की टीम ने कड़ी मशक्कत के बाद मटकी फोड़कर प्रथम स्थान हासिल किया।

विजेता टीम का आरोप है कि प्रतियोगिता जीतने के बाद जब पुरस्कार वितरण का समय आया तो उन्हें घोषित ₹1.51 लाख की पूरी राशि देने के बजाय मात्र ₹21 हजार देकर रवाना कर दिया गया। टीम के सदस्यों ने अपनी घोषित पुरस्कार राशि की मांग की, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।

आरोप है कि बाहर से आई युवाओं की टीम पर दबाव बनाया गया और उन्हें डराने-धमकाने के बाद शहडोल से वापस भेज दिया गया। इस घटना के बाद धार्मिक और सामाजिक आयोजन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में युवाओं के साथ इस प्रकार का व्यवहार बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यदि वास्तव में ₹1.51 लाख का प्रथम पुरस्कार घोषित किया गया था, तो विजेता टीम को पूरी राशि मिलनी चाहिए थी।

मामले में गुरुनानक चौक सेवा समिति के अध्यक्ष लकी साहू, उपाध्यक्ष सोनू साहू, सचिव बबलू कटारे, सोनू खान सहित आयोजन से जुड़े अन्य पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। सूत्रों की माने तो ही गुरुनानक चौक सेवा समिति का कोई शासकीय रिकॉर्ड वैध दस्तावेज रजिस्ट्रेशन भी शासन के रिकॉर्ड मे उपलब्ध नहीं है, समिति के पंजीयन और शासकीय रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों की वैधता की जांच की मांग भी उठने लगी है। 

विजेता टीम व क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर विजेता टीम को न्याय दिलाने और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की गई है। 

9.10 लाख की रिकवरी कार्रवाई पर आपत्ति, अधिकारियों की भूमिका की जांच, दोबारा माप की मांग

*राशि देने से इनकार के बाद प्रतिशोधात्मक कार्रवाई, संभागायुक्त से उच्चस्तरीय जांच की मांग*


अनूपपुर

ग्राम पंचायत जमुनीहा-1 में जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि से कराए गए करौंधिया नाला स्टॉपडैम एवं गजहा नाला स्टॉपडैम के निर्माण कार्यों को लेकर विवाद गहरा गया है। जिला पंचायत द्वारा जारी कारण बताओ सूचना-पत्र में तकनीकी माप, मूल्यांकन और निर्माण कार्य में अंतर का उल्लेख करते हुए दोनों कार्यों में कुल करीब 9.10 लाख रुपये की राशि को लेकर आपत्ति दर्ज की गई है। अब ग्राम पंचायत जमुनीहा-1 के निर्वाचित सरपंच ने इस कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए शहडोल संभागायुक्त से स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

सरपंच ने संभागायुक्त को दिए आवेदन में आरोप लगाया है कि दोनों स्टॉपडैम निर्माण कार्यों की वास्तविक और निष्पक्ष मौका जांच किए बिना उपलब्ध अभिलेखों एवं माप पुस्तिका के आधार पर निष्कर्ष निकाला गया है। उन्होंने मांग की है कि वरिष्ठ एवं स्वतंत्र तकनीकी अधिकारियों की समिति गठित कर दोनों निर्माण कार्यों की मौके पर दोबारा माप, तकनीकी परीक्षण और जांच कराई जाए। साथ ही जांच की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी एवं फोटोग्राफी कराने की मांग भी की गई है।

जिला पंचायत अनूपपुर की ओर से जारी कारण बताओ सूचना-पत्र में जल संसाधन विभाग अनूपपुर द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन का हवाला दिया गया है। इसमें करौंधिया नाला स्टॉपडैम और गजहा नाला स्टॉपडैम के निर्माण में तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका में दर्ज मूल्यांकन तथा मौके पर प्राप्त वास्तविक स्थिति के बीच अंतर का उल्लेख किया गया है।

सरपंच ने अपने आवेदन में कहा है कि यदि माप पुस्तिका में वास्तविक कार्य से अधिक माप दर्ज हुई है तो यह भी जांच का विषय है कि माप किस अधिकारी ने दर्ज की, कब दर्ज की गई और उसका सत्यापन किस अधिकारी ने किया। सरपंच ने उपयंत्री, सहायक यंत्री तथा अन्य संबंधित अधिकारियों द्वारा किए गए माप, सत्यापन एवं निरीक्षण की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग की है। 

उन्होंने यह भी मांग की है कि यदि धनराशि मांगने संबंधी आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार एवं अनुशासनात्मक नियमों के तहत कार्रवाई की जाए।

सरपंच ने संभागायुक्त से वर्तमान जांच प्रतिवेदन पर उनकी आपत्ति को अभिलेख में लेने, स्वतंत्र जांच पूरी होने तक रिकवरी एवं अन्य दंडात्मक कार्रवाई स्थगित रखने तथा उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देने की मांग की है।

नौनिहालों के उंजाले नाम पर अंधेरा, 6 आंगनबाड़ियों में लगें 12  ट्यूबलाइट, 6 पंखे, 6 बोर्ड, बिल में उड़ा दिए 81 हजार

जिम्मेदारों की आंख ने बंधी पट्टी, ग्रामीणों ने की जांच की मांग


उमरिया

सरकार कहती है - आंगनबाड़ी को सशक्त बनाओ, बच्चों को रोशनी दो, लेकिन पाली जनपद की घुनघुटी ग्राम पंचायत में इसी रोशनी को बेच दिया गया। कागजों पर ऐसा उजाला दिखाया कि पोर्टल चमक उठा, लेकिन धरातल पर 6 आंगनबाड़ी केंद्र आज भी टिमटिमाती ट्यूबलाइट और टेढ़े लटके पंखे की गवाही दे रहे हैं।

मामला  15 वां वित्त आयोग की अनटाइड राशि का है। 21 जनवरी 2026 को वाउचर नंबर  एक्स व्ही एफ सी /2025-26/पी/ 10 से रामकरण लोधी के खाते में 81 हजार रुपये बिजली फिटिंग कार्य के नाम पर डाले गए हैं जो कि वास्तविक बिल से ढाई गुना से भी ज्यादा का देयक लगा कर चूना लगाने की बात उजागर हुई है , भुगतान के मद पर लिखा है  की - 4801 कैपिटल आउटले ऑन रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन, एक्टिविटी कोड 127318791 इलेक्ट्रिक कनेक्शन। नाम इतना भारी-भरकम कि कोई आम ग्रामीण समझ ही न पाए और इसी समझ के अंधेरे का फायदा उठाकर पूरा खेल कर दिया गया।

हकीकत यह है कि प्रत्येक आंगनबाड़ी में सिर्फ 2 ट्यूबलाइट, 1 पंखा और 1 बोर्ड टांगा गया है। वही बाजारू, हल्की क्वालिटी वाला सामान। एक केंद्र में 3 हजार से ज्यादा का सामान नहीं उपयोग किया गया , इस तरह घुनघुटी की 6 आंगनबाड़ी  केंद्रों के मान से  हिसाब लगाया जाये  तो वास्तविक व्यय भी अधिकतम 18 हजार रुपये व्यय बताया जाता है इस पर भी अन्य व्यय का हिसाब भी जोड लिया जाये जैसे मिस्त्री-मजदूरी सहित 25-30 हजार रूपये से अधिक किसी भी कीमत व्यय नहीं हो सकती, फिर 81 हजार का आंकड़ा कहां से आया? इस मामले में जानकर सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले में  सीधा 50 हजार से ज्यादा की राशि कागजों में ही हजम कर ली गई।

यह विकास नहीं, बच्चों के भविष्य के साथ मजाक है। जिस आंगनबाड़ी में 3 से 6 साल के बच्चे पढ़ते हैं, जहां गर्भवती महिलाओं को पोषण मिलना है, वहां बिजली के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति। वाउचर में चस्पा की गई फोटो 176899281819∼81000 एच टी टी पी / 16 जे पी जी में भी वही एक-दो बोर्ड दिख रहे हैं, लेकिन पोर्टल पर अपलोड होते ही वह फोटो सरकारी ईमानदारी का प्रमाण बन गई।

सवाल सरपंच-सचिव से ही नहीं, उस पूरी निगरानी व्यवस्था से है जो ई-ग्राम स्वराज के नाम पर सिर्फ पीडीएफ अपलोड को ही विकास मान लेती है। बिना भौतिक सत्यापन के पैसा जारी कैसे हो गया? बिना बाजार दर मिलान के 81 हजार का भुगतान किसने पास किया? क्या जनपद और जिला पंचायत के तकनीकी अमले ने कभी घुनघुटी की आंगनबाड़ियों में जाकर स्विच ऑन करके देखा है?

यह घुनघुटी का अकेला किस्सा नहीं है, यह पूरे सिस्टम की सोच है - जहां आंगनबाड़ी की रोशनी से ज्यादा वाउचर की चमक जरूरी है। जहां ट्यूबलाइट की रोशनी नहीं, कमीशन की चकाचौंध देखी जाती है।

अब ग्रामीणों ने कलेक्टर उमरिया से सीधी मांग की है, की घुनघुटी ग्राम पंचायत में आयोजित होने वाली जन विश्वास कार्यक्रम में कम से कम इन आंगनवाड़ी केन्द्रो का एक बार अपने  सामने तकनीकी जांच  कराते हुए  81 हजार के वाउचर का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। ग्रामीण ने कलेक्टर उमरिया से मांग की है कि सभी  6 आंगनबाड़ियों में लगी सामग्री जब्त कर उनका बाजार मूल्यांकन से तुलनात्मक परीक्षण करते हुए अधिक भुगतान की राशि और वास्तविक बाजार मूल्य के अन्तर की राशि  वसूली के साथ एफआईआर दर्ज हो। वरना यही मान लिया जाएगा कि घुनघुटी में उजाला बांटने के नाम पर अंधेरा परोसा जा रहा है और अधिकारी उसी अंधेरे में आंख बंद किए बैठे हैं।

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