दबंग पब्लिक प्रवक्ता

नगर पालिका के प्रथम नागरिक की अनदेखी पर भड़का आक्रोश, प्रोटोकॉल उल्लंघन का गंभीर आरोप


अनूपपुर

कोतमा नगर पालिका क्षेत्र अंतर्गत आयोजित हो रहे भव्य मंत्री प्रीमियर लीग – टेनिस बॉल क्रिकेट टूर्नामेंट 2026 के आमंत्रण पत्र में नगर पालिका अध्यक्ष अजय सराफ का नाम न होने से नगर में तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों ने इसे नगर पालिका के प्रथम नागरिक का अपमान बताते हुए प्रशासनिक लापरवाही और मनमानी का प्रतीक करार दिया है।

आरोप है कि पूरा आयोजन कोतमा नगर पालिका क्षेत्र के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है, इसके बावजूद आमंत्रण पत्र में नगर पालिका अध्यक्ष का नाम न देना न केवल प्रोटोकॉल का उल्लंघन है, बल्कि यह पूरे नगर पालिका क्षेत्र के सम्मान को ठेस पहुंचाने जैसा है। नागरिकों का कहना है कि नगर के प्रथम नागरिक की उपेक्षा कर आयोजकों ने यह संदेश दिया है कि स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है।

स्थानीय नेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल एक नाम न जोड़ने का मामला नहीं, बल्कि नगर पालिका की गरिमा, लोकतांत्रिक मर्यादा और प्रशासनिक संतुलन से जुड़ा विषय है। उन्होंने मांग की है कि आयोजक एवं संबंधित विभाग इस त्रुटि पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण दें और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ठोस दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

जनमानस में यह भी चर्चा है कि यह कदम राजनीतिक द्वेष, प्रशासनिक तानाशाही या सोची-समझी अनदेखी का परिणाम हो सकता है। लोगों का कहना है कि यदि नगर के प्रथम नागरिक का सम्मान सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिकों की गरिमा की रक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।

नगरवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस विषय पर शीघ्र संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन, ज्ञापन और जनआक्रोश प्रदर्शन के लिए बाध्य होंगे। यह मामला अब केवल एक आमंत्रण पत्र की गलती नहीं रह गया है, बल्कि नगर की अस्मिता और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा सवाल बन चुका है।

प्रशासन का दबदबा खत्म, पुलिस का मिला संरक्षण, सरेआम चल रहा रेत माफियाओं का गुंडाराज 

*कार्यवाही नही हुई तो थाना व एसपी कार्यालय का करेंगे घेराव*


अनूपपुर

बीते कुछ दिन पहले 13 जनवरी को वन परिक्षेत्र बिजुरी के कर्मचारियों द्वारा अवैध रेत उत्खनन करने और परिवहन के दौरान दो ट्रैक्टर को पकड़ा, वन विभाग अमला बिजुरी ने बताया कि कार्यवाही करने के विरोध में रेत माफियाओं द्वारा वन परिक्षेत्र कार्यालय बिजुरी के सामने मुख्य गेट बंद कर जाम कर गेट पर ही धरना दिया जा रहा है, इन सब के बावजूद रेत माफियाओं द्वारा वन अमला बिजुरी के साथ उनके परिवार से भी अभद्रता किया गया। 

उक्त तथ्यों के संबंध में जब पुलिस प्रशासन को सूचित किया गया तो उनके द्वारा किसी तरह से कार्रवाई नहीं की गई, जिससे वन अमले को बहुत आहत हुई है।उक्त घटना घटित होने के बाद मध्य प्रदेश वन कर्मचारी संघ (शासन से मान्यता प्राप्त शाखा) जिला अनूपपुर के सदस्यों ने संघ के अध्यक्ष दादूराम कुशवाहा के मार्गदर्शन में वन मंडल अधिकारी अनूपपुर को ज्ञापन सौंपते हुए, उक्त घटना को संज्ञान में लाते हुए अपराधियों के विरुद्ध जल्दी ही कार्यवाही करने की मांग की है यदि उन पर कार्यवाही नहीं की जाती है तो वन कर्मचारी के हितों एवं सुरक्षा को ध्यान रखते हुए पहले वन मंडल एवं संभाग के समस्त वन कर्मचारी एवं अधिकारियों द्वारा साथ मिलकर थाना बिजुरी एवं पुलिस अधीक्षक कार्यालय अनूपपुर का घेराव कर कलम बंद विरोध प्रदर्शन किए जाने की बात कही है। इस पर डीएफओ अनूपपुर ने जल्द ही सम्बंधित विभाग के अधिकारियों और पुलिस विभाग के अधिकारियों से बात कर कार्यवाही की बात कही है।

*पुलिस विभाग पर खड़े हो रहे सवालिया निशान*

पुलिस विभाग द्वारा वन अमले के शिकायत करने के बावजूद कार्यवाही न करने पर बहुत से सवाल सामने खड़े नजर आ रहे हैं, इससे पहले भी बिजुरी के नागरिकों द्वारा पुलिस विभाग के कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े किया जा चुका है, और पुनः वह सवाल के कटघरे में फिर से खड़े हो चले हैं, जानकार बताते हैं कि पुलिस विभाग द्वारा ही रेत माफियाओं को सुरक्षा प्रदान किया जा रहा है, जिसका जीता जागता सबूत आज प्रशासनिक अमले पर ही ऐसी घटना घटित होते सामने नजर आ रहा है। वहीं दूसरी ओर वन विभाग के अमले को पुलिस प्रशासन का साथ न मिल पाने से पुलिस विभाग पर सवालिया निशान खड़े कर रहे हैं। 

*प्रशासन का दबदबा खत्म, मिला संरक्षण*

रेत माफियाओं द्वारा जिस तरह से घटना घटित की गई है, उससे यही सिद्ध होता है कि अब रेत माफिया का गुंडागर्दी राज अपने चरम पर है, और प्रशासन का कोई दबदबा नहीं रहा इसका जीता जागता सबूत बिजुरी में हुई घटना से आकलन लगाया जा सकता है। यदि इसे जल्द ही नहीं रोका गया तो शासन प्रशासन पर नागरिकों का भरोसा उठ जाएगा और इससे बड़ी दुर्घटना घटित हो सकती है या वास्तव में ही बड़ी अनहोनी होने की संभावना है। बिजुरी के इस घटना के बाद पुलिस विभाग के वन विभाग को साथ न मिलने से गलियारों में जोर से यह चर्चा चल रही है और लोगों का कहना है कि रेत माफियाओं को पुलिस ही अपने संरक्षण में कार्य कर रही है।

इनका कहना है।

मेरे साथ जो घटना घटित हुई है ऐसी घटना किसी के साथ ना हो पुलिस विभाग के साथ न देने से मैं बहुत आहत हूं और इस संबंध में वन विभाग के उच्च अधिकारियों से संगठन के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए के  कार्यवाही की मांग कर रहा हूं।

*सतीश कुमार बैगा, पीड़ित वन अमला बिजुरी*

बिजुरी में जो घटना घटित हुई है इसके संबंध में हमने वन मंडल अधिकारी को ज्ञापन के माध्यम से इस बात को संज्ञान में डालते हुए कार्यवाही की मांग की है, यदि कार्यवाही नहीं होती है तो हम भी आंदोलन के लिए बाधित होंगे।

*दादूराम कुशवाहा, अध्यक्ष, वन कर्मचारी संघ, अनूपपुर*

हमने जांच के लिए अधिकारियों से बात की है जांच में दोषी पाए जाने वाले आरोपियों पर उचित कार्यवाही होगी, इस संबंध में मैंने अधिकारियों से बात की है और पुलिस विभाग के अधिकारियों से भी बात की है जल्द ही उचित कार्यवाही की जाएगी।

*वेंकटराव चनाप, वन मंडल मंडलाधिकारी, वन मंडल, अनूपपुर*

रेत माफियाओं के कब्जे में अनूपपुर की नदियाँ, नदियों का सीना छलनी करके करते हैं रात भर 'खनिज डकैती


अनूपपुर

जिले में खनिज संपदा की लूट का खुला खेल जारी है। विशेष रूप से बिजुरी, कोतमा और रामनगर थाना क्षेत्रों में कानून का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है। यहाँ की नदियों और नालों का सीना छलनी कर माफिया रात के अंधेरे में 'लाल सोना' बटोर रहे हैं, और प्रशासन कार्रवाई के बजाय चुप्पी साधे बैठा है।

*​बिजुरी और आसपास के इलाकों में मचा हड़कंप*

बिजुरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों में रेत का अवैध उत्खनन चरम पर है। सूत्रों की मानें तो बिजुरी के छाती, उमर्दा और मंटोलिया जैसे क्षेत्रों में माफियाओं ने अपने गुप्त रास्ते बना लिए हैं। यहाँ से न केवल नदियों बल्कि फॉरेस्ट की जमीनों से भी धड़ल्ले से रेत निकाली जा रही है। बिजुरी क्षेत्र में सक्रिय यह सिंडिकेट इतना मजबूत है कि रात होते ही यहाँ ट्रैक्टरों की 'रेसिंग' शुरू हो जाती है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भी दहशत का माहौल है।

*​कोतमा और रामनगर में बेखौफ परिवहन*

कोतमा थाना क्षेत्र के इमली घाट, पहलचूहा और पठारवादी में माफिया ने जलस्तर को नुकसान पहुँचाते हुए गहरी खुदाई शुरू कर दी है। वहीं रामनगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले फॉरेस्ट एरिया में भी माफिया की नजरें गड़ी हुई हैं। वेंकट नगर के इलाकों में अंधेरे का फायदा उठाकर ट्रैक्टरों के जरिए रेत की तस्करी की जा रही है, जिससे शासन को हर दिन लाखों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है।

*​क्या पुलिस और खनिज विभाग सो रहा है?*

आम जनता के बीच यह चर्चा आम है कि बिजुरी, कोतमा और रामनगर पुलिस की नाक के नीचे से रात भर रेत से लदे ट्रैक्टर गुजरते हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि क्या इन थानों की पुलिस को इसकी भनक नहीं है? या फिर 'महीने' के चक्कर में माफियाओं को खुली छूट दे दी गई है? वन विभाग (फॉरेस्ट) की चुप्पी भी इस पूरे अवैध कारोबार में उनकी संलिप्तता की ओर इशारा कर रही है।

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