माँ बीरासिनी देवी मंदिर के आय व्यय में पारदर्शिता क्यों नहीं?आस्था के केंद्र में पारदर्शिता भी उतनी ही जरूरी जितनी श्रद्धा
*13 वर्षों के लेखा-जोखा को हो सार्वजनिक, जनहित की मांगें लागू हो*
(आलेख -संतोष कुमार द्विवेदी)
समाज सेवी, कवि कलमकार पत्रकार उमरिया म. प्र )
उमरिया
माँ बीरासिनी देवी मंदिर बीरसिंहपुर पाली जिला उमरिया में लाखों श्रद्धालु अपनी आस्था से दान अर्पित करते हैं, यह दान किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं बल्कि भक्तों की श्रद्धा और जन विश्वास से जुडी सार्वजनिक सम्पदा है।
देश के बड़े और प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों से जुड़े दान, संपत्ति, आभूषणों तथा वित्तीय प्रबंधन में कथित अनियमितताओं और हेराफेरी के मामले समय-समय पर सार्वजनिक चर्चा का विषय बनते रहे हैं। अयोध्या के राम मंदिर सहित विभिन्न बड़े आस्था केंद्रों से जुड़े विवादों ने यह महत्वपूर्ण प्रश्न सामने रखा है कि, जहाँ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और बड़ी मात्रा में जनसहयोग एवं दान जुड़ा हो, वहाँ पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक लेखा-जोखा सर्वोच्च प्राथमिकता क्यों न हो।
इसी व्यापक जनहित और श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए माँ बीरासिनी देवी मंदिर, बिरसिंहपुर पाली, जिला उमरिया की व्यवस्था में भी पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित किया जाना समय की आवश्यकता है।
*13 वर्षों के लेखा-जोखा को हो सार्वजनिक*
मई 2013 से वर्तमान समय तक मंदिर की आय, व्यय, दान, बैंक जमा, FDR, सोने-चाँदी के आभूषणों तथा अन्य चल-अचल संपत्तियों से संबंधित जानकारी नियमित रूप से सार्वजनिक किए जाने की आवश्यकता है।
यदि यह जानकारी अब तक मंदिर के सूचना-पटल, अधिकृत माध्यमों, समाचार पत्रों, समाचार चैनलों अथवा अन्य सार्वजनिक माध्यमों से श्रद्धालुओं और आम नागरिकों के सामने नियमित रूप से उपलब्ध नहीं कराई गई है, तो यह स्वाभाविक जनहित का प्रश्न है कि ऐसा क्यों है और वर्तमान व्यवस्था किस नियम, आदेश अथवा प्राधिकृत अनुमति के आधार पर संचालित हो रही है?
यह सवाल किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाने के उद्देश्य से नहीं, बल्कि मंदिर की व्यवस्था के प्रति जनविश्वास को और मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
*जनहित मे प्रमुख माँगें*
माँ बीरासिनी देवी मंदिर के श्रद्धालुओं और आम नागरिकों के हित में मई 2013 से वर्तमान समय तक की निम्न जानकारी वर्षवार, प्रमाणित एवं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाए।
1. आय एवं दान: प्रत्येक वित्तीय वर्ष में प्राप्त कुल दान एवं अन्य आय का पूरा विवरण।
2. व्यय: प्रत्येक वर्ष किए गए व्यय का मदवार एवं प्रमाणित विवरण।
3. दान पेटियाँ: दान पेटियाँ किन-किन तारीखों को खोली गईं, प्रत्येक अवसर पर कितनी नकद राशि तथा सोना, चाँदी अथवा अन्य मूल्यवान सामग्री प्राप्त हुई, इसकी दिनांकवार जानकारी।
4. बैंक में जमा राशि: दान पेटियों एवं अन्य स्रोतों से प्राप्त राशि में से कितनी राशि किस बैंक खाते में, किस तारीख को जमा की गई—इसका विवरण।
5. FDR एवं ब्याज: मंदिर की FDR/सावधि जमा का वर्षवार विवरण तथा उनसे प्राप्त वार्षिक ब्याज की जानकारी।
6. सोना-चाँदी एवं आभूषण: मंदिर में उपलब्ध सोने-चाँदी के आभूषणों एवं अन्य मूल्यवान वस्तुओं की वर्षवार सूची, उनका वजन/मात्रा, उपलब्धता तथा रख-रखाव का अधिकृत अभिलेख।
7. बैंक लॉकर/सुरक्षित भंडारण: यदि सोने-चाँदी अथवा अन्य मूल्यवान वस्तुएँ बैंक लॉकर या किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर रखी गई हैं, तो उनके संबंध में उपलब्ध अधिकृत रिकॉर्ड, जमा/निकासी की दिनांक तथा वर्तमान स्थिति की जानकारी।
8. चल-अचल संपत्ति: मंदिर की समस्त चल-अचल संपत्तियों का विवरण, उनके अभिलेख तथा वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए।
9. ऑडिट: प्रत्येक वर्ष की आय-व्यय एवं संपत्ति का विधिवत ऑडिट कराया जाए तथा ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
10. वेबसाइट एवं डिजिटल पारदर्शिता: मंदिर की अधिकृत वेबसाइट बनाई जाए और उस पर वर्षवार आय-व्यय, ऑडिट रिपोर्ट, दान, FDR, संपत्ति एवं अन्य महत्वपूर्ण वित्तीय जानकारी नियमित रूप से अपडेट की जाए।
11. वैधानिक एवं जवाबदेह प्रबंधन: मंदिर की व्यवस्था को स्पष्ट वैधानिक ढाँचे में संचालित करने के लिए पंजीकृत ट्रस्ट अथवा उपयुक्त वैधानिक संस्था के गठन पर गंभीरता से विचार किया जाए।
12. जनसहभागिता: मंदिर की व्यवस्था में नियमसम्मत तरीके से आम नागरिकों, माताओं-बहनों, युवाओं और श्रद्धालुओं की सहभागिता सुनिश्चित की जाए, ताकि मंदिर का संचालन व्यापक जनविश्वास और जवाबदेही के साथ हो।
*पारदर्शिता से आस्था व विश्वास होगा मजबूत*
माँ बीरासिनी देवी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि लाखों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र है। इसलिए मंदिर की आय, संपत्ति और प्रशासनिक व्यवस्था से संबंधित जानकारी को सार्वजनिक करना किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध कार्रवाई नहीं, बल्कि जनविश्वास की रक्षा का माध्यम माना जाना चाहिए।
देश के विभिन्न बड़े मंदिरों में वित्तीय एवं प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर सामने आने वाली चर्चाएँ यह संकेत देती हैं कि किसी भी बड़े आस्था स्थल पर ऐसी व्यवस्था पहले से स्थापित होनी चाहिए, जिसमें न तो संदेह की गुंजाइश रहे और न ही भविष्य में किसी प्रकार की हेराफेरी की संभावना।
अतः माँ बीरासिनी देवी मंदिर की व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता, नियमित ऑडिट, सार्वजनिक लेखा-जोखा, डिजिटल सूचना प्रणाली और जनसहभागिता सुनिश्चित की जाए।
यह पहल किसी व्यक्ति, अधिकारी अथवा संस्था को कटघरे में खड़ा करने के लिए नहीं, बल्कि माँ बीरासिनी देवी मंदिर की गरिमा, श्रद्धालुओं की आस्था और जनविश्वास को और अधिक मजबूत करने के लिए है। जनहित में स्पष्ट, नियमित और सार्वजनिक लेखा-जोखा—यही पारदर्शिता है और यही मजबूत जनविश्वास का आधार है।