प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में मरम्मत के नाम पर भारी गड़बड़ी, पांच साल की गारंटी कागजों में कैद
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में मरम्मत के नाम पर भारी गड़बड़ी, पांच साल की गारंटी कागजों में कैद
*3.30 किलोमीटर की सड़क में सिर्फ 900 मीटर में ही बीटी रिन्यूअल*
उमरिया
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में उमरिया जिले के निपनिया की 3.30 किलोमीटर सड़क मरम्मत के नाम पर घोटाले की मिसाल बन गई है। पैकेज क्रमांक एम पी 44 पी टी एन 26 / एम पी 44 एम टी एन -027, एन एच -78 से निपनिया मार्ग का निर्माण जनवरी 2023 में मे. देव कंस्ट्रक्शन कंपनी सतना ने किया था। कागजों पर इसकी पांच वर्षीय संधारण गारंटी 2028 तक है और रखरखाव के लिए 38.43 लाख रुपये का भारी-भरकम बजट स्वीकृत है, पर जमीन पर इस बजट का एक अंश भी ईमानदारी से नहीं उतरा।
इस खेल का पहला पर्दा सूचना बोर्ड से ही उठता है। एक ही सड़क पर दो बोर्ड लगे हैं और दोनों में संधारण की शुरुआत की तारीख अलग-अलग है, एक पर 22.01.2023 तो दूसरे पर 22.09.2023। जब विभाग को ही नहीं पता कि संधारण कब से शुरू हुआ तो उसकी निगरानी क्या होगी। बोर्ड पर वित्तीय प्रावधान और व्यय का पूरा टेबल तो बना है, पर प्रथम वर्ष से पंचम वर्ष तक सारे खाने खाली हैं। मूल निर्माण लागत का कॉलम भी कोरा है। यानी 38.43 लाख रुपये का आंकड़ा तो दिखा दिया, पर वह किस साल कितना निकलेगा और कहां लगेगा, इसका कोई हिसाब जनता के सामने नहीं।
अब इस बजट के खर्च की जमीनी हकीकत देखिए। बोर्ड पर आठ कामों की गारंटी लिखी है, घास-झाड़ियों की कटाई, रेनकट्स की भराई, शोल्डर, पुल-पुलिया, नाली-स्क्रीन की सफाई, रोड फर्नीचर और बी टी रिन्यूअल। पर मौके पर इनमें से एक भी काम पूरा नहीं। बोर्ड के नीचे ही घुटने भर झाड़ियां उगी हैं, शोल्डर मिट्टी से अटे हैं, रेनकट जस के तस खुले हैं। और तो और इस पूरी 3.30 किलोमीटर सड़क पर कहीं भी नाली का प्रावधान ही नहीं रखा गया। पीएमजीएसवाई की गाइडलाइन कहती है कि पानी निकासी के लिए दोनों तरफ नाली अनिवार्य है, पर निपनिया मार्ग में न तो कच्ची नाली है न पक्की। नतीजा यह है कि बरसात का पानी सड़क पर ही बहता है, शोल्डर कटते हैं, गिट्टी उखड़ती है और सड़क महीनों में ही गड्ढों में तब्दील हो जाती है। जिस सड़क में नाली ही नहीं, वहां नाली सफाई का पैसा किस मद में निकलेगा, यह सबसे बड़ा सवाल है।
और सबसे बड़ा झोल तो बी टी रिन्यूअल के नाम पर है। विभाग खुद स्वीकार कर रहा है कि 3.30 किलोमीटर की पूरी सड़क में सिर्फ 900 मीटर में ही बी टी रिन्यूअल कराया गया है। बाकी 2.40 किलोमीटर सड़क को उसी हालत में छोड़ दिया गया, जबकि जानकारों का कहना है कि जितनी लंबाई में बी टी कार्य विभाग बता रहा है उससे भी कम में काम कराया गया है। 3.30 किलोमीटर के लिए 38.43 लाख यानी प्रति किलोमीटर ग्यारह लाख से ज्यादा, पर काम सिर्फ 700 मीटर में करके 900 मीटर बताया जा रहा है। शेष सड़क की मरम्मत राशि का क्या होगा वह समझ से परे है। कतिपय सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि बीटी निर्माण कागजों में दर्शा कर कहीं पूरी राशि की ही इतिश्री न कर ली गई हो।
गांव वालों का कहना है कि सड़क बनने के कुछ महीनों बाद ही गिट्टी उखड़ने लगी और आवागमन दूभर हो गया। नाली नहीं होने से घरों का पानी भी सड़क पर आता है और कीचड़ जमा हो जाता है। पर कागजों में हर साल संधारण का पैसा निकल रहा है। बिना घास काटे, बिना शोल्डर भरे, बिना नाली बनाए और बिना पूरी सड़क पर BT किए ही 38 लाख का बजट कैसे खप रहा है, यह जांच का विषय है।
निपनिया की यह सड़क बता रही है कि उमरिया में पीएमजीएसवाई में अब सड़क नहीं, फाइलों की मरम्मत होती है। बोर्ड पर आंकड़ा छुपा दो, नाली का प्रावधान ही गायब कर दो, जमीन पर 900 मीटर का पैच लगा दो और पांच साल की गारंटी को कागजों में कैद कर दो, यही नया फॉर्मूला बन गया है। यह सड़क उमरिया जिले के प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कामों की हकीकत की असली तस्वीर है, जिससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि हांडी के दो दाने ही पूरे विभाग की पोल खोल रहे हैं।