दबंग पब्लिक प्रवक्ता

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 461.73 करोड़ रुपये के 134 विकास कार्यों का किया लोकार्पण एवं भूमिपूजन

*जनप्रतिनिधियों व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा किया गया आत्मीय स्वागत*

शहडोल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शहडोल आगमन पर जमुई हेलीपैड में जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा आत्मीय स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शहडोल में आयोजित तेंदूपत्ता संग्राहकों को बोनस वितरण एवं प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम में शामिल हुए। तेंदूपत्ता संग्राहकों के बोनस वितरण कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई छायाचित्र प्रदर्शनी का अवलोकन किया। 

मुख्यमंत्री ने जिले में आयोजित तेंदूपत्ता संग्राहकों के बोनस वितरण कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अंतर्गत 461 करोड़ 73 लाख रुपये की लागत के 134 निर्माण एवं विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इनमें 82 करोड़ 28 लाख रुपये की लागत के 45 विकास कार्यों का लोकार्पण तथा 379 करोड़ 45 लाख रुपये की लागत के 89 निर्माण कार्यों का भूमिपूजन शामिल है।

इन विकास कार्यों में सड़क एवं पुल निर्माण, शासकीय विद्यालयों के भवन, छात्रावास, महाविद्यालयीन भवन, पुलिस कार्यालय एवं आवास, विद्युत उपकेंद्र, खेल सुविधाएं, पेयजल व्यवस्था तथा ग्रामीण अधोसंरचना से संबंधित कार्य शामिल हैं। इन कार्यों के पूर्ण होने से जिले में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार होगा तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, आवागमन, पेयजल और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सुविधाएं मजबूत होंगी। मुख्यमंत्री ने आठ विभागों के अंतर्गत 82 करोड़ 28 लाख रुपये की स्वीकृत राशि के 45 विकास कार्यों का लोकार्पण किया। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शहडोल में आयोजित तेंदूपत्ता संग्राहकों के बोनस वितरण कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किए। कार्यक्रम में शिक्षा, वन, ग्रामीण आजीविका मिशन, महिला एवं बाल विकास तथा राजस्व विभाग की हितग्राहीमूलक योजनाओं के अंतर्गत हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया।

मुख्यमंत्री ने बाणगंगा मैदान शहडोल आयोजित कार्यक्रम में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और गीता भवन की स्थापना सहित क्षेत्र के विकास के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। हस्तशिल्प केंद्र छतवई की काष्ठ कलाकार दुर्गा सिंह ने मुख्यमंत्री को भगवान गणेश की काष्ठ प्रतिमा भेंट की। 

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पासपोर्ट कार्यालय ने माता पिता का नाम गलत दर्ज किया, नही हो रहा नवीनीकरण, युवक परेशान

अनूपपुर

जिले के लहरपुर गांव के वार्ड नं. 11, क्योटार नया टोला, तहसील जैतहरी निवासी मूलचन्द राठौर पिता नत्थूलाल राठौर पासपोर्ट में नाम की त्रुटि के कारण पिछले कई महीनों से परेशान हैं।

मूलचन्द ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2016 में पासपोर्ट कार्यालय भोपाल से अपना पासपोर्ट बनवाया था। उस समय उन्होंने आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर कार्ड और 10वीं की अंकसूची सहित सभी प्रमाणित दस्तावेज जमा किए थे। उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उनका पासपोर्ट जारी किया गया था। आरोप है कि पासपोर्ट बनाते समय विभाग की लापरवाही से उनके माता-पिता के नाम गलत दर्ज कर दिए गए।

अब वर्ष 2026 में जब वे अपने 2016 के पासपोर्ट का नवीनीकरण कराने पासपोर्ट ऑफिस शहडोल पहुंचे, तो वहीं पुराने सही दस्तावेज पेश करने पर भी उन्हें त्रुटि सुधार के नाम पर रोका जा रहा है। मूलचन्द का कहना है कि दस्तावेज आज भी वही हैं जो 2016 में लगाए थे, लेकिन विभाग की पुरानी गलती का खमियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है।

पीड़ित ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने सीएम हेल्पलाइन 181 पर कई बार शिकायत दर्ज कराई, लेकिन हर बार यह कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है कि "यह विभाग हमारे दायरे में नहीं आता।"

इस त्रुटि के कारण उनके सभी कामों में बाधा उत्पन्न हो रही है। पीड़ित ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि दस्तावेजों के आधार पर उनके पासपोर्ट में पिता का नाम में सुधार कर जल्द नवीनीकरण किया जाए।

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अमरकंटक से गौरेला-पेंड्रा जाने वाले चारों मार्ग बदहाल, पर्यटक व्यापारी हो रहे हैं परेशान, सुधार की मांग

अनूपपुर

प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थ स्थल तथा पर्यटन केंद्र पवित्र नगरी अमरकंटक से छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले को जोड़ने वाले चारों प्रमुख मार्गों की स्थिति अत्यंत दयनीय बनी हुई है। जर्जर और गड्ढों से भरी सड़कों के कारण पर्यटकों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों, विद्यार्थियों तथा स्थानीय नागरिकों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कहीं सड़क पर गड्ढे ही गड्ढे हैं, तो कहीं पहाड़ियों का मलबा और टूटी पुलिया दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ा रही हैं।

वर्षाकाल के दौरान इन मार्गों की स्थिति और अधिक खराब हो गई थी। बारिश का दौर समाप्त होने के बाद भी क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत नहीं होने से लोगों की परेशानी बनी हुई है। इन मार्गों से प्रतिदिन आवागमन करने वाले लोगों का कहना है कि सड़क की बदहाली के कारण कम दूरी तय करने में भी काफी समय लग रहा है।

अमरकंटक से धर्मपानी, दुर्गाधारा, पकरिया और देवर गांव होते हुए गौरेला-पेंड्रा जाने वाला लगभग 25 किलोमीटर का मार्ग बेहद खराब स्थिति में है। सड़क पर गड्ढों की भरमार होने से दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया वाहनों को निकालना मुश्किल हो गया है। वाहन चालकों को समझ नहीं आता कि सड़क के किस हिस्से से वाहन सुरक्षित निकाला जाए।

इस मार्ग से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी तय करने में डेढ़ घंटे तक का समय लग रहा है। अमरकंटक से जालेश्वर, डोकरगढ़ी और मदरवानी होते हुए जाने वाला लगभग 35 किलोमीटर लंबा मार्ग भी बदहाली का शिकार है। सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं। 

पवित्र नगरी अमरकंटक में मां नर्मदा के उद्गम स्थल के दर्शन-पूजन और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों का भ्रमण करने के लिए पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों से पर्यटक एवं तीर्थयात्री पहुंचते हैं। इनमें अनेक श्रद्धालु गौरेला-पेंड्रा क्षेत्र के पेंड्रा रोड रेलवे स्टेशन के माध्यम से अमरकंटक आते-जाते हैं।

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खुलेआम रेत के अवैध कारोबार, कचरा घाट से बरघाट तक उठे सवाल, आखिर खनिज विभाग की कार्रवाई कहां

अनूपपुर

जिले में रेत के अवैध उत्खनन और परिवहन को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। जिले के कचरा घाट, हर्री, बहेराबांध, सेंदुरी, भगत बांध, निगवानी के पचखुरा, बसखला, बर्री और जैतहरी क्षेत्र के बरघाट सहित विभिन्न स्थानों से रेत के अवैध कारोबार की शिकायतें सामने आने के आरोप हैं। स्थानीय स्तर पर उठ रहे इन सवालों ने खनिज विभाग और पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

तस्वीरें इस बात की गवाही दे रही है कि  रात होते ही रेत के अवैध कारोबार में लगे लोग सक्रिय हो जाते हैं और अंधेरे का फायदा उठाकर नदियों से रेत निकालने तथा उसका परिवहन करने का सिलसिला सुबह तक चलता रहता है। यदि इन शिकायतों में सच्चाई है, तो यह केवल प्राकृतिक संसाधनों की लूट का मामला नहीं, बल्कि संबंधित विभागों की निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता की भी परीक्षा है।

जिले की नदियां क्षेत्र की प्राकृतिक संपदा हैं। इनके जलप्रवाह और नदी तल से छेड़छाड़ का असर पर्यावरण, नदी के पारिस्थितिकी तंत्र और आसपास के क्षेत्रों पर पड़ सकता है। ऐसे में यदि निर्धारित नियमों के विरुद्ध रेत का उत्खनन हो रहा है, तो उसे रोकना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

खनिज विभाग तथा कानून-व्यवस्था के लिए पुलिस मौजूद है, तो फिर अवैध कारोबार पर लगाम नही लग रही है। रात के समय संवेदनशील घाटों पर गश्त और जांच की जा रही है तो कार्रवाई क्यों नही हों रही है।

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मुक्तिधाम में चल रहा है जुआं, पुलिस पर कार्यवाही को लेकर उठ रहे हैं सवाल, वीडियो हो रहा है वायरल

अनूपपुर 

जिले में कानून व्यवस्था और कथित अवैध गतिविधियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। जुआ फड़ों और कबाड़ कारोबार से जुड़ी शिकायतों के बीच पुलिस की निगरानी व्यवस्था, सूचना तंत्र तथा प्रभावी कार्रवाई को लेकर आमजन में असंतोष की बातें सामने आ रही हैं।

केंवई नदी के समीप नर्सरी के पीछे स्थित मुक्तिधाम एवं आस-पास में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर जुआ खेले जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां लाखों रुपये के दांव लगाए जा रहे हैं। संबंधित गतिविधियों का वीडियो सोशल मीडिया जारी होने के पश्चात, जुआ फड़ के संचालन, रकम के लेन-देन और गतिविधियों में शामिल लोगों के संबंध में आधिकारिक पुष्टि तथा स्वतंत्र जांच आवश्यक है। यदि आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला केवल अवैध जुआ गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि संबंधित क्षेत्र में पुलिस की निगरानी और सूचना तंत्र की प्रभावशीलता की समीक्षा की जरूरत भी सामने आएगी।

मुक्तिधाम जैसे संवेदनशील स्थान के समीप इस तरह की गतिविधियां संचालित होने के आरोप भी चिंता का विषय हैं। पुलिस प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मामले में संज्ञान लेकर क्या कार्यवाही की गई।

इस मामले में पुलिस अधीक्षक अनूपपुर से लगातार संपर्क करने का प्रयास किया गया। लेकिन संपर्क नहीं हो सका। कोतमा एसडीओपी को व्यक्तिगत तौर पर उन्हे वीडियो उपलब्ध कराने के बाद जाँच हुई कार्रवाई हुई स्पष्ट कोई जानकारी प्राप्त नही हुई है।

बिजुरी थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली और शिकायतों पर संवाद को लेकर भी कुछ लोगों द्वारा असंतोष व्यक्त किए जाने की बात सामने आ रही है। आरोप है कि कुछ मामलों में सूचनाएं साझा करने पर अपेक्षित गंभीरता से संवाद नहीं किया जाता। 

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जंगल से भटककर खेत मे पहुँचा चीतल करंट से हुई मौत

उमरिया

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से जुड़े धमोखर परिक्षेत्र के महामन गांव में रविवार को करंट लगने से करीब 2 साल के चीतल की मौत हो गई। खेत की सुरक्षा के लिए लगाए गए जीआई तार में करंट दौड़ाया गया था। जंगल से भटककर खेत में पहुंचा चीतल इसी तार की चपेट में आ गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। पशु चिकित्सकों की टीम ने मृत चीतल का पोस्टमार्टम किया। इसके बाद नियमानुसार उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। धमोखर परिक्षेत्र अधिकारी सचिन सिंह ने बताया कि खेत मालिक की पहचान की जा रही है। मामले की जांच जारी है।

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दिव्यांग आदिवासी छात्र आधार बन्द होने से नही मिला छात्रवृत्ति व लैपटॉप का पैसा

उमरिया 

जिले के दिव्यांग आदिवासी छात्र अमित सिंह गोंड़ की पढ़ाई आधार कार्ड से जुड़ी समस्या के कारण रुक गई है। आधार सस्पेंड होने से उसे पिछले 4-5 साल से छात्रवृत्ति और लैपटॉप योजना का पैसा नहीं मिल पाया है।

आर्थिक तंगी के चलते अमित को किताबें खरीदने, कॉलेज आने-जाने और हॉस्टल की सुविधा पाने में दिक्कत हो रही है। वह 12वीं पास कर चुका है, लेकिन आधार अपडेट न होने से योजनाओं का लाभ नहीं मिला।

छात्र का कहना है कि वह इस समस्या को लेकर कलेक्टर से भी शिकायत कर चुका है, लेकिन करीब तीन साल से इसका हल नहीं निकला।

आधार अपडेशन के अधिकारी विपिन पांडेय ने बताया कि अमित को कई बार बुलाया गया था। पांडेय ने कहा कि मंगलवार को अमित का आधार अपडेट करा दिया जाएगा। अब छात्र को उम्मीद है कि समस्या दूर होने के बाद उसे पात्रता के हिसाब से योजनाओं का लाभ मिलेगा और उसकी आगे की पढ़ाई आसान होगी।

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खेत मे अजगर ने किया अजगर का शिकार

अनूपपुर

जिला मुख्यालय अनूपपुर से 10 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत जमुडी के पटपरहाटोला गांव निवासी प्रेम नारायण सिंह परिहार के घर के पीछे स्थित, धान के खेत में 10 फीट लंबे अजगर प्रजाति के सर्प ने 8 फीट लंबे अजगर प्रजाति के सर्प को ही मारकर निगल कर धान के खेत के बीच बैठा रहा, जिसे धान काटने गए मजदूरों ने देखा जिस पर किसान प्रेम नारायण द्वारा जिला मुख्यालय अनूपपुर के सर्पप्रहरी शशिधर अग्रवाल को सूचित किए जाने पर वे अपने सहयोगी सर्पपहरी छोटेलाल यादव,मनोज यादव एवं पिंटू यादव के साथ स्थल पर पहुंचकर देखने दौरान विशालकाय 10 फिट लम्बा अजगर 8 फीट लंबे अजगर सर्प का शिकार कर आधे से अधिक हिस्से को उसे निगल कर बैठा हुआ था, जिसे सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर बोरी में रखा गया जबकि मृत 8 लंबे अजगर को पास के ही जंगल में दफनाया गया।

लोको पायलट की विधवा की संदेहात्मक मौत; करोड़ों की पैतृक संपत्ति, आभूषण व 81 लाख की पेंशन हड़पने का आरोप

*परिजनों ने सीएम, डीजीपी व आई जी से न्याय की मांग, प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उठाए गंभीर सवाल*


शहडोल

शहडोल के पुरानी बस्ती क्षेत्र में रेलवे के सेवानिवृत्त लोको पायलट स्वर्गीय देवी सिंह की 75 वर्षीय बेबस, अनपढ़ और निःसंतान विधवा श्रीमती शांति बाई की संदेहात्मक परिस्थितियों में हुई मृत्यु के मामले में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। मृतका के सगे परिजनों—उनकी सगी देवरानी सुशीला हरी सिंह और पुत्रवधू हरूना विक्रम सिंह द्वारा एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस आहूत की गई। इस दौरान परिजनों ने दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ जिला व पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए।

परिजनों ने स्पष्ट किया कि स्व. देवी सिंह और स्व. हरी सिंह सगे भाई थे। पुरानी बस्ती में एक ही परिसर में दोनों के घर थे, जिसमें एक तरफ हरी सिंह का घर मुख्य गेट से लगा हुआ है और दूसरी ओर पीछे की तरफ स्वर्गीय देवी सिंह का सर्वसुविधायुक्त पक्का मकान है। देवी सिंह की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी शांति बाई इस करोड़ों रुपए मूल्य की अचल संपत्ति की एकमात्र स्वामिनी बची थीं।

आभूषण गायब, खड़ी की चार पहिया गाड़ियों की फौज: परिजनों ने आरोप लगाया कि मृतका के सोने-चांदी के सभी आभूषण और घर-गृहस्थी का पूरा सामान नदारद है। आशंका है कि मृतका की इस गाढ़ी कमाई को ठिकाने लगाकर उससे अपनी बच्चियों की पढ़ाई, शादियां और चार पहिया वाहनों का काफिला खड़ा कर लिया गया। इस संपत्ति का उपभोग करने वाले सभी लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सालाना ₹5 लाख की पेंशन के बावजूद बदतर स्थिति में जीवन: स्वर्गीय देवी सिंह की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी शांति बाई को लगभग 30 से 40 हजार रुपए प्रति माह (सालाना करीब ₹5 लाख) पेंशन मिल रही थी। इसके बावजूद बुजुर्ग महिला को दो कमरों के घर में बेहद बदतर स्थिति में रखा गया। एक कमरे में जहां भगवान शंकर की पूजा होती थी, वहीं शांति बाई रहती थीं और उससे लगे दूसरे कमरे में शकीला और सबीर खान रहते थे। सेवा का ढोंग करते-करते कब हिंदू परिवार को ठग लिया गया, पता ही नहीं चला।

देखरेख के नाम पर ₹81 लाख की मोटी वसूली: सुशीला हरी सिंह ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने बुजुर्ग महिला के अकेलेपन का फायदा उठाकर उनकी देखरेख के ऐवज में लगभग ₹4,48,000 प्रतिवर्ष की मोटी रकम वसूली। यदि आरोपियों द्वारा पेश किए गए वर्ष 2009 के कथित वसीयतनामा को ही आधार मान लिया जाए, तो बीते 17 वर्षों में इन लोगों ने बुजुर्ग महिला से करीब 81 लाख रुपए वसूल कर लिए।

करोड़ों की संपत्ति हड़पने के लिए हत्या का ताना-बाना: परिजनों का सीधा आरोप है कि इसी मोटी पेंशन और करोड़ों की अचल संपत्ति को हड़पने की फिराक में बुजुर्ग महिला की हत्या का यह खौफनाक ताना-बाना बुना गया।

मौत सामान्य थी तो अंतिम संस्कार की जल्दबाजी क्यों?: परिजनों ने तीखा सवाल उठाया कि यदि कथित वसीयतनामा वैध था और मौत सामान्य थी, तो आरोपियों को बिना पोस्टमार्टम कराए, बिना परिजनों को बताए अत्यंत गोपनीय तरीके से अंतिम संस्कार करने की इतनी व्याकुलता क्यों थी? परिजनों द्वारा महाराष्ट्र से फोन पर मिन्नतें करने के बावजूद अंतिम दर्शन क्यों नहीं करने दिए गए।

11 अक्टूबर को ही एसपी-सीएसपी को दी गई थी सूचना: इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी 11 अक्टूबर 2026 को ही स्थानीय समाजसेवियों और पत्रकारों द्वारा फोन पर एसपी व सीएसपी शहडोल को दे दी गई थी। चूंकि महाराष्ट्र से शहडोल के लिए कोई सीधी ट्रेन सुविधा नहीं है, इसलिए परिजनों को वाया कटनी होकर पहुँचने में 2 से 3 दिन का समय लग गया, जिसका फायदा उठाकर आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने का पूरा खेल रच दिया।

कोतवाली पुलिस द्वारा मात्र एनसीआर काटना न्याय का गला घोंटना: परिजनों ने भारी आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि हत्या की आशंका और साक्ष्य छुपाने के स्पष्ट प्रयासों के बावजूद थाना कोतवाली पुलिस ने गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने के बजाय महज एक मामूली एनसीआर काटकर आरोपियों को खुला छोड़ दिया है।

धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ और सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने का प्रयास: परिजनों ने आरोप लगाया कि मुस्लिम परिवार होते हुए भी आरोपियों ने अति उत्साह और लोभ-लालच में जानबूझकर मृतका का अंतिम संस्कार कर अक्षम्य अपराध कारित किया है, जिससे दो समुदायों के बीच अविश्वास पैदा कर सामाजिक सौहार्द्र बिगाड़ने की कोशिश की गई। शकीला व सबीर खान का परिवार जिले की शांति व्यवस्था के लिए खतरा है, जिस पर जिला प्रशासन को चिंतन करना चाहिए।

सुशीला हरी सिंह और हरूना विक्रम सिंह ने मुख्यमंत्री, डीजीपी व आईजी शहडोल से मांग की है कि मामले को तत्काल संज्ञान में लेते हुए कोतवाली पुलिस द्वारा काटी गई एनसीआर को हत्या, फर्जी दस्तावेज तैयार करने (कूटरचना) और साक्ष्य विलोपन की संगीन धाराओं के तहत एफआईआर में बदला जाए तथा शकीला, सबीर खान और अंतिम संस्कार की जल्दबाजी में शामिल सभी संदिग्धों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाए।

दो बाइक आमने सामने टकराई दो घायल, पीकप की टक्कर से सुअर की हुई मौत, वाहन पलटा


उमरिया

जिले के इंदवार थाना क्षेत्र के चिल्हारी गांव में दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर हो गई। यह हादसा हायर सेकंडरी स्कूल के पास हुआ। इसमें दो लोग घायल हो गए।

बाइक क्रमांक एमपी 18 जेडए 4739 और यूपी 85 एएस 3913 के बीच भिड़ंत हुई। हादसे में मानपुर निवासी रामकमल गुप्ता घायल हो गए, जिन्हें बरही अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज चल रहा है। दूसरा घायल एंबुलेंस से अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उतरकर भाग गया। उसने अपना इलाज नहीं कराया।

घटना की खबर मिलने पर 108 एंबुलेंस और डायल 112 की टीम मौके पर पहुंची। डायल 112 में मौजूद आरक्षक शैलेन्द्र गुर्जर ने घायलों को बरही अस्पताल पहुंचाने में मदद की।


उमरिया जिले से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-43 पर वन्यजीवों की सुरक्षा और सड़क हादसों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। पाली के पास रात एक तेज रफ्तार पिकअप की टक्कर से जंगली सूअर की मौत हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि हादसे के बाद पिकअप भी अनियंत्रित होकर पलट गई। लेकिन शनिवार सुबह जब वन विभाग की टीम घटनास्थल पर पहुंची, तो वहां न दुर्घटनाग्रस्त पिकअप का कोई पता था और न ही जंगली सूअर का शव मिला। मौके पर केवल खून के निशान ही दिखाई दिए।

पाली के नजदीक पिकअप क्रमांक MP 54 GA 0823 ने सड़क पार कर रहे या सड़क पर मौजूद जंगली सूअर को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि वन्यजीव की मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के दौरान पिकअप के पलटने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि, घटना के बाद वाहन और मृत वन्यजीव का शव घटनास्थल से हटाए जाने के कारणों का अभी खुलासा नहीं हो पाया है।

मामले को लेकर सहायक परिक्षेत्र अधिकारी रोहिणी सिंह ने बताया कि वन विभाग को दुर्घटनाग्रस्त पिकअप का पंजीयन नंबर मिल गया है। वाहन क्रमांक MP 54 GA 0823 के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। इसके साथ ही चंदिया वन परिक्षेत्र को भी घटना की सूचना दे दी गई है। संबंधित वाहन के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी और पिकअप को जब्त किया जाएगा। 

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