दबंग पब्लिक प्रवक्ता

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कोतवाली पुलिस ने पीकप से खाद की 20 बोरियां की जब्त, खाद की  कालाबाजारी की आशंका

अनूपपुर

जिले में खाद की खरीद-बिक्री और वितरण व्यवस्था को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। अनूपपुर कोतवाली पुलिस ने कुसमहाई रोड पर कार्रवाई करते हुए एक पिकअप वाहन के साथ खाद की 20 बोरियां जब्त की हैं। इस कार्रवाई के बाद खाद के परिवहन और बिक्री से जुड़े तथ्यों की जांच को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, जब्त खाद का संबंध दुर्गा पटेल से जोड़ा जा रहा है। उनके संबंध में खाद की कालाबाजारी की शिकायतें सामने आने की बात भी कही जा रही है। हालांकि, इन शिकायतों की वास्तविकता और जब्त खाद के मामले में उनकी भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

पुलिस की इस कार्रवाई के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल खाद के स्रोत और उसके परिवहन को लेकर है। जब्त की गई बोरियां कहां से लाई गई थीं, उन्हें किस स्थान पर पहुंचाया जाना था और उनकी बिक्री किन शर्तों पर की जानी थी, इन बिंदुओं की जांच से मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल, खाद की जब्ती की जानकारी सामने आई है, लेकिन इसे कालाबाजारी से जोड़ने वाले तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में जांच के निष्कर्ष सामने आने तक किसी व्यक्ति की संलिप्तता को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

खेती के मौसम में खाद की उपलब्धता किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि खाद के अवैध भंडारण, परिवहन या निर्धारित व्यवस्था से बाहर बिक्री की पुष्टि होती है, तो इसका असर किसानों की जरूरतों और बाजार व्यवस्था पर पड़ सकता है। इसलिए मामले की जांच केवल जब्त खाद तक सीमित न रहकर उसके वितरण और बिक्री से जुड़े पहलुओं तक पहुंचना जरूरी है।

कोतवाली पुलिस की कार्रवाई के बाद अब खाद के स्रोत, परिवहन और संभावित बिक्री से जुड़े तथ्यों की पड़ताल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संबंधित कृषि विभाग की भूमिका और मामले में लागू होने वाले कानूनी प्रावधानों को लेकर भी आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

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ट्रैक्टर व मोटरसाइकिल की टक्कर, युवक की उपचार के दौरान अस्पताल में हुई मौत

अनूपपुर

जिले के बड़हर गांव में ट्रैक्टर व मोटरसाइकिल की टक्कर होने से 21 वर्षीय युवक टीकम सिंह घायल हो गया, हादसे के बाद गंभीर रूप से घायल टीकम को परिजन निजी वाहन से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। घटना के बाद परिवार में शोक का माहौल है।

जानकारी के अनुसार, टीकम सिंह करीब 6 बजे बाइक से घर का सामान लेने दुकान जा रहा था। इसी दौरान गांव के मोड़ पर ट्रैक्टर और उसकी बाइक के बीच टक्कर हो गई। दुर्घटना में टीकम गंभीर रूप से घायल हो गया। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने ट्रैक्टर और उसके चालक को पकड़ लिया। इसके बाद परिजन घायल युवक को तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे।

बताया गया की घायल को अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्सकों ने उसका उपचार शुरू किया, लेकिन अंदरूनी गंभीर चोटों के कारण करीब आधे घंटे बाद उसकी मौत हो गई।

घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को मर्चुरी में रखवाया। सुबह पोस्टमार्टम कराया जाएगा। पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज कर मर्ग कायम किया है। मामले में दुर्घटना के कारणों की पुलिस जांच कर रही है।

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युवती के साथ बलात्कार का आरोपी को पुलिस ने किया गिरप्तार

अनूपपुर

थाना कोतवाली अनूपपुर पुलिस व्दारा 32 वर्षीय युवती के साथ ब्लैकमेल कर बलात्कार का आरोपी 24 घण्टो के अंदर गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त किया गया।

16 अक्टूबर 2026 को 32 वर्षीय युवती के व्दारा थाना कोतवाली अनूपपुर पहुंकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई की सैम राजपूत उर्फ संजू निवासी वार्ड न. 15 विवेकनगर रेस्क्यू कालोनी चचाई के द्वारा अश्लील फोटो वीडियो बनाकर ब्लैकमेल कर बलात्कार किया गया है। उक्त रिपोर्ट पर थाना कोतवाली अनूपपुर मे अपराध क्र. 555/2026 धारा 64(2) एम, 332 (बी) बी.एन.एस. पंजीबद्ध किया जाकर टी. आई कोतवाली उमेश उपाध्याय के नेतृत्व में महिला उपनिरीक्षक सरिता लकडा, प्रधान आरक्षक शेख रसीद, प्रकाश तिवारी एवं आरक्षक अब्दुल कलीम की टीम के व्दारा आरोपी सैम राजपूत उर्फ संजू पिता वृतलाल राजपूत उम्र 27 वर्ष निवासी वार्ड न. 15 विवेकनगर रेस्क्यू कालोनी चचाई थाना चचाई जिला अनूपपुर को गिरफ्तार किया जाकर न्यायालय में पेश किया जाकर न्यायिक अभिरक्षा में जिला जेल अनूपपुर में निरूद्ध कराया गया है।

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विराट नारी शक्ति सेवा संस्थान के ग्रैंड गरबा डांडिया रास सीज़न-9 का आयोजन संपन्न, विजेताओं को मिले पुरस्कार

शहडोल

विराट नारी शक्ति सेवा संस्थान द्वारा आयोजित ग्रैंड गरबा डांडिया रास सीज़न-9 का दो दिवसीय कार्यक्रम उत्साह, उमंग और भव्यता के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में प्रतिभागियों ने शानदार गरबा एवं डांडिया प्रस्तुतियों से सभी का मन मोह लिया। आयोजन में विभिन्न श्रेणियों में प्रतिभागियों को नकद पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।

संस्था की संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. नूतन एम. सिंह ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले सभी प्रायोजकों, सहयोगियों, प्रतिभागियों एवं उपस्थित जनसमुदाय के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

पुरस्कार विजेता मिस गरबा क्वीन, प्रथम पुरस्कार बैच नंबर 44  ₹11,000, द्वितीय पुरस्कार बैच नंबर 207 ₹5,100, मिसेज गरबा क्वीन प्रथम पुरस्कार बैच नंबर 285 ₹3,100, द्वितीय पुरस्कार  बैच नंबर 300 ₹2,100, मिस्टर गरबा किंग प्रथम पुरस्कार बैच नंबर 327 ₹3,100, द्वितीय पुरस्कार बैच नंबर 314 ₹2,100, गरबा प्रिंसेस बैच नंबर 354 ₹1,100

गरबा प्रिंस बैच नंबर 358 ₹1,100, द्वितीय दिवस के पुरस्कार विजेता,मिस गरबा क्वीन, प्रथम पुरस्कार अंजली ताम्रकार, बैच नंबर 261 ₹11,000, द्वितीय पुरस्कार बैच नंबर 53 ₹5,100, मिसेज गरबा क्वीन प्रथम पुरस्कार शिवानी सिंह, बैच नंबर 300 ₹3,100, द्वितीय पुरस्कार बैच नंबर 299 ₹2,100, मिस्टर गरबा किंग, प्रथम पुरस्कार राम गोले, बैच नंबर 320 ₹3,100, द्वितीय पुरस्कार बैच नंबर 327 ₹2,100, गरबा प्रिंसेस, बैच नंबर 354 ₹1,100, गरबा प्रिंस बैच नंबर 358 ₹1,100। संस्था की ओर से सभी विजेताओं को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी गईं। 

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कुएं में मिला किसान का शव, गले में बंधे थे पत्थर, हत्या की आशंका

अनूपपुर। जिले के देवरी चक्कीटोला गांव में शनिवार सुबह उस समय सनसनी फैल गई, जब 20 फीट गहरे कुएं से 48 वर्षीय किसान रमेश सिंह का शव बरामद हुआ। एसडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू कर शव को बाहर निकाला। किसान के गले में गमछे से करीब 20 किलो वजनी पत्थर बंधे मिले।

जानकारी के अनुसार, रमेश सिंह 15 अक्टूबर को खेत जाने के लिए घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। 16 अक्टूबर को परिजनों ने उनके लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शनिवार सुबह उनके बड़े भाई को घर से करीब तीन किलोमीटर दूर कुएं के पास रमेश के जूते और पनही दिखाई दिए। इसके बाद तलाश की गई तो कुएं में शव मिला।

परिजनों ने हत्या की आशंका जताई है। हालांकि, उन्होंने रमेश की मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने की बात भी बताई। एसडीआरएफ ने शव पुलिस को सौंप दिया है। पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद हो सकेगा।

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पेड़ से गिरा युवक, जंगल में पत्नी के सामने हुई मौत, दोनो लोग लकड़ियां लेने गए थे

शहडोल  

जंगल में लकड़ियां बटोर रही पत्नी की नजरें बार-बार पेड़ पर चढ़े पति की ओर जा रही थीं। जब लकड़ियां पर्याप्त हो गईं तो उसने आवाज लगाई बस करो, अब नीचे उतर आओ, घर चलते हैं। पति पेड़ से नीचे उतर ही रहा था कि अचानक उसका संतुलन बिगड़ा और वह ऊंचाई से जमीन पर आ गिरा। पत्नी दौड़कर उसके पास पहुंची, लेकिन पति गंभीर रूप से घायल हो चुका था। वह मदद के लिए चीखती रही, मगर घने जंगल में उसकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं था। कुछ ही देर में पति की सांसें थम गईं।

यह घटना शहडोल जिले के गोहपारू थाना क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार, रतहर निवासी 32 वर्षीय सुखीलाल कोल अपनी पत्नी के साथ गांव के पास स्थित बहेरहा जंगल में लकड़ी काटने गया था। पति पेड़ पर चढ़कर लकड़ियां काट रहा था, जबकि पत्नी नीचे खड़ी होकर गिराई गई लकड़ियों को इकट्ठा कर रही थी।

पत्नी के मुताबिक, जब काफी लकड़ियां इकट्ठा हो गईं तो उसने पति से कहा कि अब बस करो और नीचे उतर आओ। घर लौटने की तैयारी के बीच सुखीलाल पेड़ से उतर रहा था।

इसी दौरान अचानक उसका संतुलन बिगड़ा और वह काफी ऊंचाई से नीचे गिर गया। पति को जमीन पर घायल पड़ा देख पत्नी घबरा गई। वह तत्काल उसके पास पहुंची और मदद के लिए चिल्लाने लगी। वह बार-बार पति के पास जाती और किसी के आ जाने की उम्मीद में जंगल की ओर देखती रही। 

कुछ समय बाद जंगल के रास्ते से गुजर रहे लोगों ने पत्नी की चीख-पुकार सुनी और मौके पर पहुंचे। हालांकि, तब तक सुखीलाल की मौत हो चुकी थी। घटना की जानकारी मिलने पर गोहपारू पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने मर्ग कायम कर विवेचना में लिया है।

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नर्मदा नदी के रामघाट पर सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का आयोजन

अनूपपुर

प्रदेश के प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थ स्थल तथा पर्यटन केंद्र पवित्र नगरी अमरकंटक में मां नर्मदा के पावन तट रामघाट पर सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत महापुराण कथा का आयोजन किया जा रहा है। जयपुर के तपस्वी संत स्वामी स्वरूपानंद महाराज अपनी ओजस्वी वाणी और संगीतमय शैली में श्रद्धालुओं को भागवत कथा का रसपान करा रहे हैं। कथा श्रवण के लिए पहुंच रहे भक्त श्रद्धालु धार्मिक आयोजन का लाभ लेते हुए भक्ति और आध्यात्मिकता में सराबोर हो रहे हैं।

रामघाट का पावन वातावरण श्रीमद् भागवत कथा, भजन और भगवान के स्मरण से भक्तिमय बना हुआ है। व्यास पीठ से स्वामी स्वरूपानंद महाराज कथा प्रसंगों के माध्यम से धर्म, सदाचार, प्रेम, सेवा और मानव कल्याण का संदेश दे रहे हैं। उनकी ओजस्वी वाणी कभी श्रोताओं को देशप्रेम की भावना से ओतप्रोत करती है।

स्वामी स्वरूपानंद महाराज ने कहा कि भगवान सभी का कल्याण करते हैं और उनकी दृष्टि में सभी समान हैं। मनुष्य को सदैव भगवान का स्मरण करते हुए अपने जीवन में भक्ति, विश्वास और सद्भाव बनाए रखना चाहिए। भगवान का ध्यान केवल आंखें बंद करके ही नहीं, बल्कि आंखें खुली रखकर भी किया जा सकता है। सच्चे मन से प्रभु का स्मरण करने वाले भक्तों पर भगवान की कृपा बनी रहती है। उनके संदेश ने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति और आत्मचिंतन की प्रेरणा दी।

कथा के दौरान जब स्वामी स्वरूपानंद महाराज ने सुप्रसिद्ध भजन “राम आएंगे, राम आएंगे, मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल जाएंगे” का संगीतमय गायन किया, तो पूरा कथा स्थल भक्तिरस में डूब गया। 

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कलेक्टर ने जिला अस्पताल का किया निरीक्षण, विद्युत पैनल में लगी आग की घटना की जांच टीम गठित

उमरिया

कलेक्टर राखी सहाय ने आज प्रातः जिला अस्पताल का निरीक्षण कर गत रात्रि विद्युत पैनल में लगी आग की घटना के संबंध में जानकारी प्राप्त की । उन्होने घटना स्थल का निरीक्षण किया तथा वार्डो में पहुंचकर मरीजों से वस्तु स्थिति के विषय में जानकारी ली। इस दौरान सीईओ जिला पंचायत अभय सिंह भी उपस्थित रहे। उल्लेखनीय है कि गत रात्रि विद्युत पैनल में शार्ट सर्किट की वजह से आग लग गई थी । आग लगन पर तत्काल ही बिजली की सप्लाई बंद कर अग्निशमन यंत्रों से आग पर काबू पा लिया गया था। कलेक्टर ने विद्युत पैनल क्षेत्र का अवलोकन किया तथा निर्देश दिए कि विद्युत एवं सुरक्षा की प्रति वर्ष होने वाली आडिट कराएं । उन्होंने सिविल सर्जन से आग लगने के कारणों तथा गत माहों में की गई आडिट के संबंध में जानकारी प्राप्त की। उन्होंने घटना की गंभीरता को देखते हुए जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने चिकित्सकों को निर्देशित किया कि पर्याप्त मात्रा में विद्युत शमन यंत्र व रेत की बाल्टियां रखी जाए तथा विद्युत पैनल के आस पास कचरा आदि न रहे और सुरक्षा के पूरे इंतजाम रहे।  निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने रात की घटना के संबंध में भर्ती मरीजों से जानकारी ली। मरीजों ने बताया कि विद्युत पैनल में अचानक विस्फोट जैसी आवाज आई और बिजली गुल हो गई तथा वार्ड में धुआं आ गया। तत्काल ही उपस्थित चिकित्सको एवं स्टाफ व्दारा मरीजो को बाहर ले जाया गया और आग पर काबू पा लिया गया। कलेक्टर ने अस्पताल प्रबंधन को स्पष्ट निर्देश दिए कि इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति दोबारा न हो। अस्पताल के सभी संवेदनशील उपकरणों की विशेषज्ञों से जांच कराकर सुधार की कार्यवाही करें।

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ओपीडी में मरीज को ताला लगाकर किया बन्द

शहडोल

कुशाभाऊ ठाकरे जिला अस्पताल शहडोल में इलाज कराने पहुंचे अनूपपुर जिले के एक मरीज को कथित तौर पर अस्पताल की ओपीडी में बंद कर दिया गया। मरीज घंटों तक कमरे में कैद रहा और बाहर निकलने के लिए मदद की गुहार लगाता रहा। काफी देर बाद जब सुरक्षा गार्ड की नजर उस पर पड़ी, तब कहीं जाकर कमरा खुला और मरीज को बाहर निकाला गया। अनूपपुर जिले के बिजुरी निवासी मोहम्मद अमजद इलाज कराने के लिए शहडोल जिला अस्पताल पहुंचे थे। 

डॉ. शिल्पी सराफ ने बताया कि ओपीडी का निर्धारित समय समाप्त होने के बाद सुरक्षा की दृष्टि से कक्ष बंद किए जाने के दौरान एक व्यक्ति ओपीडी क्रमांक 14 में रह गया। सूचना मिलने पर शीघ्र ही उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। व्यक्ति बिना किसी को सूचित किए बाथरूम में चला गया था। 

पोषण माह पर राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम आयोजित, बच्चों के पोषण एवं क्रेच नीति पर दिया गया जोर

*कार्यक्रम में 68 सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने लिया भाग*


नई दिल्ली

नींव दिल्ली फोर्सेस द्वारा कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया, रफ़ी मार्ग, नई दिल्ली में पोषण माह राज्य स्तरीय परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में 68 सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ. ओम प्रकाश व्यास (अध्यक्ष, दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग) शामिल हुए। इसके साथ अन्य नेटवर्क के प्रतिनिधि डॉ. नूपुर बिड़ला (नापी नेटवर्क), डॉ. अपराजिता शर्मा (नेशनल फोर्सेस), अमरीश दुबे (NCCM), अशिया (राइट टू फूड), अवधेश यादव (संयोजक, नींव दिल्ली फोर्सेस), अशोक कुमार झा (स्टीयरिंग सदस्य, नींव दिल्ली फोर्सेस), थानेश्वर दयाल अदिगोंड (स्टीयरिंग सदस्य, नींव दिल्ली फोर्सेस) तथा संतलाल (नींव दिल्ली फोर्सेस प्रतिनिधि) भी उपस्थित रहे।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों के पोषण, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं विकास (ECCD), घर के बने पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देने तथा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड और पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के बढ़ते उपयोग को कम करने पर चर्चा करना था।

कार्यक्रम का उद्घाटन थानेश्वर दयाल अदिगोंड (स्टीयरिंग सदस्य, नींव दिल्ली फोर्सेस) ने किया। उन्होंने पोषण माह के दौरान विभिन्न संगठनों द्वारा एक महीने में की गई गतिविधियों और प्रयासों की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि इस अभियान में विभिन्न संगठनों ने भागीदारी की और ECCD एवं बच्चों के पोषण में सुधार के लिए सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत स्टीयरिंग कमेटी के सदस्यों एवं डॉ. ओ.पी. व्यास की उपस्थिति में दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद ज्ञानवती एवं उनके साथियों ने गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में डॉ. ओ.पी. व्यास, अवधेश यादव, संतलाल, गुड्डी, फारूक और रिंकी सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया गया।

डॉ. ओ.पी. व्यास ने बाल कल्याण के क्षेत्र में अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बच्चों के अधिकारों, पोषण और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर केवल चर्चा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें व्यवहार में लागू करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बच्चों और महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। सरकार, सामाजिक संगठनों और समुदाय को मिलकर काम करना होगा, ताकि बच्चों को उचित पोषण मिल सके।

उन्होंने भोजन में मिलावट, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को गंभीर विषय बताते हुए कहा कि पोषण माह की गतिविधियों को केवल एक महीने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इन्हें निरंतर जारी रखना चाहिए। उन्होंने पारंपरिक और घर के बने भोजन को बढ़ावा देने तथा आंगनवाड़ी और क्रेच में दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता की निगरानी पर भी जोर दिया। क्रेच सुविधाओं और दिल्ली में क्रेच नीति की मांग पर भी उन्होंने सहमति दी।

बैठक में नेशनल नेटवर्क FORCES तथा क्रेच से जुड़े प्रयासों पर चर्चा की गई। नेटवर्क के प्रतिनिधियों ने बताया कि दिल्ली में विभिन्न प्रयासों के माध्यम से 611 क्रेच खोले जाने की उपलब्धि हासिल हुई है। अब आवश्यकता है कि क्रेच सुविधाओं को और मजबूत किया जाए तथा आंगनवाड़ी के साथ क्रेच सेवाओं को जोड़ने की दिशा में काम किया जाए।

बैठक में निर्माण श्रमिकों, घरेलू कामगारों और कामकाजी महिलाओं के बच्चों के लिए सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण देखभाल सुविधाओं की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया। प्रतिनिधियों ने दिल्ली में क्रेच नीति (Palna Policy) तैयार करने की मांग उठाई, ताकि छोटे बच्चों की देखभाल, पोषण और विकास के लिए व्यवस्थित व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।

कार्यक्रम के दौरान नेटवर्क की वेबसाइट और वार्षिक रिपोर्ट का डॉ. ओ.पी. व्यास द्वारा शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही अतिथियों के कर-कमलों द्वारा वार्षिक प्रतिवेदन का विमोचन भी किया गया।

बैठक के प्रथम सत्र में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने पोषण माह के दौरान किए गए कार्यों, समुदाय तक पहुंच और अपने अनुभव साझा किए। अवधेश यादव ने अभियान की समग्र उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि 32 गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) ने 33 क्षेत्रों में मिलकर प्रत्यक्ष रूप से 2,622 और अप्रत्यक्ष रूप से 1,878 लोगों की अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के प्रति समझ बढ़ाई।

अन्य प्रतिनिधियों ने भी बताया कि बच्चों और अभिभावकों को पौष्टिक भोजन, खाद्य पदार्थों के लेबल, सामग्री, चीनी और वसा की मात्रा तथा पैकेटबंद खाद्य पदार्थों के संभावित दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना जरूरी है। सामाजिक संवाद और सोशल मीडिया के माध्यम से इस जानकारी को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।

प्रतिभागियों ने भोजन की गुणवत्ता की जांच, आंगनवाड़ी एवं अन्य संस्थागत रसोई की निगरानी तथा भोजन से जुड़ी शिकायतों के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करने के सुझाव दिए।

दूसरे सत्र में आयोजित पैनल चर्चा में बाल अधिकार, पोषण, खाद्य सुरक्षा, महिलाओं के अधिकार और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के विनियमन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार साझा किए गए। अशोक झा ने बच्चों के अधिकारों और उचित पोषण के लिए प्रभावी नीतियों तथा नियमों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों के पोषण की स्थिति को समझने और सुधारने के लिए उपलब्ध आंकड़ों, निगरानी तथा सामाजिक अंकेक्षण को महत्व देना चाहिए।

राइट टू फूड से अशिया ने कहा कि पोषण को केवल न्यूनतम आहार तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि बच्चों को पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए। बजट में पोषण के लिए पर्याप्त संसाधन, मिड-डे मील की गुणवत्ता और प्रवासी एवं विस्थापित बच्चों के भोजन के अधिकार को सुनिश्चित करना भी जरूरी है।

नूपुर बिड़ला ने मातृत्व अधिकारों, स्तनपान, छोटे बच्चों के पूरक आहार और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के नियमन से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने खाद्य पैकेटों पर सामग्री, चीनी और वसा की मात्रा स्पष्ट रूप से लिखने तथा उपभोक्ताओं को सचेत करने वाले प्रभावी चेतावनी लेबल की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बच्चों को लक्षित करने वाले खाद्य विज्ञापनों पर उचित नियमन की भी बात कही।

डॉ. अपराजिता शर्मा ने कहा कि बच्चों की देखभाल और पोषण की जिम्मेदारी का बड़ा हिस्सा महिलाओं पर रहता है। इसलिए महिलाओं के अधिकारों, परिवारों की वास्तविक परिस्थितियों और समुदाय की जरूरतों को ध्यान में रखकर नीतियां बनानी चाहिए। उन्होंने सभी नेटवर्कों के साथ मिलकर जागरूकता अभियान चलाने और स्थानीय स्तर पर पोषण संबंधी मुद्दों को उठाने की आवश्यकता बताई।

*बैठक में प्रमुख सुझाव एवं कार्ययोजनाएं*

1. जागरूकता अभियान: घर के बने ताजे और पौष्टिक भोजन को बढ़ावा देने तथा अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के उपयोग को कम करने के लिए समुदाय में निरंतर अभियान चलाना।

2. सामूहिक मांग-पत्र: अन्य नेटवर्कों के सहयोग से खाद्य गुणवत्ता से संबंधित मांग-पत्र तैयार करना।

3. खाद्य पैकेटों पर स्पष्ट जानकारी: खाद्य पदार्थों की सामग्री, चीनी और वसा की मात्रा तथा चेतावनी संबंधी जानकारी स्पष्ट रूप से हिंदी में उपलब्ध कराने की मांग करना।

4. बच्चों के लिए खाद्य सुरक्षा: छह वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के नियमन और बच्चों को लक्षित विज्ञापनों पर प्रभावी नियंत्रण की मांग करना।

5. जनसुनवाई का आयोजन: चारों क्षेत्रों में अन्य नेटवर्कों और दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (DCPCR) के सहयोग से पोषण, भोजन की गुणवत्ता और बच्चों के अधिकारों पर जनसुनवाई आयोजित करना।

6. दिल्ली में क्रेच नीति: कामकाजी महिलाओं और छोटे बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली में प्रभावी क्रेच नीति बनाने की मांग को आगे बढ़ाना।

7. संयुक्त शोध और दस्तावेजीकरण: पोषण, खाद्य गुणवत्ता, बच्चों के स्वास्थ्य और स्थानीय खाद्य परंपराओं पर संयुक्त शोध कर साक्ष्य-आधारित सुझाव तैयार करना।

8. सोशल मीडिया और जनसंचार: जागरूकता पोस्टर, डिजिटल सामग्री और अन्य माध्यमों से सही पोषण संबंधी जानकारी अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचाना।

कार्यक्रम के समापन पर कविता ने सभी प्रतिभागियों, FORCES की स्टीयरिंग कमेटी, विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों, सहयोगी संगठनों और नेटवर्क सदस्यों का धन्यवाद किया। ज्ञानवती जी एवं उनके साथियों की गीत प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

बैठक का मुख्य संदेश रहा कि बच्चों को उचित पोषण, सुरक्षित भोजन और गुणवत्तापूर्ण देखभाल उपलब्ध कराना केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज, संगठनों और समुदाय की साझा जिम्मेदारी है। पोषण माह के प्रयासों को निरंतर जारी रखते हुए बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और समग्र विकास के लिए सामूहिक रूप से काम करना आवश्यक है।

 *न्यू दिल्ली से पत्रकार ऊषा माहना*

जिला अस्पताल के ओपीडी में मरीज को ताला लगाकर किया बन्द, स्वास्थ्य विभाग ने बयान जारी कर दी सफाई


शहडोल

कुशाभाऊ ठाकरे जिला अस्पताल शहडोल में इलाज कराने पहुंचे अनूपपुर जिले के एक मरीज को कथित तौर पर अस्पताल की ओपीडी में बंद कर दिया गया। मरीज घंटों तक कमरे में कैद रहा और बाहर निकलने के लिए मदद की गुहार लगाता रहा। काफी देर बाद जब सुरक्षा गार्ड की नजर उस पर पड़ी, तब कहीं जाकर कमरा खुला और मरीज को बाहर निकाला गया।

अनूपपुर जिले के बिजुरी निवासी मोहम्मद अमजद इलाज कराने के लिए शहडोल जिला अस्पताल पहुंचे थे। वह अस्पताल की ओपीडी के कमरा नंबर 14 में डॉक्टर को दिखाने गए थे। इसी दौरान कथित तौर पर ओपीडी में ताला लगा दिया गया और मरीज अंदर ही बंद रह गया, देखते ही देखते इलाज कराने आया मरीज खुद को एक बंद कमरे में कैद पाया। 

बताया जा रहा है कि मरीज ने बाहर निकलने के लिए काफी देर तक आवाज लगाई और मदद की गुहार करता रहा,बंद कमरे में फंसे रहने के दौरान उसकी परेशानी और बढ़ गई। घंटों इंतजार के बाद जब सुरक्षा गार्ड की नजर कमरे में बंद मरीज पर पड़ी, तब ताला खोलकर उसे बाहर निकाला गया। बाहर आने के बाद मरीज ने राहत की सांस ली। इस घटना को अस्पताल में मौजूद किसी व्यक्ति ने अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया।

*प्रशासन ने जारी की प्रेस विज्ञप्ति*

डॉ. शिल्पी सराफ ने बताया कि ओपीडी का निर्धारित समय समाप्त होने के बाद सुरक्षा की दृष्टि से कक्ष बंद किए जाने के दौरान एक व्यक्ति ओपीडी क्रमांक 14 में रह गया। सूचना मिलने पर शीघ्र ही उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

एक व्यक्ति बिना किसी को सूचित किए बाथरूम में चला गया था। इसकी जानकारी नहीं होने और ओपीडी क्रमांक 14 के खाली होने तथा उसे बंद करने का निर्धारित समय हो जाने के कारण सुरक्षा गार्ड ने कक्ष बंद कर दिया।

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