दबंग पब्लिक प्रवक्ता

नदी किनारे जमीन में दफन मिला लापता युवक का शव, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका


उमरिया

कोतवाली थाना क्षेत्र के मगरघरा गांव में उस समय सनसनी फैल गई, जब कई दिनों से लापता एक युवक का शव नदी किनारे जमीन के अंदर दफन मिला। शव की पहचान 30 वर्षीय गो चरण सिंह के रूप में हुई है, जो 5 सितंबर से लापता था। शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने के बाद परिजनों ने युवक की हत्या कर शव को छिपाने के उद्देश्य से दफन किए जाने की आशंका जताई है।

जानकारी के अनुसार गो चरण सिंह के अचानक लापता होने के बाद परिजन उसकी तलाश में जुटे हुए थे। गांव सहित आसपास के संभावित स्थानों पर खोजबीन की गई, लेकिन युवक का कोई सुराग नहीं मिला। इसी दौरान 9 सितंबर को नदी किनारे एक चरवाहे को एक स्थान से असामान्य रूप से तेज दुर्गंध महसूस हुई। स्थान संदिग्ध लगने पर उसने मामले की सूचना पुलिस को दी।

सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और संदिग्ध स्थान का निरीक्षण किया। इसके बाद जमीन की खुदाई कराई गई तो भीतर से युवक का शव बरामद हुआ। शव बाहर निकाले जाने के बाद उसकी पहचान गो चरण सिंह के रूप में की गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई? यदि उसकी मौत सामान्य थी तो शव को नदी किनारे जमीन में दफन करने की जरूरत क्यों पड़ी? 

परिजनों का आरोप है कि युवक की हत्या किए जाने के बाद शव को सुनसान नदी किनारे ले जाकर जमीन में छिपाया गया होगा। सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है की पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा।

पंचायत का कचरा घर बना शराबियों का अड्डा गंदगी व अव्यवस्था से ग्रामीण परेशान, अनदेखी पर उठ रहे सवाल

*ग्रामीणों ने की कार्यवाही की मांग*


अनूपपुर

ग्राम पंचायत पयारी नंबर 01 एक में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिल रही है। पंचायत द्वारा बनाए गए कचरा घर का समुचित उपयोग और रखरखाव नहीं होने के कारण यहां कचरे का ढेर लगने के साथ ही असामाजिक गतिविधियों की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कचरा घर का परिसर धीरे-धीरे शराब पीने वालों का अड्डा बनता जा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार कचरा घर का उद्देश्य गांव से निकलने वाले कचरे को एकत्रित कर उसका उचित प्रबंधन करना था, लेकिन वर्तमान स्थिति में व्यवस्था अपने उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है। आसपास गंदगी और कचरा फैले रहने से दुर्गंध की समस्या बनी रहती है। इससे राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम के समय कचरा घर के आसपास लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है। ग्रामीणों ने वहां शराबखोरी और खाली शराब की बोतलें पड़े होने की शिकायत की है। इससे विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को वहां से गुजरने में असुविधा महसूस होती है। ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर इस तरह की स्थिति से गांव का माहौल भी प्रभावित हो रहा है।

गांव में स्वच्छता अभियान और कचरा प्रबंधन को लेकर लगातार प्रयास किए जाने के बावजूद यदि कचरा घर ही गंदगी और अव्यवस्था का केंद्र बन जाए तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने पंचायत से कचरा घर की नियमित सफाई, कचरे का समय पर उठाव तथा परिसर की निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

ग्रामीणों ने मांग की है कि ग्राम पंचायत के जिम्मेदार पदाधिकारी और संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करें। यदि शराबखोरी या अन्य अनियमित गतिविधियां पाई जाती हैं तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।                ‌‌ 

मृत गाय व बछड़े को नपा के कचरे वाली गाड़ी में भरकर खुले स्थान में फेंका, मानवता हुई शर्मसार


शहडोल

नगर पालिका के कचरा वाहन में नालियों की गंदगी के साथ मृत गाय और बछड़े को उठाया गया और फिर कचरे की तरह खुले में पलट दिया गया। पूरा मामला कैमरे मे कैद होकर सोशल मीडिया पर वायरल होंरहे है। तस्वीरें और वीडियो सवाल पूछ रहे हैं कि क्या बेजुबान मवेशियों की मौत के बाद उनकी कोई कीमत नहीं, सवाल सिर्फ यह नहीं कि मृत मवेशियों को कचरे के साथ क्यों फेंका गया, सवाल यह भी है कि आखिर जिम्मेदारों की संवेदनशीलता कहां चली गई।

नगर पालिका शहडोल के मैजिक कचरा वाहन से नालियों की गंदगी के साथ एक मृत गाय और बछड़े को कचरे की तरह कचरे के ढेर में फेक दिया गया। यह पूरा घटनाक्रम जमुई स्थित बघेल ढाबे के पीछे हेलीपैड क्षेत्र का है। वायरल वीडियो में कचरा वाहन से गंदगी के साथ मृत मवेशियों को भी खुले स्थान पर फेंकते हुए देखा जा सकता है। मौके पर मौजूद किसी व्यक्ति ने इस पूरी घटना को अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड कर लिया, जिसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद नगरपालिका की कचरा प्रबंधन व्यवस्था और मृत पशुओं के निपटारे की प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं।

सबसे गंभीर बात यह है कि शहर के खुले में डंप किए जा रहे कचरे के आसपास बड़ी संख्या में मवेशी पहुंचते हैं और कचरे में मौजूद बायो-वेस्ट के साथ जहरीली पन्नियां और प्लास्टिक तक खा लेते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि शहर की सफाई व्यवस्था आखिर बेजुबान मवेशियों के लिए कितनी सुरक्षित है। कचरे में प्लास्टिक और जहरीले पदार्थों के सेवन से मवेशियों के बीमार पड़ने और असमय मौत का खतरा लगातार बना रहता है। इसके बावजूद यदि मृत मवेशियों को भी सामान्य कचरे के साथ खुले में फेंका जा रहा है, तो यह व्यवस्था की संवेदनशीलता पर बड़ा सवाल है।

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