*नवरात्रि*


दुर्गे मां की महिमा


मैया बहरारे वारी तेरी महिमा सबसे न्यारी।

तेरी महिमा सबसे न्यारी तू ही करौली वारी।


नवरात्रि जब जब आती,

तेरी शिला मूर्ति बढ़ जाती।

भक्तों को दर्शन देने,

तू देहरी तक आ जाती।


मैया छोटी सी किवड़िया बंद न हो पाती तुम्हारी।

मैया बहरारे वारी तेरी महिमा सबसे न्यारी।


जितना भी जल चढ़ता है,

इक कुंड में समाता है,

ये इक बिलस्त भर का है,

जो कभी नहीं भरता है।


मैया हम तेरे पुजारी तू है कुलदेवी हमारी।

मैया बहरारे वारी तेरी महिमा सबसे न्यारी।


इस शिला रूप में माते,

तेरे नौ रूप समाते,

मनवान्छित फल तू देती,

जब करूं तेरे जगराते।


मैया छवि तेरी प्यारी तू ही राखे लाज हमारी। 

मैया बहरारे वारी तेरी महिमा सबसे न्यारी।


गीतकार- अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाईकोर्ट 

ग्वालियर म.प्र.

श्रद्धा महिला मण्डल ने खोला प्याऊ, बांटे मीठा व फल


अनूपपुर

श्रद्धा महिला मण्डल के सौजन्य से जागृति महिला समिति की अध्यक्षा विनिता शर्मा एवं उनकी सहयोगियों द्वारा हसदेव क्षेत्र के राजनगर आर.ओ. उपक्षेत्र के अंतर्गत राजनगर बस स्टैंड में प्याऊ का उद्घाटन किया गया, जिससे लोगों को गर्मी में राहत मिले और पूरे गर्मी के मौसम तक लोगों को ठंडा पेय जल पीने को मिले। यह प्याऊ पूरे गर्मी के मौसम तक संचालित किया जाएगा । प्रथम दिवस में पेय जल के साथ पेय पदार्थ शिकंजी,जलजीरा, गुड चना, अंगूर, संतरा, तरबूज, शहतूत व नाश्ता पैकेट, लस्सी आदि का वितरण किया गया ।इस कार्यक्रम को सफल बनाने में जागृति महिला समिति की सरिता सिंह, उषा शर्मा, रजनी सिंह, पुष्पा नेताम, सुष्मिता मिश्रा, किरण मिश्रा, अस्मिता प्रधान, गरिमा द्विवेदी, रेखा कुमार आदि ने अपना बहुमूल्य समय व योगदान देकर इस कार्यक्रम को सफल बनाया ।

 Summary


*Anupama, our journey companion*

*Second edition - February 2025*



The second edition of Anupama, our journey companion, has been successfully published. This edition will feature interviews on fashion, literature, and various other creative writings, along with much more exciting content for you to enjoy. It features contributions from numerous writers from India and abroad. The publication offers advice on health, beauty, fashion, and yoga. This collection of writings by various authors presents a diverse range of perspectives and writing styles, making it an engaging read. The language is simple and accessible, allowing readers of all ages to easily understand and enjoy it."

"We request everyone to read this issue of Anupama, our journey companion, at least once. This initiative has been started by Sushi Saxena, a budding writer in the literary field, and has been supported by advisors Anupama, Dolly Jha, Prashant Shrivastava, Kanika Sharma and buddhi prakash sen. Their invaluable contributions have helped reach this milestone of success, and they have pledged to make it extremely popular. This magazine provides an opportunity for artists of all kinds, big or small, old or new, to showcase their writing skills and be honored with a certificate of appreciation. It offers a wide range of essential information in the form of literature for people of all classes. Additionally, it features various types of writings, including stories, poems, essays, memoirs, travelogues, career guidance, parenting tips, beauty tips, healthcare, book reviews, and more. This publication has been brought to you by Unique Feel Publications. 

 

*Sushi Saxena Indore, Madhya Pradesh*

आचार्य विजय तिवारी 'किसलय' को हिन्दी सेवी सम्मान से किया गया सम्मानित


जबलपुर

प्रेरणा हिन्दी प्रचारिणी सभा के संस्थापक कवि संगम त्रिपाठी व सशक्त हस्ताक्षर संस्था के संस्थापक गणेश श्रीवास्तव प्यासा जबलपुरी संयोजक हिंदी महाकुंभ ने दिनांक 28 मार्च 2025 को आचार्य विजय तिवारी 'किसलय' को हिन्दी सेवी सम्मान प्रदान किया। आचार्य विजय तिवारी 'किसलय' के सदन में कवि संगम त्रिपाठी व गणेश श्रीवास्तव प्यासा जबलपुरी ने सम्मानित किया। 

आचार्य विजय तिवारी 'किसलय' संस्कारधानी जबलपुर के वरिष्ठ साहित्यकार है व विभिन्न संस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनकी कृतियाँ किसलय के काव्य सुमन (काव्य संग्रह), किसलय मन अनुराग (दोहा कृति), किसलय के मन में आया (छांदस काव्य संग्रह), किसलय की आद्याक्षरी कवितायें प्रकाशित है, विभिन्न कृतियों एवं पत्रिकाओं का संपादन, अनेक सामूहिक काव्य, दोहा, कहानी, लघुकथा संग्रहों में प्रकाशन के साथ ही समाचार पत्रों में लगातार संपादकीय लेखों का प्रकाशन उनके द्वारा किए जा रहे हैं।

आचार्य विजय तिवारी 'किसलय' को स्थानीय व राष्ट्रस्तरीय विभिन्न संस्थाओं, संस्थानों व संगठनों द्वारा सम्मानित किया गया हैं व उनकी निरंतर हिंदी के प्रचार-प्रसार की लगनशीलता प्रेरणादायक है।

नव सम्वत्सर बन आना, सभी मौसम, ऋतुओं को संग ले आना, प्रिये नव संवतसर बन के मेरे घर आना



 नव सम्वत्सर बन आना


सभी मौसम सभी ऋतुओं को संग ले आना।

प्रिये नव संवतसर बन के मेरे घर आना।

              

बन के सरसों के फूल यादें तेरी आतीं हैं।

मुझसे गेहूॅं की बालियों सी लिपट जातीं हैं।

अपनी यादों की पालकी में बैठ कर आना,

प्रिये नव संवतसर बन के मेरे घर आना।

       

जब भी आते थे तो फागुन की तरह आते थे,

गुलमोहर सी दहकती तड़प छोड़ जाते थे।

सुनहरे पल मिलन के अपने संग ले आना,

प्रिये नव संवतसर बन के मेरे घर आना।

           

याद आती है तेरे हाथों की बसंती छुअन,

विरह की तपती दुपहरी में झुलसता है बदन।

प्रीति की ठंडी-ठंडी छांव संग ले आना,

प्रिये नव संवतसर बन के मेरे घर आना।        


देखो इन मेरी बिना नींद वाली पलकें उठा,

प्यासे कजरारे नयन बन गये सावन की घटा।

झूमती गाती बहारों को संग ले आना,

प्रिये नव संवतसर बन के मेरे घर आना।

                   

गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाईकोर्ट ग्वालियर

अंतरिक्ष यात्री और अंतरिक्ष का सफर, सुनीता विलियम्स ने रचा इतिहास


*सुशी सक्सेना इंदौर मध्यप्रदेश*

नासा के अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर बोइंग कंपनी के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से जून 2024 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए रवाना हुए थे। मिशन केवल 8 दिनों का था, लेकिन तकनीकी खराबियों के कारण दोनों अंतरिक्ष यात्रियों को 9 महीने से अधिक समय तक अंतरिक्ष में ही रहना पड़ा। अंततः स्पेस-एक्स के क्रू-9 ड्रैगन कैप्सूल के जरिए 19 मार्च 2025 को वे सफलतापूर्वक फ्लोरिडा के तट पर अटलांटिक महासागर में स्प्लैशडाउन (समुद्र में लैंडिंग) कर पृथ्वी पर लौटे। इस मिशन में उनके साथ नासा के अंतरिक्ष यात्री निक हेग और रूसी कॉस्मोनॉट अलेक्जेंडर गोर्बनोव भी शामिल थे।

*तकनीकी खराबी के कारण मिशन में हुई देरी*

बोइंग के स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट में तकनीकी खामियां लॉन्च के बाद से ही सामने आने लगी थीं। जब स्पेसक्राफ्ट ISS के पास पहुंचा, तब 5 थ्रस्टर्स (रॉकेट के छोटे इंजन) काम करना बंद कर चुके थे और हीलियम गैस का रिसाव हो रहा था। लगातार एक के बाद एक खराबियां सामने आती गईं, जिसके चलते यह मिशन लंबा खिंच गया। नासा को चिंता थी कि अगर तकनीकी खामियों के साथ यह यान पृथ्वी के वायुमंडल में री-एंटर करता, तो बड़ा खतरा हो सकता था। इसलिए, नासा ने स्पेस-एक्स के भरोसेमंद ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के जरिए वापसी कराने का फैसला किया। इस निर्णय पर बोइंग कंपनी नाराज भी दिखी, क्योंकि यह स्टारलाइनर की पहली मानवयुक्त उड़ान थी, जो पूरी तरह सफल नहीं हो पाई।

*स्पेस-एक्स ड्रैगन: भरोसेमंद और अत्याधुनिक अंतरिक्ष यान*

एलन मस्क की स्पेस-एक्स कंपनी द्वारा निर्मित ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट को पहले भी नासा के कॉमर्शियल क्रू प्रोग्राम में शामिल किया गया था और यह पहले भी सफल मिशन अंजाम दे चुका है। इस यान की विशेषताएं इस प्रकार हैं- 

यह सात अंतरिक्ष यात्रियों को एक साथ ले जाने में सक्षम है।

यह पूरी तरह ऑटोनॉमस (स्वयं-नियंत्रित) है, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे मैन्युअली भी ऑपरेट किया जा सकता है। 

इसमें आपातकालीन सुरक्षा प्रणाली मौजूद है, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा बनी रहती है। 

यह यान बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है (री-यूजेबल), जिससे यह बेहद किफायती साबित हुआ है।

*वापसी का रोमांचक सफर*

18 मार्च 2025 को क्रू-9 ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट को ISS से अनडॉक किया गया और 17 घंटे की यात्रा के बाद यह 27359 किमी/घंटा की रफ्तार से पृथ्वी के वायुमंडल में दाखिल हुआ। वायुमंडल में प्रवेश करते समय यान को भीषण गर्मी और दबाव सहना पड़ा, लेकिन स्पेस-एक्स की अत्याधुनिक हीट शील्ड ने इसे सुरक्षित रखा। 19 मार्च 2025 की सुबह 3:27 बजे (भारतीय समयानुसार) यह अमेरिका के फ्लोरिडा तट पर सफलतापूर्वक स्प्लैशडाउन (समुद्र में लैंडिंग) हुआ।

*सुनीता विलियम्स ने रचा इतिहास*

इस मिशन के साथ ही 59 वर्षीय भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने नया रिकॉर्ड बना दिया। वे 286 दिन अंतरिक्ष में बिताने वाली तीसरी महिला बन गई हैं। 

इससे पहले-

1. क्रिस्टीना कोच – 328 दिन (पहली महिला)

2. पेगी व्हिटसन – 289 दिन (दूसरी महिला)

*अंतरिक्ष मिशन के दौरान आने वाली चुनौतियां*

खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अंतरिक्ष यात्रियों को कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें ये शामिल हैं:

हीलियम रिसाव – गैस लीक होने पर स्पेसक्राफ्ट का बैलेंस बिगड़ सकता है।

थ्रस्टर्स फेलियर – इंजन ठीक से काम न करें, तो यान दिशाहीन हो सकता है।

कंट्रोल लॉस – यान का सही तरह से मैनेउवर न होना।

ब्लैकआउट – पृथ्वी से संपर्क टूट जाना।

री-एंट्री के दौरान शील्ड फेलियर– पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते समय भीषण गर्मी से सुरक्षा जरूरी होती है।

डॉकिंग/अनडॉकिंग असफल होना- आईएसएस से सही ढंग से नहीं जुड़ पाना। 

स्प्लैशडाउन की समस्या- समुद्र में उतरते समय पैराशूट ठीक से काम न करे। यही वजह है कि नासा और स्पेस-एक्स जैसे संगठन हर संभावित खराबी को ध्यान में रखते हुए मिशन को अंजाम देते हैं।

*भविष्य की सीख और भारत के लिए संदेश*

खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, इस मिशन से हमें यह सीख मिलती है कि हर मिशन में टीम वर्क, सटीक योजना और वैज्ञानिक समर्पण बेहद जरूरी होता है। अगर भारत सरकार भी निजी अंतरिक्ष कंपनियों को इस क्षेत्र में अधिक अवसर दे, तो इसरो भी विश्व की अग्रणी स्पेस एजेंसियों के साथ मिलकर अंतरिक्ष अन्वेषण में नई ऊंचाइयों को छू सकता है। स्पेस-रेस अब सिर्फ देशों तक सीमित नहीं, बल्कि निजी कंपनियां भी इसमें अहम भूमिका निभा रही हैं। भारत को भी इस दिशा में और मजबूत कदम उठाने की जरूरत है।

*खगोल विद अमर पाल सिंह, नक्षत्र शाला (तारामण्डल) गोरखपुर,उत्तर प्रदेश,भारत*

हृदय का मरूस्थल कोई स्थायी अवस्था नहीं है, हृदय का मरूस्थल - एक अनुभव


हृदय का मरूस्थल कोई स्थायी अवस्था नहीं है, बल्कि यह जीवन की कठिन परिस्थितियों की उपज होती है। यदि कोई व्यक्ति सही दिशा में प्रयास करे, तो वह फिर से अपने हृदय को संवेदनशील, प्रेमपूर्ण और ऊर्जावान बना सकता है। हर रेगिस्तान में कहीं न कहीं पानी का एक स्रोत अवश्य होता है, बस उसे खोजने की आवश्यकता होती है।

मनुष्य का हृदय भावनाओं का केंद्र होता है, जहाँ प्रेम, करुणा, सहानुभूति, और संवेदनशीलता के बीज अंकुरित होते हैं। लेकिन जब जीवन में निरंतर आघात, धोखा, असफलता, और उपेक्षा मिलती है, तो हृदय धीरे-धीरे एक मरूस्थल में परिवर्तित हो जाता है। एक ऐसा स्थान जहाँ संवेदनाएँ सूख जाती हैं, भावनाएँ निष्प्राण हो जाती हैं और व्यक्ति भीतर से शुष्क एवं निर्जीव महसूस करने लगता है। व्यक्ति भावनात्मक  रूप से सुन्न हो जाता है और दूसरों पर विश्वास खो देता है। 

जब कोई व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं को साझा करने के लिए किसी को नहीं पाता, तो धीरे-धीरे उसका हृदय एक रेगिस्तान की तरह खाली और सूना महसूस करने लगता है। समाज में कई बार लोग अपने दुख और दर्द को खुलकर व्यक्त नहीं कर पाते। लगातार भावनाओं को दबाने से व्यक्ति भीतर से कठोर और संवेदनाहीन होता चला जाता है।

जीवन में हम सभी कभी न कभी दिल के मरूस्थल से गुजरते हैं। यह एक ऐसी जगह है जहां प्यार, स्नेह और खुशी की कमी होती है। यहां की रेत पर पैरों के निशान होते हैं, जो प्यार की खोज में यहां आते हैं और जाते हैं। दिल का मरूस्थल एक ऐसी जगह है जहां दिल की धड़कनें धीमी होती जाती हैं और प्यार की यादें धीरे-धीरे मिटती जाती हैं। यहां की हरियाली की कमी और आसमान की उदासी इस मरूस्थल को और भी वीरान बना देती है। लेकिन फिर भी, इस मरूस्थल में एक उम्मीद होती है। एक उम्मीद कि एक दिन, प्यार की बारिश, यहां जरूर होगी। एक उम्मीद कि इस मरूस्थल को हरा-भरा बना देगी और दिल के टुकड़े फिर से जुड़ जाएंगे।

*इस मरूस्थल से बाहर निकलने का मार्ग*

अपने दुख, दर्द, और भावनाओं को स्वीकार करना और किसी विश्वसनीय व्यक्ति से साझा करना दिल को हल्का कर सकता है। स्वयं से प्रेम करना और खुद को महत्व देना, इस रेगिस्तान में एक नखलिस्तान की तरह काम कर सकता है। संवेदनाओं को व्यक्त करने के लिए संगीत, चित्रकला, कविता, या लेखन का सहारा लिया जाए तो दिल फिर से जीवन से भर सकता है।जीवन में नई आशाओं और नए संबंधों की तलाश से यह भावनात्मक सूखा धीरे-धीरे हरियाली में बदल सकता है।

दिल का मरूस्थल हमें यह सिखाता है कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। लेकिन हमें कभी हार नहीं माननी चाहिए। हमें हमेशा उम्मीद रखनी चाहिए कि एक दिन, सब कुछ ठीक हो जाएगा। इसलिए, अगर आप भी दिल के मरूस्थल से गुजर रहे हैं, तो हार न मानें। उम्मीद रखें और आगे बढ़ते रहें। एक दिन, आपको भी प्यार की बारिश का अनुभव होगा और आपका दिल फिर से हरा-भरा हो जाएगा।

*सुशी सक्सेना इंदौर मध्यप्रदेश*

शनिदेव की मदद से हनुमान जी को मिली थी विजय, चमत्कारिक है ऐंति के शनिदेव की ऐतिहासिक कथा 

( मनोज कुमार द्विवेदी की कलम से, अनूपपुर- मप्र )


अनूपपुर

कहा जाता है कि यदि त्रेतायुग में शनि महाराज हनुमान जी की मदद नहीं करते तो भगवान श्री राम कभी लंका विजय नहीं कर पाते। मुरैना के ऐंति पर्वत स्थित शनिदेव के विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक मंदिर में श्रद्धा लुओं को यहाँ पहुँच कर आत्मिक शांति प्राप्त होती है। तुलसी मानस प्रतिष्ठान मध्यप्रदेश भोपाल द्वारा उद्धृत यहाँ लगाए गये एक शिला पट्टिका में उल्लेख है कि त्रेतायुग में शनि महाराज की सहायता से हनुमान जी ने लंका में भगवान श्री राम की विजय का मार्ग प्रशस्त किया था। मुरैना के ऐंति गाँव में विश्वप्रसिद्ध शनि देव का ऐतिहासिक मन्दिर आज भी इसका गवाह है। लंका में जब राक्षसों ने हनुमान जी की पूंछ में आग लगाई थी और हनुमान जी ने लंका दहन का प्रयास किया था तो वे सफल नहीं हो पाए थे। तब योगबल से हनुमान जी ने पता लगा लिया कि  उनके प्रिय सखा शनिदेव रावण के पैरों के नीचे आसन वने हुए हैं । उन्ही के प्रभाव से लंका में आग नहीं लग पा रही है।

 हनुमान जी ने अपने बुद्धि चातुर्य से शनि देव को रावण के पैरों के नीचे से मुक्त करवाया और तुरंत लंका छोड़ने को कहा। वर्षों तक रावण के पैरों के नीचे आसन बने रहने के कारण शनिदेव अत्यंत दुर्बल हो गये थे । लंकाधिपति की कैद से मुक्त होने के बाद कुछ दूर चल कर ही वे थक गये। उन्होंने हनुमान जी से कहा कि वे दुर्बल हो गये हैं और अधिक नहीं चल सकते। और जब तक वो लंका में हैं ,तब तक लंका दहन नहीं हो सकता। वो इतने कमजोर हो गये हैं कि तुंरत लंका नहीं छोड़ सकते। यह सुनकर हनुमान जी मानसिक परेशानी से घिर गये। तब शनिदेव ने कहा कि आप इतने बलशाली हैं कि मुझे आप भारत भूमि की ओर प्रक्षेपित कर दें। तब मैं लंका से दूर हो जाऊंगा और तब आप लंका दहन कर सकेगें। 

 वीर हनुमान जी ने ऐसा ही किया। उन्होंने शनिदेव को पूरे वेग से भारत की ओर फेंका। शनिदेव मुरैना जिले के ऐंति गाँव के समीप एक पर्वत में गिरे। जिसे अब शनिपर्वत कहा जाता है‌। इस पर्वत पर जहां वे गिरे वहाँ आज भी विशाल गड्ढा है। यहाँ शनिदेव ने घोर तपस्या करके अपनी शक्तियाँ प्राप्त कीं। चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य ने यहाँ शनि मन्दिर की स्थापना की। इस मन्दिर में पूर्वाभिमुख भव्य दिव्य शनि प्रतिमा स्थापित हैं। सूर्य और शनि देव के मध्य एक श्रृंगारिक सुन्दर से हनुमान जी की स्थापना भी विक्रमादित्य ने किया था। 

ऐंति से ही शनि शिंगणापुर की प्रतिमा हेतु शिला पहुँची थी। इसकी अलग कहानी है। 

 ऐंति के शनि मन्दिर में प्रत्येक अमावस्या को विशाल मेले का आयोजन होता है। जिसमें लाखों भक्त गण यहाँ शनिदेव की पूजा अर्चना और दर्शन के लिये आते हैं।


ॐ नीलांजन समाभासं रविपुत्र यमाग्रजं ।

छाया मार्तण्ड संभूतं तं नमामि शनैशचरं ।।

होली में सब रंग आएंगे, प्यासे तीर उमड़ आएंगे, पर ए रंगों की बरसात, मेरे सरताज ना आएंगे


*रंगों की बरसात*


होली में सब रंग आएंगे,

प्यासे तीर उमड़ आएंगे।

    पर ए रंगों की बरसात,

    मेरे सरताज ना आएंगे।

 

 सपनों में रंग डाला तुमको,

   प्यासी अंखियों के काजल से,

 भिगो दिया भीगी पलकों ने,

    तन के सिंदूरी बादल से ।

    

इंद्रधनुष कांधों पर रखकर,

रंगों के कहार आएंगे ,

   पर ए फागुन की सौगात ,

   मेरे सरताज ना आएंगे।


सखियों के अधरों से रह-रह,

    मधुर मिलन के चित्र झरेंगे,   

विरह वेदना के क्षण प्रतिपल,

    विरहिन के आंसू पोंछेंगे।

         

पूनम की गागर सिर पर रख,

धरती गगन फाग गाएंगे ,

   मगर ऐ सूनी-सूनी रात ,

   मेरे सरताज ना आएंगे ।


होली में सब रंग आएंगे,

प्यासे तीर उमड़ आएंगे ,

  मगर ऐ सतरंगी सौगात,

  मेरे सरताज ना आएंगे।


गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाईकोर्ट ग्वालियर

महाकवि आचार्य भगवत दुबे जी को हिंदी सेवी सम्मान प्रदान किया गया 


जबलपुर

संस्कारधानी के गौरव, दधीचि महाकाव्य के रचयिता,गद्य-पद्य में निष्णात, जिनके रचना संसार के खाते में 53 प्रकाशित पुस्तकें है, महाकवि आचार्य भगवत दुबे से प्रेरणा हिन्दी प्रचारिणी सभा के संस्थापक,  सशक्त हस्ताक्षर के संस्थापक गणेश श्रीवास्तव प्यासा, प्रसिद्ध कवयित्री ज्योति मिश्रा ने सौजन्य भेंट की। कवि संगम त्रिपाठी ने अंगवस्त्र,मोती की माला, कलमश्री,स्मृति चिन्ह प्रदान कर श्रद्धाभाव से सम्मानित किया। आचार्य जी ने भी प्रसन्न होकर कवि संगम त्रिपाठी का शाल से अभिनंदित किया और अपनी कृति 'पलक पांवड़े ' भेंट कर अपना आशीर्वाद दिया।

कवि संगम त्रिपाठी ने विज्ञप्ति में बताया कि संस्कारधानी जबलपुर के गौरव महाकवि आचार्य भगवत दुबे ने कहा कि हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने हेतु जारी अभियान में मैं सदा आपके साथ हूं और हर तरह से सहयोग प्रदान करता रहूंगा। महाकवि आचार्य भगवत दुबे का हिंदी के प्रचार-प्रसार में सहयोग व समर्थन वंदनीय है।

एस एच एम वी फाउंडेशन द्वारा डाॅक्टरेट की मानद उपाधि प्रदान की गई 


जबलपुर

एस एच एम वी फाउंडेशन ने भाषा  सेवा के लिए अर्पित माहनुभावो को (गुंडाल राघवेंधर व कवि संगम त्रिपाठी जी) को गौरव डॉक्टरेट की मानद पत्र प्रदान किया गया है। एस एच एमी वी फॉउंडेशन भारत में कहीं सेवा कर रहे है। फॉउंडेशन का मुख्य उद्देश्य भारतीय भाषाओ का प्रचार करना, भारतीय कला और संस्कृति को आगे बढ़ाना संस्था का मुख्य उद्देश्य हैं।

डॉ गुंडाल राघवेंधर जी व डॉ कवि संगम त्रिपाठी जी को संस्था ने गौरव डॉक्टरेट की मानद पत्र प्रदान करके गौरव महसूस हो कर रही है। अपनी स्तर और भाषाओ को प्रचार करना, भाषा को बचाने का कार्य करके, बच्चों को सिखाना, पढ़ाना मुख्य लक्ष्य बनाकर हजारों लोगों को अपना भाषा सिखाया है। ये बहुत गर्व की बात है। आप लोग देश की सेवा कर रहे है। संस्था ने आपके देश सेवा के लिए गौरव डाक्टरेट की मानद उपाधि  फाउंडेशन द्वारा दिया जा रहा है।

संस्थापक डॉ गुंडाल विजय कुमार ने कहा है मेरा सौभाग्य है इन महान पुरुषों कों मेरा संस्था के तरफ से गौरव डाक्टरेट देने के लिए संस्था बहुत गौरव महसूस कर रहा है। मैं इन महान व्यक्ति को प्रणाम करता हूं।  इसी तरह आगे आने वाली पीढ़ीयो को भी अपना धर्म निभाना है। भाषा का सेवा करिए। डॉ धर्म प्रकाश वाजपेयी, प्रदीप मिश्र अजनबी, गणेश श्रीवास्तव, राजकुमारी रैकवार राज , आदि प्रमुख लोगों ने बधाई दिया है।

डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र 'आदित्य' को हिंदी सेवी सम्मान मिला 


जबलपुर 

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा हिंदी सेवी सम्मान की श्रृंखला में डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र 'आदित्य' को हिंदी सेवी सम्मान प्रदान किया है। कवि संगम त्रिपाठी ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र 'आदित्य' कलम के माध्यम से हिंदी का प्रचार प्रसार कर रहे हैं। आदित्य जैसा उनका नाम है वैसा ही उनकी रचनाओं में प्रकाश भी है। डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र 'आदित्य' शब्दों के जादूगर है। उनकी रचनाओं में चिंतन व अध्यात्म का संगम है। राष्ट्रप्रेम की धारा उनकी रचनाओं से सतत प्रवाहित होती है।

डॉ कर्नल आदि शंकर मिश्र 'आदित्य' को हिंदी सेवी सम्मान प्रदान करने पर डॉ धर्म प्रकाश वाजपेई, प्रदीप मिश्र अजनबी, डॉ विजय कुमार, डॉ लाल सिंह किरार, माला अज्ञात, राजकुमारी रैकवार राज, प्रभा बच्चन श्रीवास्तव, अजय पांडेय आदि ने बधाई दी है।

सोमनाथ शुक्ल को हिंदी सेवी सम्मान से किया गया सम्मानित, लोहा ने दी शुभकामनाएं


प्रयागराज    

प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा हिंदी के प्रचार-प्रसार में सतत काम कर रही है और हिंदी सेवियों को सम्मानित भी कर रही है। इसी तारतम्य में सोमनाथ शुक्ल प्रयागराज को कवि संगम त्रिपाठी ने हिंदी सेवी सम्मान प्रदान किया।

कवि संगम त्रिपाठी ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि सोमनाथ शुक्ल प्रयागराज हिंदी के प्रचार-प्रसार में अमूल्य कार्य कर रहे हैं व हिंदी साहित्य को समृद्ध बनाने में सतत क्रियाशील है। कवि संगम त्रिपाठी प्रयागराज प्रवास के दौरान सोमनाथ शुक्ल को हिंदी सेवी सम्मान प्रदान किया।

सोमनाथ शुक्ल लेखनी के माध्यम से रचनात्मक कार्य कर रहे हैं। प्रयागराज की विभिन्न संस्थाओं से जुड़े हैं और उनकी कई कृतियां व साझा संकलन प्रकाशित हो चुकी है। सोमनाथ शुक्ल ने हिंदी प्रचार प्रसार में कवि संगम त्रिपाठी को प्रेरणात्मक सहयोग प्रदान करते आ रहे हैं।

अर्चना द्विवेदी 'गुदालू' जबलपुर को हिंदी सेवी सम्मान मिला 


जबलपुर

जानकी रमण महाविद्यालय में कवयित्री अर्चना द्विवेदी 'गुदालू' जबलपुर को प्रबुद्ध कवि आदरणीय श्री संगम त्रिपाठी जी द्वारा स्थापित संस्था "प्रेरणा हिंदी प्रचारिणी सभा" द्वारा चलाए जा रहे हिंदी हितार्थ राष्ट्रव्यापी अभियान हिंदी महाकुंभ का सम्मान मिला, साथ ही सशक्त हस्ताक्षर संस्था की काव्यगोष्ठी में काव्यपाठ का भी सुअवसर मिला ..... गणेश श्रीवास्तव प्यासा जबलपुरी के प्रति आभार।

अर्चना द्विवेदी 'गुदालू' ने कहा कि हिंदी से मेरा प्रेम,,,, मुझे सम्मान के द्वार तक पहुंचा दिया, विद्यालय से मेरा प्रेम,,,,,मुझे महाविद्यालय में कलम और सम्मान दिला रहा है,अभिभूत हूँ,,,,अविस्मरणीय आह्लादित क्षण!!

आभार साहित्यिक परिवार!

वेतनमान के अनुरूप पदोन्नति का लाभ दिया जाये, बिना शर्त दिवंगत शिक्षकों के आश्रितों को अनुकम्पा नियुक्ति दी जाए

*तृतीय वेतनमान की विसंगति को दूर कर शिक्षकों को देय तिथि से लाभ दिया जाये*


मध्यप्रदेश राज्य अधिकारी-कर्मचारी संघ की जिला शाखा द्वारा प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार स्कूल शिक्षा एवं आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत कार्यरत सहायक शिक्षकों, उच्च श्रेणी शिक्षकों, प्रधान पाठको तथा व्याख्याताऒ को प्राप्त वेतनमान के अनुरूप पदोन्नति का लाभ प्रदान किया जावे। मध्यप्रदेश राज्य अधिकारी कर्मचारी संघ के संयोजक दिलीप सिंह ठाकुर ने आगे बताया कि तृतीय वेतनमान की विसंगति को दूर करते हुए 30 वर्ष की सेवा पर सहायक शिक्षकों को क्रमशः 4200 रूपये के स्थान पर 5400 रूपये तथा व्याख्याताऒ को 6600 रूपये के स्थान पर 7600 रूपये का लाभ देय तिथि से दिया जावे।

मध्यप्रदेश राज्य अधिकारी कर्मचारी संघ के संयोजक दिलीप सिंह ठाकुर ने आगे बताया कि अन्य विभागों के कर्मचारियों की भांति शिक्षकों के भी सेवाकाल में न्यूनतम 300 दिवस के अर्जित अवकाश के नगदीकरण  का लाभ भी दिया जाये। मध्यप्रदेश राज्य अधिकारी कर्मचारी संघ के संयोजक दिलीप सिंह ठाकुर के अनुसार नियुक्ति की आस में भटक रहे प्रदेश के दिवंगत शिक्षकों को बिना शर्त अनुकम्पा नियुक्ति प्रदान की जाये।

मध्य प्रदेश राज्य अधिकारी कर्मचारी संघ के दिलीप सिंह ठाकुर,भास्कर गुप्ता, राशिद अली, विश्वनाथ सिंह,नितिन तिवारी, आलोक शर्मा,अजब सिंह, धर्मेंद्र परिहार आदेश विश्वकर्मा,सुधीर गौर,दुर्गेश खातरकर,ऋषि पाठक,इमरत सेन, सुल्तान सिंह,चंद्रभान साहू,पवन सोयाम, रामदयाल उइके,रामकिशोर इपाचे,मदन पांन्द्रो,सुरेंद्र परसते,भोगीराम चौकसे, गंगाराम साहू,अंजनी उपाध्याय,समर सिंह,आकाश भील,ब्रजवती आर्मो, भागीरथ परसते, योगिता नंदेश्वर, पूर्णिमा बेन, अम्बिका हँतिमारे, राजेश्वरी दुबे,कमलेश दुबे, सुमिता इंगले,डेलन सिंह, जागृति मालवीय,संदीप परिहार, पुष्पा रघुवंशी, प्रेमवती सोयाम, रेनू बुनकर आदि ने सरकार से  इस विषय पर गंभीरता से चिंतन मनन कर शीघ्र अतिशीघ्र निर्णय लेने को कहा है।

संभलने भी नहीं देता ये बदलता मौसम, वार करता है जिस्मो जां पै बदलता मौसम


*बदलता मौसम*

संभलने भी नहीं देता ये बदलता मौसम,

वार करता है जिस्मो जां पै बदलता मौसम।


हम बदल पाते नहीं और ये बदल जाता है,

फिर ये जी भर के सताता है बदलता मौसम।


अपनी ऋतु से भी ये मुंह फेर के चल देता है,

बड़ा ही बेवफा होता है बदलता मौसम।


लगता है रूठ गया अगली बरस आएगा,

पर अचानक ही लौट आता बदलता मौसम।


चाहे जब रंग बदल लेता है गिरगिट की तरह, 

आंख तोते सी फेर लेता बदलता मौसम।


चाहे जब रूठ के चल देता तुम्हारी तरहा,

चाहे जब लौट के आ जाता बदलता मौसम। 


इसकी बातों पै अनिल को कतई यकीं नहीं,

दगा देने में ये माहिर है बदलता मौसम।


गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट हाईकोर्ट ग्वालियर मध्यप्रदेश

पहले भूखे, प्यासे निर्धन, पुष्प सींच लेने दो, वैलेंटाइन डे पर तब कोई इजहार करूंगा


*वैलेंटाइनडे पर इजहार*


पहले भूखे,प्यासे निर्धन 

पुष्प सींच लेने दो,

वैलेंटाइन डे पर तब 

कोई इजहार करूंगा।


मेंहदी,मांग,महावर,बिछुओं 

तक ने पलक भिगोई ।

डाल तिरंगा आंचल शव पर 

जब भारत मां रोई,


उस शहीद की समाधि पर 

कुछ अश्रु चढा देने दो,

वैलेंटाइन डे पर तब 

कोई इजहार करूंगा।


मुरझाई पलकों मैं जिनके 

आंसू सूख गए हैं,

ताजमहल सपनों के 

दिल ही दिल में टूट गए हैं।


हर घर का चेहरा मुस्काए 

हृदय खुशी से झूमे,

आंगन में वसंत ऋतु आकर 

द्वार, झरोखे चूमे।


पतझड़ के सूखे पत्तों पर 

नए गीत लिखने दो।

वैलेंटाइन डे पर तब 

कोई इजहार करूंगा।


गीतकार अनिल भारद्वाज एडवोकेट, हाईकोर्ट ग्वालियर मध्य प्रदेश

सरसों के फूलों पर ,मुस्कान सजाती जाना, अमराई के माथे पर, बौर सजाती जाना, तब बसंत महकेगा


*बसंत ऋतु पर गीत*  

       

        *तब बसंत महकेगा*    


तुम सरसों के फूलों पर ,मुस्कान सजाती जाना ,

तुम अमराई के माथे पर ,बौर सजाती जाना ,


तब पतझर की सूखी डाली,पै बसंत महकेगा ,

तब कोयल के रस भीने,स्वर से बसंत चहकेगा"।


मैं पलाश के पत्तों पर ,श्रंगार-गीत रच दूंगा ।


तुम अनब्याही अभिलाषा की,मांग सजाती जाना , 

तुम पंखुड़ियों से क्यारी की ,सेज सजाती जाना ,


तब तन पर यौवन की केसर,से बसंत बहकेगा,

तब कलियों के खुलते घूंघट, से बसंत झांकेगा।


मैं कोंपल की कोरों पर ,श्रंगार- गीत रच दूंगा।

 

तुम पुरवा के पांवों में , झंकार सजाती जाना,

तुम भंवरों के गुंजन में,झपताल सजाती जाना,


तब बंजारिन के इकतारे,से बसंत झनकेगा ,

तब पायलिया की रुन-झुन धुन से बसंत खनकेगा,


मैं मृदंग की थापों पर , श्रंगार-गीत रच दूंगा।


 गीतकार-अनिल भारद्वाज,एडवोकट, हाईकोर्ट ग्वालियर,

श्री नर्मदे हर सेवा न्यास ने संयुक्त रूप से नर्मदा जयंती महोत्सव का किया भव्य आयोजन, लोकसंस्कृति, आस्था का अनूठा संगम


अनूपपुर

पवित्र नगरी अमरकंटक में पुण्यसलिला मां नर्मदा के पावन जन्मोत्सव पर्व पर श्री नर्मदे हर सेवा न्यास के तत्वावधान में तीन दिवसीय नर्मदा जयंती महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। 3 फरवरी से 5 फरवरी तक चले इस उत्सव में धार्मिक, सांस्कृतिक और लोककला से जुड़े कार्यक्रमों ने लोगों को भाव-विभोर कर दिया।

महोत्सव के मुख्य आकर्षणों में रामघाट मैदान पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकगीत और लोकनृत्य प्रतियोगिता प्रमुख रहे। अमरकंटक के पीएमश्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कल्याणिका केंद्रीय शिक्षा निकेतन, पीएमश्री नवोदय विद्यालय, सरस्वती शिशु विद्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय एवं मां कल्याणिका पब्लिक स्कूल पेंड्रा के छात्र-छात्राओं ने इस कार्यक्रम में भाग लिया और अपनी शानदार प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि हिमाद्रि मुनि महाराज प्रबंध न्यासी श्री कल्याण सेवा आश्रम अमरकंटक एवं कोल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रामलाल रौतेल (कैबिनेट मंत्री दर्जा) ने समस्त प्रतिभागियों को प्रोत्साहन राशि एवं सांत्वना पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया। लोकनृत्य प्रतियोगिता में कल्याणिका केंद्रीय विद्यालय अमरकंटक ने प्रथम स्थान, सरस्वती जनजातीय वनवासी छात्रावास ने द्वितीय स्थान और मां शारदा शक्ति कन्यापीठ ने तृतीय स्थान प्राप्त कर सम्मान अर्जित किया। तीन दिवसीय महोत्सव के दौरान 3 फरवरी को सुप्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी गायक नीलकमल वैष्णव की लोकगीत संध्या ने श्रद्धालुओं को भक्तिरस में सराबोर कर दिया। 4 फरवरी को मंदिर प्रांगण में भव्य नर्मदा पूजन एवं हवन का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। 5 फरवरी को लोकगीत एवं नृत्य प्रतियोगिताओं के साथ आयोजन का भव्य समापन हुआ।

अमरकंटक महोत्सव के अंतर्गत विभिन्न जिलों से आए लोककला समूहों और कलाकारों ने भी अपनी अनुपम प्रस्तुतियों और प्रदर्शनी से दर्शकों का मन मोह लिया। प्रदर्शनी में पहुंचे आगंतुकों को भी विशेष अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। नर्मदा सेवा न्यास प्रतिवर्ष इस पावन अवसर पर भव्य आयोजन करता है, जो आस्था, संस्कृति और लोककला का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। इस वर्ष भी हजारों श्रद्धालुओं और कलाकारों की उपस्थिति ने इस आयोजन को विशेष बना दिया। आयोजन समिति ने सभी प्रतिभागियों, आगंतुकों और श्रद्धालुओं का आभार व्यक्त करते हुए अगले वर्ष और भी भव्य उत्सव आयोजित करने का संकल्प लिया।

युगपुरुष अटल बिहारी वाजपेयी जन्म शताब्दी दिवस समारोह का होगा भव्य आयोजन


दिल्ली -     डी पी वाजपेई शैक्षिक न्यास पूर्व प्रधानमंत्री, भारतीय राजनीति के अजातशत्रु, भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी का सौवां जन्मदिन समारोह 25 दिसंबर 2024 को सायं 4.00 बजे से दीनदयाल उपाध्याय कालेज, द्वारका सेक्टर- 3, दिल्ली में मना रहा हैं।

हमारी संस्था पूज्य अटल जी के पत्रकार, कवि और शिक्षक स्वरूपों की स्मृतियों के  संरक्षण पर विशेष बल देती रही है। इस शताब्दी वर्ष से, हम दो राष्ट्रीय पुरस्कार प्रारंभ कर रहे हैं। इसके लिए एक प्रवर परिषद गठित की गई है, जिसकी अनुशंसा पर पुरस्कारों का चयन किया गया है। जन्म शताब्दी दिवस समारोह में केंद्रीय मंत्री, असम विधान सभा के अध्यक्ष, माननीय सांसदों के साथ प्रमुख राजनीतिक विभूतियों के उपस्थित रहने की सहमति प्राप्त हुई है।

संस्थान द्वारा गठित प्रवर परिषद द्वारा विस्तृत विचार विमर्श एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण  के साथ अपने अपने क्षेत्र में की गई सेवाओं के मूल्यांकन के पश्चात प्रवर परिषद की संस्तुति के आधार पर, युगपुरूष अटल बिहारी वाजपेयी सेवा संस्थान अटल बिहारी राष्ट्रवादी पुरस्कारों की घोषणा करता है।

 प्रथम राष्ट्रवादी पत्रकारिता पुरस्कारश्री अतुल तारे को इसके साथ साथ युगपुरुष अटल बिहारी वाजपेयी समाजसेवी पुरस्कार प्रेम सिंह रावत, राम कुमार सोलंकी, भारतभूषण कुलरत्न , डॉ डी सी उपाध्याय,  गोपाल बिष्ट। युगपुरुष अटल बिहारी वाजपेयी शिक्षक पुरस्कार प्रो बलराम पाणी, दिल्ली विश्वविद्यालय,  प्रो बृजेश पांडेय, जे एन यू , डॉ स्वदेश सिंह , दिल्ली विश्वविद्यालय,  डॉ एच सी जैन , दिल्ली विश्वविद्यालय , डॉ अनुराग मिश्रा , दिल्ली विश्वविद्यालय। युगपुरुष अटल बिहारी वाजपेयी पत्रकारिता पुरस्कार राजशेखर व्यास पूर्व डायरेक्टर जनरल दूरदर्शन, सुरेश चौहान निदेशक,सुदर्शन चैनल,  स्वाति खानविलकर वरिष्ठ पत्रकार , गौतम कुमार मिश्र, दैनिक जागरण, पूनम गौड़, नव भारत टाइम्स को प्रदान करने का निर्णय किया गया है।

पुरस्कार समारोह का आयोजन दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज ऑडिटोरियम द्वारका सेक्टर- 3 में  किया जाएगा। उक्ताशय की जानकारी डी. पी. वाजपेयी राष्ट्रीय समन्वयक, युगपुरुष अटल बिहारी वाजपेयी सेवा संस्थान ने दी है। कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु प्रदीप मिश्र अजनबी, राष्ट्रीय महासचिव, प्रेरणा हिन्दी प्रचारणी सभा, कार्य कर रहे हैं। प्रेरणा हिन्दी प्रचारिणी सभा के संस्थापक कवि संगम त्रिपाठी ने अपील की है कि अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग प्रदान करें।

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